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मुर्शिदाबाद रेल हादसा: गेटमैन गिरफ्तार, मृतकों के परिजनों को रेलवे देगा 10 लाख रुपये मुआवजा

मुर्शिदाबाद. मुर्शिदाबाद ट्रेन हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 4 हो गई है. इस बीच, रेलवे ने मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये और घायलों के परिवारों को 2.5 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है. गैटमैन को गिरफ्तार कर लिया गया है. सुपरवाइजर को पहले ही निलंबित कर दिया गया था. रेलवे इस पूरे मामले की जांच कर रही है. रेल सेवाएं बाधित ट्रेन दुर्घटना के कारण दोपहर बाद तक रेल सेवाएं बाधित रहीं. रेलखंड पर लगाए गए अवरोध के कारण अजीमगंज से कटवा जाने वाली ट्रेन सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं. ट्रेनों को कटवा स्टेशन पर रोक दिया गया है. कटवा स्टेशन पर सैकड़ों ट्रेन यात्री इंतजार कर रहे हैं. अब तक चार लोगों की मौत मुर्शिदाबाद के बरहमपुर में 7 तारीख की सुबह चलती ट्रेन के चपेट में आने से एक स्कूल जा रही कार हादसे की शिकार हो गयी. इस हादसे में दो बच्चों समेत तीन लोगों को मौके पर ही मौत हो गयी, जबकि एक शिशु की मौत इलाज के दौरान हुई है. डीआरएम के नेतृत्व में जांच टीम पहुंची हादसे के बाद एडीआरएम के नेतृत्व में 10 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच दल घटनास्थल पर पहुंचा है. पूर्वी रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रेलवे ऐसे मामलों में ज़ीरो टॉलरेंस नीति का पालन करता है. पूरी घटना की जांच की जाएगी. घायलों के इलाज के लिए एक मेडिकल टीम भेजी गई है. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें भाजपा विधायक ने रखी मांग बरहामपुर के विधायक सुब्रता मैत्रा ने कहा कि इतने सारे छात्रों की मौत दुखद और पीड़ादायक है. रेलवे को इस बात की जांच करनी चाहिए कि इतने सारे स्कूली छात्रों की जान क्यों गई. अधीर चौधरी ने आरोप लगाया कि रेलवे में सुरक्षा व्यवस्था का कोई अभाव है. Also Read: Murshidabad Rail Accident: मुर्शिदाबाद में किसकी लापरवाही, रेलवे ने दो को किया निलंबित The post मुर्शिदाबाद रेल हादसा: गेटमैन गिरफ्तार, मृतकों के परिजनों को रेलवे देगा 10 लाख रुपये मुआवजा appeared first on Naya Vichar.

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क्या ‘3 इडियट्स’ की कहानी सोनम वांगचुक पर बनी थी? आमिर खान ने दूर की गलतफहमी, बोले- चतुर इस बार गलत

