Hot News

June 18, 2026

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

अब अभिषेक बनर्जी की मौसी के घर पहुंची सीआईडी, ‘भड़काऊ बयान’ से जुड़े मामले में एक घंटे तक की पूछताछ

CID Raids Abhishek Banerjee Aunt Reena Gayen Residence: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान तृणमूल कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी द्वारा दिये गये कथित भड़काऊ बयान से संबंधित मामले की जांच के तहत सीआईडी की एक टीम बृहस्पतिवार को कोलकाता के कालीघाट इलाके में स्थित उनकी मौसी के घर पहुंची. अभिषेक के सोशल मीडिया से जुड़ी हैं अदिति गायेन राज्य पुलिस के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) की एक टीम लगभग एक घंटे तक हरीश चटर्जी स्ट्रीट पर स्थित बनर्जी की मौसी रीना गायेन के घर पर रही और लगभग 3 बजे वहां से चली गयी. सूत्रों ने बताया कि गायेन की बेटी अदिति, अभिषेक बनर्जी के सोशल मीडिया कार्यों से जुड़ी हैं और अक्सर पार्टी कार्यक्रमों में उनके साथ दिखाई देती हैं. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें ममता बनर्जी के घर के पास है मौसी का घर जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या उनकी इस मामले में कोई भूमिका थी. सीआईडी की टीम जिस घर पहुंची, वह कालीघाट में तृणमूल प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास से लगभग 250 मीटर की दूरी पर स्थित है. सीआईडी ने इस बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. इसे भी पढ़ें भड़काऊ बयानबाजी मामले में सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी से 6 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की अभिषेक बनर्जी के करीबी तृणमूल नेता मैदुल इस्लाम गिरफ्तार, आत्महत्या के लिए उकसाने का है आरोप The post अब अभिषेक बनर्जी की मौसी के घर पहुंची सीआईडी, ‘भड़काऊ बयान’ से जुड़े मामले में एक घंटे तक की पूछताछ appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

झारखंड राज्यसभा चुनाव: माले-राजद ने कांग्रेस प्रभारी के राजू के आरोप को किया खारिज

Jharkhand Rajya Sabha Election: झारखंड राज्यसभा चुनाव के परिणाम सामने आते ही गठबंधन में खटास बढ़ गयी है. कांग्रेस के प्रभारी के राजू ने आरोप लगाया है कि हमें झामुमो के चार वोट मिले, लेकिन राजद और माले ने क्रॉस वोटिंग की है. राजद-माले ने धोखा दिया है. राज्य में चल रहे गठबंधन की समीक्षा होगी. केंद्रीय नेतृत्व को रिपोर्ट भेजी जायेगी. राजद और माले ने कांग्रेस के प्रभारी के बयान को खारिज किया है. राजद की ओर से कहा गया है कि कांग्रेस अपने गिरेबां में झांके, राजद संघर्ष से उपजी पार्टी है. वहीं माले ने कहा कि कांग्रेस अपने ही विधायकों को इंटैक्ट नहीं रख सकी. छोटा दल देखकर बिना जांच पड़ताल के वाम दलों पर आरोप स्वीकार नहीं है. बड़े दलों पर आरोप की हिम्मत नहीं : अरूप माले विधायक अरुप चटर्जी ने कहा कि उनके दल के द्वारा कोई क्रॉस वोटिंग नहीं की गयी है. माले विधायकों ने इंडिया गठबंधन के निर्देशों के मुताबिक ही वोट किया है. क्रॉस वोटिंग किसने की है, इसकी जांच होनी चाहिए. श्री चटर्जी ने कहा कि कांग्रेस में बड़े दलों पर आरोप लगाने की हिम्मत नहीं है. कांग्रेस पार्टी को पहले अपने गिरेबां में झांक कर देखना चाहिए. मिथ्या आरोप लगाने से बचना चाहिए. जल्द ही माले इस विषय पर अपना पक्ष रखा जायेगा. खुद को इंटैक्ट नहीं रख सकी कांग्रेस : चंद्रदेव माले विधायक चंद्रदेव महतो ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी खुद को इंटैक्ट नहीं रख पायी. कांग्रेस का खुद के विधायकों पर नियंत्रण नहीं रहा. उन्होंने कहा कि माले के विधायकों ने लिये गये निर्णय के अनुसार ही वोट किया है. कांग्रेस पार्टी छोटा दल देख कर हम पर अनाप-शनाप आरोप लगा रही है. यह बिलकुल गलत है. बिना किसी तथ्य के गठबंधन के साथी संगठनों पर आरोप लगाना कहीं से भी उचित नहीं है. जब भी आते हैं, तो झोला भरकर जाते हैं राजू : संजय यादव उद्योग मंत्री सह राजद विधायक संजय प्रसाद यादव ने कांग्रेस के आरोप पर कहा कि राजद कभी किसी को धोखा नहीं देता. कांग्रेस को अपने गिरेबां में झांकना चाहिए. संजय यादव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रभारी के राजू जब भी आते हैं, तो झोला भरकर जाते हैं. कांग्रेस में प्रदीप यादव व अनूप सिंह का गुट है. किस गुट ने क्या डील किया, कौन जाने. यह तो जांच का विषय है कि किसने क्रॉस वोटिंग की है. मुझे तो शक है कि के राजू ही जानबूझ कर पोलिंग एजेंट बनकर कांग्रेस के विधायकों से ही तो कहीं क्रॉस वोटिंग नहीं करा ली. हम पूरी मजबूती के साथ हेमंत सोरेन प्रशासन के साथ खड़े थे और खड़े रहेंगे. के राजू अपने विधायकों की जांच करें. राजद संघर्ष की पार्टी है, बिकाऊ नहीं : संजय सिंह यादव हुसैनाबाद से राजद विधायक संजय सिंह यादव ने कहा कि राजद संघर्ष की पार्टी है. कभी फिरकापरस्तों से समझौता नहीं किया. के राजू को अपने गिरेबां में झांकना चाहिए. कांग्रेस की तरह राजद बिकाऊ पार्टी नहीं है. यदि ऐसा करना रहता, तो बाबूलाल मरांडी की प्रशासन के समय भी ऑफर मिला था, लेकिन हमने कभी समझौता नहीं किया. गठबंधन को हमने वोट किया. अब कांग्रेस के ही किस एमएलए ने डील करके क्रॉस वोटिंग की, यह तो के राजू ही बता सकते हैं. ये भी पढ़ें… कौन हैं कांग्रेस को पटखनी देने वाले परिमल नथवाणी? जानिए मुकेश अंबानी के ‘राइट हैंड’ की कहानी कौन हैं बैजनाथ राम, जिन्होंने झारखंड से जीता राज्यसभा चुनाव? The post झारखंड राज्यसभा चुनाव: माले-राजद ने कांग्रेस प्रभारी के राजू के आरोप को किया खारिज appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

