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March 3, 2026

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होली के बाद रूखे बालों को ऐसे बनाएं फिर से मुलायम और चमकदार

Holi Hair Care Tips: होली का त्योहार रंगों और खुशियों से भरा होता है, लेकिन इन रंगों का असर हमारे बालों पर भी पड़ता है. अबीर और केमिकल वाले गुलाल बालों को रूखा, बेजान और कमजोर बना सकते हैं. कई बार रंगों की वजह से बाल उलझने लगते हैं, टूटने लगते हैं और उनकी प्राकृतिक चमक भी कम हो जाती है. ऐसे में जरूरी है कि होली के बाद बालों की सही तरीके से देखभाल की जाए. कुछ आसान घरेलू उपाय और सही हेयर केयर रूटीन अपनाकर आप अपने बालों को दोबारा स्वस्थ, मुलायम और चमकदार बना सकते हैं. तुरंत हल्के शैम्पू से धोएं रंग स्पोर्ट्सने के बाद बालों को ज्यादा देर तक बिना धोए न रखें. माइल्ड या हर्बल शैम्पू से 1–2 बार हल्के हाथों से धोएं. जोर से रगड़ने से बाल और कमजोर हो सकते हैं. गुनगुने तेल से मसाज नारियल तेल या बादाम तेल को हल्का गुनगुना करके 20–30 मिनट तक बालों में मसाज करें. इससे सूखापन कम होगा और जड़ों को पोषण मिलेगा. डीप कंडीशनिंग जरूर करें शैम्पू के बाद अच्छा कंडीशनर लगाएं. हफ्ते में एक बार हेयर मास्क या दही और शहद का पैक भी लगा सकते हैं. इससे बालों की नमी वापस आएगी. अंडा या दही हेयर पैक अगर बाल ज्यादा रूखे हो गए हैं तो अंडे का सफेद हिस्सा या दही लगाएं. 20 मिनट बाद धो लें. इससे बाल मुलायम और मजबूत बनेंगे. हीट स्टाइलिंग से बचें होली के बाद कुछ दिनों तक हेयर ड्रायर, स्ट्रेटनर या कर्लर का इस्तेमाल न करें. इससे बालों को रिकवर होने का समय मिलेगा. खूब पानी पिएं सिर्फ बाहर से ही नहीं, अंदर से भी बालों की देखभाल जरूरी है. पर्याप्त पानी और पौष्टिक आहार लें. यह भी पढ़ें: कम उम्र में ही हो गई गंजेपन की शुरुआत? पुरुषों की ये 5 गलतियां हैं जिम्मेदार यह भी पढ़ें: रात की ये 3 आदतें बालों को बना देती हैं कमजोर, गंजेपन से बचना है तो तुरंत करें सुधार The post होली के बाद रूखे बालों को ऐसे बनाएं फिर से मुलायम और चमकदार appeared first on Naya Vichar.

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फ्रांस बढ़ाएगा परमाणु हथियार, मैक्रों ने नई न्यूक्लियर नीति का किया ऐलान, US से मिले झटके बाद लिया फैसला

France Nuclear Policy: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने परमाणु हथियारों के संभावित उपयोग से जुड़ी फ्रांस की नीति (डॉक्ट्रिन) में बदलाव की घोषणा की है. उन्होंने इसे देश की प्रतिरोधक (डिटरेंस) रणनीति के नए चरण की शुरुआत बताया. फ्रांस के बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों वाले सैन्य अड्डे से इस मुद्दे पर संबोधित किया. मैक्रों ने कहा कि पेरिस अपनी परमाणु नीति को नाटो के व्यापक मिशन के अनुरूप समायोजित करेगा, लेकिन अपने परमाणु शस्त्रागार पर पूर्ण राष्ट्रीय संप्रभुता बनाए रखेगा. उन्होंने यूरोपीय सहयोगियों को परमाणु प्रतिरोध अभ्यासों में भाग लेने का निमंत्रण भी दिया, ताकि महाद्वीपीय सुरक्षा समन्वय को मजबूत किया जा सके.  फ्रांस 24 की रिपोर्ट के अनुसार, मैक्रों ने कहा, ‘मैं चाहता हूं कि यूरोपीय देश अपनी किस्मत पर फिर से खुद नियंत्रण हासिल करें.’ मैक्रों ने जोर देकर कहा कि फ्रांस की परमाणु क्षमता शांति बनाए रखने के लिए समर्पित रहेगी, लेकिन उन्होंने देश के शस्त्रागार की ताकत को भी रेखांकित किया. उन्होंने चेतावनी दी कि फ्रांस की परमाणु शक्ति इतनी प्रभावशाली है कि ‘कोई भी देश, कोई भी ताकत, चाहे वह कितनी भी मजबूत क्यों न हो, उससे उबर नहीं सकेगी.’ फ्रांस: 10 मार्च को शिखर सम्मेलन रिपोर्ट के अनुसार, दशकों बाद फ्रांस पहली बार अपने परमाणु वारहेड्स (परमाणु हथियारों की संख्या) बढ़ाने की तैयारी में है. यह फैसला रूस-यूक्रेन युद्ध और ट्रांस-अटलांटिक रक्षा गारंटी के भविष्य को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच लिया गया है. राष्ट्रपति ने यह भी घोषणा की कि फ्रांस 10 मार्च को पेरिस में एक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसका उद्देश्य परमाणु ऊर्जा के विकास और उपयोग को बढ़ावा देना है. उन्होंने कहा कि फ्रांस नागरिक परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अच्छी स्थिति में है. फ्रांस की न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन फ्रांस की परमाणु प्रतिरोध नीति एक रक्षात्मक रणनीति पर आधारित है, जिसका उद्देश्य देश के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है. फ्रांसीसी संविधान के तहत राष्ट्रपति सेना के सर्वोच्च कमांडर होते हैं और परमाणु हथियारों के संभावित उपयोग का अंतिम निर्णय उन्हीं के पास होता है. फ्रांस की परमाणु त्रयी (न्यूक्लियर ट्रायड) में चार परमाणु-सशस्त्र पनडुब्बियां शामिल हैं. ले त्रिओंफां, ले तेमेरेर, ले विजिलां और ले तेरिब्ल, जो अटलांटिक तट पर स्थित इल लॉन्ग बेस पर तैनात हैं. 1972 से अब तक कम से कम एक पनडुब्बी लगातार गश्त पर रहती है, जिससे निरंतर हमले की क्षमता सुनिश्चित होती है. विमानवाहक पोत Charles de Gaulle भी परमाणु-सशस्त्र राफेल लड़ाकू विमानों को तैनात करने में सक्षम है. ये भी पढ़ें:- कुवैत ने 3 अमेरिकी F-15E विमानों को मार गिराया, US का बयान आया सामने स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट और फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के अनुमानों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि फ्रांस के पास लगभग 290 परमाणु वारहेड हैं. इस तरह वह रूस, अमेरिका और चीन के बाद दुनिया की चौथी सबसे बड़ी परमाणु शक्ति है. यूरोप पर अमेरिकी दबाव और रूस-यूक्रेन युद्ध ने बदला परिदृश्य मैक्रों का यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के बाद यूरोप की सुरक्षा संरचना में बदलाव आ रहे हैं. साथ ही यूक्रेन, ग्रीनलैंड और नाटो को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ तनाव भी बना हुआ है. यूरोपीय नेताओं के बीच अमेरिका की पारंपरिक ‘न्यूक्लियर अम्ब्रेला’ (परमाणु सुरक्षा छतरी) को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है. ऐतिहासिक रूप से अमेरिका ने नाटो सहयोगियों को परमाणु सुरक्षा का आश्वासन दिया है, जिससे उन्हें स्वतंत्र परमाणु क्षमता विकसित करने की आवश्यकता नहीं पड़ी. यूरोपीय संघ के भीतर फ्रांस ही एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न देश है. ये भी पढ़ें:- अमेरिका-इजराइल ने ईरान के न्यूक्लियर साइट पर किया हमला पिछले महीने म्यूनिख में मैक्रों ने कहा था, ‘हमें परमाणु प्रतिरोध की अवधारणा को फिर से परिभाषित करना होगा.’ उन्होंने बताया कि जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और अन्य यूरोपीय नेताओं के साथ इस विषय पर रणनीतिक संवाद हो चुका है. उन्होंने कहा, ‘यूरोप को एक भू-नेतृत्वक शक्ति बनना सीखना होगा.’ The post फ्रांस बढ़ाएगा परमाणु हथियार, मैक्रों ने नई न्यूक्लियर नीति का किया ऐलान, US से मिले झटके बाद लिया फैसला appeared first on Naya Vichar.