आमिर खान ने आखिरकार उस पुराने दावे पर चुप्पी तोड़ी, जिसमें कहा जाता था कि ‘3 इडियट्स’ का किरदार सोनम वांगचुक से प्रेरित था. लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल के दौरान, जहां सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को लेकर चर्चा हो रही थी, वहीं आमिर ने साफ कहा कि जब राजकुमार हिरानी की 2009 की सुपरहिट फिल्म बनाई जा रही थी, तब न तो उन्हें और न ही फिल्म के राइटर्स को सोनम वांगचुक के बारे में कोई जानकारी थी, यानी फिल्म का उनके जीवन से कोई सीधा संबंध नहीं था. Aamir Khan Said ‘Chatur is wrong this time’: आमिर खान बोले ‘चतुर इस बार गलत’ ओमी वैद्य के हालिया वीडियो का जिक्र करते हुए, आमिर खान ने मजाकिया अंदाज में कहा, “लगता है चतुर इस बार गलत साबित हो गया.” दरअसल फिल्म फेस्टिवल के दौरान ऑडियंस में मौजूद एक शख्स ने कहा, “हमारी पीढ़ी पर ‘3 इडियट्स’ का काफी असर रहा है और हमें हमेशा बताया गया कि यह फिल्म सोनम वांगचुक से प्रेरित थी.” Is 3 Idiots Inspired By Sonam Wangchuk: क्या सोनम वांगचुक से प्रेरित है 3 इडियट्स इस पर आमिर खान ने साफ करते हुए कहा, “ऐसा बिल्कुल नहीं है. यह सिर्फ एक गलतफहमी है. जब हम ‘3 इडियट्स’ बना रहे थे, तब मैं और हमारी टीम सोनम वांगचुक के बारे में जानते ही नहीं थे.” आमिर ने आगे कहा, “जब ‘3 इडियट्स’ लिखी जा रही थी, तब न तो फिल्म के दोनों राइटर्स राजू हिरानी और अभिजात जोशी, और न ही मुझे सोनम वांगचुक के बारे में जानकारी थी, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि हम उनके काम की इज्जत नहीं करते, सम्मान देने के लिए यह जरूरी नहीं कि ‘3 इडियट्स’ का किरदार उन्हीं पर आधारित हो. खुद सोनम वांगचुक भी कई बार साफ कर चुके हैं कि फिल्म का वह किरदार उनसे प्रेरित नहीं था.” Sonam Wangchuk Had Said This: सोनम वांगचुक कह चुके हैं यह बात सोनम वांगचुक भी साफ कर चुके हैं कि उनका ‘3 इडियट्स’ से कोई संबंध नहीं है. उनका कहना था कि फिल्म बनाने से पहले न तो मेकर्स ने उनसे कभी संपर्क किया और न ही किसी तरह की अनुमति ली, जबकि लोग अक्सर उनकी तुलना फिल्म के ‘फुंसुख वांगडू’ किरदार से करते रहे. Sonam Wangchuk Hunger Strike: सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं. उनका कहना है कि NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच, शिक्षा व्यवस्था में जरूरी बदलाव और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रशासन जवाब दे. उनके इस आंदोलन को बॉलीवुड सितारों, फिल्ममेकर्स, डिजिटल क्रिएटर्स और अन्य चर्चित हस्तियों का समर्थन मिल रहा है. ये भी पढ़ें: ‘हम सभी उनकी सेहत और जिंदगी को लेकर चिंतित हैं’, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर आमिर खान का रिएक्शन ये भी पढ़ें: आमिर खान-गौरी स्प्रैट की शादी में क्यों नहीं पहुंचीं रीना दत्ता और किरण राव, करीबी दोस्त ने बताई वजह The post क्या ‘3 इडियट्स’ की कहानी सोनम वांगचुक पर बनी थी? आमिर खान ने दूर की गलतफहमी, बोले- चतुर इस बार गलत appeared first on Naya Vichar.

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FIFA World Cup 2026 Final: अर्जेंटीना के राष्ट्रपति ने क्यों बनाई दूरी? जानिए कारण

