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डिजिटल अरेस्ट से ऑनलाइन फ्रॉड तक: साइबर अपराध पर साथ आए 91 देश, UN की संधि से क्या बदलेगा

ऑनलाइन ठगी, डेटा चोरी, हैकिंग और इंटरनेट के जरिए होने वाले दूसरे अपराध किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं. अपराधी एक देश में बैठकर दूसरे देश के व्यक्ति या कंपनी को निशाना बना सकते हैं और डिजिटल सबूत किसी तीसरे देश में मौजूद सर्वर पर मिल सकता है. ऐसे मामलों में अलग-अलग देशों की कानून व्यवस्था के बीच तालमेल बड़ी चुनौती होती है.

इसी चुनौती से निपटने के लिए हिंदुस्तान ने संयुक्त राष्ट्र के साइबर अपराध कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए हैं. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान इस कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए और उन्होंने इसे सुरक्षित डिजिटल भविष्य के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने वाला कदम बताया.

समझते हैं कि UN कन्वेंशन क्या है और हिंदुस्तान डिजिटल भविष्य के लिए यह कितना कारगर है? और इसका आप पर क्या असर होगा ?

UN साइबर क्राइम कन्वेंशन है क्या?

  • संयुक्त राष्ट्र का यह कन्वेंशन साइबर अपराध से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग का एक साझा कानूनी ढांचा तैयार करता है.
  • करीब पांच साल चली बातचीत के बाद तैयार हुआ यह पहला व्यापक वैश्विक साइबर अपराध कन्वेंशन है. जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 2024 में मंजूर किया था.
  • इसका मकसद केवल हैकिंग जैसे अपराधों से निपटना नहीं है, बल्कि डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करके किए जाने वाले गंभीर अपराधों की जांच में दुनिया के देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है.

हिंदुस्तान ने हस्ताक्षर किए, इसका क्या मतलब हुआ?

  • हिंदुस्तान के हस्ताक्षर करने का मतलब यह नहीं है कि कन्वेंशन हिंदुस्तान में तुरंत लागू हो गया है. संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 25 सितंबर 2026 तक यह कन्वेंशन अभी लागू नहीं हुआ है.
  • इसके लिए कम से कम 40 देशों को अनुसमर्थन, स्वीकृति, मंजूरी या शामिल होने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इसके बाद 90 दिन में कन्वेंशन प्रभावी होगा.
  • यानी हिंदुस्तान का मौजूदा कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस समझौते से जुड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण औपचारिक कदम है, लेकिन इसका पूरा कानूनी असर आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा.

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साइबर अपराध की जांच में क्या बदलेगा?

इसे उदाहरण से समझते हैं…

  • मान लीजिए हिंदुस्तान में किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी हुई. ठगी करने वाला किसी दूसरे देश(पाकिस्तान) में बैठा है और ठगी का पैसा किसी तीसरे देश (अमेरिका) में मौजूद खाते में चला गया.
  • ऐसे मामले में हिंदुस्तानीय जांच एजेंसियों को पाकिस्तान और अमेरिका से जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक सबूत हासिल करने की जरूरत पड़ सकती है.
  • कन्वेंशन का एक बड़ा उद्देश्य ऐसे ही मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आसान बनाना है. इसमें गंभीर अपराधों से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सबूत साझा करने के लिए सहयोग का ढांचा बनाया गया है.
  • इससे अलग-अलग देशों की एजेंसियों के बीच जांच से जुड़ी जानकारी हासिल करने की प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है.

आम लोगों के लिए इसका मतलब क्या है?

  • आम इंटरनेट यूजर के लिए इसका सबसे बड़ा मतलब सीधे तौर पर कोई नया नियम लागू होना नहीं है. इसका असर ज्यादातर पर्दे के पीछे होने वाली जांच और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की व्यवस्था में दिखाई देगा.
  • ऑनलाइन ठगी, फर्जी पहचान, डिजिटल चोरी या दूसरे गंभीर साइबर अपराधों में अगर अपराधी और पीड़ित अलग-अलग देशों में हैं, तो जांच एजेंसियों को डिजिटल सबूत जुटाने की जरूरत होती है. कन्वेंशन ऐसे मामलों में देशों के बीच सहयोग मजबूत करने का आधार देता है.
  • संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, कन्वेंशन साइबर अपराध की रोकथाम और जांच के साथ-साथ पीड़ितों की सुरक्षा, तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण पर भी जोर देता है.

क्या इससे ऑनलाइन ठगी तुरंत बंद हो जाएगी?

  • नहीं, यह समझना जरूरी है कि इस तरह का कोई अंतरराष्ट्रीय समझौता अपने आप साइबर ठगी खत्म नहीं कर सकता.
  • अपराध रोकने के लिए मजबूत कानून, पुलिस और जांच एजेंसियों की क्षमता, डिजिटल फोरेंसिक व्यवस्था और लोगों में साइबर सुरक्षा की जागरूकता भी जरूरी है. कन्वेंशन का फायदा खास तौर पर उन मामलों में हो सकता है जहां अपराध की कड़ी कई देशों से जुड़ी हो.
  • हालांकि इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अलग-अलग देश इसे अपनी घरेलू कानूनी व्यवस्था के साथ किस तरह लागू करते हैं.

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आगे की प्रक्रिया क्या होगी?

संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड के अनुसार, कन्वेंशन पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया 2025 में शुरू हुई थी और देशों के लिए न्यूयॉर्क में 31 दिसंबर 2026 तक हस्ताक्षर का रास्ता खुला है. 25 सितंबर 2026 तक 91 हस्ताक्षर और तीन पक्षकार दर्ज थे, लेकिन कन्वेंशन अभी प्रभावी नहीं हुआ था. हिंदुस्तान के हस्ताक्षर के बाद अगला महत्वपूर्ण सवाल इसके अनुसमर्थन और घरेलू स्तर पर लागू किए जाने की प्रक्रिया का होगा. 

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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