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होगी बारिश या बढ़ेगा तापमान, जानें होली में कैसा रहेगा मौसम

Holi Weather Forecast : IMD के अनुसार, एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) की वजह से मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है. 4 से 8 मार्च  के बीच जम्मू-कश्मीर में, 7 और 8 मार्च को हिमाचल प्रदेश में जबकि 8 मार्च उत्तराखंड में हल्की बारिश के साथ बर्फबारी की संभावना है. राजस्थान में तापमान सामान्य से ऊपर राजस्थान में तापमान बढ़ने लगा है. तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया जा रहा है. मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ेगा. मौसम केंद्र जयपुर ने बताया कि इस समय राज्य के अधिकांश भागों में न्यूनतम व अधिकतम तापमान सामान्य से 2-6 डिग्री सेल्सियस ऊपर दर्ज किया जा रहा है. आगामी एक सप्ताह मौसम शुष्क रहने की संभावना है. दिल्ली का मौसम कैसा रहेगा दिल्ली का अधिकतम तापमान मंगलवार को 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है. आसमान साफ रहेगा. वहीं 4 मार्च को यानी होली के दिन अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस जबकि न्यूनतम तापमान 15 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है. इस दिन भी आसमान साफ रहने की संभावना व्यक्त की गई है. बिहार का मौसम कैसा रहेगा मौसम विभाग के अनुसार, बिहार में 6 मार्च तक मौसम सामान्य और संतुलित रहने की संभावना है. 7 मार्च से तापमान में और बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. अधिकतम तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे दिन में गर्मी बढ़ने की संभावना है. इन इलाकों का अधिकतम तापमान बढ़ेगा 1. उत्तर-पश्चिम हिंदुस्तान के मैदानी इलाकों में अगले 5 दिनों में अधिकतम तापमान 2-4°C तक धीरे-धीरे बढ़ेगा. इसके बाद तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा. 2. मध्य हिंदुस्तान के मैदानी इलाकों में अगले 5 दिनों में तापमान 2-4°C तक धीरे-धीरे बढ़ेगा. इसके बाद अगले 2 दिनों में कोई खास बदलाव नहीं होगा. यह भी पढ़ें : होली से पहले ही बदलेगा मौसम का मिजाज, बिहार में गर्मी दिखाएगी अपना रौद्र रूप 3. छत्तीसगढ़ और विदर्भ में अगले 3 दिनों में तापमान लगभग 2-3°C बढ़ने की संभावना है, उसके बाद कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं होगा. 4. महाराष्ट्र में अगले 4 दिनों के दौरान तापमान 2-4°C तक धीरे-धीरे बढ़ने की संभावना है. इसके बाद अगले 3 दिनों में तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा. 5. गुजरात में अगले 3 दिनों में तापमान 3-5°C तक धीरे-धीरे बढ़ने की संभावना है. इसके बाद अगले 3 दिनों में कोई खास बदलाव नहीं होगा. The post होगी बारिश या बढ़ेगा तापमान, जानें होली में कैसा रहेगा मौसम appeared first on Naya Vichar.

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आज दिखेगा ब्लड मून, होली से पहले पूर्ण चंद्रग्रहण का अद्भुत नजारा न चूकें

Blood Moon 2026:  आज 3 मार्च 2026, मंगलवार का दिन एक अनोखी खगोलीय घटना का साक्षी बनने जा रहा है.  साल 2026 का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण आज रात दिखाई देगा, ठीक होली के रंगों से एक दिन पहले यानी 4 मार्च से पहले.  यानी 3 मार्च की रात आकाश में एक अद्भुत खगोलीय घटना घटित होने जा रही है. चंद्रमा सीधे पृथ्वी की छाया से गुजरेगा और पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई देगा. खास बात यह है कि इस बार ग्रहण एक सुविधाजनक समय पर लगेगा, इसलिए इसे देखने के लिए न तो अलार्म लगाने की जरूरत है और न ही आधी रात को नींद तोड़ने की. ऑस्ट्रेलिया और ऑटेरोआ (न्यूजीलैंड) इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए सबसे उपयुक्त स्थानों में होंगे. कैसे शुरू होगा यह खगोलीय नजारा? मंगलवार शाम को पूर्ण और चमकीले चंद्रमा पर धीरे-धीरे पृथ्वी की छाया पड़नी शुरू होगी. शुरुआत में यह बदलाव हल्का सा लगेगा, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतेगा, चंद्रमा का एक हिस्सा अंधकार में डूबता जाएगा. इस चरण को आंशिक ग्रहण कहा जाता है. जब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की गहरी छाया में प्रवेश कर जाएगा, तब वह लाल रंग की आभा में चमकने लगेगा. खगोलविद इस क्षण को “पूर्णता” कहते हैं. यही वह समय होता है जब चंद्रमा का रूप सबसे आकर्षक और रहस्यमय दिखाई देता है. क्यों कहा जाता है ‘रक्त चंद्रमा’? पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा का लाल दिखाई देना लोगों के मन में जिज्ञासा और आश्चर्य पैदा करता है. इसी वजह से