संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में हिंदुस्तान पर, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा लगाए गए आरोप का हिंदुस्तान ने राइट ऑफ रिप्लाई के तहत जवाब दिया. UN में हिंदुस्तान के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने हिंदुस्तान की ओर से आतंकवाद, धार्मिक असहिष्णुता, लोकतांत्रिक अधिकारों और कश्मीर जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान के दावों का जवाब दिया. इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान की मौजूदा प्रशासन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ‘फॉर्म-47 प्रशासन’ शब्द का भी जिक्र किया.
ऐसे में सवाल है कि आखिर फॉर्म-47 क्या है और पाकिस्तान की नेतृत्व में यह इतना चर्चित क्यों है?
क्या है फॉर्म-47?
- पाकिस्तान के चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक फॉर्म-47 किसी निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव परिणाम का अंतिम समेकित विवरण यानी फाइनल रिपोर्ट होता है.
- इसे समझने के लिए पहले पाकिस्तान की चुनावी प्रक्रिया को समझना जरूरी है. इसकी शुरुआत होती है फॉर्म -45 से. इसमें किस बूथ पर किस उम्मीदवार को कितने वोट मिले, इसका रिकॉर्ड रहता है.
- इसके बाद एक निर्वाचन क्षेत्र के अलग-अलग मतदान केंद्रों से मिले आंकड़ों को एक साथ जोड़कर फॉर्म-47 तैयार किया जाता है.इसे निर्वाचन क्षेत्र का अंतिम समेकित परिणाम कहा जाता है, यानी की उस निर्वाचन क्षेत्र में कुल कितने मतदान हुए.
- इसके बाद चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ती है और अंतिम परिणाम से जुड़े दूसरे दस्तावेज तैयार किए जाते हैं. जिसमें फॉर्म-48 और फॉर्म-49 जैसे दस्तावेज भी शामिल है.
यानी फॉर्म-47 अपने आप में कोई विवादित या गैरकानूनी दस्तावेज नहीं है. विवाद इसके इस्तेमाल को लेकर लगाए गए नेतृत्वक आरोपों से जुड़ा है.
फॉर्म-47 को लेकर क्या है विवाद
- पाकिस्तान में 8 फरवरी 2024 को हुए आम चुनाव के बाद कई नेतृत्वक दलों, खासकर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ(PTI) के नेताओं ने चुनाव परिणामों में गड़बड़ी के आरोप लगाए.
- आरोप ये लगाया गया कि मतदान केंद्रों पर तैयार किए गए फॉर्म-45 और बाद में जारी फॉर्म-47 के आंकड़ों में कई जगह अंतर था और इसी प्रक्रिया के जरिए नतीजों को प्रभावित किया गया.
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शहबाज शरीफ प्रशासन का क्या है फॉर्म-47 से कनेक्शन
- 2024 के चुनाव के बाद PTI और पाकिस्तान के कुछ विपक्षी नेताओं ने शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली गठबंधन प्रशासन को ‘फॉर्म-47 प्रशासन’ कहना शुरू किया.
- उनका आरोप है कि चुनाव में उनके समर्थित उम्मीदवारों को मिले जनादेश को नतीजों के अंतिम संकलन के दौरान बदला गया और इसी वजह से मौजूदा प्रशासन सत्ता में आई.यह आरोप आज भी लगया जाता है.
- यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र में फॉर्म-47 का जिक्र होने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर पाकिस्तान की चुनावी नेतृत्व और 2024 के आम चुनाव से जुड़े विवादों के केंद्र में है.
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