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पापा ने कहा था, इतने बड़े सपने मत देखो, बिहार के छोटे से गांव की बेटी ने महज 21 साल की उम्र में अधिकारी बन दिखाया, पढ़िए पूरी कहानी

Success Story: बिहार के बेगूसराय जिले के बखरी जैसे छोटे से गांव से निकलकर मुस्कान कुमारी ने वह कर दिखाया, जिसका सपना भी वहां बहुत कम लोग देख पाते हैं. गांव की साधारण बेटी ने अपने हौसले, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर 70वीं BPSC परीक्षा में 80वीं रैंक हासिल की. उन्हें असिस्टेंट प्लानिंग ऑफिसर के पद के लिए चुना गया.

पिता ने कहा था- इतने बड़े सपने मत देखो

मुस्कान बताती हैं कि जब उन्होंने अपने पिता से कहा कि वह सिविल सर्वेंट बनना चाहती हैं, तो पिता ने उन्हें समझाया कि यह बहुत कठिन रास्ता है. इतने बड़े सपने मत देखो. उनके पिता की एक छोटी-सी दवा की दुकान है. परिवार में आज तक कोई प्रशासनी नौकरी में नहीं रहा. ऐसे माहौल में सिविल सेवा का सपना बहुत बड़ा माना जाता था. लेकिन मुस्कान ने हार नहीं मानी. उन्होंने तय कर लिया कि परिस्थितियां नहीं, उनकी मेहनत उनका भविष्य तय करेगी.

बचपन से पढ़ाई ही बनी ताकत

मुस्कान को बचपन से ही पढ़ाई का शौक था. उन्होंने हर पड़ाव पर खुद को साबित किया. 10वीं और 12वीं की पढ़ाई बिहार बोर्ड से की और दोनों परीक्षाओं में जिला टॉपर रहीं. इसके बाद 2023 में पटना यूनिवर्सिटी से हिंदी मीडियम में ग्रेजुएशन किया और वहां भी अपने डिपार्टमेंट की टॉपर बनीं.

आर्थिक तंगी के बीच खुद से की तैयारी

घर की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी. इसलिए उन्होंने किसी कोचिंग या महंगे गाइडेंस का सहारा नहीं लिया. उन्होंने सेल्फ स्टडी का रास्ता चुना. किताबें खुद पढ़ीं, नोट्स खुद बनाए और अपनी स्ट्रेटजी भी खुद तैयार की.

खुद पर था शक, लेकिन मेहनत पर पूरा भरोसा

मुस्कान ने बताया कि तैयारी के दौरान कई बार उन्हें खुद पर शक हुआ. कभी-कभी ऐसा लगा कि नहीं हो पाएगा. FOMO भी महसूस हुआ कि कहीं कुछ छूट न जाए. लेकिन एक चीज कभी नहीं बदली- अपनी मेहनत पर उनका भरोसा. उन्होंने पूरे समर्पण के साथ घंटों पढ़ाई की और अपना 100 प्रतिशत दिया.

पहले प्रयास में मिली सफलता, लेकिन नहीं हुआ चयन

69वीं BPSC उनका फर्स्ट अटेम्प्ट था. उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू, तीनों चरण सफलतापूर्वक पास किए. लेकिन कुछ कारणवश फाइनल सेलेक्शन नहीं हो सका. यह झटका बड़ा था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी.

मुस्कान की तस्वीर

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वही रणनीति, दूसरा प्रयास और शानदार सफलता

मुस्कान ने दूसरे प्रयास में कोई नई रणनीति नहीं बनाई. उन्होंने वही किताबें पढ़ीं, वही नोट्स दोहराए और उसी आत्मविश्वास के साथ तैयारी जारी रखी. इस मेहनत का परिणाम 70वीं BPSC में मिला. सिर्फ 21 साल की उम्र में उन्होंने 80वीं रैंक हासिल कर असिस्टेंट प्लानिंग ऑफिसर का पद प्राप्त किया. हालांकि, कम उम्र के कारण इस बार भी उनका SDM बनने का सपना पूरा नहीं हो सका.

युवाओं के लिए बनीं मिसाल

मुस्कान की कहानी बताती है कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती. छोटे गांव, सीमित संसाधन और आर्थिक कठिनाइयां भी उस व्यक्ति का रास्ता नहीं रोक सकतीं, जो खुद पर विश्वास रखता है. उनकी सफलता आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो बड़े सपने तो देखते हैं, लेकिन उन्हें पूरा करने से पहले ही डर जाते हैं.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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