इसे “रक्त चंद्रमा” या “ब्लड मून” कहा जाता है. इतिहास में कई संस्कृतियों ने इस लालिमा को अशुभ संकेत के रूप में देखा, लेकिन आधुनिक विज्ञान इसके पीछे का स्पष्ट कारण बताता है. जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तो सूर्य की सीधी रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती. पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को मोड़कर चंद्रमा तक पहुंचाता है. इस प्रक्रिया में नीली रोशनी बिखर जाती है और केवल लाल रंग की किरणें चंद्रमा तक पहुंच पाती हैं. इसी कारण चंद्रमा लाल दिखाई देता है. चंद्र ग्रहण कब और कितनी देर तक रहेगा? चंद्र ग्रहण एक धीमी गति से घटित होने वाली घटना है, जो कई घंटों तक चलती है. इस बार चंद्रमा को पृथ्वी की छाया में पूरी तरह प्रवेश करने में लगभग 75 मिनट लगेंगे. इसके बाद करीब एक घंटे तक पूर्ण ग्रहण रहेगा, जब चंद्रमा पूरी तरह लाल दिखाई देगा. फिर अगले 75 मिनट में चंद्रमा धीरे-धीरे छाया से बाहर निकल आएगा और अपनी सामान्य चमक में लौट आएगा. चूंकि पृथ्वी की छाया चंद्रमा से काफी बड़ी होती है, इसलिए पृथ्वी के रात्रि भाग में रहने वाले सभी लोग इस घटना को लगभग एक ही समय पर देख सकेंगे. केवल स्थानीय समय के अनुसार देखने का समय अलग-अलग होगा. ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में कैसा रहेगा दृश्य? पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में ग्रहण की शुरुआत उस समय होगी जब चंद्रमा क्षितिज के नीचे होगा. जैसे-जैसे चंद्रमा ऊपर उठेगा, वह आंशिक रूप से छाया में आ चुका होगा. गोधूलि की हल्की रोशनी में इसे देखना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, क्योंकि चंद्रमा सूर्यास्त के समय उगेगा. हालांकि थोड़े धैर्य के साथ इंतजार करने पर दृश्य स्पष्ट होता जाएगा. जैसे-जैसे अंधेरा गहराएगा, लालिमा लिए चंद्रमा पूर्वी आकाश में साफ दिखाई देने लगेगा. ऑस्ट्रेलिया के अन्य हिस्सों में ग्रहण थोड़ी देर से शुरू होगा. वहीं ऑटेरोआ (न्यूजीलैंड) में स्थानीय समयानुसार रात 10 बजकर 50 मिनट पर ग्रहण की शुरुआत होगी. यहां आसमान पूरी तरह अंधेरा होगा और चंद्रमा उत्तर दिशा में काफी ऊंचाई पर रहेगा, जिससे यह दृश्य बेहद शानदार दिखाई देगा. चंद्रमा लाल क्यों हो जाता है? जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है, तो शुरुआत में वह काला या धुंधला दिखाई देता है. लेकिन जैसे ही वह पूरी तरह छाया में समा जाता है, पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को मोड़कर चंद्रमा तक पहुंचाता है. वायुमंडल में मौजूद धूल, बादल और कण इस लालिमा की तीव्रता को प्रभावित करते हैं. यदि वातावरण अधिक धूल भरा हो, तो चंद्रमा गहरा लाल दिखाई देगा. यदि वातावरण साफ और पारदर्शी हो, तो चंद्रमा हल्के नारंगी रंग में चमक सकता है. ये भी पढ़ें: सूतक काल आरंभ, आज लगने जा रहा है साल का पहला चंद्रग्रहण इस पूरी प्रक्रिया को ‘रेले प्रकीर्णन’ कहा जाता है. यही कारण है कि दिन में आकाश नीला दिखाई देता है, क्योंकि नीली रोशनी अधिक बिखरती है और लाल रोशनी लंबी दूरी तय कर पाती है. हर बार पूर्ण चंद्र ग्रहण क्यों नहीं होता? हालांकि चंद्रमा हर महीने पृथ्वी की परिक्रमा करता है, फिर भी हर पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण नहीं लगता. इसका कारण यह है कि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा से थोड़ी झुकी हुई है. इसलिए सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा हमेशा एक सीध में नहीं आते. जब ये तीनों पिंड बिल्कुल सीध में आ जाते हैं, तभी पूर्ण चंद्र ग्रहण संभव होता है. अन्य समय में चंद्रमा केवल पृथ्वी की बाहरी छाया यानी उपछाया से गुजरता है, जिससे हल्का सा धुंधलापन आता है, जिसे सामान्य आंखों से पहचानना मुश्किल होता है. 2029 तक आखिरी मौका खगोलविदों के अनुसार, यह पूर्ण चंद्र ग्रहण 2029 तक “रक्त चंद्रमा” देखने का आखिरी अवसर होगा. 2027 में होने वाले तीन ग्रहण केवल उपछाया ग्रहण होंगे, जिन्हें महसूस करना लगभग असंभव होगा. इसलिए इस बार का ग्रहण विशेष महत्व रखता है. एक अद्भुत अनुभव चंद्र ग्रहण हमें यह याद दिलाता है कि हम एक विशाल और रहस्यमय ब्रह्मांड का हिस्सा हैं. इसे देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती—सिर्फ साफ आसमान और थोड़े धैर्य की जरूरत है. जब चंद्रमा लाल आभा में चमके, तो उस क्षण को जरूर महसूस करें. यह न केवल एक वैज्ञानिक घटना है, बल्कि प्रकृति का एक मनमोहक दृश्य भी है, जिसे हर किसी को कम से कम एक बार अवश्य देखना चाहिए. The post आज दिखेगा ब्लड मून, होली से पहले पूर्ण चंद्रग्रहण का अद्भुत नजारा न चूकें appeared first on Naya Vichar.

