पिछले कुछ महीनों से उत्तरी अफगानिस्तान, खासकर बदख्शां और पंजशीर प्रांतों में तालिबान बलों पर तालिबान विरोधी गुटों, जैसे नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट (NRF), अफगानिस्तान फ्रीडम फ्रंट (AFF) और हाल ही में गठित सिपाह-ए-मिहान—की ओर से लगभग रोजाना हमले किए जाने की समाचारें सामने आती रही हैं.
तालिबान ने हाल के दिनों में इन अशांत इलाकों में अपनी तैनाती बढ़ाई है और प्रतिरोधी कमांडरों का पता लगाने के लिए गुप्त अभियान भी शुरू किए हैं. इन्हीं अभियानों के दौरान NRF के ऑपरेशंस कमांडर हसीब पंजशिरी, जिन्हें कोये मरकज के नाम से भी जाना जाता था, की सलांग घाटी में तालिबान के विशेष बलों द्वारा किए गए घात में मौत हो गई.
हसीब पंजशिरी के पूर्व डिप्टी कमांडर रूबिन सत्तार से अफगानिस्तान-पाकिस्तान मामलों के भू-नेतृत्वक विश्लेषक मनीष राय ने बातचीत की. सत्तार वर्तमान में नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट (NRF) की स्पेशल ऑपरेशंस यूनिट, यूनिट 01 के कमांडर हैं.
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