Rajasthan Royals के बिकने के बाद अमेरिका के काल सोमानी ग्रुप ने कहा कि उन्होंने राजस्थान रॉयल्स पर लगाई अपनी बोली को वापस नहीं लिया. उन्हें इस बिक्री प्रकिया से बाहर कर दिया. मार्च में काल सोमानी ने राजस्थान रॉयल्स को रिकॉर्ड 1.63 बिलियन अमेरिकी डॉलर में खरीदने के लिए सहमत हुए थे.
यह डील आईपीएल 2026 के बाद पूरी होने की उम्मीद थी. लेकिन, रविवार को लक्ष्मी एन. मित्तल और आदित्य मित्तल ने घोषणा करते हुए कहा कि मनोज बडाले और उनके ग्रुप से अदार पूनावाला के साथ साझेदारी में राजस्थान रॉयल्स को खरीदने के लिए एक पक्का समझौता कर लिया गया है.
राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा नहीं बनने के बाद निराश है चारों निवेशक
कंसोर्टियम के चार निवेशकों काल सोमानी, रॉब और जॉर्डन वॉल्टन और माइकल हैम्प ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा हम राजस्थान रॉयल्स के स्वामित्व का हिस्सा न बन पाने से बहुत निराश हैं. हम पिछले छह महीने की लंबी प्रक्रिया के दौरान शुरू से आखिर तक लीड बिड थे.
रिपोर्ट्स में बताया गया कि सोमानी के नेतृत्व वाला कंसोर्टियम, जिसने पहले आरआर को खरीदने के लिए सफल बिड लगाई थी, उसे खरीदारी पूरी करने के लिए फंडिंग की दिक्कतों का सामना करना पड़ा और उनकी डील फेल हो गई.
हमारे ग्रुप को मिली थी पूरी फंडिंग
इस समाचार पर प्रतिक्रिया देते हुए कंसोर्टियम ने कहा कि मीडिया में चलाई गई कहानियों के उलट, हमारे ग्रुप को हमेशा पूरी फंडिंग मिली थी और मिली है. हम पक्के तौर पर डील को पूरा करने के लिए तैयार थे और हमने अपनी बिड कभी वापस नहीं ली. हमने डॉक्यूमेंटेशन तैयार कर लिया था और हमें बताया गया था कि शनिवार को फ्रेंचाइजी की बोर्ड मीटिंग हमारे कंसोर्टियम को मंजूरी देने के लिए हुई थी. लेकिन हमें इस डील से बाहर कर दिया गया.
बता दें कि 1.65 बिलियन डॉलर में हुए नए समझौते के मुताबिक मित्तल परिवार के पास राजस्थान रॉयल्स (आरआर) का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा होगा. अदार पूनावाला के पास लगभग 18 प्रतिशत और बाकी का 7 प्रतिशत हिस्सा मनोज बडाले सहित मंजूर मौजूदा निवेशकों के पास होगा.
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