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Om Puri Birthday: चाय बेची, अंग्रेजी से घबराए, हॉलीवुड में किया रोमांस, अन्ना हजारे पर बयान से मचा था बवाल

हिंदी सिनेमा में कई ऐसे सितारे हुए, जिनकी पहचान उनके लुक्स और पर्दे पर हीरो वाली छवि से बनी. लेकिन ओम पुरी की कहानी इससे बिल्कुल अलग थी. चेहरा पारंपरिक हीरो जैसा नहीं था, अंग्रेजी बोलने में भी सहज नहीं थे और शुरुआती जिंदगी में आर्थिक तंगी ऐसी थी कि छोटी उम्र में काम करना पड़ा. इसके बावजूद उन्होंने अपनी अदाकारी के दम पर ऐसा मुकाम बनाया कि हिंदुस्तानीय फिल्मों के साथ विदेशी सिनेमा में भी उनकी पहचान बनी.

ओम पुरी की जिंदगी में संघर्ष था, दोस्ती थी, पर्दे पर रोमांस था और कुछ ऐसे विवाद भी थे, जिन्होंने उनके अभिनय से इतर उन्हें सुर्खियों में ला दिया.

नसीरुद्दीन शाह और ओम पुरी

आगे चलकर ओम पुरी ने ऐसी फिल्मों में काम किया, जिन्होंने उन्हें गंभीर और दमदार अभिनेता के तौर पर स्थापित किया. ‘अर्ध सत्य’, ‘आक्रोश’, ‘आरोहण’ और ‘मिर्च मसाला’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने दिखाया कि हीरो बनने के लिए पारंपरिक चेहरे से ज्यादा जरूरी किरदार को जीने की क्षमता है.

अंग्रेजी को लेकर झिझक, फिर हॉलीवुड तक पहुंचा सफर

ओम पुरी की जिंदगी का एक दिलचस्प पहलू अंग्रेजी को लेकर उनकी शुरुआती झिझक भी थी. जिस अभिनेता ने हिंदुस्तानीय समाज और व्यवस्था की जटिलताओं को पर्दे पर इतनी मजबूती से उतारा, उसे अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में अपनी जगह बनाने के लिए भाषा और नए माहौल की चुनौतियों का सामना करना पड़ा.

लेकिन उन्होंने इन मुश्किलों को अपने काम के रास्ते में नहीं आने दिया. ‘सिटी ऑफ जॉय’, ‘ईस्ट इज ईस्ट’ और ‘माय सन द फैनैटिक’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने विदेशी दर्शकों के बीच भी पहचान बनाई. फिल्म ‘ईस्ट इज ईस्ट’ में उनके काम को BAFTA नामांकन भी मिला.

ओम पुरी की खासियत यह थी कि वह किसी एक तरह के किरदार में बंधकर नहीं रहे. वह कभी आम आदमी की बेबसी दिखाते, कभी व्यवस्था से लड़ते इंसान का गुस्सा और कभी कॉमेडी से दर्शकों को हंसाते नजर आए. ‘जाने भी दो यारों’, ‘हेरा फेरी’ और ‘चाची 420’ जैसी फिल्मों ने उनके अभिनय के दूसरे रंग भी दिखाए.

हेलेन मिरेन के साथ पर्दे पर रोमांस, डांस को लेकर थे नर्वस

ओम पुरी की फिल्मी जिंदगी का एक अलग और दिलचस्प अध्याय हॉलीवुड फिल्म ‘द हंड्रेड-फुट जर्नी’ से जुड़ा है. इस फिल्म में उन्होंने हिंदुस्तानीय परिवार के मुखिया का किरदार निभाया था, जबकि हेलेन मिरेन एक फ्रांसीसी रेस्तरां की मालकिन के रोल में थीं. फिल्म में दोनों के किरदारों के बीच एक नरम और परिपक्व रोमांटिक रिश्ता दिखाया गया.