Argentina president Javier Milei World Cup superstition: अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि वह फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल मुकाबले में शामिल नहीं होंगे. यह मुकाबला अर्जेंटीना और स्पेन के बीच अमेरिका के न्यू जर्सी स्थित मेटलाइफ स्टेडियम में स्पोर्ट्सा जाना है. दुनिया भर के शीर्ष नेताओं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो समेत कई विशिष्ट अतिथियों के वीआईपी बॉक्स में मौजूद रहने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन मिलेई ने साफ कर दिया कि वह अर्जेंटीना में अपने आधिकारिक आवास ओलिवोस से ही मैच देखेंगे. अंधविश्वास के आगे झुके राष्ट्रपति मिलेई ब्यूनस आयर्स के स्थानीय रेडियो स्टेशन एल ऑब्जर्वाडोर से बातचीत में राष्ट्रपति मिलेई ने अमेरिका जाने की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “No way” (बिल्कुल नहीं). उन्होंने बताया कि विश्व कप में अर्जेंटीना के अब तक स्पोर्ट्से गए सभी सात मुकाबले उन्होंने अपने ओलिवोस स्थित प्रशासनी आवास के एक ही स्थान पर बैठकर देखे हैं. टीम ने सभी मैच जीते हैं, जिनमें इंग्लैंड के खिलाफ 2-1 की रोमांचक सेमीफाइनल जीत भी शामिल है. ऐसे में वह अपनी इस “काबाला” (शुभ मान्यता या स्पोर्ट्स से जुड़ा अंधविश्वास) को किसी भी कीमत पर तोड़ना नहीं चाहते. YPF की जैकेट बनी ‘लकी चार्म’ राष्ट्रपति मिलेई का यह अंधविश्वास सिर्फ एक जगह बैठकर मैच देखने तक सीमित नहीं है. उन्होंने बताया कि हर मैच के दौरान वह अपने आवास की हीटिंग बंद रखते हैं और अर्जेंटीना की प्रशासनी तेल कंपनी YPF की ब्रांडेड मोटी जैकेट पहनकर मैच देखते हैं. उनके मुताबिक इस जैकेट की “ताकत” उन्हें स्विट्जरलैंड के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में महसूस हुई. राष्ट्रपति मिलेई का अजीबोगरीब ‘लकी चार्म’ “स्विट्जरलैंड वाले मैच में मुझे बहुत गर्मी लग रही थी. मैंने जैकेट उतार दी और उसी दौरान हमारी टीम ने गोल खा लिया. मैंने तुरंत जैकेट दोबारा पहन ली और उसके बाद से उसे कभी नहीं उतारा.” उनका मानना है कि उसी पल से यह जैकेट टीम के लिए शुभ साबित हुई और तब से यह उनके मैच देखने की रस्म का स्थायी हिस्सा बन गई है. फुटबॉल में ‘काबाला’ का खास महत्व अर्जेंटीना में फुटबॉल केवल स्पोर्ट्स नहीं बल्कि भावनाओं और परंपराओं का हिस्सा है. यहां खिलाड़ी, कोच, प्रशंसक और कई बार राजनेता भी अपनी-अपनी “काबाला” यानी शुभ रस्मों का पालन करते हैं. माना जाता है कि यदि जीत दिलाने वाली दिनचर्या में बदलाव किया जाए तो टीम का भाग्य बदल सकता है. इसी सांस्कृतिक सोच के चलते राष्ट्रपति मिलेई भी अपनी जीत वाली दिनचर्या को बदलने के पक्ष में नहीं हैं. 30 साल पुरानी घटना बनी वजह मिलेई की सावधानी के पीछे अर्जेंटीना की नेतृत्वक और फुटबॉल संस्कृति से जुड़ी एक पुरानी घटना भी बताई जाती है. 1990 के फीफा विश्व कप के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति कार्लोस मेनेम ने टीम से मुलाकात की थी. इसके तुरंत बाद अर्जेंटीना अपने पहले मुकाबले में अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाने वाली कैमरून की टीम से 1-0 से हार गया था. उस हार के बाद बड़ी संख्या में प्रशंसकों ने मेनेम को “मुफा” यानी अपशकुनी या बदकिस्मती लाने वाला व्यक्ति कहना शुरू कर दिया. तब से अर्जेंटीना में यह धारणा मजबूत हो गई कि मौजूदा राष्ट्रपति को विश्व कप के बड़े मुकाबलों में स्टेडियम जाकर टीम का समर्थन नहीं करना चाहिए. परंपरा निभा रहे हैं मिलेई राष्ट्रपति मिलेई का मानना है कि यदि उनकी अनुपस्थिति से टीम का मनोबल और किस्मत दोनों बरकरार रहती हैं, तो यही बेहतर है. इसलिए उन्होंने हजारों किलोमीटर दूर न्यू जर्सी जाने के बजाय अपने ओलिवोस स्थित आवास में उसी कुर्सी, उसी कमरे और उसी जैकेट के साथ फाइनल देखने का फैसला किया है. दुनिया की नजर फाइनल पर फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल का रोमांच अपने चरम पर है, जहां अर्जेंटीना लगातार दूसरा खिताब जीतकर इतिहास रचने की कोशिश में है, वहीं स्पेन की टीम विश्व चैंपियन बनने के पक्के इरादे के साथ मैदान में उतर रही है. इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में जहां खिलाड़ियों की रणनीतियां और कौशल चर्चा का केंद्र हैं, वहीं अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई का एक खास ‘लकी रूटीन’ भी खूब सुर्खियों में है. उनके इस अनूठे अंधविश्वास ने फुटबॉल जगत में एक दिलचस्प बहस छेड़ दी है कि क्या स्पोर्ट्स में ये निजी मान्यताएं और टोटके खिलाड़ियों या प्रशंसकों के लिए केवल एक अंधविश्वास हैं, या फिर ये उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने का एक जरिया बन जाते हैं. इसे भी पढ़े- जश्न के बीच मेसी ने खोला इंग्लैंड का पेनल्टी प्लान, तस्वीर हुई वायरल The post FIFA World Cup 2026 Final: अर्जेंटीना के राष्ट्रपति ने क्यों बनाई दूरी? जानिए कारण appeared first on Naya Vichar.

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बिहार पंचायत चुनाव 2026: समय पर ही होंगे चुनाव, परिसीमन की वजह से टलने की खबरों पर मंत्री दीपक प्रकाश ने क्या कहा