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सूतक काल आरंभ, आज लगने जा रहा है साल का पहला चंद्रग्रहण

Chandra Grahan 2026 Sutak Kaal: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगने जा रहा है. खास बात यह है कि यह ग्रहण होली के दिन पड़ रहा है, जिसके कारण धार्मिक मान्यताओं में इसका महत्व और बढ़ गया है. यह चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक चलेगा. ग्रहण के साथ ही सूतक काल भी प्रभावी रहेगा, जिसे शास्त्रों में विशेष महत्व दिया गया है. सूतक काल शुरू चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है. इसी आधार पर 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से सूतक प्रभावी हो चुका है. ग्रहण समाप्त होते ही सूतक काल भी समाप्त माना जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल के दौरान शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते. इस समय को संयम, साधना और सावधानी का काल माना जाता है. सूतक काल के नियम क्या हैं? सूतक लगते ही कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है: पूजा-पाठ या देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श न करें. किसी भी प्रकार के शुभ या मांगलिक कार्य से बचें. बाल, नाखून या दाढ़ी कटवाने से परहेज करें. भोजन पकाना या खाना वर्जित माना जाता है. बाहरी मेल-मिलाप और अनावश्यक यात्राओं से बचने की सलाह दी जाती है. हालांकि ये सभी नियम धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं, और लोग अपनी आस्था के अनुसार इनका पालन करते हैं. हिंदुस्तान के प्रमुख शहरों में चंद्र ग्रहण का समय देश के अलग-अलग शहरों में चंद्र ग्रहण अलग-अलग समय पर दिखाई देगा. नीचे प्रमुख शहरों के समय दिए गए हैं: दिल्ली दिल्ली: शाम 6:26 बजे से 6:46 बजे तक (20 मिनट) बिहार और झारखंड पटना: शाम 5:55 बजे से 6:46 बजे तक (51 मिनट) रांची: शाम 5:55 बजे से 6:46 बजे तक (51 मिनट) उत्तर प्रदेश और आसपास के शहर लखनऊ: शाम 5:59 बजे से 6:47 बजे तक (48 मिनट) कानपुर: शाम 6:14 बजे से 6:46 बजे तक (32 मिनट) वाराणसी: शाम 6:04 बजे से 6:46 बजे तक (43 मिनट) मेरठ: शाम 6:17 बजे से 6:47 बजे तक नोएडा: शाम 6:20 बजे से 6:47 बजे तक आगरा: शाम 6:16 बजे से 6:47 बजे तक प्रयागराज: शाम 6:08 बजे से 6:46 बजे तक (38 मिनट) पूर्वी हिंदुस्तान कोलकाता: शाम 5:43 बजे से 6:46 बजे तक (1 घंटा 03 मिनट) भुवनेश्वर: शाम 5:54 बजे से 6:46 बजे तक (52 मिनट) गुवाहाटी: शाम 5:27 बजे से 6:46 बजे तक (1 घंटा 19 मिनट) दक्षिण हिंदुस्तान चेन्नई: शाम 6:21 बजे से 6:46 बजे तक (26 मिनट) हैदराबाद: शाम 6:26 बजे से 6:46 बजे तक (20 मिनट) बेंगलुरु: शाम 6:32 बजे से 6:46 बजे तक (14 मिनट) क्यों खास माना जा रहा है यह ग्रहण? होली जैसे बड़े त्योहार के दिन चंद्र ग्रहण लगना धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है. कई लोग इसे केवल खगोलीय घटना मानते हैं, जबकि कई घरों में इसे लेकर नियम-कायदे अपनाए जाते हैं. पूर्णिमा के दिन ग्रहण लगना भी इसे अधिक प्रभावशाली बनाता है. इसलिए इस बार का चंद्र ग्रहण धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से चर्चा में है. 3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आस्था और परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण दिन भी है. सूतक काल के नियमों का पालन करते हुए लोग इसे श्रद्धा और सावधानी के साथ देखेंगे. यदि आप इसे देखना चाहते हैं, तो अपने शहर के समय के अनुसार तैयार रहें और इस दुर्लभ खगोलीय घटना का साक्षी बनें. The post सूतक काल आरंभ, आज लगने जा रहा है साल का पहला चंद्रग्रहण appeared first on Naya Vichar.

