Bihar Land Measurement Fees: बिहार प्रशासन ने जमीन की मापी कराने वाले लोगों को बड़ा झटका दिया है. अब शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में जमीन नपवाने की फीस को करीब दो गुना बढ़ा दिया गया है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई में सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस नए नियम को हरी झंडी दे दी गई. इस बैठक में कुल 25 अहम एजेंडों पर मुहर लगी, जिसकी पूरी जानकारी कैबिनेट सचिवालय के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी.
अब कितनी लगेगी फीस? सामान्य और तत्काल मापी का नया रेट समझें
नए नियमों के मुताबिक, अगर आप नगर निगम, नगर परिषद या नगर पंचायत वाले शहरी इलाके में अपनी जमीन की सामान्य मापी करवाना चाहते हैं, तो अब आपको प्रति खेसरा 2 हजार रुपये देने होंगे. इसकी अधिकतम सीमा 8 हजार रुपये तय की गई है. ग्रामीण इलाकों में सामान्य मापी के लिए अब प्रति खेसरा 500 रुपये की जगह 1 हजार रुपये लगेंगे और इसके लिए ज्यादा से ज्यादा 4 हजार रुपये की फीस तय की गई है. इससे पहले शहरी इलाकों में यह फीस केवल 1 हजार और ग्रामीण क्षेत्रों में महज 500 रुपये थी.
अगर आपको अपनी जमीन की तुरंत नापी करानी है, यानी तत्काल मापी का विकल्प चुनना है, तो जेब और ज्यादा ढीली करनी होगी. शहरी क्षेत्रों में तत्काल मापी के लिए प्रति खेसरा 4 हजार रुपये और अधिकतम 16 हजार रुपये का शुल्क लगेगा. देहाती या ग्रामीण इलाकों में तत्काल मापी का नया रेट प्रति खेसरा 2 हजार रुपये और अधिकतम 8 हजार रुपये तय कर दिया गया है.
पुरानी गाड़ियां कबाड़ करने पर टैक्स में छूट, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की वापसी
कैबिनेट की बैठक में प्रदूषण कम करने और नई गाड़ियों की बिक्री बढ़ाने के लिए भी कदम उठाया गया है. राज्य में 15 साल पुराने गैर-प्रशासनी वाहनों को स्क्रैप करने की नीति जारी है. अब अगर आप अपनी पुरानी गाड़ी को रजिस्टर्ड स्क्रैपिंग सेंटर पर ले जाकर कबाड़ करवाते हैं, तो आपको एक सर्टिफिकेट मिलेगा. इस सर्टिफिकेट के दम पर जब आप कोई नई गाड़ी खरीदेंगे, तो आपको मोटर व्हीकल टैक्स में अच्छी-खासी छूट दी जाएगी.
इसके साथ ही, बिहार में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की दोबारा वापसी हो रही है. रबी सीजन 2026-27 से इसे पूरे राज्य में लागू कर दिया जाएगा, जो साल 2018 से चल रही बिहार राज्य फसल सहायता योजना की जगह लेगी. इस नई व्यवस्था से बड़े और छोटे दोनों तरह के किसानों को फायदा होगा और फसल बर्बाद होने पर उन्हें खेती की लागत के बराबर मुआवजा सीधे उनके बैंक खातों में मिल सकेगा.
सासामूसा मिल के किसानों के बकाए को मंजूरी
ग्रामीण इलाकों में रहने वाले गरीब परिवारों के लिए प्रशासन 1 जुलाई 2026 से एक नई रोजगार गारंटी योजना शुरू करने जा रही है. इस योजना का नाम विकसित हिंदुस्तान-रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी विकसित हिंदुस्तान-जी राम जी रखा गया है. इसके तहत गांव के जो भी वयस्क लोग शारीरिक मजदूरी करना चाहते हैं, उन्हें प्रशासन एक साल में कम से कम 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देगी.
गोपालगंज में बंद पड़ी सासामूसा शुगर मिल को दोबारा शुरू करने की परमिशन दे दी गई है. गन्ना किसानों का पिछले कई सालों से रुका हुआ 42 करोड़ 99 लाख 9 हजार 95 रुपये का बकाया भुगतान भी प्रशासन करेगी. इससे इलाके में रोजगार के नए अवसर बनेंगे. मुंगेर के खड़गपुर में बनने वाली सिंधवारणी जलाशय योजना का काम दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और इसकी बजट राशि को 125 करोड़ से बढ़ाकर 196 करोड़ रुपये कर दिया गया है.
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निबंधन दफ्तर होंगे पूरी तरह पेपरलेस
शहरी विकास के तहत अमृत 2.0 योजना के जरिए बिहारशरीफ में एसटीपी प्लांट लगाने के लिए करीब 101 करोड़ रुपये पास किए गए हैं. हाजीपुर में पीने के पानी की समस्या दूर करने के लिए 131 करोड़ 88 लाख रुपये मंजूर हुए हैं, जिसके जरिए 19 हजार 436 घरों में पानी के नए कनेक्शन दिए जाएंगे. इसी तरह बेगूसराय में सीवरेज नेटवर्क के लिए 375 करोड़ 86 लाख और सहरसा में जलापूर्ति के लिए 127 करोड़ 45 लाख राशि स्वीकृत हुई है.
अब बिहार निबंधन नियमावली-2026 के तहत सभी रजिस्ट्री दफ्तरों को पूरी तरह डिजिटल यानी पेपरलेस बनाया जाएगा. देश में शुद्ध पेयजल के लिए जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केंद्र और राज्य प्रशासन के बीच समझौता होगा. पटना स्थित आईआईटी कैंपस में एक अत्याधुनिक रिसर्च पार्क बनाने के लिए राज्य प्रशासन ने अपनी तरफ से 305 करोड़ रुपये की भारी धनराशि को प्रशासनिक मंजूरी दे दी है.
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