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सरायकेला के मो शमीम ने योग से दिया किडनी रोग को मात, अब पूरी तरह हैं स्वस्थ

सरायकेला से प्रताप मिश्रा और धीरज कुमार की रिपोर्ट

Seraikela News: योग को लेकर अक्सर कहा जाता है कि नियमित अभ्यास शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करता है. सरायकेला के राजबांध निवासी मो. शमीम की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. मुस्लिम समुदाय से आने वाले मो. शमीम पिछले 17 वर्षों से नियमित योग कर रहे हैं और उनका दावा है कि योग और प्राणायाम ने उन्हें नई जिंदगी दी है. मो शमीम बताते हैं कि करीब 17 वर्ष पहले वह किडनी संबंधी गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए थे. उनकी दोनों किडनी प्रभावित हो गई थीं और स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी. परिवार के लोग उन्हें कई चिकित्सकों के पास लेकर गए. इलाज के लिए तमिलनाडु के वेल्लोर तक भी जाना पड़ा, लेकिन वहां भी चिकित्सकों ने परिजनों को उन्हें घर ले जाने की सलाह दे दी थी.

तमिलनाडु में आयुर्वेदिक चिकित्सक से मिला नया रास्ता

जब आधुनिक चिकित्सा से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले, तब परिवार को तमिलनाडु के वानमबाड़ी में एक चिकित्सक के बारे में जानकारी मिली. इसके बाद परिजन मो. शमीम को आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. अकबर कौशर के पास लेकर पहुंचे. मो शमीम बताते हैं कि डॉक्टर के क्लिनिक में उन्होंने योग गुरु बाबा रामदेव का पोस्टर देखा. उसी पोस्टर ने उनके मन में योग के प्रति रुचि पैदा की. इलाज के बाद वह वापस सरायकेला लौट आए, लेकिन उनके मन में योग को लेकर जिज्ञासा बनी रही.

टेलीविजन पर देखा योग कार्यक्रम तो बदल गई जिंदगी

मो. शमीम ने बताया कि वह प्रतिदिन सुबह नमाज अदा करने के लिए जल्दी उठते थे. एक दिन नमाज पढ़ने के बाद उन्होंने टेलीविजन चालू किया, जहां योग का कार्यक्रम प्रसारित हो रहा था. कार्यक्रम में किडनी से संबंधित योग और प्राणायाम की जानकारी दी जा रही थी. इसके बाद उन्होंने नियमित रूप से योगासन और प्राणायाम करना शुरू कर दिया. लगभग एक से डेढ़ महीने तक लगातार अभ्यास करने के बाद उन्हें अपने स्वास्थ्य में सुधार महसूस होने लगा. इसके बाद उन्होंने योग को अपनी दिनचर्या का स्थायी हिस्सा बना लिया.

सुबह-शाम योग करना नहीं भूले

मो शमीम का कहना है कि आज भी वह अपने सभी कामों से पहले योग को प्राथमिकता देते हैं. सुबह नमाज के बाद करीब एक घंटे तक और शाम में आधे घंटे तक नियमित योग करते हैं. उनका मानना है कि योग के कारण ही आज वह पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी रहे हैं. हालांकि किसी भी गंभीर बीमारी के उपचार को लेकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह और नियमित जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है. चिकित्सा विज्ञान और स्वस्थ जीवनशैली का संतुलन कई बार बेहतर परिणाम देने में सहायक साबित होता है.

अनुलोम-विलोम से लेकर भ्रामरी तक करते हैं कई प्राणायाम

मो शमीम ने बताया कि वह प्रतिदिन अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भस्त्रिका और भ्रामरी जैसे प्राणायाम करते हैं. इसके अलावा अन्य योग क्रियाओं का भी नियमित अभ्यास करते हैं. उनके अनुसार इन अभ्यासों से न केवल शारीरिक लाभ मिलता है, बल्कि पूरे दिन शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और मानसिक शांति का भी अनुभव होता है. इंसान की दिनचर्या में जितनी नियमितता कम होती जा रही है, उतनी ही बीमारियां बढ़ती जा रही हैं. शरीर को मशीन की तरह इस्तेमाल करने वाले लोग अक्सर उसकी सर्विसिंग करना भूल जाते हैं और फिर अस्पताल को ही सर्विस सेंटर समझ बैठते हैं.

योग को धर्म से ऊपर मानते हैं मो शमीम

मो शमीम का मानना है कि योग को किसी धर्म या समुदाय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. उनके अनुसार योग मानव शरीर को स्वस्थ रखने की एक विधा है और यह सभी लोगों के लिए समान रूप से उपयोगी है. उन्होंने कहा कि जब चिकित्सकों ने उम्मीद छोड़ दी थी, तब योग ने उन्हें नई राह दिखाई. यही कारण है कि वह योग को धर्म से ऊपर मानते हैं. उनका कहना है कि आज मुस्लिम समुदाय के कई लोग भी नियमित योग कर रहे हैं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे हैं.

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दूसरे लोगों को भी देते हैं योग अपनाने की सलाह

मो शमीम की बीमारी और उनके स्वास्थ्य लाभ की कहानी सुनकर जमशेदपुर, रांची और अन्य स्थानों से भी लोग उनसे संपर्क करते हैं. वह लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नियमित योग करने की सलाह देते हैं. उनका कहना है कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि निरोग जीवन का मंत्र है. नियमित अभ्यास, सकारात्मक सोच और अनुशासित जीवनशैली के साथ व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रख सकता है. मो. शमीम की यह कहानी कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है, जो स्वस्थ और संतुलित जीवन की तलाश में हैं.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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