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राज्यसभा चुनाव: बैजनाथ राम और परिमल नथवाणी ने मार ली बाजी, बिखर गया महागठबंधन का कुनबा

रांची से आनंद मोहन की रिपोर्ट

Rajya Sabha Election: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए गुरुवार 18 जून 2026 को हुए चुनाव के साथ पिछले करीब दो सप्ताह से जारी नेतृत्वक उठापटक और सस्पेंस पर विराम लग गया. कड़े मुकाबले के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैजनाथ राम और एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी ने जीत दर्ज की. इस परिणाम के साथ ही राज्य की नेतृत्व में महागठबंधन की एकजुटता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.

नतीजों ने बदल दिया नेतृत्वक समीकरण

81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में हुए मतदान में झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम को सबसे अधिक 31 वोट मिले और वह आसानी से राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे. दूसरी सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी ने जीत हासिल की. परिमल नथवानी को कुल 30 वोट प्राप्त हुए थे, लेकिन इनमें से दो मत रद्द कर दिए गए. यानी उन्हें कुल 28 वोट मिले. वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को 20 वोट मिले, जिनमें एक वोट अमान्य घोषित कर दिया गया. कुल 81 वोटों में से तीन मत रद्द हुए. इस तरह अंतिम गणना में बैजनाथ राम को 31 और परिमल नथवानी को 28 वैध वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार जीत से दूर रह गए.

परिमल नथवानी की जीत ने बढ़ाई महागठबंधन की मुश्किलें

राज्यसभा चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन के नेताओं द्वारा दोनों सीटों पर जीत का दावा किया जा रहा था. कांग्रेस और झामुमो के नेताओं का कहना था कि गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और क्रॉस वोटिंग की कोई संभावना नहीं है. लेकिन चुनाव परिणामों ने इन दावों की पोल खोल दी. परिमल नथवानी की जीत के बाद यह साफ हो गया कि महागठबंधन के भीतर कहीं न कहीं नेतृत्वक दरार मौजूद थी. यही वजह रही कि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा अपेक्षित समर्थन जुटाने में असफल रहे और दूसरी सीट उनके हाथ से निकल गई.

कौन हैं परिमल नथवानी

परिमल नथवानी देश के प्रमुख उद्योग समूह रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े हुए हैं और लंबे समय से झारखंड की नेतृत्व में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. वह लगातार दो बार झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं. उन्होंने वर्ष 2008 में पहली बार निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा का चुनाव जीता था. इसके बाद 2014 में भी उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल कर संसद के उच्च सदन में अपनी जगह बरकरार रखी. अब तीसरी बार उन्होंने राज्यसभा पहुंचने में सफलता प्राप्त की है.

शिक्षक से सांसद तक का सफर तय करने वाले बैजनाथ राम

झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम का नेतृत्वक सफर संघर्ष और कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. लातेहार के शहीद चौक स्थित धोबी मुहल्ला के निवासी बैजनाथ राम का जन्म वर्ष 1967 में लातेहार प्रखंड के परसही गांव में हुआ था. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त की और बाद में बालक उच्च विद्यालय, लातेहार से मैट्रिक और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद बनवारी साहू महाविद्यालय से नेतृत्वक शास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की. नेतृत्व में आने से पहले उन्होंने सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में लगभग तीन वर्षों तक शिक्षक के रूप में काम किया. लेकिन वर्ष 2000 में झारखंड राज्य गठन के बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर नेतृत्व को अपना पूर्णकालिक कार्यक्षेत्र बना लिया.

कई दलों का सफर तय कर पहुंचे राज्यसभा

बैजनाथ राम ने वर्ष 2000 में जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर पहली बार लातेहार विधानसभा सीट से जीत हासिल की और बाद में स्पोर्ट्स मंत्री, मद्य निषेध मंत्री तथा स्वास्थ्य मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले. वर्ष 2005 में वह भाजपा में शामिल हुए और शिक्षा मंत्री बने. हालांकि, बाद के वर्षों में नेतृत्वक परिस्थितियां बदलीं और टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने भाजपा छोड़कर झामुमो का दामन थाम लिया. अब झामुमो के उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा चुनाव जीतकर उन्होंने अपने लंबे नेतृत्वक अनुभव में एक और उपलब्धि जोड़ ली है.

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झारखंड की नेतृत्व में नए संकेत

राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने यह संकेत दे दिया है कि झारखंड की नेतृत्व में आने वाले दिनों में नए समीकरण बन सकते हैं. एक ओर बैजनाथ राम ने झामुमो के खाते में सीट बरकरार रखी, वहीं परिमल नथवानी की जीत ने महागठबंधन की एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आने वाले समय में इन परिणामों का असर राज्य की नेतृत्व और गठबंधन की रणनीति पर भी देखने को मिल सकता है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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