IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस और इंजीनियरिंग विभाग के छात्र साहिल वाकोडे हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे. बीटेक दूसरे वर्ष के छात्र साहिल की मौत के बाद आक्रोशित छात्रों ने IIT परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया. परिवार ने साहिल की मौत के पीछे जातिगत उत्पीड़न को वजह बताया. मुंबई पुलिस ने परिवार की ओर से लगाए गए आरोप के आधार पर SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है. अब देश के शिक्षण संस्थानों में जातीय आधार पर उत्पीड़न और आत्महत्या की घटनाओं पर नई बहस छिड़ गई है. SC-ST और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों से जुड़े आत्महत्या के मामलों की गूंज संसद में भी सुनाई देती रही है. साल 2024 में इसे लेकर सांसद एंटो एंटनी ने लोकसभा में सवाल भी पूछा था.
सांसद एंटो एंटनी ने किया था ये सवाल
लोकसभा में सांसद एंटो एंटनी ने 25 नवंबर 2024 को शिक्षा मंत्री से IIT में छात्रों की आत्महत्या को लेकर सवाल पूछा था. उन्होंने जानना चाहा कि पिछले पांच साल में हर IIT में कितने छात्रों ने आत्महत्या की, इनमें SC, ST और OBC वर्ग के कितने छात्र थे और इनका साल और संस्थान के हिसाब से आंकड़ा क्या है. साथ ही, प्रशासन से यह भी पूछा गया कि IIT में आत्महत्या रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और हर IIT में इस समय कितने मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ काम कर रहे हैं. उस वक्त शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने बताया कि आत्महत्या से जुड़े आंकड़े राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) पुलिस में दर्ज मामलों के आधार पर जुटाता है. छात्रों की आत्महत्या से जुड़े 2022 के आंकड़े NCRB की ‘Accidental Deaths & Suicide in India (ADSI) 2022’ रिपोर्ट में उपलब्ध हैं.
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वहीं, हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में IIT में छात्रों की मौत से जुड़ा आधिकारिक आंकड़ा सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2020-21 से 2024-25 के बीच देश के अलग-अलग IIT में कम से कम 53 छात्रों की मौत हुई. इनमें आधे से ज्यादा छात्र SC, ST और OBC वर्ग से थे. इन 53 मामलों में 45 आत्महत्या और 8 अप्राकृतिक मौत के मामले शामिल हैं.
IIT छात्रों की मौत का डेटा संसद में नहीं हुआ पेश
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, उच्च शिक्षा विभाग के अंडर सेक्रेटरी नीलेश चंद्र श्रीवास्तव ने 1 दिसंबर 2025 को सभी IIT को पत्र भेजकर छात्रों की आत्महत्या से जुड़ी जानकारी मांगी थी. यह जानकारी लोकसभा में पूछे जाने वाले एक सवाल के जवाब के लिए मांगी गई थी. इस सवाल का डायरी नंबर 3682 था और इसे 8 दिसंबर 2025 को पेश किया जाना था. मंत्रालय को सभी IIT से जानकारी मिल गई थी, लेकिन यह आंकड़ा संसद में पेश नहीं किया गया. कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने 8 दिसंबर को IIT और दूसरे केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या से जुड़े सवाल पूछे थे.
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IIT में छात्रों की मौत के आंकड़े बढ़े
IIT की ओर से शिक्षा मंत्रालय को दी गई जानकारी के मुताबिक, देश के इन बड़े इंजीनियरिंग संस्थानों में छात्रों की मौत के मामले बढ़े हैं. 2020-21 में 5 छात्रों की मौत हुई थी. 2021-22 और 2022-23 में यह संख्या 6-6 रही. इसके बाद 2023-24 में 17 और 2024-25 में 19 छात्रों की मौत दर्ज की गई. कुल मौतों में 84.9 फीसदी मामले आत्महत्या के थे. वहीं, 2024-25 में 19 मौतों में से 6 को अप्राकृतिक मौत की श्रेणी में रखा गया. इन 53 मौतों में सबसे ज्यादा 23 छात्र जनरल कैटेगरी से थे, जो कुल मामलों का 43.4 फीसदी है. इसके बाद OBC वर्ग के 12 छात्र (22.6 फीसदी), SC वर्ग के 10 छात्र (18.9 फीसदी), ST वर्ग के 7 छात्र (13.2 फीसदी) और EWS वर्ग का 1 छात्र (1.9 फीसदी) शामिल था. यानी SC, ST और OBC वर्ग को मिलाकर कुल 29 छात्रों की मौत हुई, जो सभी मामलों का 54.7 फीसदी है.
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