झारखंड राज्यसभा चुनाव: जीत के बाद क्या बोले बैजनाथ राम और परिमल नथवाणी

Jharkhand Rajya Sabha Election: झारखंड में राज्यसभा चुनाव संपन्न हो गया. झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार बैजनाथ राम और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी ने जीत हासिल की. वहीं, कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा को करारी हार का सामना करना पड़ा. नथवाणी के पास एनडीए के 24 वोट थे. वहीं उन्हें इस आंकड़े से छह वोट अधिक मिले. हालांकि नथवाणी को मिले दो वोट अवैध हो गये. झामुमो के बैजनाथ राम 30 वोट के साथ आसानी से राज्यसभा पहुंच गये हैं. कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा महज 20 वोट में सिमट गये. प्रणव के खाते में मिला एक वोट अवैध बताया जा रहा है. झारखंड की आवाज को देश के मंच पर उठाऊंगा : बैजनाथ राज्यसभा चुनाव में जीत के बाद झामुमो प्रत्याशी बैजनाथ राम ने कहा कि झारखंड की आवाज को देश के मंच पर उठाऊंगा. उन्होंने कहा कि राज्य की जनता की आवाज वहां उठायेंगे. पार्टी के सिद्धांतों के प्रति मेरी आस्था है. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि पहली बार झारखंड से राज्यसभा के लिए किसी दलित प्रत्याशी को मौका मिला है. यह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ही देन है. झारखंड मेरे लिए नया नहीं, सेवा का फिर सौभाग्य मिला : नथवाणी परिमल नथवाणी ने जीत के बाद कहा कि झारखंड मेरे लिए नया नहीं है. यहां के लोगों की सेवा का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है. मेरा मुख्य ध्यान मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों पर होगा, जहां स्थायी आजीविका के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और कुटीर उद्योगों को पुनर्जीवित करना हमारा लक्ष्य है. श्री नथवाणी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित एनडीए के सभी विधायकों के प्रति आभार जताया. नवीन का पहला वोट, सुदिव्य सबसे आखिर में कांग्रेस के विधायक बस पर सवार होकर सबसे पहले विधानसभा पहुंचे. कांग्रेस के विधायक झामुमो और घटक दलों का इंतजार करने लगे. इधर थोड़ी देर के बाद एनडीए के विधायक पहुंचे. एनडीए विधायक पहुंचते ही वोटिंग के लिए निकले. भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने सबसे पहले वोट किया. इसके बाद बारी-बारी से दूसरे विधायकों ने वोट डाला. इधर 10 बजे से झामुमो, माले और राजद के विधायकों का अलग-अलग आने का सिलसिला शुरू हुआ. इंडिया गठबंधन के विधायक रुक-रुककर वोट कर रहे थे. सबसे आखिरी में झामुमो के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने वोट डाले. आखिरी दूसरा वोट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का था. दोपहर 1.35 तक सारे वोट पड़ गये थे. ये भी पढ़ें… कौन हैं कांग्रेस को पटखनी देने वाले परिमल नथवाणी? जानिए मुकेश अंबानी के ‘राइट हैंड’ की कहानी कौन हैं बैजनाथ राम, जिन्होंने झारखंड से जीता राज्यसभा चुनाव? The post झारखंड राज्यसभा चुनाव: जीत के बाद क्या बोले बैजनाथ राम और परिमल नथवाणी appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

कर्नाटक MLC चुनाव: क्रॉस-वोटिंग ने बिगाड़ा NDA का खेल! BJP-JDS को झटका, कांग्रेस ने मारी बाजी