Deepak Prakash On Bihar Panchayat Chunav: बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर पिछले कुछ दिनों से कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं. कहा जा रहा है कि परिसीमन की प्रक्रिया के कारण चुनाव अगले साल तक टल सकते हैं. लेकिन नया विचार से विशेष बातचीत में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने इन अटकलों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि प्रशासन चुनाव समय पर कराने की दिशा में काम कर रही है और फिलहाल चुनाव टालने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है. परिसीमन क्यों करा रही है प्रशासन? दरअसल, प्रशासन ने ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद की सीमाओं का नए सिरे से परिसीमन करने का फैसला लिया है. यह प्रक्रिया 2011 की जनगणना के आधार पर होगी. राज्य में पिछले 36 वर्षों से पंचायतों का परिसीमन नहीं हुआ है. इस दौरान कई इलाकों की आबादी में बड़ा बदलाव आया है. ऐसे में प्रशासन चाहती है कि नई आबादी के अनुसार पंचायतों की सीमाएं तय हों, ताकि सभी क्षेत्रों को संतुलित प्रतिनिधित्व मिल सके. चुनाव टालने की समाचारों पर मंत्री ने क्या कहा? कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अगस्त 2026 से परिसीमन शुरू होगा, अप्रैल 2027 तक चलेगा और इसके बाद आरक्षण संबंधी प्रक्रिया पूरी होने पर ही चुनाव होंगे. इस पर मंत्री दीपक प्रकाश ने साफ कहा कि ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रशासन की पूरी कोशिश है कि पंचायत चुनाव इसी साल के अंत तक संपन्न करा दिए जाएं. उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव टालने की समाचारें सही नहीं हैं और अभी तक प्रशासन ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है. नए परिसीमन से क्या होगा फायदा? प्रशासन का मानना है कि नए परिसीमन के बाद पंचायतों की सीमाएं वर्तमान आबादी के अनुरूप तय होंगी. इससे सभी क्षेत्रों को बेहतर प्रतिनिधित्व मिलेगा. साथ ही पंचायतों में भौगोलिक और सामाजिक संतुलन भी मजबूत होगा. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें 2021 में कोरोना की वजह से टले थे चुनाव बिहार में इससे पहले 2021 में कोरोना महामारी के कारण पंचायत चुनाव तय समय पर नहीं हो पाए थे. उस समय विशेष परिस्थितियों में चुनाव आगे बढ़ाए गए थे और पंचायतों के कामकाज के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी. हालांकि इस बार स्थिति अलग है. प्रशासन का कहना है कि चुनाव टालने का कोई फैसला नहीं हुआ है और कोशिश यही है कि समय पर ही चुनाव कराया जाए. फिलहाल प्रशासन की ओर से यही स्पष्ट किया गया है कि पंचायत चुनाव समय पर कराने की तैयारी चल रही है. परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर चर्चा जरूर है, लेकिन चुनाव अगले साल टलेंगे, ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. ऐसे में फिलहाल बिहार में पंचायत चुनाव 2026 तय समय पर होने की ही संभावना बनी हुई है. Also Read: सम्मान नहीं मिला या कुछ और? जानिए क्यों RJD से इस्तीफा देने पर मजबूर हुए मृत्युंजय तिवारी, अंदर की पूरी कहानी The post बिहार पंचायत चुनाव 2026: समय पर ही होंगे चुनाव, परिसीमन की वजह से टलने की समाचारों पर मंत्री दीपक प्रकाश ने क्या कहा appeared first on Naya Vichar.

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Corona Alert: क्या फिर लौट रहा है कोरोना? इस राज्य में मिले 12 नए केस, 4 की मौत

