कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को (1 मई) उन्हें अग्रिम जमानत दे दी. यह मामला असम पुलिस द्वारा दर्ज मानहानि और जालसाजी केस से जुड़ा है, जो असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान की शिकायत पर दर्ज हुआ था.
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि इस मामले में दोनों पक्षों की तरफ से आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए हैं. कोर्ट ने साफ किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाली व्यक्तिगत आजादी को खतरे में नहीं डाला जा सकता. इसे हर हाल में सुरक्षित रखा जाना चाहिए.
#WATCH | Delhi | On Supreme Court granting anticipatory bail to Congress leader Pawan Khera, Congress leader Pawan Khera says, “The truth has won and justice prevailed…The Chief Minister (Himanta Biswa Sarma) should have kept the facts forward in connection with his wife, but… pic.twitter.com/ibtU8Lhiy6
— ANI (@ANI) May 1, 2026
सरमा को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का कोई हक नहीं : कांग्रेस
खेड़ा को अग्रिम जमानत मिलने के बाद कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि सच की जीत हुई है और न्याय मिला है. उन्होंने सीएम सरमा पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपनी पत्नी से जुड़े मामले में तथ्य सामने रखने चाहिए थे, लेकिन कांग्रेस को बदनाम करने के लिए दिल्ली और हैदराबाद तक कार्रवाई करवाई गई. सरमा को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है.
Supreme Court grants anticipatory bail to Congress leader Pawan Khera in forgery and defamation case linked to the allegedly making false allegations against the wife of Assam CM Himanta Biswa Sarma, Riniki Bhuyan Sharma. pic.twitter.com/tvqYgeGpEh
— ANI (@ANI) May 1, 2026
इससे पहले 30 अप्रैल को खेड़ा ने सरमा की कथित टिप्पणियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में उनकी तुलना ‘‘संवैधानिक काउबॉय या रैम्बो’’ (बाहुबली) से की थी. कोर्ट ने खेड़ा की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसमें उन्होंने सरमा की पत्नी पर कई पासपोर्ट और विदेश में अघोषित संपत्तियां होने के आरोपों से जुड़े मामले में अग्रिम जमानत मांगी थी.
वकील अभिषेक सिंघवी ने कोर्ट में क्या कहा
खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए एस चंदुरकर की पीठ से वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने कहा था कि मुख्यमंत्री कांग्रेस नेता के खिलाफ कई आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहे हैं. सरमा की कथित अभद्र टिप्पणियों का जिक्र करते हुए, सिंघवी ने आशंका जताई कि अगर खेड़ा को इस मामले में गिरफ्तार होने दिया गया तो उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया जाएगा.
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सिंघवी ने कहा कि डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने यदि यह कल्पना की होती कि कोई संवैधानिक पदाधिकारी ‘‘संवैधानिक काउबॉय’’ या ‘‘संवैधानिक रैम्बो’’ की तरह बोलेगा, तो वे बेचैन हो उठते. उन्होंने असम के मुख्यमंत्री का जिक्र करते हुए इस मामले को ‘‘अभूतपूर्व’’ करार दिया. सिंघवी ने कहा कि सरमा ने धमकी दी है कि खेड़ा को अपना शेष जीवन असम की जेल में बिताना पड़ेगा, जबकि मामले का मूल आधार मानहानि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के आरोप से जुड़ा है.
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