Karnataka MLC Election: कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में पहली चुनावी परीक्षा में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया. गुरुवार (18 जून 2026) को हुए विधान परिषद चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने सात में से पांच सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि विपक्षी बीजेपी को दो सीटों से संतोष करना पड़ा. जबकि जेडी(एस) का एकमात्र उम्मीदवार हार गया. वहीं, चुनाव परिणाम को कांग्रेस के लिए बड़ी नेतृत्वक सफलता माना जा रहा है. चुनाव में खास बात यह रही कि कांग्रेस को उसके विधायकों की संख्या से कहीं अधिक वोट मिले, जिससे विपक्षी खेमे में हलचल मच गई है. कांग्रेस को मिले 151 वोट, बहुमत से 16 अधिक आधिकारिक मतगणना के अनुसार, कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस के 135 विधायक हैं, लेकिन एमएलसी चुनाव में पार्टी को कुल 151 वोट मिले. यानी, कांग्रेस को अपने संख्याबल से 16 वोट अधिक मिले हैं. इस अतिरिक्त समर्थन के दम पर कांग्रेस के सभी पांच उम्मीदवार पहले ही चरण में निर्वाचित घोषित कर दिए गए. परिणामों ने संकेत दिया कि विपक्षी दलों के कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया हो सकता है. बीजेपी को आठ वोटों का नुकसान विधानसभा में बीजेपी के 64 विधायक हैं, लेकिन उसके दोनों उम्मीदवारों को मिलाकर केवल 56 वोट मिले. यानी पार्टी को अपने निर्धारित वोटों से आठ वोट कम मिले हैं. बीजेपी उम्मीदवार लिंगराज पाटिल को 27 वोट मिले, जबकि उनके लिए 30 वोट अपेक्षित थे. वहीं दूसरे उम्मीदवार रघु के. को 29 वोट मिले, जो उनके निर्धारित कोटे से एक वोट कम था. इन आंकड़ों ने बीजेपी खेमे में क्रॉस-वोटिंग और असंतोष की अटकलों को और मजबूत कर दिया है. जेडी(एस) उम्मीदवार को भी लगा झटका जेडी(एस) के पास विधानसभा में 18 विधायक हैं. एनडीए गठबंधन के तहत भाजपा ने अपने तीन विधायकों को जेडी(एस) उम्मीदवार के समर्थन में मतदान करने के लिए अधिकृत किया था. इस तरह जेडी(एस) उम्मीदवार के पक्ष में कुल 21 वोट होने चाहिए थे. हालांकि मतगणना में जेडी(एस) उम्मीदवार को केवल 14 वोट मिले. यानी उसे अपेक्षित संख्या से सात वोट कम मिले हैं और वह कांग्रेस के पांचवें उम्मीदवार से हार गया. एनडीए के 12 वोट कहां गए? बना बड़ा सवाल चुनाव परिणाम आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि एनडीए के कुल 12 वोट आखिर गए कहां. बीजेपी को आठ और जेडी(एस) को चार वोटों का नुकसान हुआ. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि ये वोट कांग्रेस के पक्ष में गए, अमान्य घोषित हुए या फिर किसी अन्य कारण से गणना में शामिल नहीं हो सके. चुनाव अधिकारियों की ओर से अभी तक अंतिम और पूरी वोटिंग पैटर्न जारी नहीं किया गया है. बीजेपी ने क्रॉस-वोटिंग की जांच के दिए संकेत परिणामों के बाद कर्नाटक बीजेपी ने कहा कि जल्द ही यह साफ हो जाएगा कि किन विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की है. पार्टी नेताओं ने संकेत दिए हैं कि यदि क्रॉस-वोटिंग की पुष्टि होती है तो संबंधित विधायकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. डीके शिवकुमार बोले- अंतरात्मा की आवाज पर पड़ा वोट मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें क्रॉस-वोटिंग के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा- कुछ विधायकों ने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर मतदान किया होगा. बीजेपी और जेडी(एस) के आरोप उनकी हताशा को दर्शाते हैं. सीएम शिवकुमार ने आगे यह भी कहा कि पूर्व भाजपा विधायक शिवराम हेब्बर और एसटी सोमशेखर को भाजपा से निष्कासित किया जा चुका था और वे कांग्रेस के साथ जुड़ना चाहते थे. ऐसे में उन्होंने अपनी इच्छा और अंतरात्मा के अनुसार मतदान किया. सुरजेवाला ने बताया सकारात्मक नेतृत्व की जीत कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने चुनाव परिणामों को सकारात्मक नेतृत्व की जीत करार दिया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को 135 वोट मिलने थे, लेकिन पार्टी को 151 वोट प्राप्त हुए. वहीं भाजपा और जेडी(एस) दोनों को अपने अपेक्षित समर्थन से कम वोट मिले. सुरजेवाला ने दावा किया कि विपक्षी दल कांग्रेस की पांच गारंटी योजनाओं का विरोध कर रहे थे, लेकिन उनके अपने विधायकों ने भी इन योजनाओं पर भरोसा जताया है. अंतिम आंकड़ों का इंतजार चुनाव परिणाम स्पष्ट हो चुके हैं, लेकिन क्रॉस-वोटिंग और अमान्य मतों की वास्तविक संख्या को लेकर अभी भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है. चुनाव अधिकारियों की विस्तृत रिपोर्ट के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि एनडीए के कथित 12 वोट आखिर किस दिशा में गए. The post कर्नाटक MLC चुनाव: क्रॉस-वोटिंग ने बिगाड़ा NDA का स्पोर्ट्स! BJP-JDS को झटका, कांग्रेस ने मारी बाजी appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा! 6 लाख की डील, OMR खेल और फर्जी दस्तावेज का खुलासा