Corona Alert: आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य आयुक्त जी. वीरपांडियन ने बताया कि 26 जून से 16 जुलाई के बीच राज्य में कोविड-19 के 12 नए मामले सामने आए. इनमें से चार मरीजों की मौत हो गई. अधिकारियों के अनुसार, इन सभी लोगों को पहले से दूसरी गंभीर बीमारियां (को-मॉर्बिडिटी) भी थीं. स्वास्थ्य आयुक्त ने बताया कि जिन चार मरीजों की मौत हुई, वे पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, किडनी की बीमारी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे. इन्हीं पुरानी बीमारियों की वजह से उनकी हालत ज्यादा बिगड़ गई. आंध्र प्रदेश में कोविड-19 का पहला मामला 26 जून को आया वीरपांडियन ने बताया कि कोविड-19 से हुई चार मौतों में से तीन मरीज कडप्पा जिले के थे, जबकि एक मरीज की मौत काकीनाडा जिले में हुई. स्वास्थ्य आयुक्त के मुताबिक, साल 2026 में आंध्र प्रदेश में कोविड-19 का पहला मामला 26 जून को कडप्पा जिले में मिला था. इसके बाद 1 जुलाई से 16 जुलाई के बीच राज्य में 11 और नए संक्रमित मरीज सामने आए. किस जिले में कितने कोरोना के मामले आए? स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, दो लोग संक्रमित व्यक्तियों के करीब संपर्क में आने के बाद कोविड-19 की चपेट में आए. इससे संक्रमण एक से दूसरे व्यक्ति तक फैलने की पुष्टि हुई. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सबसे ज्यादा 8 कोविड-19 मामले कडप्पा जिले में सामने आए. इसके बाद गुंटूर में 2 मामले दर्ज हुए, जबकि विशाखापट्टनम और काकीनाडा में 1-1 संक्रमित मरीज मिला. ये भी पढ़ें: बलिया में कोरोना की वापसी, सहतवार की स्त्री मिली संक्रमित, स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की निगरानी स्वास्थ्य आयुक्त ने बताया कि 26 जून से 15 जुलाई के बीच आंध्र प्रदेश में 67 लोगों की कोविड-19 जांच की गई. इनमें 11 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जबकि 12वां संक्रमित मरीज तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) में जांच के दौरान मिला. संक्रमित लोगों में से तीन मरीज घर पर ही आइसोलेशन में हैं. दो मरीज अस्पताल में इलाज करा रहे हैं, जबकि तीन लोग पूरी तरह ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी पा चुके हैं. किस राज्य में कितने मिले कोरोना पॉजिटिव? स्वास्थ्य आयुक्त ने बताया कि 1 जुलाई से 15 जुलाई के बीच देशभर में कोविड-19 के 339 नए मामले दर्ज किए गए हैं. सबसे ज्यादा 115 मामले केरल में मिले. इसके बाद कर्नाटक में 64, महाराष्ट्र में 43, तमिलनाडु में 39, अंडमान-निकोबार और दिल्ली में 18-18, राजस्थान में 12 मामले सामने आए. इसके अलावा अन्य राज्यों में भी कुछ नए संक्रमित मरीज मिले हैं. The post Corona Alert: क्या फिर लौट रहा है कोरोना? इस राज्य में मिले 12 नए केस, 4 की मौत appeared first on Naya Vichar.

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मुजफ्फरपुर के रोहुआ में गैस पाइप लाइन फटी, 5 छात्राएं बेहोश, अस्पताल में भर्ती, स्कूल की छुट्टी

Muzaffarpur Gas Pipeline Blast: मुशहरी थाना क्षेत्र में शुक्रवार को बड़ा हादसा हो गया. बुडको द्वारा नाला निर्माण के दौरान पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे तेज गैस रिसाव शुरू हो गया. गैस की चपेट में आने से वहां से गुजर रही पांच स्कूली छात्राएं दम घुटने के कारण बेहोश हो गईं. घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई. हादसे के बाद अस्पताल पहुंचे परिजन इन छात्राओं की बिगड़ी तबीयत अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, बेहोश होने वाली छात्राओं में दसवीं कक्षा की दिव्या, नाहिद, अमृता और राखी के साथ-साथ ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा विशाखा शामिल हैं. गैस रिसाव के कारण सभी को सांस लेने में परेशानी हुई, जिसके बाद वे बेहोश हो गईं. बुडको के नाला निर्माण के दौरान हुआ हादसा प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, बुडको की ओर से नाला निर्माण कार्य चल रहा था. इसी दौरान खुदाई में पीएनजी पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई और गैस का रिसाव शुरू हो गया. कुछ ही देर में आसपास गैस फैल गई, जिससे वहां मौजूद लोगों में दहशत फैल गई. इसी स्कूल की छात्राएं हुईं बेहोश मौके पर पहुंची प्रशासन और तकनीकी टीम घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और गैस पाइपलाइन ऑपरेटर की तकनीकी टीम मौके पर पहुंच गई. तकनीकी टीम ने तत्काल गैस आपूर्ति बंद कर फटी पाइपलाइन की मरम्मत शुरू कर दी. साथ ही आसपास के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई. हादसे की जांच शुरू पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है. यह पता लगाया जा रहा है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं और पाइपलाइन कैसे क्षतिग्रस्त हुई. प्रशासन ने कहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. View on Instagram The post मुजफ्फरपुर के रोहुआ में गैस पाइप लाइन फटी, 5 छात्राएं बेहोश, अस्पताल में भर्ती, स्कूल की छुट्टी appeared first on Naya Vichar.