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दबी हुई ऊर्जा का सांस्कृतिक विस्तार है होली, पढ़ें परिचय दास का आलेख

होली केवल लोकानुष्ठान नहीं, यह मनुष्य की सामूहिक आत्मा का खुला पाठ है-रंगों में लिखा हुआ, हंसी में उच्चरित और वसंत की हवा में बहता हुआ. यही अनुभूति सामान्य जन भी अपने सहज शब्दों में व्यक्त करता है. पीली सरसों का अनंत फैलाव केवल कृषि-दृश्य नहीं, वह प्रकृति और मनुष्य के सहअस्तित्व की दृश्य कविता है. धरती यहां स्वयं रंग का पाठ पढ़ाती है, कि जीवन अपनी पूर्णता में बहुरंगी है. वसंत ऋतु की कोमलता, आम्र मंजरियों की गंध और हवा की मृदुल थिरकन मिलकर एक ऐसा वातावरण रचती है, जिसमें ऋतु परिवर्तन उत्सव में रूपांतरित हो जाता है. किसी सभ्यता की परिपक्वता इसी से आंकी जा सकती है कि वह प्रकृति के इस रूपांतरण को कितनी सृजनात्मकता से सामाजिक अनुभव में बदलती है. होली सामाजिक संरचना का अद्भुत क्षण है, जहां स्थापित पदानुक्रम कुछ समय के लिए शिथिल पड़ जाते हैं. जिनके बीच सामान्य दिनों में दूरी रहती है, वे इस दिन एक-दूसरे के कपोलों पर अबीर लगा रहे होते हैं. यह सामाजिक भूमिका परिवर्तन का उत्सव है-एक ऐसा अवसर जब व्यक्ति अपनी कठोर परिभाषाओं से बाहर निकलकर सामूहिक ‘हम’ में विलीन होता है. रंग यहां सजावट नहीं, पहचान की सीमाओं को धुंधला करने वाली प्रक्रिया है. होली दबी हुई ऊर्जा का सांस्कृतिक विसर्जन भी है. मनुष्य अपने भीतर अनेक इच्छाएं, संकोच और दबाव संचित करता है. इस दिन वह उन्हें रंग और हंसी में मुक्त करता है. चौतार पर गूंजते फगुआ के गीत, ढोलक की थाप पर थिरकते पांव, स्त्रियों के स्वर में छिपा परिहास-ये सब उस सामूहिक अवचेतन के झरोखे हैं, जो सामान्य दिनों में मौन रहता है. यहां वह स्वीकृत और सौंदर्यपूर्ण रूप में अभिव्यक्त होता है. यह उत्सव समय की रैखिकता को तोड़ देता है. दैनिक जीवन की क्रमबद्ध गति से अलग एक ‘विशेष काल’ निर्मित होता है. इस काल में नियम ढीले पड़ते हैं, भाषा मुक्त होती है, शरीर लय में खुलकर नाचता है. यह अस्थायी स्वतंत्रता अव्यवस्था नहीं रचती, बल्कि समाज को अपनी कठोरताओं से राहत देती है. हर सुदृढ़ सामाजिक संरचना को ऐसे अवसरों की आवश्यकता होती है, जहां व्यवस्था स्वयं को थोड़ी देर के लिए विराम दे सके. रंगों के इस उत्सव में सौंदर्य स्थिर रूप में नहीं, प्रक्रिया में है. रंग एक-दूसरे में घुलते हैं, चेहरे बदलते हैं, आकृतियां धुंधली होती हैं. परिवर्तनशीलता ही यहां सौंदर्य है. शुद्ध और पृथक रूप की अपेक्षा मिश्रण अधिक जीवंत प्रतीत होता है. लाल का नीले में, हरे का पीले में विलय यह संकेत देता है कि मनुष्य संबंधों का समुच्चय है, अलगाव का