Bihar Police Recruitment Exam (संवाददाता- गया जी/भभुआ/सासाराम/नवादा): केंद्रीय चयन परिषद (सिपाही भर्ती) द्वारा आयोजित मद्यनिषेध सिपाही, कक्षपाल और चलंत दस्ता सिपाही पदों की लिखित परीक्षा के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और कदाचार का मामला सामने आया है. विभिन्न केंद्रों से हाइटेक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, जाली दस्तावेज और ओएमआर शीट से छेड़छाड़ के आरोप में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य सरगनाओं की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है. गया जी में छह लाख की सेटिंग का खुलासा, नालंदा में छापेमारी गया जी के रामरुचि बालिका स्कूल परीक्षा केंद्र से ब्लूटूथ डिवाइस के साथ पकड़े गये परीक्षार्थी प्रिंस कुमार ने पुलिसिया पूछताछ में एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है. नालंदा जिले के कोरई गांव निवासी प्रिंस ने स्वीकार किया कि उसने परीक्षा पास करने के लिए छह लाख रुपये में सेटिंग की थी. इस स्पोर्ट्स का मुख्य सूत्रधार नालंदा के खुंदुपुर गांव निवासी अमित कुमार उर्फ अर्जुन है. गया पुलिस ने नालंदा में अमित के घर पर छापेमारी की. पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह फरार हो गया. पुलिस ने उसकी मां और बहन से घंटों पूछताछ की है. आधार कार्ड में छेड़छाड़ कर दोबारा परीक्षा दे रहा शातिर भभुआ में गिरफ्तार भभुआ के सरदार वल्लभ भाई पटेल महाविद्यालय में तैनात दंडाधिकारी अमन कुमार राय की शिकायत पर पुलिस ने एक शातिर युवक रवि कुमार को गिरफ्तार किया है. गया जिले के वजीरगंज का रहनेवाला रवि कुमार अपने मूल आधार कार्ड में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से छेड़छाड़ कर दोबारा परीक्षा में शामिल हो रहा था. जांच में पता चला कि वह इससे पूर्व 14 जून को आरा (भोजपुर) के आरबीएस स्कूल में नाम बदलकर परीक्षा दे चुका था. कोचस में हाइटेक उपकरणों के साथ गिरोह का सदस्य दबोचा रोहतास जिले के कोचस थाना क्षेत्र में पुलिस ने वाहन चेकिंग के दौरान परीक्षा में फर्जीवाड़ा कराने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग कैमूर जिले में परीक्षा केंद्र की ओर जा रहे हैं. महात्मा गांधी चौक पर जब एक संदिग्ध लग्जरी कार को रोका गया, तो उसका मुख्य सरगना नंदकिशोर पासवान (निवासी बेतिया) भीड़ का फायदा उठाकर भाग निकला, जबकि पश्चिम चंपारण के भुंटुन कुमार को पुलिस ने दबोच लिया. कार की तलाशी लेने पर एक काले बैग से दो वॉकी-टॉकी, तीन ब्लूटूथ डिवाइस, चार बुकलेट, तीन चार्जर, माइक रिसीवर, कनेक्टर और दो मोबाइल फोन सहित भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किये गये. नवादा में ओएमआर की कार्बन कॉपी लेकर परीक्षार्थी फरार नवादा के एसकेएम महाविद्यालय परीक्षा केंद्र पर एक परीक्षार्थी राहुल कुमार परीक्षा समाप्त होने के बाद ओएमआर शीट की मूल प्रति तो जमा कर दी, लेकिन उसकी कार्बन कॉपी लेकर फरार हो गया. कक्ष वीक्षक सतेंद्र प्रसाद की सूचना पर केंद्राधीक्षक ने नगर थाने में लिखित शिकायत दर्ज करायी है. पुलिस मामले की जांच कर रही है कि कार्बन कॉपी ले जाने के पीछे क्या मंशा थी. Also Read: गया जी में सिपाही से साइबर ठगी, डॉक्टर के यहां नंबर लगाने के नाम पर खाते से उड़ाए 1.89 लाख रुपये The post बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा! 6 लाख की डील, OMR स्पोर्ट्स और फर्जी दस्तावेज का खुलासा appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

‘अंडा हमले’ का डर या ‘रेकी’ की आशंका, ममता बनर्जी के आवास पर क्यों खड़ी हुई नीली दीवार!

