UP News: वाराणसी से प्रशासनी स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है. बड़ागांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक बनवासी स्त्री का प्रसव खुले आसमान के नीचे जमीन पर कराया गया. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है. वहीं, प्रसव के पांचवें दिन नवजात की मौत ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है. अब सीएमओ ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं.
वाराणसी में CHC परिसर में खुले में कराया गया प्रसव
वाराणसी के बड़ागांव विकासखंड स्थित विरांव कोट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही का मामला सामने आया है. यहां सियरहा बनवासी बस्ती की रहने वाली 38 वर्षीय सविता पत्नी जोगिंदर का खुले आसमान के नीचे प्रसव कराया गया. परिजनों के मुताबिक, सविता को सुबह से ही तेज पेट दर्द हो रहा था. इसके बाद उन्हें दोपहर करीब 2 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया. स्त्री की हालत बिगड़ने पर भी उसे लेबर रूम में भर्ती कराने के बजाय परिसर में ही प्रसव हो गया.
नर्स ने जमीन पर कराया प्रसव, वीडियो हुआ वायरल
आशा कार्यकर्ता राधिका के अनुसार, स्त्री तेज दर्द से परेशान थी और बार-बार लेबर रूम से बाहर आ रही थी. स्वजन और अस्पताल स्टाफ ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह अस्पताल परिसर में जमीन पर बैठ गई. इसी दौरान शाम करीब 4 बजे स्त्री को तेज प्रसव पीड़ा हुई. ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स प्रीति ने खुले आसमान के नीचे बिना किसी प्राइवेसी के प्रसव कराया. इस दौरान किसी तरह की व्यवस्था नहीं दिखाई दी. घटना का वीडियो वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया.
प्रसव के पांचवें दिन नवजात की मौत
प्रसव के बाद जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ बताए गए थे, लेकिन पांचवें दिन शाम को नवजात की मौत हो गई. परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है.
स्टाफ नर्स प्रीति ने बताया कि उस समय चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कालिका यादव छुट्टी पर थीं. उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी अधीक्षक और फार्मासिस्ट को है. वहीं, एएनएम मुक्ता तिवारी ने बताया कि उस दिन उनकी ड्यूटी नहीं थी, इसलिए वह इस बारे में कुछ नहीं बता सकतीं.
सीएमओ ने दिए जांच के आदेश
मामला सामने आने के बाद वाराणसी के सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार ने जांच के लिए टीम गठित करने की बात कही है. उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
नौवां प्रसव होने के कारण हाई रिस्क में थी स्त्री
जानकारी के मुताबिक, सविता का यह नौवां प्रसव था. स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के अनुसार नौवां प्रसव हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (HRP) की श्रेणी में आता है. ऐसे मामलों में प्रसव लेवल-3 अस्पताल में कराया जाना चाहिए. बताया गया कि स्त्री का वजन करीब एक क्विंटल था और सातवें महीने में ही गर्भ का पता चला था. इसके बावजूद स्त्री का प्रसव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कराया गया.
प्रसव के कुछ घंटे बाद ही कर दिया गया डिस्चार्ज
प्रशासन की गाइडलाइन के अनुसार प्रसव के बाद स्त्री को 24 से 48 घंटे तक अस्पताल में निगरानी में रखना जरूरी होता है. लेकिन परिजनों के मुताबिक, सविता दोपहर 2 बजे अस्पताल पहुंची, शाम 4 बजे प्रसव हुआ और रात करीब 8 बजे उसे डिस्चार्ज कर दिया गया. परिजनों का आरोप है कि स्त्री को न तो उचित देखभाल मिली और न ही प्रसव के दौरान गोपनीयता का ध्यान रखा गया. इसके बाद नवजात की मौत हो गई.
विशेषज्ञों ने जताई चिंता
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में बेहतर निगरानी, समय पर इलाज और प्रसव के बाद देखभाल बेहद जरूरी होती है. इसकी कमी से नवजात मृत्यु दर का खतरा बढ़ जाता है. खासकर बनवासी बस्तियों में समय पर एंटी नेटल केयर (ANC) नहीं पहुंच पाना भी एक बड़ी समस्या है. यह घटना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. खुले आसमान के नीचे बिना किसी व्यवस्था के प्रसव कराए जाने की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है.
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