रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
Jharkhand High Court, रांची : झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की एकल पीठ ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कद्दावर नेता रहे निर्मल महतो की हत्या के मामले में उम्रकैद काट रहे नरेंद्र सिंह उर्फ पंडित की समय पूर्व रिहाई को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य सजा समीक्षा बोर्ड के 28 मार्च 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें नरेंद्र सिंह की रिहाई की अर्जी को खारिज कर दिया गया था. हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि बोर्ड ने राज्य प्रशासन की रिमिशन नीति के मानकों पर गौर किए बिना, केवल अपराध की प्रकृति को आधार बनाकर आवेदन खारिज कर दिया, जो कानूनन सही नहीं है. अदालत ने अब इस मामले को वापस बोर्ड के पास भेजते हुए तीन महीने के भीतर नए सिरे से फैसला लेने का निर्देश दिया है.
केवल अपराध की प्रकृति को आधार बनाना गलत
अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि सजा समीक्षा बोर्ड ने नरेंद्र सिंह की रिहाई को यह कहते हुए नामंजूर किया था कि वह एक बेहद लोकप्रिय जनप्रतिनिधि की नेतृत्वक हत्या का दोषी है और उसे छोड़ने से समाज में गलत संदेश जाएगा. इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य प्रशासन की 26 मई 2011 की नीति के तहत समय पूर्व रिहाई के लिए बोर्ड को पांच प्रमुख मानकों पर विचार करना अनिवार्य है. इन मानकों में अपराध का सामाजिक प्रभाव, भविष्य में दोबारा अपराध करने की संभावना, अपराध की पुनरावृत्ति की कम आशंका, आगे हिरासत में रखने की व्यावहारिक आवश्यकता और दोषी की वर्तमान सामाजिक-पारिवारिक स्थिति का मूल्यांकन शामिल है. अदालत ने यह भी नोट किया कि जेल के प्रोबेशन अधिकारी की रिपोर्ट नरेंद्र सिंह की रिहाई के पक्ष में थी, लेकिन बोर्ड ने इन सभी जरूरी मानकों की अनदेखी कर केवल नेतृत्वक हत्या होने के आधार पर फैसला सुना दिया था.
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तेईस साल से जेल में बंद है दोषी
नरेंद्र सिंह उर्फ पंडित ने क्रिमिनल रिट याचिका दायर कर रिहाई की गुहार लगाई थी. उसने अदालत को बताया कि वह तेईस वर्ष की वास्तविक कैद और रिमिशन (छूट) मिलाकर कुल उनतीस वर्ष की सजा पूरी कर चुका है. इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने भी तीन जुलाई 2023 को राज्य प्रशासन को उसकी रिमिशन याचिका पर कानून के मुताबिक जल्द निर्णय लेने का आदेश दिया था. जमशेदपुर के चमरिया टाटा स्टील गेस्ट हाउस के पास आठ अगस्त 1987 को निर्मल महतो की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले की जांच अठारह नवंबर 1987 को सीबीआई को सौंपी गई थी. इसके बाद वर्ष 2001 में धीरेंद्र सिंह और 2003 में नरेंद्र सिंह उर्फ पंडित की गिरफ्तारी हुई थी. बिष्टुपुर थाने में पूर्व सांसद सूरज मंडल की सूचना पर केस दर्ज किया गया था. इस हत्याकांड में नरेंद्र सिंह सहित तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जिनमें से एक दोषी वीरेंद्र सिंह की जेल में सजा काटने के दौरान मौत हो चुकी है.
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