खास बातें जब घर के ठीक बाहर कुणाल घोष पर बरसे अंडे, हिल गया सुरक्षा महकमा ममता के घर के सामने हुए हमले से सुरक्षा अधिकारी परेशान सौगत रॉय से लेकर अभिषेक बनर्जी तक बने निशाना Mamata Banerjee Residence Blue Fences: रेकी की भी थी आशंका ममता के घर की रेकी की आयी थी शिकायत Mamata Banerjee Residence Blue Fences: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद उभरा जन-आक्रोश अब राजनेताओं के लिए सिरदर्द बन चुकी है. सूबे में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बड़े-बड़े दिग्गजों पर हाल के दिनों में अंडों से हुए हमलों (Egg Attacks) ने सुरक्षा एजेंसियों को भी परेशान कर दिया है. लोगों के गुस्से से प्रदेश की सबसे बड़ी नेता ममता बनर्जी को बचाने के लिए उनके कोलकाता के कालीघाट स्थित आवास पर अभूतपूर्व सुरक्षा प्रबंध किये गये हैं. जब घर के ठीक बाहर कुणाल घोष पर बरसे अंडे, हिल गया सुरक्षा महकमा ममता बनर्जी के आवास के चारों ओर रातोंरात ऊंची-ऊंची नीली रंग की फेंसिंग (सुरक्षा दीवार) कर दी गयी, ताकि सड़क से कोई उपद्रवी घर के भीतर ‘अंडे’ या कोई अन्य अवांछित वस्तु न फेंक सके. यह फैसला सोमवार को हुई एक सनसनीखेज घटना के बाद लिया गया. तृणमूल कांग्रेस के नेता और बेलेघाटा के पूर्व विधायक कुणाल घोष (Kunal Ghosh) जब ममता बनर्जी से मिलकर उनके घर से बाहर निकले, तो गुस्साये लोगों ने उन पर कच्चे अंडे फेंके थे. ममता के घर के सामने हुए हमले से सुरक्षा अधिकारी परेशान इस घटना ने पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहे आला अधिकारियों को परेशान कर दिया. अधिकारियों को लगा कि अगर इतनी सुरक्षा के बीच ऐसी घटना हो सकती है, तो आगे कोई बड़ी चूक भी हो सकती है. इसलिए आनन-फानन में पूरे आंगन और परिसर को ऊंची नीली फेंसिंग से घेर दिया गया. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें सौगत रॉय से लेकर अभिषेक बनर्जी तक बने निशाना बंगाल में सत्ता बदलने के बाद जनता ने विरोध और गुस्से का इजहार करने के लिए ‘कच्चे अंडों’ को हथियार बना लिया है. सौगत रॉय और अभिषेक बनर्जी जैसे दिग्गज तृणमूल नेता भी ‘अंडा हमले’ का शिकार हो चुके हैं. Mamata Banerjee Residence Blue Fences: रेकी की भी थी आशंका प्रशासनिक सूत्रों की मानें, तो इस ऊंची फेंसिंग के पीछे सिर्फ अंडों से बचाव का ही एकमात्र कारण नहीं है. रणनीतिक और सुरक्षा कारण भी हैं. 4 मई को प्रशासन बदलने के बाद हरीश चटर्जी स्ट्रीट पर स्थित इस वीवीआईपी लेन से पुलिस के कड़े पहरे और बैरिकेड्स को हटा दिया गया था. इससे यह सड़क आम जनता के लिए पूरी तरह खुल गयी थी. ममता के घर की रेकी की आयी थी शिकायत रास्ता खुलने के बाद कोई भी राहगीर आसानी से घर पर नजर रख सकता था कि ममता बनर्जी से मिलने कौन से नेता और व्यवसायी आ-जा रहे हैं. हाल ही में ममता के घर की संदिग्ध रेकी (Recce) की सनसनीखेज शिकायत भी सामने आयी थी. इसे भी पढ़ें बंगाल में ‘सुरक्षा’ पर संग्राम! ममता बनर्जी की पसंद के बॉडीगार्ड्स को शुभेंदु प्रशासन ने हटाया, डेरेक ओब्रायन बोले- रात भर बिना सुरक्षा के थीं दीदी ममता बनर्जी के घर से वापस बुलाये गये सभी सुरक्षा गार्ड, पुलिस चौकी पूरी तरह खाली The post ‘अंडा हमले’ का डर या ‘रेकी’ की आशंका, ममता बनर्जी के आवास पर क्यों खड़ी हुई नीली दीवार! appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

राज्यसभा चुनाव: ZPM उम्मीदवार के लालतलुआंगकिमा जीते, पहली बार उच्च सदन पहुंची पार्टी

