रांची से नवीन शर्मा, अभिषेक आनंद और राजलक्ष्मी की रिपोर्ट
JPSC Student Protest: झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों और राज्य प्रशासन के बीच रविवार को दूसरी दौर की वार्ता हुई. करीब दोपहर 12 बजे शुरू हुई बैठक में छात्रों की विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई. प्रशासन की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने दावा किया कि छात्रों की करीब 98% मांगों पर सहमति बन गई है. वहीं, छात्रों का कहना है कि 50 फीसदी से अधिक मांगों को प्रशासन ने स्वीकार किया है, लेकिन कई प्रमुख और निर्णायक मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बन पाई है. बैठक के बाद छात्रों ने आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया. छात्र प्रतिनिधियों ने ऐलान किया कि 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव किया जाएगा. ऐसे में दूसरी वार्ता के बाद भी आंदोलन का समाधान नहीं निकल सका है.
14वीं JPSC परीक्षा की जांच पर प्रशासन ने लिया फैसला
14वीं JPSC परीक्षा को लेकर बैठक में प्रशासन ने जांच कराने पर सहमति जताई. मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के मुताबिक, मामले की जांच ED और CID करेगी. प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया कि CID को 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने के लिए कहा जाएगा. छात्रों की ओर से 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने की मांग भी रखी गई. इस पर प्रशासन ने तत्काल परीक्षा रद्द करने के बजाय इस पर विचार करने की बात कही है. यानी जांच के मुद्दे पर प्रशासन और छात्रों के बीच सहमति की स्थिति बनी, लेकिन परीक्षा रद्द करने का फैसला अभी लंबित है.
JSSC CGL पर नहीं बनी सहमति, CBI जांच पर अड़े छात्र
JSSC CGL परीक्षा को लेकर वार्ता में सबसे महत्वपूर्ण गतिरोध सामने आया. छात्रों ने इस मामले की CBI जांच कराने की मांग रखी, जबकि प्रशासन की ओर से न्यायिक जांच की बात कही गई. प्रशासन का तर्क है कि CGL परीक्षा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आयोजित हुई है. इसलिए इसे सीधे रद्द नहीं किया जा सकता. वहीं, छात्र परीक्षा की प्रक्रिया और उससे जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग पर कायम हैं. यही मुद्दा बैठक के दौरान प्रशासन और छात्रों के बीच असहमति का प्रमुख कारण बना रहा. छात्रों का कहना है कि केवल न्यायिक जांच का आश्वासन उनकी मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं है और वे CBI जांच चाहते हैं.
TDPL की सभी परीक्षाएं रद्द करने की मांग पर गतिरोध
TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं को लेकर भी प्रशासन और छात्रों के बीच सहमति नहीं बन सकी. छात्रों ने TDPL की ओर से आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की मांग रखी है. छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के मद्देनजर इन परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है. वहीं, प्रशासन की ओर से सभी परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति नहीं दी गई है. TDPL को लेकर छात्रों की मांग और प्रशासन के रुख में अंतर के कारण यह मुद्दा भी वार्ता में लंबित रहा. छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा.
परीक्षा व्यवस्था में रिफॉर्म पर प्रशासन-छात्र में सहमति
बैठक में परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार यानी रिफॉर्म को लेकर प्रशासन और छात्रों के बीच सहमति बनी है. छात्रों की प्रमुख मांगों में JPSC और JSSC की परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने के लिए संस्थागत सुधार शामिल हैं. प्रशासन की ओर से पहले ही संकेत दिया गया था कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए विशेषज्ञ संस्थानों की मदद ली जाएगी. इसमें IIT, XISS और ISM जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ बुद्धिजीवियों को भी शामिल करने की बात कही गई है. प्रस्तावित कमेटी छात्रों से भी विमर्श करेगी और एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देने की बात कही गई है. इस मुद्दे पर प्रशासन की सहमति को वार्ता में बड़ी प्रगति माना जा रहा है. हालांकि छात्रों के लिए परीक्षा रद्द करने और जांच एजेंसी जैसे मुद्दे अभी ज्यादा महत्वपूर्ण बने हुए हैं.
प्रशासन का दावा, 98 फीसदी मांगें मानीं
बैठक के बाद मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने दावा किया कि प्रशासन ने छात्रों की करीब 98 फीसदी मांगों को स्वीकार कर लिया है. उन्होंने कहा कि प्रशासन छात्रों की समस्याओं को लेकर गंभीर है और आंदोलन खत्म कराने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है. प्रशासन की ओर से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि वार्ता के दौरान अधिकतर मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया गया है. लेकिन छात्रों के आकलन में तस्वीर अलग है. छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि उनकी 50 फीसदी से अधिक मांगों पर सहमति बनी है, लेकिन कई महत्वपूर्ण मांगें अभी भी लंबित हैं. इस तरह दोनों पक्षों के दावों में बड़ा अंतर है. प्रशासन जहां लगभग पूरी मांगें मानने की बात कर रही है, वहीं छात्र इसे आंदोलन समाप्त करने के लिए पर्याप्त नहीं मान रहे हैं.
प्रमुख मुद्दों पर फैसला नहीं होने से छात्र नाराज
छात्रों के मुताबिक 14वीं JPSC की परीक्षा रद्द करने, JSSC CGL में CBI जांच और TDPL की सभी परीक्षाओं को रद्द करने जैसे मुद्दे अभी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं. यही वे मुद्दे हैं जिन्हें छात्र आंदोलन के केंद्र में मान रहे हैं. छात्रों का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार पर सहमति अपनी जगह है, लेकिन पुराने मामलों में जिम्मेदारी तय करना और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना भी जरूरी है. जब तक इन मांगों पर स्पष्ट फैसला नहीं होता, आंदोलन खत्म करना संभव नहीं है.
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10 अगस्त को विधानसभा घेराव
दूसरी दौर की वार्ता के बाद भी अंतिम सहमति नहीं बनने पर छात्रों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है. छात्र प्रतिनिधियों ने घोषणा की है कि 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव किया जाएगा. सोमवार को होने वाले विधानसभा घेराव को लेकर राजधानी रांची में प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी. बड़ी संख्या में छात्रों के जुटने की संभावना के बीच सुरक्षा और यातायात व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी. फिलहाल, प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी आंदोलन को समाप्त कराने में सफल नहीं हुआ है. प्रशासन कुछ मुद्दों पर सहमति बनने को बड़ी उपलब्धि बता रही है, जबकि छात्र जांच एजेंसी और परीक्षा रद्द करने जैसे मुद्दों पर स्पष्ट निर्णय चाहते हैं. अब नजर 10 अगस्त के विधानसभा घेराव और उसके बाद प्रशासन के अगले कदम पर रहेगी.
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