Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्र में अष्टमी तिथि का विशेष महत्व है. इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप माता महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की आराधना करने से सुख-समृद्धि, शांति और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है. महाष्टमी के अवसर पर कन्या पूजन करने की भी परंपरा है. इस दिन छोटी कन्याओं को देवी दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें भोजन कराया जाता है. आइए जानते हैं मां महागौरी की पूजा विधि, शुभ समय, मंत्र और प्रिय भोग के बारे में.
महाष्टमी 2026 पूजा का शुभ समय
पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर 2026 तक रहेगी. ऐसे में तिथि और पूजा के दिन को लेकर भ्रम हो सकता है.
ध्यान दें कि महाष्टमी की पूजा और कन्या पूजन का दिन स्थानीय पंचांग तथा क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार निर्धारित किया जा सकता है.
कैसे पड़ा मां महागौरी नाम?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी. लगातार तप करने के कारण उनके शरीर का रंग सांवला पड़ गया. माता की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने गंगाजल से उनके शरीर को स्वच्छ किया. इसके बाद उनका स्वरूप अत्यंत उज्ज्वल और गौर वर्ण का हो गया. इसी कारण उन्हें महागौरी कहा जाने लगा.
कैसा है मां महागौरी का स्वरूप?
मां महागौरी को अत्यंत शांत, सौम्य और करुणामयी स्वरूप वाली देवी माना जाता है. उनकी चार भुजाएं हैं. एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में डमरू रहता है, जबकि अन्य दो हाथ अभय और वर मुद्रा में होते हैं. माता श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और वृषभ यानी बैल पर सवार रहती हैं. इसी कारण उन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि उनकी पूजा से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है.
महाष्टमी पर मां महागौरी की पूजा विधि
महाष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा श्रद्धा और विधि-विधान से करनी चाहिए. पूजा की विधि इस प्रकार है:
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
- पूजा स्थल की सफाई करें और गंगाजल छिड़ककर स्थान को शुद्ध करें.
- लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां महागौरी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें.
- माता को रोली, कुमकुम, फूल और लाल चुनरी अर्पित करें.
- मां को फल, मिठाई, नारियल तथा हलवा-पूड़ी का भोग लगाएं.
- धूप-दीप जलाकर माता की आरती करें और मंत्रों का जाप करें.
- पूजा के अंत में हाथ जोड़कर सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें और अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें.
मां महागौरी के मंत्र
महाष्टमी पर मां महागौरी की कृपा प्राप्त करने के लिए इन मंत्रों का जाप किया जाता है.
सरल पूजा मंत्र
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
मां महागौरी का ध्यान मंत्र
श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः. महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
देवी स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां महागौरी रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां महागौरी को क्या भोग लगाएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी को नारियल अत्यंत प्रिय है. महाष्टमी के दिन माता को नारियल या नारियल से बनी मिठाई का भोग लगाया जा सकता है. इसके अलावा हलवा, पूड़ी, खीर और काले चने का भोग भी अर्पित किया जाता है. कन्या पूजन के दौरान छोटी कन्याओं को श्रद्धापूर्वक भोजन कराकर दक्षिणा और उपहार देने की परंपरा है. मान्यता है कि कन्याओं का सम्मान और सेवा करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं.
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