Sonia Gandhi Article : कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने द हिन्दू में प्रकाशित अपने लेख ‘शिक्षा व्यवस्था का पतन, युवा हिंदुस्तान की पीड़ा’ (“An education system’s collapse, young India’s trauma”) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र प्रशासन पर तीखा हमला बोला है.
उन्होंने कहा कि देश के छात्र शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने उनके साहस का जवाब “कायरता और अकारण क्रूरता” से दिया. सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी प्रशासन छात्रों को देश का भविष्य मानने के बजाय उनके साथ देश के दुश्मनों जैसा व्यवहार कर रही है. उनके मुताबिक छात्रों ने प्रशासन के शिक्षा व्यवस्था से जुड़े दावों की पोल खोल दी है.
संकट में शिक्षा व्यवस्था, छात्रों के समर्थन की अपील
सोनिया गांधी ने अपने लेख में कहा कि आज की शिक्षा व्यवस्था युवाओं को उम्मीद नहीं, बल्कि निराशा दे रही है. उन्होंने लिखा कि छात्र आंदोलन दो वजहों का नतीजा है. पहली, ऐसी शिक्षा व्यवस्था जिसने युवाओं का भरोसा तोड़ दिया है और दूसरी, मोदी प्रशासन का अहंकार, जो जवाबदेही तय करने और सुधारात्मक कदम उठाने से लगातार इनकार करता रहा है. उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ खड़ा होना और उनके भविष्य की रक्षा करना हर नेतृत्वक दल और समाज की नैतिक, नेतृत्वक और संवैधानिक जिम्मेदारी है.
पुलिस कार्रवाई और पुराने आंदोलनों का भी किया जिक्र
सोनिया गांधी ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री के अधिकार क्षेत्र में काम करने वाली पुलिस ने छात्रों के साथ बर्बरता की है. उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं हुआ है.
अपने लेख में उन्होंने 2020 के CAA-NRC विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान भी यूनिवर्सिटी कैंपसों में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की कार्रवाई हुई थी. इसके अलावा उन्होंने स्त्री पहलवानों के आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके साथ हुई ज्यादतियों को भी देश नहीं भूला है.
प्रशासन पर शिक्षा व्यवस्था कमजोर करने का आरोप
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र प्रशासन की नीतियों की वजह से देश की शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हुई है. उन्होंने कहा कि पेपर लीक, पारदर्शिता की कमी और छात्रों में बढ़ती निराशा जैसे मुद्दे गंभीर चिंता का विषय हैं. उनके मुताबिक प्रशासन को छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनकी मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर शिक्षा व्यवस्था में समय रहते सुधार नहीं किया गया तो इसका असर सिर्फ छात्रों पर नहीं, बल्कि देश के भविष्य पर भी पड़ेगा.
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