रांची से सुनील चौधरी की रिपोर्ट
Jharkhand Industrial Policy, रांची: झारखंड प्रशासन ने झारखंड इंडस्ट्रियल एंड इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी-2026 (ड्राफ्ट) तैयार कर लिया है. नयी नीति का उद्देश्य राज्य में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करना और कम से कम 25 हजार नये रोजगार सृजित करना है. इसके लिए उद्योगों को पूंजी निवेश सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, एसजीएसटी रिइम्बर्समेंट, स्टांप ड्यूटी, पेटेंट, गुणवत्ता प्रमाणन और क्लस्टर विकास समेत कई वित्तीय व गैर-वित्तीय प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव किया गया है. नीति में खनिज आधारित उद्योगों के साथ टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, रक्षा, खाद्य प्रसंस्करण, मेडिकल डिवाइस, आईटी, एमएसएमई और निर्यात आधारित उद्योगों पर विशेष जोर दिया गया है.ड्राफ्ट को आठ व नौ जुलाई को होने वाले निवेशक सम्मेलन में रखा जायेगा. यह नीति नोटिफाई होने के बाद अगले पांच वर्षों तक के लिए लागू रहेगी.
निर्यातक राज्य बनाने की तैयारी
ड्राफ्ट नीति में झारखंड को देश का अग्रणी औद्योगिक एवं निर्यात केंद्र बनाने की परिकल्पना की गयी है. उद्योगों को सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से समयबद्ध स्वीकृति देने, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने तथा पिछड़े क्षेत्रों में अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का भी प्रावधान किया गया है. स्त्री, एससी, एसटी और दिव्यांग उद्यमियों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा. राज्य प्रशासन ने एमएसएमई, स्टार्टअप और एंकर यूनिट के विकास पर विशेष फोकस किया है, ताकि बड़े उद्योगों के साथ स्थानीय सप्लाई चेन भी मजबूत हो सके. नयी नीति में रांची, जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद, देवघर, संताल परगना, पलामू, गढ़वा, लोहरदगा, लातेहार समेत विभिन्न क्षेत्रों के लिए सेक्टर आधारित औद्योगिक विकास की रणनीति भी तय की गयी है. साथ ही ग्रीन टेक्नोलॉजी, नवीकरणीय ऊर्जा, एफडीआई, औद्योगिक पार्क, लॉजिस्टिक्स और कौशल विकास को भी प्राथमिकता दी गयी है.
पिछड़े जिलों में निवेश पर अतिरिक्त सब्सिडी
प्रशासन ने निवेश के लिए तीन जोन में बांटा है. जोन-1 में रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, रामगढ़ है. जहां अतिरिक्त सब्सिडी नहीं मिलेगी. जोन-2 में हजारीबाग, गिरिडीह, कोडरमा, खूंटी, सरायकेला-खरसावां व देवघर हैं, जहां तीन प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी. तीसरे जोन में शेष जिलों को रखा गया है जहां पांच प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी.
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तकनीकी संस्थानों को 30 करोड़ तक की सब्सिडी
राज्य में इंजीनियरिंग व तकनीकी संस्थानों को 30 करोड़ तक की सब्सिडी दी जायेगी. वहीं निजी विश्वविद्यालयों को स्थापित करने पर नैक ग्रेड के आधार पर पांच से 12 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दी जायेगी.वहीं नर्सिंग कॉलेज से लेकर मल्टी सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल स्थापना एक करोड़ रुपये से लेकर 10 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान है.
नयी औद्योगिक नीति-2026 के प्रमुख प्रावधान
- एक लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य.
कम से कम 25 हजार नए रोजगार सृजित करने का लक्ष्य. - एमएसएमई, बड़े, मेगा और अल्ट्रा मेगा उद्योगों के लिए अलग-अलग प्रोत्साहन.
पिछड़े जिलों में अतिरिक्त पूंजी निवेश सब्सिडी. - स्त्री, एससी, एसटी और दिव्यांग उद्यमियों को अतिरिक्त पांच प्रतिशत लाभ.
सिंगल विंडो से समयबद्ध सभी स्वीकृतियां. - स्थानीय उत्पादों और स्थानीय उद्योगों को प्रशासनी खरीद में प्राथमिकता.
ग्रीन टेक्नोलॉजी, कार्बन ट्रेडिंग और पर्यावरण अनुकूल उद्योगों को बढ़ावा. - एफडीआई, निर्यात और वैल्यू एडिशन पर विशेष फोकस.
मेडिकल कॉलेज, निजी विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज और अस्पतालों को भी उद्योग का दर्जा देकर प्रोत्साहन. - किस पर कितनी सब्सिडी
एमएसएमई पूंजी निवेश सब्सिडी (सीपीआइएस) : फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट का 20%, अधिकतम 15 करोड़ रुपये. - गैर-एमएसएमई उद्योग : फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट का 25%, अधिकतम 30 करोड़ रुपये.
स्त्री/एससी/एसटी/दिव्यांग उद्यमी : अतिरिक्त 5% लाभ, अधिकतम 5 करोड़ रुपये. - जोन-2 जिले : अतिरिक्त 3%, अधिकतम 3 करोड़ रुपये.
जोन-3 जिले : अतिरिक्त 5% , अधिकतम 5 करोड़ रुपये. - ब्याज सब्सिडी : ऋण पर 5% प्रतिवर्ष, पांच वर्ष तक.
माइक्रो : अधिकतम 25 लाख रुपये. - स्मॉल : अधिकतम 1 करोड़ रुपये.
मीडियम : अधिकतम 2 करोड़ रुपये. - गैर-एमएसएमई : अधिकतम 5 करोड़ रुपये.
स्टांप ड्यूटी व रजिस्ट्रेशन शुल्क : 100% रिइम्बर्समेंट. - पेटेंट पंजीकरण : खर्च का 100%, अधिकतम 20 लाख रुपये प्रति पेटेंट.
क्वालिटी सर्टिफिकेशन : खर्च का 100%, अधिकतम 20 लाख रुपये. - क्लस्टर विकास : केंद्र प्रशासन की सहायता का अतिरिक्त 15% अनुदान.
एंकर यूनिट (125 करोड़ से अधिक निवेश पर) : अतिरिक्त 5% , अधिकतम 5 करोड़ रुपये. - एसजीएसटी प्रोत्साहन
एमएसएमई : 100% नेट एसजीएसटी, 5 वर्ष. - बड़े उद्योग : 100% नेट एसजीएसटी, 7 वर्ष.
मेगा उद्योग : 100% नेट एसजीएसटी, 9 वर्ष. - अल्ट्रा मेगा उद्योग : 75% नेट एसजीएसटी, 12 वर्ष.
सभी मामलों में अधिकतम सीमा फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट के 200% तक.
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