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यूपी के विदेशी कारोबार पर ईरान-अमेरिका तनाव की मार, यूरोप ने 6 हजार करोड़ के ऑर्डर रोके

UP News: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब उत्तर प्रदेश के निर्यात कारोबार पर भी दिखने लगा है. समुद्री परिवहन में बढ़ी अनिश्चितता के कारण यूरोप के कई आयातकों ने प्रदेश से भेजे जाने वाले माल की खेप फिलहाल रोक दी है. इसका असर करीब 6 हजार करोड़ के निर्यात ऑर्डरों पर पड़ा है, जिससे कई प्रमुख उद्योगों के कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है. यूरोप के खरीदारों ने फिलहाल रोकी शिपमेंट निर्यातकों के मुताबिक जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन सहित कई यूरोपीय देशों के आयातकों ने अगली सूचना तक नई खेप स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. अगस्त और सितंबर में भेजे जाने वाले बड़े पैमाने के ऑर्डर फिलहाल गोदामों में ही रखे हुए हैं. कारोबारियों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो तय समय पर आपूर्ति प्रभावित होगी, जिससे कई ऑर्डर रद्द होने का खतरा भी बढ़ सकता है. प्रदेश के कई उद्योगों पर सीधा असर उत्तर प्रदेश से हर महीने लगभग तीन हजार से 3,200 करोड़ का सामान यूरोप भेजा जाता है. कानपुर का लेदर और इंजीनियरिंग उद्योग, आगरा का फुटवियर कारोबार, नोएडा का गारमेंट और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर, मुरादाबाद का ब्रास हैंडीक्राफ्ट और वाराणसी के कालीन व हस्तशिल्प उत्पाद यूरोपीय बाजार में बड़ी मात्रा में निर्यात किए जाते हैं. मौजूदा स्थिति में इन सभी उद्योगों की तैयार खेप गोदामों में रुकी हुई है. देरी से डिलीवरी पड़ सकती है भारी काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स (CLE) के पूर्व रीजनल चेयरमैन असद इराकी का कहना है कि यूरोपीय बाजार में समय पर माल पहुंचाना सबसे अहम माना जाता है. यदि तय समय सीमा के भीतर शिपमेंट नहीं पहुंचती है तो आर्थिक जुर्माना लग सकता है. साथ ही वर्षों से बने कारोबारी संबंधों पर भी इसका असर पड़ सकता है. उनका कहना है कि यदि तनाव लंबा चला तो समुद्री मालभाड़ा, बीमा प्रीमियम और कंटेनरों की उपलब्धता जैसी चुनौतियां भी बढ़ेंगी. त्योहारी सीजन के कारोबार पर भी असर संभव हिंदुस्तानीय निर्यात परिषद के प्रमुख आलोक श्रीवास्तव के अनुसार अगस्त और सितंबर के लिए तय लगभग 6 हजार करोड़ के ऑर्डर फिलहाल रुके हुए हैं. यदि शिपमेंट समय पर रवाना नहीं हो सकी तो त्योहारी सीजन के लिए मिलने वाले नए ऑर्डर भी प्रभावित हो सकते हैं. इससे वैश्विक बाजार में हिंदुस्तानीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा पर भी असर पड़ने की आशंका है. लंबा खिंचा तनाव तो बढ़ सकती हैं ये मुश्किलें समय पर माल नहीं पहुंचने पर ऑर्डर रद्द होने की आशंका. तैयार माल गोदामों में रुके रहने से कंपनियों की पूंजी फंस सकती है. समुद्री मालभाड़ा और बीमा खर्च बढ़ने से निर्यात लागत में इजाफा होगा. विदेशी खरीदारों से भुगतान मिलने में देरी हो सकती है. Also Read:बहराइच जिले से दिल दहला देने वाली घटना, मगरमच्छ ने 12 साल के शिशु को जिंदा निगला The post यूपी के विदेशी कारोबार पर ईरान-अमेरिका तनाव की मार, यूरोप ने 6 हजार करोड़ के ऑर्डर रोके appeared first on Naya Vichar.

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सम्मान नहीं मिला या कुछ और? जानिए क्यों RJD से इस्तीफा देने पर मजबूर हुए मृत्युंजय तिवारी, अंदर की पूरी कहानी

