Hul Diwas 2026: 30 जून को पूरे झारखंड समेत देशभर में हूल दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया जा रहा है. इस अवसर पर 1855-56 के ऐतिहासिक संताल हूल के महानायक शहीद सिदो-कान्हू, फूलो-झानों और चांद-भैरव को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है. हूल दिवस के मौके पर झारखंड-बिहार के नंबर-वन हिंदी अखबार नया विचार ने शहीद वीरों की स्मृति में एक विशेष प्रस्तुति प्रकाशित की, जिसे व्यापक सराहना मिल रही है.
मुख्यमंत्री ने एक्स पर साझा की नया विचार की प्रस्तुति
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी नया विचार की इस विशेष पहल की प्रशंसा की. उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर नया विचार के 30 जून 2026 के विशेष संस्करण के पन्नों को साझा करते हुए अखबार की प्रस्तुति की सराहना की. मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में लिखा, “हूल की गौरवगाथा और झारखंड की ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का यह प्रयास सराहनीय है. इस पहल के लिए नया विचार की टीम को हूल जोहार और शुभकामनाएं.” मुख्यमंत्री की इस प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया पर भी नया विचार की प्रस्तुति की चर्चा तेज हो गई.
हूल की गौरवगाथा और झारखंड की ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का यह प्रयास सराहनीय है।
इस पहल के लिए नया विचार की टीम को हूल जोहार और शुभकामनाएँ। pic.twitter.com/TofXnrLMIZ
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) June 30, 2026
‘लहू से लिखा हूल’ शीर्षक से प्रकाशित हुई विशेष प्रस्तुति
नया विचार ने 30 जून 2026 के अंक में ‘लहू से लिखा हूल’ शीर्षक से विशेष पृष्ठ प्रकाशित किया है. इस प्रस्तुति में संताल हूल के इतिहास, शहीदों के संघर्ष, आदिवासी अस्मिता और आजादी की लड़ाई में उनके योगदान को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है. इतिहास, दस्तावेजों और शोधपरक तथ्यों पर आधारित इस विशेष प्रस्तुति को पाठकों के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक और बौद्धिक वर्गों से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है.

नया विचार डिजिटल का विशेष वीडियो भी बना आकर्षण
हूल दिवस के अवसर पर नया विचार डिजिटल ने भी विशेष वीडियो तैयार किया है. इस वीडियो में संताल हूल के इतिहास, उसके नायकों और उनके बलिदान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है. सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस वीडियो को भी सराहना मिल रही है.
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दूसरे मीडिया संस्थानों में भी हो रही चर्चा
नया विचार की इस विशेष प्रस्तुति की चर्चा अन्य मीडिया संस्थानों में भी हो रही है. इतिहास और झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को केंद्र में रखकर तैयार किए गए इस विशेषांक की लोग खुलकर प्रशंसा कर रहे हैं. हूल दिवस के अवसर पर प्रकाशित यह Hul Diwas 2026प्रस्तुति न केवल शहीदों को श्रद्धांजलि है, बल्कि नई पीढ़ी को उनके संघर्ष, बलिदान और ऐतिहासिक योगदान से परिचित कराने का एक महत्वपूर्ण प्रयास भी मानी जा रही है.
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