Mizoram Rajya Sabha Election: मिजोरम की एकमात्र राज्यसभा सीट पर हुए चुनाव में सत्तारूढ़ जोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) के उम्मीदवार के. लालतलुआंगकिमा ने शानदार जीत दर्ज की है. इस जीत के साथ ही जेडपीएम ने इतिहास रच दिया है, क्योंकि यह पहला अवसर है जब पार्टी का कोई प्रतिनिधि संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में पहुंचेगा. गुरुवार को घोषित चुनाव परिणाम में लालतलुआंगकिमा ने विपक्षी मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) की उम्मीदवार जोथानसांगी ह्मार को हराकर सीट अपने नाम की. 26 वोट हासिल कर दर्ज की जीत विधानसभा सचिव एवं निर्वाचन अधिकारी जोथानसांगा राल्ते के अनुसार, राज्यसभा चुनाव में कुल 36 वोट पड़े, जिनमें से के. लालतलुआंगकिमा को 26 मत मिले. वहीं, एमएनएफ उम्मीदवार जोथानसांगी ह्मार को उनकी पार्टी के सभी 10 विधायकों का समर्थन मिला और उन्हें कुल 10 वोट प्राप्त हुए. जेडपीएम के पास विधानसभा में स्पष्ट बहुमत होने के कारण शुरुआत से ही लालतलुआंगकिमा की जीत लगभग तय मानी जा रही थी. पहली बार राज्यसभा में पहुंचेगी जेडपीएम के. लालतलुआंगकिमा की जीत केवल एक चुनावी सफलता नहीं है, बल्कि जेडपीएम के नेतृत्वक सफर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी है. पार्टी पहली बार राज्यसभा में अपना प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने में सफल रही है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर उसकी मौजूदगी और मजबूत होगी. तीन विधायकों ने नहीं किया मतदान राज्यसभा चुनाव के दौरान तीन विधायकों ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया. इनमें बीजेपी के विधायक के. बेइचहुआ और के. हराहमो के अलावा कांग्रेस के एकमात्र विधायक सी. न्गुनलिआनचुंगा शामिल हैं. कांग्रेस विधायक सी. न्गुनलिआनचुंगा ने पहले ही साफ कर दिया था कि उन्होंने पार्टी आलाकमान के निर्देश के अनुसार मतदान से दूरी बनाई. वहीं, भाजपा के मीडिया संयोजक जॉनी लालथानपुइया ने बताया कि पार्टी के दोनों विधायकों ने भी राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाला. स्वास्थ्य कारणों से वोट नहीं डाल सके एक विधायक निर्वाचन अधिकारी जोथानसांगा राल्ते ने बताया कि विधायक डब्ल्यू. छुआनावमा स्वास्थ्य संबंधी कारणों की वजह से मतदान नहीं कर सके. इस प्रकार कुल 40 सदस्यीय विधानसभा में से 36 विधायकों ने मतदान किया, जबकि चार सदस्य वोटिंग प्रक्रिया से बाहर रहे. The post राज्यसभा चुनाव: ZPM उम्मीदवार के लालतलुआंगकिमा जीते, पहली बार उच्च सदन पहुंची पार्टी appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

राज्यसभा चुनाव: प्रणव झा की हार के बाद कांग्रेस में बौखलाहट, बोले के राजू – आरजेडी और माले ने हमें दिया धोखा

रांची से आनंद मोहन की रिपोर्ट Rajya Sabha Election: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजे गुरुवार 18 जून 2026 को घोषित कर दिए गए. चुनाव में झामुमो समर्थित उम्मीदवार बैजनाथ राम और एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी ने जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा. नतीजों के सामने आते ही महागठबंधन के भीतर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. प्रणव झा की हार पर के राजू का बड़ा आरोप कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के राजू ने सहयोगी दलों राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और भाकपा माले पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि आरजेडी और माले के विधायकों ने कांग्रेस के साथ धोखा किया है, जिसकी वजह से पार्टी समर्थित उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सके. के राजू का कहना है कि अगर गठबंधन के सभी सहयोगी दल पूरी मजबूती के साथ साथ खड़े रहते, तो परिणाम अलग हो सकता था. उनके इस बयान ने राज्य की नेतृत्व में नई बहस को जन्म दे दिया है. दीपिका पांडेय सिंह ने भी उठाए सवाल कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने भी प्रणव झा की हार के लिए आरजेडी और माले को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि महागठबंधन की मजबूती का दावा करने वाले सहयोगी दलों को अपने रुख को स्पष्ट करना चाहिए. दीपिका पांडेय के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने इंडिया गठबंधन के भीतर असहजता बढ़ा दी है. नेतृत्वक जानकारों का मानना है कि इस विवाद का असर भविष्य में गठबंधन की रणनीति पर भी पड़ सकता है. बैजनाथ राम और परिमल नथवानी ने दर्ज की जीत 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में हुए मतदान में झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम को सबसे अधिक 31 वोट मिले और वह राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे. दूसरी सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी ने जीत दर्ज की. परिमल नथवानी को कुल 30 वोट मिले थे, लेकिन इनमें से दो मत रद्द कर दिए गए. इस तरह उन्हें 28 वैध वोट प्राप्त हुए. वहीं, कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को 20 वोट मिले, जिनमें एक वोट अमान्य घोषित कर दिया गया. कुल 81 मतों में तीन वोट रद्द हुए. अंतिम गणना में बैजनाथ राम को 31 और परिमल नथवानी को 28 वैध वोट मिले, जबकि प्रणव झा केवल 19 वैध वोटों तक ही सीमित रह गए. महागठबंधन के पास थे 56 विधायक झारखंड विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थन है. इनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, आरजेडी के चार और भाकपा माले के दो विधायक शामिल हैं. संख्या बल के लिहाज से गठबंधन मजबूत स्थिति में था और कांग्रेस को उम्मीद थी कि वह दोनों सीटों पर जीत दर्ज कर लेगा. लेकिन चुनाव परिणाम ने इन दावों को झटका दे दिया. अब कांग्रेस नेताओं के आरोपों के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या महागठबंधन के भीतर सबकुछ ठीक है या फिर राज्यसभा चुनाव ने अंदरूनी मतभेदों को उजागर कर दिया है. इसे भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव: बैजनाथ राम और परिमल नथवाणी ने मार ली बाजी, बिखर गया महागठबंधन का कुनबा परिणाम के बाद बढ़ सकती है नेतृत्वक खींचतान राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने झारखंड की नेतृत्व में नए समीकरणों और संभावित खींचतान के संकेत दे दिए हैं. कांग्रेस नेताओं द्वारा सहयोगी दलों पर लगाए गए आरोपों के बाद आने वाले दिनों में महागठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर और बयानबाजी देखने को मिल सकती है. फिलहाल, चुनावी हार के बाद कांग्रेस जवाब तलाशने में जुटी हुई है और सहयोगी दलों की भूमिका पर सवाल खड़े कर रही है. इसे भी पढ़ें: कौन हैं बैजनाथ राम, जिन्होंने झारखंड से जीता राज्यसभा चुनाव? The post राज्यसभा चुनाव: प्रणव झा की हार के बाद कांग्रेस में बौखलाहट, बोले के राजू – आरजेडी और माले ने हमें दिया धोखा appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

