पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों के 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से हिंदुस्तानीय शेयर बाजार में लाल निशान का सिलसिला जारी है. बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सूचकांक दबाव में आ गए.
शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 456.78 अंक (0.60%) गिरकर 75,120.80 पर आ गया. वहीं, एनएससी निफ्टी 50 (NSE Nifty 50) भी 119.65 अंक (0.51%) टूटकर 23,515.45 के स्तर पर आ गया.
बाजार में गिरावट की क्या है बड़ी वजह?
जिओजित इन्वेस्टमेंट्स (Geojit Investments) के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि इस समय हिंदुस्तानीय बाजार दो बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है:
- महंगा कच्चा तेल: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से ब्रेंट क्रूड $100 के करीब है, जो सीधे तौर पर हिंदुस्तानीय वित्तीय स्थिति पर दबाव डाल रहा है.
- IPO बाजार का बुखार: दूसरा और सबसे बड़ा कारण आईपीओ (IPO) मार्केट की बूम है. यह द्वितीयक (Secondary) बाजार से बड़ी मात्रा में नकदी (Liquidity) खींच रहा है, जिससे निफ्टी में लगातार गिरावट आ रही है.
“जून से अब तक आईपीओ से मिलने वाला लिस्टिंग गेन औसतन 22% तक बढ़ गया है. इसी वजह से रिटेल और इंस्टीट्यूशनल (संस्थागत) दोनों तरह के निवेशक आईपीओ में पैसा लगा रहे हैं. यह स्वाभाविक भी है क्योंकि इस साल अब तक (YTD) निफ्टी का रिटर्न करीब 9.5% माइनस में रहा है.” — वी के विजयकुमार
कमोडिटी और ग्लोबल मार्केट का क्या है हाल?
वैश्विक बाजारों से मिले-जुले और सतर्क संकेत मिल रहे हैं. एक तरफ जहां कमोडिटीज में तेजी दर्ज की गई है, वहीं अमेरिकी बाजार में सुस्ती रही.
| संपत्ति / सूचकांक | चाल / बदलाव | नया स्तर |
| ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) | +$1.40 (+1.43%) | $99.32 प्रति बैरल |
| WTI क्रूड ऑयल | +$1.23 (+1.33%) | $94.26 प्रति बैरल |
| सोना (Gold) | +$22.06 (+0.51%) | $4,377.86 |
| डाउ जोन्स फ्यूचर्स (Dow Futures) | -30.19 अंक (-0.06%) | 52,755.88 |
| S&P 500 | -45.08 अंक (-0.58%) | 7,673.52 |
| नैस्डैक (Nasdaq) | -85.58 अंक (-0.32%) | 26,421.41 |
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भी बड़ा रुझान आईपीओ की तरफ दिखा है. FIIs ने इस साल सेकेंडरी मार्केट में 2,84,000 करोड़ रुपये की बिकवाली की है, लेकिन आईपीओ बाजार में करीब 36,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है.
इस माहौल में निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि आईपीओ की होड़ में कंपनियां अपनी वैल्यूएशन बढ़ा रही हैं, इसलिए आंख बंद करके पैसा लगाने से बचना चाहिए.
- चुनिंदा आईपीओ चुनें: केवल उन्हीं आईपीओ में दांव लगाएं जो सही दाम पर उपलब्ध हों और जिनका बिजनेस मॉडल मजबूत हो.
- लार्ज-कैप शेयरों पर ध्यान दें: आईपीओ के पीछे भागने के बजाय इस समय अच्छी और वाजिब कीमत पर मिल रहे ग्रोथ सेक्टर्स के लार्ज-कैप (बड़ी कंपनियों के) शेयरों में धीरे-धीरे खरीदारी करें.
- धैर्य रखें: समझदारी और धैर्य से काम लें, क्योंकि बिना सोचे-समझे महंगे आईपीओ में पैसा लगाने पर वे इश्यू प्राइस से नीचे गिर सकते हैं.
आगे कैसा रहेगा निफ्टी का रुख?
एक्सिस डायरेक्ट (Axis Direct) के रिसर्च हेड राजेश पालविया के अनुसार, जब तक निफ्टी 23,800 के नीचे है, तब तक बाजार का रुझान नाजुक बना रहेगा.
- अहम सपोर्ट स्तर: पहला सपोर्ट 23,500–23,450 के पास है. अगर यह टूटता है तो अगला सपोर्ट 23,300 पर रहेगा.
- रुकावट (Resistance) का दायरा: 23,800–23,850 के बीच पहला रेजिस्टेंस है. बाजार में सुधार तभी माना जाएगा जब निफ्टी मजबूती से 24,000 के पार निकल जाए.
फिलहाल शेयर बाजार की अगली चाल कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के हालात पर निर्भर करेगी. यदि वहां थोड़ी शांति बनती है, तो इक्विटी मार्केट में स्थिरता और सुधार आ सकता है.
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