Tahawwur Rana: ‘छोटू चाय वाला’ के नाम से मशहूर मोहम्मद तौफीक ने कहा, आतंकवादियों से निपटने के लिए देश में सख्त कानून बनाने की भी मांग की. तौफीक ने कहा, “तहव्वुर राणा को अलग कोठरी या बिरयानी और अन्य सुविधाएं देने की कोई जरूरत नहीं है, जैसी (जिंदा पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकवादी) अजमल कसाब को दी गई थीं.”
राणा को 15 दिन में दे देना चाहिए फांसी
चाय विक्रेता ने कहा, “आतंकवादियों के लिए हिंदुस्तान में भी सख्त कानून होना चाहिए. राणा का हिंदुस्तान लाया जाना हमारे लिए अच्छी समाचार है, लेकिन उसे 15 दिन या दो-तीन महीने में सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी जानी चाहिए.”
मुंबई हमने में तौफीक ने कैसे लोगों की बचाई थी जान
तौफीक की दक्षिण मुंबई में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) पर चाय की दुकान थी, जो नवंबर 2008 में आतंकवादियों के हमले की चपेट में आ गई थी. उन्होंने बताया कि हमले के दौरान उन्होंने अपनी आंखों के सामने लोगों को मरते हुए देखा था. तौफीक के अनुसार, इसके बाद उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों को सचेत किया, उन्हें हमले से बचने के लिए स्टेशन पर सुरक्षित दिशा की ओर जाने का निर्देश दिया तथा कई घायलों को अस्पताल पहुंचाया.
कसाब के मटन बिरयानी मांगने की क्या है सच्चाई?
मुंबई आतंकी हमले के मामले में प्रशासनी वकील उज्ज्वल निकम ने 2015 में कहा था कि कसाब द्वारा जेल में मटन बिरयानी की मांग करने की बात महज एक मिथक है और आतंकवादी के पक्ष में पैदा की जा रही भावनात्मक लहर को रोकने के लिए ऐसा कहा गया था. निकम ने कहा था, “कसाब ने कभी बिरयानी की मांग नहीं की और प्रशासन ने उसे कभी बिरयानी नहीं परोसी. मैंने यह कहानी सिर्फ उस भावनात्मक माहौल को खत्म करने के लिए गढ़ी थी जो मामले की सुनवाई के दौरान कसाब के पक्ष में बन रहा था.”
10 पाकिस्तानियों ने मुंबई हमले को दिया था अंजाम, 166 की हुई थी मौत
छह नवंबर, 2008 को 10 पाकिस्तानी आतंकवादियों के एक समूह ने अरब सागर में समुद्री मार्ग का उपयोग करके हिंदुस्तान की वित्तीय राजधानी में घुसने के बाद सीएसएमटी, दो लक्जरी होटलों और एक यहूदी केंद्र पर हमला किया था. हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी.
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