कौन हैं बैजनाथ राम, जिन्होंने झारखंड से जीता राज्यसभा चुनाव?

Rajya Sabha Election: झारखंड के पूर्व मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के वरिष्ठ नेता बैजनाथ राम ने राज्यसभा चुनाव में जीत हासिल कर संसद के उच्च सदन में अपनी जगह बना ली है. लातेहार की नेतृत्व से निकलकर राज्य स्तर और अब राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचने वाले बैजनाथ राम का सफर संघर्ष, दल बदल और कई नेतृत्वक उतार-चढ़ाव से होकर गुजरा है. लातेहार के एक साधारण परिवार से आते हैं बैजनाथ राम बैजनाथ राम लातेहार शहर के शहीद चौक स्थित धोबी मुहल्ला के निवासी हैं. उनका जन्म वर्ष 1967 में लातेहार प्रखंड के परसही गांव में हुआ था. शुरुआती शिक्षा उन्होंने अपने गांव में ही प्राप्त की. इसके बाद मैट्रिक और इंटरमीडिएट की पढ़ाई बालक उच्च विद्यालय, लातेहार से पूरी की. उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने लातेहार के बनवारी साहू महाविद्यालय में प्रवेश लिया और नेतृत्वक शास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की. छात्र जीवन से ही सामाजिक और नेतृत्वक गतिविधियों में उनकी रुचि रही. तीन वर्षों तक शिक्षक के रूप में किया काम शिक्षा पूरी करने के बाद बैजनाथ राम ने लातेहार शहर स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दीं. लगभग तीन वर्षों तक उन्होंने अध्यापन का कार्य किया. हालांकि, वर्ष 2000 में झारखंड के अलग राज्य बनने के साथ ही उन्होंने नौकरी छोड़कर सक्रिय नेतृत्व में कदम रखने का फैसला किया. यह फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ. एक शिक्षक के रूप में बच्चों को पढ़ाने वाले बैजनाथ राम ने नेतृत्व को अपना नया कार्यक्षेत्र बनाया और जल्द ही जनता के बीच अपनी पहचान स्थापित कर ली. जेडीयू के टिकट पर पहली बार बने विधायक झारखंड गठन के बाद वर्ष 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में बैजनाथ राम ने जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के टिकट पर लातेहार विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा. पहली ही बार में उन्हें जीत मिली और वे विधायक बन गए. प्रशासन में उन्हें स्पोर्ट्स मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई. इसके बाद उन्होंने मद्य निषेध मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के रूप में भी काम किया. मंत्री के तौर पर उन्होंने राज्य प्रशासन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और अपनी प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया. बीजेपी में शामिल होकर बने शिक्षा मंत्री वर्ष 2005 में बैजनाथ राम ने जेडीयू का साथ छोड़कर हिंदुस्तानीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया. बीजेपी के टिकट पर उन्होंने एक बार फिर लातेहार विधानसभा सीट से जीत दर्ज की. प्रशासन में उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया गया. शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने राज्य की शैक्षणिक व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों पर काम किया. हालांकि, वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में उन्हें राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी प्रकाश राम के हाथों हार का सामना करना पड़ा. टिकट कटने के बाद बीजेपी छोड़कर पहुंचे जेएमएम वर्ष 2014 का विधानसभा चुनाव बैजनाथ राम ने नहीं लड़ा. इसके बाद 2019 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में वे जुटे हुए थे और बीजेपी से टिकट मिलने की उम्मीद कर रहे थे. लेकिन पार्टी ने उनका टिकट काटते हुए प्रकाश राम को उम्मीदवार बना दिया. इस फैसले के बाद बैजनाथ राम ने बीजेपी से नाता तोड़ लिया और झारखंड मुक्ति मोर्चा में शामिल हो गए. जेएमएम में शामिल होने के बाद उन्होंने संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई और पार्टी नेतृत्व का भरोसा भी हासिल किया. इसे भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव: दो पार्टियों के वो छह विधायक, जो बताए जा रहे ‘गेमचेंजर’! अब राज्यसभा पहुंचकर मिली नई जिम्मेदारी जेएमएम के टिकट पर राज्यसभा चुनाव जीतने के साथ ही बैजनाथ राम के नेतृत्वक जीवन में एक नया अध्याय जुड़ गया है. एक शिक्षक से विधायक, मंत्री और अब सांसद बनने तक का उनका सफर झारखंड की नेतृत्व में उनकी लंबी सक्रियता और अनुभव को दर्शाता है. लातेहार की नेतृत्व में कई उतार-चढ़ाव देखने वाले बैजनाथ राम अब राज्यसभा में झारखंड का प्रतिनिधित्व करेंगे. उनकी जीत को जेएमएम के लिए नेतृत्वक मजबूती के रूप में भी देखा जा रहा है. संसद के उच्च सदन में पहुंचने के बाद अब उनसे राज्य के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने की अपेक्षा की जा रही है. इसे भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव: बैजनाथ राम और परिमल नथवाणी ने मार ली बाजी, बिखर गया महागठबंधन का कुनबा The post कौन हैं बैजनाथ राम, जिन्होंने झारखंड से जीता राज्यसभा चुनाव? appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