नहीं. होली शक्ति संबंधों का क्षणिक पुनर्संतुलन भी रचती है. फगुआ के गीतों में व्यंग्य की महीन धार व्यवस्था पर हल्की चोट करती है. स्त्रियां गीतों में पुरुषों की चुटकी लेती हैं, युवा बुजुर्गों पर रंग डालते हैं. यह विनाशकारी विद्रोह नहीं, बल्कि सौम्य पुनर्संतुलन है. समाज अपनी ही संरचना पर मुस्कराता है और इसी मुस्कान में लचीलापन पाता है. होलिका दहन की अग्नि इस उत्सव का सांकेतिक केंद्र है. लोग लकड़ियां डालते हैं और लपटें आकाश की ओर उठती हैं. यह दृश्य स्मरण कराता है कि हर संस्कृति अपने भीतर के अंधकार को दृश्य बनाकर ही उससे मुक्त होती है. राख में बदलती लकड़ियां संकेत देती हैं कि जड़ता अनंत नहीं, रूपांतरण संभव है. पीली सरसों की गंध और गुलाल की महक जब हवा में मिलती है, तो एक बहु-इंद्रिय संसार बनता है-दृश्य, गंध, स्पर्श और ध्वनि का संयुक्त अनुभव. यह बहुलता जीवन की बहुलता का रूपक है. होली मनुष्य को यह स्मरण कराती है कि वह केवल विचारशील प्राणी नहीं, संवेदनशील भी है. संध्या के समय जब रंग धुल जाते हैं और लोग शांत बैठते हैं, तब उत्सव का वास्तविक प्रभाव उसकी पश्चात शांति में दिखाई देता है. रंग भले बह गये हों, पर एक कोमलता मन में शेष रहती है. सामाजिक दूरी कुछ कम हुई होती है, हंसी की स्मृति बनी रहती है. यही अवशेष उत्सव का स्थायी अर्थ है. कहा जा सकता है कि यह उत्सव मनुष्य की सामूहिक कल्पना का दृश्य रूप है, जहां प्रकृति और संस्कृति, शरीर और समाज, स्पोर्ट्स और दर्शन एक साथ उपस्थित होते हैं. वसंत की हरीतिमा, सरसों का स्वर्ण, चौतार की लय और फगुआ का रस मिलकर एक ऐसा क्षण रचते हैं, जहां जीवन स्वयं को रंग में पहचानता है. इस उत्सव का लालित्य केवल बाहरी रंगों में नहीं, उस अदृश्य प्रक्रिया में है, जो मनुष्य को अपने कठोर रूप से निकालकर एक कोमल, सामूहिक, बहुरंगी अस्तित्व में प्रवेश कराती है. होली केवल देखी नहीं जाती, उसमें प्रवेश करना पड़ता है. दर्शक बने रहना संभव नहीं, रंग अंततः दर्शक को भी सहभागी बना लेते हैं. यही सहभागिता उसकी सच्ची व्याख्या है. होली मनुष्य की उस गहरी आकांक्षा का सार्वजनिक रूप है, जिसमें वह सीमाओं से परे जाना चाहता है-विनाश करके नहीं, स्पोर्ट्सकर, तोड़कर नहीं, रंगकर. यहां विरोध भी परिहास में बदल जाता है और दूरी भी स्पर्श में. इस प्रकार होली किसी एक भूगोल का उत्सव नहीं, मनुष्य की सार्वभौमिक चेतना का रूपक है, जहां जीवन, अपनी जटिलताओं के बीच, रंग का एक क्षण खोज लेता है और उसी क्षण में स्वयं को पुनः रच लेता है. (ये लेखक के निजी विचार हैं.) The post दबी हुई ऊर्जा का सांस्कृतिक विस्तार है होली, पढ़ें परिचय दास का आलेख appeared first on Naya Vichar.