Bihar Politics: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख प्रवक्ता और पार्टी के ब्राह्मण चेहरे माने जाने वाले मृत्युंजय तिवारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने पार्टी में सम्मान नहीं मिलने और लगातार उपेक्षा का आरोप लगाया है. हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष ने तेजस्वी यादव के विदेश से लौटने तक इंतजार करने को कहा है. पार्टी में सम्मान नहीं मिलने से नाराज हुए मृत्युंजय बिहार की नेतृत्व में गुरुवार को उस समय हलचल मच गई, जब आरजेडी के वरिष्ठ प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपना इस्तीफा लेकर प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने साफ कहा कि जब पार्टी में सम्मान ही नहीं मिल रहा, तो पद पर बने रहने का कोई मतलब नहीं है. हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष ने उनसे तेजस्वी यादव के विदेश से लौटने तक इंतजार करने की अपील की. बताया जा रहा है कि फिलहाल उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है. मुख्य प्रवक्ता से नाराजगी बनी वजह? पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो मृत्युंजय तिवारी की नाराजगी की बड़ी वजह मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव बताए जा रहे हैं. कई वर्षों से मृत्युंजय तिवारी राष्ट्रीय टीवी चैनलों पर आरजेडी का पक्ष रखते रहे हैं. लेकिन हाल के दिनों में उन्हें मीडिया में पार्टी का प्रतिनिधित्व करने से रोका गया. इसी बात को लेकर उन्होंने पार्टी नेतृत्व से भी शिकायत की थी. माना जा रहा है कि यही विवाद इस्तीफे की सबसे बड़ी वजह बना. पार्टी नेताओं ने समझाने की कोशिश की जब मृत्युंजय तिवारी पार्टी कार्यालय पहुंचे, तब वहां कोषाध्यक्ष सुनील सिंह, तनवीर हसन समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे. सभी नेताओं ने उन्हें इस्तीफा वापस लेने की सलाह दी. वहीं, प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने सार्वजनिक तौर पर इस्तीफा मिलने की बात से इनकार किया है. ‘तेजस्वी को कई लोगों ने घेर रखा है’ इस्तीफे के बाद मृत्युंजय तिवारी ने बयान जारी कर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की. उन्होंने कहा कि पिछले छह से सात महीनों से उन्हें लगातार अपमानित महसूस कराया जा रहा है. इस मुद्दे पर उन्होंने कई बार तेजस्वी यादव से शिकायत भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. मृत्युंजय ने यह भी आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव को कुछ लोगों ने पूरी तरह घेर रखा है. उनके मुताबिक, हालात ऐसे हैं कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें RJD के लिए क्यों अहम हैं मृत्युंजय तिवारी? आरजेडी लंबे समय से यादव और मुस्लिम वोटबैंक की नेतृत्व करती रही है. ऐसे में मृत्युंजय तिवारी पार्टी के प्रमुख ब्राह्मण चेहरे के रूप में पहचान रखते हैं. वह पिछले एक दशक से ज्यादा समय से मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते रहे हैं. ऐसे नेता का पार्टी से अलग होना आरजेडी के लिए नेतृत्वक और सामाजिक दोनों स्तर पर नुकसानदायक माना जा रहा है. Also Read: अब बिहार के छात्रों को मिलेगी JEE-NEET की मुफ्त कोचिंग, सम्राट प्रशासन का ऐलान The post सम्मान नहीं मिला या कुछ और? जानिए क्यों RJD से इस्तीफा देने पर मजबूर हुए मृत्युंजय तिवारी, अंदर की पूरी कहानी appeared first on Naya Vichar.

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’19 दिन बाद भी सन्नाटा क्यों?’, सोनम वांगचुक के सपोर्ट में उतरीं किरण राव, सरकार से पूछे सवाल

Kiran Rao On Sonam Wangchuk: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की छात्रों के अधिकारों को लेकर जारी 19 दिन की भूख हड़ताल को अब बॉलीवुड से लगातार सपोर्ट मिल रहा है. आमिर खान, सोनाक्षी सिन्हा और फातिमा सना शेख के बाद अब फिल्ममेकर किरण राव भी उनके सपोर्ट में उतर आई हैं. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, “मैं सोनम वांगचुक, अभिजीत दिपके, CJP और इस देश के उन सभी नागरिकों के साथ खड़ी हूं, जो छात्रों के अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं. आप सभी ने हमें हमारी चुप्पी और उदासीनता से बाहर निकालने का काम किया है. हमें याद दिलाया है कि इस देश में हर आवाज मायने रखती है. इसके लिए पूरा देश आपका ऋणी है.” Kiran Rao Post: सोनम वांगचुक के सपोर्ट में क्या बोलीं किरण राव? किरण राव ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, “यह देखकर बेहद दुख होता है कि 19 दिन बीत जाने के बाद भी इस भूख हड़ताल को लगभग पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है. आखिर सत्ता में बैठे लोग जनता की आवाज कब सुनेंगे? यह स्थिति चौंकाने वाली भी है और अमानवीय भी. प्रशासन को प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत शुरू करनी चाहिए, छात्रों की परेशानियों को समझना चाहिए और इस मुद्दे का समाधान निकालना चाहिए. हम नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार है और हमारी आवाज सुनी जानी चाहिए.” View on Instagram Aamir Khan On Sonam Wangchuk: आमिर खान ने भी तोड़ी थी चुप्पी इससे पहले आमिर खान ने भी सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था कि ‘3 इडियट्स’ का फुनसुख वांगडू किरदार सोनम वांगचुक पर आधारित नहीं था और इसे लेकर लोगों के बीच गलतफहमी है. हालांकि उन्होंने सोनम वांगचुक के काम की सराहना करते हुए कहा था कि उनका सम्मान करने के लिए फिल्म से उनका जुड़ाव होना जरूरी नहीं है. आमिर ने उनकी सेहत को लेकर चिंता जताते हुए कहा था, “हम सभी उनकी सेहत और जिंदगी को लेकर चिंतित हैं. हम चाहते हैं कि सब कुछ अच्छे तरीके से खत्म हो और वह अपनी भूख हड़ताल समाप्त करके अपना ध्यान रखें.” ये भी पढ़ें: सोनम वांगचुक के सपोर्ट में 1 दिन का अनशन करेंगे अतुल कुलकर्णी, कहा- दर्द को समझने के लिए जरूरी है कि हम दूसरे के दर्द से जुड़ें ये भी पढ़ें: ‘मुझे देश के भविष्य की चिंता है, मैं एंटी-नेशनल नहीं हूं’, सोनम वांगचुक के सपोर्ट में बोलीं सोनाक्षी सिन्हा, समय रैना ने भी उठाई आवाज The post ’19 दिन बाद भी सन्नाटा क्यों?’, सोनम वांगचुक के सपोर्ट में उतरीं किरण राव, प्रशासन से पूछे सवाल appeared first on Naya Vichar.

