लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान जब अखिलेश यादव बोलने के लिए उठे, तो उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी, जौहर यूनिवर्सिटी और ‘कॉकरोच आंदोलन’ जैसे मुद्दों पर प्रशासन को जमकर घेरा. सांसद अखिलेश यादव ने पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था, एनटीए की कार्यप्रणाली, उत्तर प्रदेश की शिक्षा नीति और राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी जैसे मुद्दों को उठाते हुए प्रशासन की नीयत और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए. अखिलेश यादव ने कहा कि प्रशासन पेपर लीक रोकने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जिन लोगों से राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी नहीं रुक सकी, वे देश में पेपर लीक कैसे रोकेंगे. उन्होंने कहा यह भी कहा कि “प्रशासन को अहंकार था कि प्रशासन झुकती नहीं है, लेकिन नई पीढ़ी के लोगों ने नारा दिया कि झुकाने वाला चाहिए, प्रशासन भी झुकती है”.
पेपर लीक से करोड़ों परिवार हुए प्रभावित
अखिलेश यादव ने कहा कि जब प्रशासन 2024 में प्रिवेंशन ऑफ अनलॉफुल मींस एक्ट लेकर आई थी, तब उसे यह भी बताना चाहिए था कि 2026 तक इतने बड़े पैमाने पर पेपर लीक कैसे हो गए. उन्होंने कहा कि केवल एक-दो नहीं, बल्कि कई परीक्षाएं लीक हुईं और इससे अभूतपूर्व जनआंदोलन खड़ा हुआ. उनके मुताबिक, यदि 20 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी तो उनके परिवारों को मिलाकर करीब एक करोड़ लोग इस समस्या से प्रभावित हुए. आमतौर पर आंदोलनों के लिए नेतृत्वक दलों को अलग से तैयारी करनी पड़ती है, लेकिन यह पहला ऐसा आंदोलन था, जिसमें माता-पिता ने खुद अपने बच्चों से कहा कि वे आंदोलन करें, क्योंकि वे उनके साथ खड़े हैं. उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश में देखने को मिला.
‘पहली बार माता-पिता भी आंदोलन में उतरे’
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि यदि उनकी बातें गलत लग रही हैं तो देश के गृह मंत्री से इसकी व्याख्या कराई जा सकती है. पेपर लीक से देशभर के छात्र और उनके अभिभावक इतने परेशान हैं कि पहली बार ऐसा देखने को मिला जब माता-पिता खुद अपने बच्चों के साथ आंदोलन में उतर गए. यह आंदोलन सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे देश में फैला और इससे साफ पता चलता है कि परीक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों में कितना आक्रोश और निराशा है.
‘जो चढ़ावा नहीं बचा पाए, वे पेपर लीक क्या रोकेंगे’
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा उठाते हुए अखिलेश यादव ने प्रशासन पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, “जो लोग चढ़ावा चोर भी नहीं बचा पाए, वो पेपर लीक कैसे बचा पाएंगे? भगवान के दरबार से दान गायब हो गया और अब वही लोग पेपर लीक रोकने की बात कर रहे हैं.” उन्होंने कहा कि प्रशासन पुराने कानून में संशोधन कर फिर से वही कानून लेकर आई है. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कानून इतना प्रभावी था तो भाजपा के दस वर्षों के शासनकाल में करीब 20 परीक्षाएं कैसे लीक हो गईं, जबकि कई मामलों में छात्रों को कोर्ट तक जाना पड़ा और उसके बाद भी परीक्षाएं समय पर रद्द नहीं की गईं.
‘दिल्ली में इमरजेंसी जैसी झलक देखने को मिली’
अपने भाषण के अंत में अखिलेश यादव ने पेपर लीक आंदोलन और छात्रों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली में हुई घटनाओं ने इमरजेंसी की याद दिला दी. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और कील लगे डंडों का इस्तेमाल किया गया. छात्रों के साथ जो व्यवहार हुआ, वह इमरजेंसी से कम अन्याय नहीं था. अखिलेश यादव ने कहा, “याद रखिए, इमरजेंसी के बाद भी परिवर्तन हुआ था. मुझे भरोसा है कि इस बार भी बदलाव होगा. कानून बनाने से कुछ नहीं होगा, जब तक प्रशासन की नीयत साफ नहीं होगी, तब तक नीट जैसी परीक्षाएं भी साफ नहीं होंगी.”
69000 शिक्षक भर्ती और प्रशासनी स्कूलों का भी उठाया मुद्दा
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में केवल प्रशासनी स्कूल ही बंद नहीं किए जा रहे, बल्कि नौकरियों पर भी हमला किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 69000 शिक्षक भर्ती में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ, जिसके कारण अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ा. उन्होंने कहा कि वर्षों से अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे हैं और शायद ही कोई ऐसा स्थान बचा हो, जहां उन्होंने अपनी आवाज न उठाई हो. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन किसी को नौकरी नहीं देना चाहती, क्योंकि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं. उन्होंने कहा कि इस भर्ती में सबसे अधिक नुकसान पिछड़े और दलित वर्ग के युवाओं को हुआ, जिनका अधिकार उनसे छीन लिया गया.
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