यह ओम पुरी की उस छवि से अलग था, जिसमें दर्शक उन्हें अक्सर गंभीर, गुस्सैल या व्यवस्था से जूझते किरदारों में देखते आए थे. इस फिल्म में रोमांस का अंदाज भी उम्र और अनुभव के अनुरूप था. ओम पुरी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि हेलेन मिरेन के साथ वॉल्ट्ज डांस करने को लेकर वह नर्वस थे. हेलेन ने उन्हें सहज महसूस कराने में मदद की.

यहां खास बात यह है कि फिल्म में दोनों का रोमांस पर्दे पर निभाया गया रिश्ता था, न कि उनकी निजी जिंदगी के रोमांस की कहानी. इस भूमिका ने ओम पुरी के अभिनय का एक और रंग सामने रखा.

अन्ना हजारे के आंदोलन में ऐसा क्या बोले ओम पुरी कि मच गया बवाल?

ओम पुरी की जिंदगी में विवाद का एक बड़ा अध्याय साल 2011 में आया. उस समय सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे और दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन पर बैठे थे. ओम पुरी भी इस आंदोलन के समर्थन में वहां पहुंचे थे.

इस दौरान उन्होंने नेताओं और सांसदों पर तीखी टिप्पणी की. उन्होंने नेतृत्वक वर्ग के लिए ‘नालायक’ और ‘गंवार’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया. उनके बयान पर विवाद खड़ा हो गया और संसद में उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई पर विचार किए जाने की बात सामने आई.

ओम पुरी

बाद में ओम पुरी ने अपने शब्दों के लिए खेद जताया. उन्होंने माना कि उनकी भाषा अनुचित थी और कहा कि वह उस समय भावुक थे. उनका कहना था कि उनकी मंशा भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाने की थी, लेकिन इस्तेमाल किए गए शब्दों पर उन्हें अफसोस है.

यह विवाद उनके करियर के उन प्रसंगों में शामिल हो गया, जब एक अभिनेता की टिप्पणी फिल्मी दुनिया से बाहर निकलकर नेतृत्वक बहस का हिस्सा बन गई. इस घटना ने यह भी दिखाया कि सार्वजनिक मंच पर कही गई बातों के शब्द और उनका असर कितना महत्वपूर्ण होता है.

जन्मतिथि को लेकर भी रहा रहस्य

ओम पुरी की जिंदगी से जुड़ा एक और दिलचस्प तथ्य उनकी जन्मतिथि है. उनके जन्म का कोई पक्का रिकॉर्ड या जन्म प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं था. उनकी मां कहती थीं कि उनका जन्म दशहरे के दो दिन बाद हुआ था. स्कूल में दाखिले के समय उनके मामा ने 9 मार्च 1950 को जन्मतिथि के तौर पर दर्ज करा दिया.

बाद में ओम पुरी ने दशहरे की तारीख के आधार पर 18 अक्टूबर 1950 को अपना जन्मदिन मानना शुरू किया. इसी वजह से उनकी जन्मतिथि को लेकर अलग-अलग तारीखें सामने आती रहीं. आम तौर पर उनकी जयंती 18 अक्टूबर को मनाई जाती है.

ओम पुरी का जीवन इस बात की मिसाल है कि किसी कलाकार की पहचान सिर्फ उसके चेहरे या शुरुआती हालात से तय नहीं होती. चाय की दुकान पर काम करने वाला वह लड़का आगे चलकर हिंदुस्तानीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली अभिनेताओं में शामिल हुआ. उसने भाषा की झिझक, आर्थिक मुश्किलों और बदलते फिल्मी माहौल के बीच अपनी जगह बनाई.

उनकी जिंदगी में उपलब्धियां थीं, विवाद थे और ऐसे कई किस्से थे, जो उन्हें एक साधारण फिल्मी सितारे से अलग बनाते हैं. लेकिन अंत में ओम पुरी को याद किया जाता है तो उनकी सबसे बड़ी पहचान उनका अभिनय है, जिसने छोटे-बड़े हर तरह के किरदार को अपनी आवाज और चेहरा दिया.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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