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20वें दिन भी भूख हड़ताल पर सोनम वांगचुक, बोले- ’20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा’

Sonam Wangchuk hunger strike : शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सोनम वांगचुक 20वें दिन भी भूख हड़ताल पर बैठे हैं. डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी सेहत की जांच कर रही है. उनका वजन भी बताया जा रहा है कि 9 किलोग्राम तक कम हो चुका है.  उन्होंने कहा, “मैं किसी भी कीमत पर 20 जुलाई तक जीवित रहूंगा ताकि आप सबके साथ संसद तक मार्च कर सकूं; और अगर 20 जुलाई को हमारा मार्च सफल नहीं हुआ, तो मैं भूत बनकर लौट आऊंगा!” सोनम वांगचुक द्वारा कही इस बात को बताते हुए कॉकरोच जनता पार्टी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि “सोनम वांगचुक ने अपने जीवन के इतने कठिन समय में भी अपना सेंस ऑफ ह्यूमर नहीं खोया है. उन्होंने युवाओं से संसद की ओर मार्च पर चलने की अपील भी की.  सोनम वांगचुक की टिप्पणियों को साझा करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी ने पोस्ट में लिखा, “हिंदुस्तान जाग रहा है, इस विरोध प्रदर्शन ने नेतृत्वक ध्यान भी आकर्षित किया है”.  पिनारयी विजयन का केंद्र प्रशासन पर आरोप गुरुवार को केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनारयी विजयन ने केंद्र पर वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य के प्रति उदासीनता बरतने का आरोप लगाया. फेसबुक पोस्ट में विजयन ने कहा कि वांगचुक की हालत के बारे में समाचारें चिंताजनक हैं. उन्होंने केंद्र प्रशासन की इस बात के लिए आलोचना की कि उसने वांगचुक द्वारा उठाए गए मुद्दों पर उनसे बातचीत करने से इनकार कर दिया.  ये भी पढ़ें : बंगाल की खाड़ी में नाव हादसा: 500 रोहिंग्या शरणार्थियों की मौत की आशंका वांगचुक की सेहत पर बढ़ी चिंता  उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन न केवल NEET पेपर लीक से प्रभावित छात्रों की चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है, बल्कि वांगचुक के जीवन को भी नजरअंदाज किया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि कार्यकर्ता के कई अंग ठीक से काम नहीं कर रहे. उनका वजन भी लगातार कम हो रहा है. विजयन ने केंद्र से आग्रह किया कि सोनम वांगचुक की सेहत में और गिरावट आए इससे पहले प्रशासन हस्तक्षेप करे. मांगों पर प्रशासन की चुप्पी बरकरार  कॉकरोच जनता पार्टी का दिल्ली स्थित जंतर-मंतर में प्रदर्शन बीते 25 दिनों से जारी है. वहीं प्रोटेस्ट को सोनम वांगचुक वांगचुक का साथ 28 जून को मिला. इसके बाद से वे लगातार आमरण अनशन पर बैठे हैं. शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और प्रशासन की जवाबदेही को लेकर अब तक किसी भी प्रकार से बातचीत के लिए कदम नहीं बढ़ाए गए हैं.  ये भी पढ़ें : सोनम वांगचुक के समर्थन में जदिया के युवाओं का सांकेतिक अनशन, केंद्र से वार्ता की मांग The post 20वें दिन भी भूख हड़ताल पर सोनम वांगचुक, बोले- ’20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा’ appeared first on Naya Vichar.

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