खास बातें
Mosharraf Hossain Resigns: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अंदरूनी संकट और गहरा गया है. पार्टी में मची भगदड़ के बीच उत्तर दिनाजपुर जिले के ईटाहार से टीएमसी विधायक मुशर्रफ हुसैन (Mosharraf Hossain) ने बड़ा धमाका कर दिया है. अचानक उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के अल्पसंख्यक सेल (Minority Cell) के राज्य अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर सबको चौंका दिया.
प्रशासनी चिट्ठी नहीं मिली तो मौखिक ही सही, पद छोड़ रहा हूं
अपने इस कड़े फैसले की वजह भी उन्होंने बता दी है. विधायक ने संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा- कुछ दिनों पहले मुझे मीडिया की समाचारों से पता चला था कि मुझे टीएमसी अल्पसंख्यक सेल का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. लेकिन इस संबंध में मुझे पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक पत्र नहीं मिला. इसलिए, जब नियुक्ति मौखिक थी, तो मैं भी मौखिक रूप से ही इस पद को छोड़ने की घोषणा कर रहा हूं.
ममता-अभिषेक के थे बेहद खास, 30 साल की उम्र में मिली थी बड़ी कमान
मुशर्रफ हुसैन का इस्तीफा टीएमसी के लिए बड़ा झटका है. वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में प्रख्यात नेता अमल आचार्य का टिकट काटकर ममता बनर्जी ने मुशर्रफ मैदान में उतारा था. चुनाव जीतने के बाद वे ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बेहद करीब आ गये थे. यही वजह थी कि कई वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर महज 30 साल की उम्र में उन्हें अल्पसंख्यक सेल का अध्यक्ष और अल्पसंख्यक वित्त निगम का चेयरमैन बनाया गया था.
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Mosharraf Hossain Resigns: बागी नेता रीतब्रत के खेमे में जाने की अटकलें
अब सबसे बड़ा सस्पेंस मुशर्रफ हुसैन के अगले कदम को लेकर है. सूत्रों का दावा है कि सोमवार को विधानसभा के बजट सत्र (Budget Session) के दौरान वे आधिकारिक तौर पर पाला बदल सकते हैं. वे टीएमसी के पूर्व राज्यसभा सांसद और अब विधानसभा में बागी गुट के प्रमुख चेहरा रीतब्रत बंद्योपाध्याय (Ritabrata Banerjee) के खेमे में शामिल हो जायेंगे, जो वर्तमान में शुभेंदु अधिकारी की नयी व्यवस्था के करीब माने जाते हैं.
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अल्पसंख्यक वोट बैंक में सेंधमारी, टीएमसी के लिए बड़ी मुसीबत
पश्चिम बंगाल की नेतृत्व में अल्पसंख्यक मतदाताओं की भूमिका हमेशा से निर्णायक रही है. चुनाव के बाद जिस तेजी से टीएमसी के बड़े मुस्लिम चेहरे और सांसद-विधायक बागी खेमे या एनसीपीआई (NCPI) में शामिल हो रहे हैं, उसने ममता ब्रिगेड की नींद उड़ा दी है.
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