Video : हिंदुस्तानीय रेलवे में पहली बार मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट में ऐसे खास टर्नआउट लगाए जा रहे हैं, जिनमें मूवेबल क्रॉसिंग यानी स्विंग-नोज तकनीक का इस्तेमाल होगा. ये टर्नआउट 320 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार वाली ट्रेनों के लिए बनाए गए हैं. इसकी खासियत यह है कि ट्रैक पर पहियों के गुजरने के दौरान कोई गैप नहीं रहता. इससे ट्रेन के पहियों को बेहतर सहारा मिलता है और झटके, कंपन, शोर और ट्रैक की टूट-फूट कम होती है. हर हाई-स्पीड टर्नआउट में दो पॉइंट मशीनें लगी हैं. ये स्विच और मूवेबल क्रॉसिंग को नियंत्रित करती हैं. सुरक्षित संचालन के लिए कई स्तरों पर इसकी जांच भी की जाती है. मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट का एक वीडियो न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया है.
हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट की लंबाई 508 किलोमीटर
पीआईबी ने 25 मार्च 2026 को बताया कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट की लंबाई 508 किलोमीटर है. यह गुजरात, महाराष्ट्र और दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगा. इस रूट पर मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती समेत 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं. प्रशासन के अनुसार प्रोजेक्ट के लिए जरूरी 1,389.5 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण पूरा हो चुका है. सभी जरूरी प्रशासनी मंजूरियां भी मिल गई हैं. प्रोजेक्ट से जुड़ी 1,651 बिजली, पानी और दूसरी सेवाओं की लाइनों को भी दूसरी जगह शिफ्ट किया जा चुका है. महाराष्ट्र में जमीन मिलने में देरी के कारण 2021 तक काम प्रभावित रहा. 2022 से वहां जमीन अधिग्रहण में तेजी आई.
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प्रोजेक्ट में समुद्र के नीचे बनने वाली है करीब 21 किलोमीटर लंबी सुरंग
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में समुद्र के नीचे बनने वाली करीब 21 किलोमीटर लंबी सुरंग का काम शुरू हो चुका है. इसमें महाराष्ट्र के घनसोली से शिलफाटा के बीच 4.8 किलोमीटर सुरंग बनकर तैयार हो गई है.
महाराष्ट्र के रेलवे बजट में 20 गुना बढ़ोतरी
किसी रेलवे प्रोजेक्ट को मंजूरी देने से पहले उसकी विस्तृत रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाती है. इसके बाद राज्य प्रशासन समेत अलग-अलग विभागों से राय ली जाती है. प्रोजेक्ट को मंजूरी देने के लिए नीति आयोग और वित्त मंत्रालय जैसी संस्थाओं की भी मंजूरी जरूरी होती है. इसलिए किसी प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने की तय समयसीमा पहले से बताना मुश्किल होता है. महाराष्ट्र में रेलवे के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा से जुड़े कामों के लिए बजट में बड़ी बढ़ोतरी हुई है. 2009-14 के दौरान जहां हर साल औसतन 1,171 करोड़ रुपये मिलते थे, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 23,778 करोड़ रुपये हो गया. यानी करीब 20 गुना बढ़ोतरी हुई है.
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