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JPSC Protest: देवेंद्रनाथ महतो का ऐलान- 15 सितंबर को सरकार की कमजोर पैरवी हुई तो सीएम आवास का करेंगे घेराव

रांची से अभिषेक आनंद की रिपोर्ट

JPSC Student Protest: JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच ने शुक्रवार को रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में झारखंड की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए और प्रशासन पर अदालत में कमजोर पक्ष रखने का आरोप लगाया. मंच के प्रमुख और छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि 26 साल के झारखंड में भर्ती व्यवस्था पूरी तरह भ्रष्टाचार से प्रभावित हो चुकी है और अब आंदोलन किसी भी कीमत पर समझौते की राह पर नहीं जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि 15 सितंबर को प्रशासन ने हाईकोर्ट में छात्रों के हितों में अपना मजबूत पक्ष नहीं रखा, तो मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे. लेकिन इससे पहले मंच 24 अगस्त से दिशोम गुरु पद्म भूषण शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा से भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा निकालेगा.

5 जुलाई से शुरू हुआ था छात्रों का आंदोलन

देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि छात्र आंदोलन की शुरुआत 5 जुलाई से हुई थी, जो 25 जुलाई से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह में बदल गया. उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के दबाव में प्रशासन को 22 परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं, छह परीक्षाएं स्थगित करनी पड़ीं और 17 मामलों में जांच बैठानी पड़ी. लेकिन दो दिन बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, FSO, CDPO और JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के फैसले पर रोक लग गयी.

अदालत में प्रशासन की भूमिका पर उठाए सवाल

देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन ने अदालत में CID की रिपोर्ट को मजबूती से क्यों नहीं रखा. उन्होंने पूछा कि पहले दिन महाधिवक्ता अदालत में क्यों नहीं पहुंचे और प्रशासन ने अपने फैसले का पर्याप्त बचाव क्यों नहीं किया. उन्होंने कहा, “हमारी लड़ाई किसी निर्दोष छात्र की नौकरी छीनने की नहीं है. प्रशासन तय करे कि कौन दोषी है और कौन निर्दोष. दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन पूरे भर्ती तंत्र में पारदर्शिता भी सुनिश्चित हो.” उन्होंने आरोप लगाया कि यदि प्रशासन अदालत में अपने फैसले के आधार और CID जांच की रिपोर्ट प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती, तो परीक्षाएं रद्द करने के फैसले पर रोक नहीं लगती.

नेमरा से शुरू होगी भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा

मंच ने आंदोलन के दूसरे चरण की घोषणा करते हुए कहा कि 24 अगस्त से दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पैतृक गांव नेमरा से “भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा” निकाली जाएगी. यह यात्रा झारखंड के सभी 24 जिलों तक जाएगी. देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि यात्रा का उद्देश्य केवल विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि भविष्य में बिना धांधली वाली परीक्षा व्यवस्था की गारंटी सुनिश्चित करना है. उन्होंने कहा कि मंत्री के बयानों और CID जांच के आधार पर अब तक 45 परीक्षाओं पर कार्रवाई हुई है. अब प्रशासन को स्थायी सुधार लागू करना होगा.

15 सितंबर को सीएम आवास घेरने की चेतावनी

मंच ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट में 15 सितंबर को अगली सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण होगी. देवेंद्रनाथ महतो ने चेतावनी दी कि यदि उस दिन भी प्रशासन अदालत में मजबूती से अपना पक्ष नहीं रखती, तो छात्र बड़ी संख्या में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे. उन्होंने कहा कि इस बार आंदोलन में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी. जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन चक्का जाम जैसे बड़े आंदोलन भी किए जाएंगे.

PGT समेत कई परीक्षाओं की अनदेखी का आरोप

देवेंद्रनाथ महतो ने आरोप लगाया कि PGT भर्ती मामले को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि कई अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी गंभीर शिकायतें हैं, लेकिन प्रशासन ने उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की. उन्होंने मांग की कि जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति विवादित भर्ती प्रक्रियाओं के तहत हुई है और जो अभी प्रशिक्षण ले रहे हैं, उनके प्रशिक्षण पर भी रोक लगाई जाए, ताकि जांच पूरी होने तक किसी प्रकार की जल्दबाजी न हो.

प्रशासन ने भरोसा मांगा, अदालत में पैरवी कमजोर: राजेश प्रसाद

प्रेस वार्ता में मंच के प्रतिनिधि राजेश प्रसाद ने कहा कि छात्र आंदोलन का परिणाम यह रहा कि कई मामलों में गिरफ्तारियां हुईं और CGL प्रकरण राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा. उन्होंने कहा कि छात्रों को लगा था कि प्रशासन भर्ती सुधार के मुद्दे पर उनके साथ खड़ी होगी. राजेश प्रसाद ने कहा कि प्रशासन ने स्वयं छात्रों से भरोसा रखने को कहा था और छात्रों ने उस भरोसे पर आंदोलन भी समाप्त किया. लेकिन इसके बाद जब JPSC की 11वीं से 13वीं परीक्षाओं का मामला अदालत पहुंचा, तब पहले दिन महाधिवक्ता मौजूद नहीं थे.

उन्होंने कहा कि उस दिन प्रशासन की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने केवल जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जबकि प्रशासन कई महत्वपूर्ण पहलुओं और CID जांच के आधार को अदालत के सामने रख सकती थी. उनका आरोप है कि इसी तरह CGL मामले में भी प्रशासन की ओर से प्रभावी ढंग से पक्ष नहीं रखा गया.

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प्रशासन ठोस पक्ष रखती तो रद्द परीक्षा पर नहीं लगती रोक

राजेश प्रसाद ने कहा कि यदि प्रशासन अदालत में अपने फैसलों के ठोस आधार प्रस्तुत करती, तो रद्द परीक्षाओं पर रोक लगाने जैसी स्थिति नहीं बनती. उन्होंने कहा कि मंच फिलहाल यह नहीं मानता कि प्रशासन ने आंदोलन खत्म करने के लिए कोई साजिश रची थी, लेकिन यदि केवल विरोध शांत कराने के लिए फैसले लिए गए और अदालत में उनका बचाव नहीं किया गया, तो यह छात्रों के साथ विश्वासघात होगा. उन्होंने याद दिलाया कि कार्मिक विभाग ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा था कि परीक्षाओं पर कार्रवाई CID जांच के आधार पर की गई थी.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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