खास बातें
Mamata Banerjee Challenge Ritabrata LoP Status: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य की नेतृत्व में मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अंदरूनी लड़ाई कोर्ट तक पहुंच गयी है. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) में एक याचिका दायर की. याचिका में पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी गयी है, जिसके तहत पार्टी के बागी गुट के नेता रीतब्रत बनर्जी को विधानसभा में आधिकारिक तौर पर नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) के रूप में मान्यता दी गयी है.
11 जून को होगी हाईकोर्ट में सुनवाई
कलकत्ता हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर सोमवार को काफी गहमागहमी देखी गयी. तृणमूल के वरिष्ठ वकील ने न्यायमूर्ति कृष्णा राव से केस की जल्द से जल्द सुनवाई की मांग की. जस्टिस कृष्णा राव ने मामले की गंभीरता और समय की कमी को देखते हुए कहा कि याचिका पर 11 जून को प्राथमिकता के आधार पर (Priority Basis) विस्तृत सुनवाई की जायेगी.
विधानसभा अध्यक्ष को बनाया मुख्य प्रतिवादी
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि इस पूरी कानूनी लड़ाई में सदन के अध्यक्ष (Speaker) को ही मुख्य प्रतिवादी (Main Respondent) बनाया गया है, क्योंकि उनके ही एक फैसले ने पार्टी के भीतर इस संवैधानिक संकट को जन्म दिया है.
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टीएमसी के 80 में 58 विधायकों ने किया विद्रोह
कानूनी लड़ाई का सियासी गणित और संख्या बल ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले आधिकारिक धड़े के लिए बेहद चिंताजनक और परेशान करने वाला है. विधानसभा चुनाव 2026 के बाद टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से रिकॉर्ड 58 विधायकों ने ममता बनर्जी के आधिकारिक आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए नेता प्रतिपक्ष पद के लिए बागी नेता रीतब्रत बनर्जी का समर्थन किया.
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Mamata Banerjee Challenge Ritabrata LoP Status: आधिकारिक उम्मीदवार हो गया खारिज
इन 58 विधायकों के संख्या बल के कारण ममता बनर्जी के वफादार और पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार शोभनदेब चट्टोपाध्याय के नाम को बागी गुट ने पूरी तरह से खारिज कर दिया. विधायकों के बहुमत के आधार पर विधानसभा अध्यक्ष ने रीतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दी थी, जिसे अब अदालत में घसीटा गया है.
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नयी विधानसभा में ममता बनर्जी की साख का सवाल
हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 294 सदस्यीय विधानसभा के भीतर सीटों का समीकरण पूरी तरह बदल चुका है. चुनाव में हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (BJP) ने 207 सीटों पर जीत दर्ज कर प्रशासन बनायी है. तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमटकर मुख्य विपक्षी दल बनी थी. इनमें से 58 अलग हो गये. यानी ममता बनर्जी के साथ अब मात्र 22 विधायक बचे हैं. 11 जून को अगर हाईकोर्ट ने टीएमसी के हक में फैसला नहीं दिया, तो ममता बनर्जी की नेतृत्वक साख दांव पर होगी.
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