कौन हैं कांग्रेस को पटखनी देने वाले परिमल नथवाणी? जानिए मुकेश अंबानी के ‘राइट हैंड’ की कहानी

Jharkhand Rajya Sabha Election, रांची: झारखंड में 2 सीटों के लिए हुए राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रहे कयासों का बाजार अब पूरी तरह खत्म हो चुका है. दो बार झारखंड से राज्यसभा सांसद रहे परिमल नथवाणी ने एक बार फिर जीत का सेहरा पहना है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि परिमल नाथवाणी कौन हैं, जिन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को हरा दिया? क्या वे सिर्फ एक अच्छे नेतृत्वज्ञ हैं या फिर एक बड़े बिजनेसमैन? अगर हम उनके करियर पर नजर डालें तो वे एक शानदार ऑलराउंडर की तरह नजर आते हैं, जिन्होंने हर क्षेत्र में अपना बड़ा योगदान दिया है. दरअसल, वे रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) में कॉर्पोरेट अफेयर्स (Corporate Affairs) के डायरेक्टर हैं. रिलायंस के मालिक मुकेश अंबानी के वे बेहद करीबी और उनके सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक माने जाते हैं. रिलायंस के कई बड़े प्रोजेक्ट्स, खासकर गुजरात के जामनगर में बनी दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी के जमीनी काम को संभालने में इनकी मुख्य भूमिका रही है. लगातार तीन बार पहुंचे हैं राज्यसभा परिमल नथवाणी न केवल बिजनेस मैन हैं बल्कि नेतृत्व के भी शानदार खिलाड़ी हैं. यही वजह है कि वे लंबे समय तक राज्यसभा से सांसद भी रहे हैं. उनकी खास बात ये है कि वे हर दल के लोगों के साथ में अच्छा तालमेल बनाकर के रखते हैं. यही कारण है कि वे झारखंड से ही लगातार दो बार राज्यसभा पहुंचे थे. साल 2008 में वे पहली बार और फिर 2014 में झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा पहुंचे, जिसमें उन्हें सभी प्रमुख दलों (जेएमएम, भाजपा और कांग्रेस) का समर्थन प्राप्त था. केवल झारखंड से ही नहीं बल्कि वे आंध्र प्रदेश से भी राज्यसभा जा चुके हैं. साल 2020 में वे वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे थे. Also Read: चार घंटे तक अटकी रहेगी सबकी जान, विधानसभा में स्पोर्ट्सा होगा या बिदक जाएगा घोड़ा? क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में भी बनाई है पहचान नेतृत्व और बिजनेस के अलावा परिमल नथवाणी का स्पोर्ट्स प्रशासन में भी बड़ा नाम है. वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के पूर्व उपाध्यक्ष (Vice President) रह चुके हैं. अहमदाबाद के विश्व प्रसिद्ध ‘नरेंद्र मोदी स्टेडियम’ (मोटेरा स्टेडियम) के पुनर्निर्माण और उसे दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम बनाने के प्रोजेक्ट में उनका बहुत बड़ा योगदान था. वन्यजीव संरक्षण के लिए भी करते हैं काम परिमल नथवाणी अपने करियर में वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ा काम किये हुए हैं. जानकारी के मुताबिक गुजरात के गिर जंगलों में पाए जाने वाले एशियाई शेरों (Asiatic Lions) के संरक्षण के लिए भी वे काफी काम करते हैं. वे गिर राष्ट्रीय उद्यान के विकास और शेरों की सुरक्षा को लेकर अक्सर आवाज उठाते रहते हैं. Also Read: राज्यसभा चुनाव: मतगणना से पहले राधाकृष्ण किशोर का दावा, प्रणव झा को मिलेंगे 28.97 वोट The post कौन हैं कांग्रेस को पटखनी देने वाले परिमल नथवाणी? जानिए मुकेश अंबानी के ‘राइट हैंड’ की कहानी appeared first on Naya Vichar.

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top