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अयोध्या राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, कैश हैंडलिंग से जुड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू नहीं किए गए

Ayodhya Ram Mandir: उत्तर प्रदेश के तीन सबसे बड़े मंदिर ट्रस्ट वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर, मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर से तुलना करने पर पता चलता है कि इन तीनों ने वित्तीय जवाबदेही के लिए मज़बूत सिस्टम बनाए हैं. इनमें मजिस्ट्रेट की देखरेख में गिनती, CCTV से कैश हैंडलिंग की निगरानी, ​​ऑडिट का लिखित रिकॉर्ड, सामूहिक देखरेख और दान की रकम को तुरंत बैंक में जमा करना शामिल है. यह तुलना तब और भी अहम हो जाती है जब दान चोरी की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी शुरुआती जांच में कहा है कि संदिग्ध धोखाधड़ी सिर्फ़ किसी व्यक्ति की गड़बड़ी नहीं है, बल्कि कैश हैंडलिंग, सुरक्षा प्रोटोकॉल और संस्थागत देखरेख में सिस्टम की कमियों के कारण हुई.

राम मंदिर में दान सुरक्षा पर सवाल

हिंदूस्तान टाइम्स में छपी समाचार के अनुसार, 21 मार्च को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एग्जीक्यूटिव कमिटी के सामने रखे गए फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि 1 अप्रैल, 2025 और 28 फरवरी, 2026 के बीच भक्तों ने कुल 82.78 करोड़ का दान दिया. इसमें से 54.79 करोड़ डोनेशन बॉक्स से, 18.88 करोड़ कैश काउंटर से, 8.33 करोड़ ऑनलाइन ट्रांसफर से और 78 लाख फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) के तहत मिले. इसी दौरान, ट्रस्ट ने बैंक डिपॉजिट पर ब्याज के तौर पर 138.03 करोड़ कमाए, जिससे उसकी कुल आय 220.81 करोड़ हो गई. अधिकारियों ने एग्जीक्यूटिव कमिटी को बताया कि कंस्ट्रक्शन पर खर्च के बाद भी लगभग 2,100 करोड़ फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेशित थे. इस स्थिति को देखते हुए, जांचकर्ताओं का कहना है कि कैश मैनेजमेंट में कथित कमियां और भी अहम हो जाती हैं.

SIT की जांच में उजागर हुईं कमियां

SIT जांच में सामने आया कि राम मंदिर की करीब 40 दान पेटियों से निकाली गई नकदी संग्रह से लेकर बैंक में जमा होने तक कई मैन्युअल प्रक्रियाओं से गुजरती थी. जांच एजेंसी ने जिम्मेदारियों के स्पष्ट बंटवारे, स्वतंत्र सत्यापन और निगरानी तंत्र की कमी पर सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कैश हैंडलिंग से जुड़े कुछ निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल प्रभावी ढंग से लागू नहीं किए गए. इसके अलावा, सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था और रिकॉर्ड संरक्षण को लेकर भी कमियां बताई गईं. इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश के अन्य प्रमुख मंदिर ट्रस्टों ने वित्तीय सुरक्षा के कई स्तर विकसित किए हैं. वराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट में दान पेटियां प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में खोली जाती हैं और बैंक अधिकारियों व स्वतंत्र पर्यवेक्षक की मौजूदगी में सीसीटीवी कैमरों के बीच गिनती की जाती है. वहां प्रत्येक लेनदेन का विस्तृत दस्तावेजीकरण और ऑडिट रिकॉर्ड भी तैयार किया जाता है. जांच में यह सवाल भी उठाया गया कि कैश संभालने वालों की तलाशी का काम पुलिस या किसी प्रशासनी सुरक्षा बल के बजाय प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी को क्यों सौंपा गया.

दान पेटियों से बैंक तक निगरानी में फर्क

मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि में दान संग्रह की व्यवस्था निर्धारित काउंटरों के माध्यम से संचालित होती है, जहां कर्मचारियों की नियमित मौजूदगी रहती है और पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी निगरानी में होती है. श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने कहा कि तय किए गए कर्मचारी लगभग हर दिन कैश गिनते हैं, गहनों को कड़ी सुरक्षा वाले स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है और डिजिटल दान सीधे बैंक खातों में जमा किया जाता है, जिससे हाथों से लेन-देन कम से कम होता है. वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में, दान के मैनेजमेंट की देखरेख एक हाई-पावर्ड कमेटी करती है. यह कमेटी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर बनाई गई है और इसके प्रमुख इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज हैं. दान के बक्से महीने में सिर्फ़ एक बार स्थानीय SDM और कमेटी के सदस्यों की मौजूदगी में CCTV की निगरानी में खोले जाते हैं और फिर इकट्ठा हुए दान को अधिकृत बैंक खातों में जमा किया जाता है.

यह भी पढ़ें: SBI को 3 महीने पहले से शक था राम मंदिर दान चोरी का मामला, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई, जानिए किसका था दबाव

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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