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अमेरिकी राजदूत गोर कुछ ज्यादा ही सक्रिय हैं, पढ़ें प्रभु चावला का आलेख

हाल ही में, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अपने एक्स हैंडल पर एक महत्वपूर्ण तस्वीर साझा की. इसमें मंत्री के साथ विवादास्पद अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक और राजदूत सर्जियो गोर आत्मीय मुद्रा में दिखाई दे रहे थे. यह छवि शिष्टाचार के बजाय भाईचारे का संदेश दे रही थी. अतीत में राजकीय यात्राओं के दौरान ऐसी तस्वीरें सार्वजनिक मंचों पर शायद ही कभी साझा की जाती थीं. अमेरिकी राजदूत गोर ने वह अंतर पैदा कर दिया है. राजदूत पारंपरिक रूप से वे अदृश्य प्रेरक होते हैं, जो छायादार गलियारों में फुसफुसाकर परामर्श देते हैं, न कि आक्रामक स्वामी की तरह सुर्खियों में छाये रहते हैं. फिर भी, नयी दिल्ली के व्यस्त राजनयिक मंच पर, हिंदुस्तान में अमेरिका के नये राजदूत दूत गोर ने इस बुनियादी सिद्धांत को ऐसी भव्यता के साथ तोड़ा है, जो ढिठाई की सीमा को छूती है. मात्र 38 वर्ष की आयु में, हालिया स्मृति में इस महत्वपूर्ण पद पर तैनात होने वाले सबसे कम उम्र के राजदूत, एक बवंडर की तरह आये हैं. उन्होंने 14 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना परिचय पत्र सौंपने से बहुत पहले ही अपना संचालन शुरू कर दिया था. उनका अति सक्रिय कार्यकाल अमेरिकी अतिरेक का सुझाव देता है. उन्होंने रक्षा प्रतिष्ठानों, राज्यों की राजधानियों, कॉरपोरेट बोर्डरूम और नेतृत्वक सैलूनों के दौरे पहले ही पूरे कर लिये हैं. उन्होंने अपने आवास पर भव्य दावतों की मेजबानी की है. हिंदुस्तानीय मंत्री और सांसद न केवल उनसे मिलते हैं, बल्कि इन मुलाकातों को प्रतिष्ठा के प्रतीक के रूप में प्रचारित करते हैं. कोई उन्हें किसी विदेशी राष्ट्रपति का नामित व्यक्ति नहीं, बल्कि एक वास्तविक ‘अमेरिकी वायसराय’ समझने की भूल कर सकता है, जिसकी सत्ता के हर गलियारे तक बेरोकटोक पहुंच है. वह कोई साधारण राजनयिक नहीं हैं. सोवियत मूल के नेतृत्वक संचालक और ट्रंप के वफादार गोर कभी व्हाइट हाउस प्रेसिडेंशियल पर्सनेल ऑफिस के प्रमुख थे. उनका नामांकन विवादों के घेरे में था : एलन मस्क ने एक बार उन्हें ‘सांप’ कहा था, क्योंकि उन पर आरोप था कि उन्होंने हजारों अन्य लोगों की जांच करते समय मस्क के व्यक्तिगत सुरक्षा मंजूरी कागजी कार्रवाई में जानबूझकर देरी की थी. पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने उन्हें हिंदुस्तान-विशिष्ट राजनयिक अनुभव की कमी का हवाला देते हुए अयोग्य करार दिया था. आलोचकों ने उन्हें एक ऐसे ‘इनसाइडर ऑपरेटर’ के रूप में चित्रित किया, जो भाषा की बारीकियों के बजाय वफादारी परीक्षणों में माहिर है. सीनेट की सुनवाई में गोर ने गरजते हुए कहा था कि ट्रंप ने यह बिल्कुल ‘स्पष्ट कर’ दिया है कि हिंदुस्तान को रूसी तेल खरीदना बंद करना होगा. वाशिंगटन और उसके बाहर उनके विरोधियों ने उन्हें ट्रंप की दुनिया में सबसे मुखर हिंदुस्तान विरोधी आवाजों में से एक बताया था. इसकी तुलना उनके साथियों के शालीन संयम से करें. यूरोप, जापान, चीन और रूस के राजदूत दिल्ली में खुद को आधिकारिक सम्मेलनों, संक्षिप्त विज्ञप्तियों और औपचारिक हाथ मिलाने तक सीमित रखते हैं. गोर के तत्काल पूर्ववर्ती एरिक गार्सेटी ने भी ऊर्जावान होने के बावजूद नपा-तुला व्यवहार बनाये रखा था. पिछले महीने गोर अमेरिकी हिंद-प्रशांत कमान के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे पापारो के साथ हिंदुस्तानीय सेना के पश्चिमी कमान मुख्यालय के हाई प्रोफाइल दौरे के लिए चंडीगढ़ पहुंचे. वहां उन्हें परिचालन तत्परता, पश्चिमी मोर्चे पर रणनीतिक गतिशीलता और यहां तक कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में जानकारी दी गयी-ये वे विवरण हैं, जो आमतौर पर संप्रभु राष्ट्र की अपनी नजरों के लिए आरक्षित होते हैं. हिंदुस्तानीय विपक्षी दल आक्रोश से भड़क उठे. फिर भी गोर ने एक्स पर गर्व से लिखा : ‘अभी चंडीगढ़ उतरा हूं. पश्चिमी कमान के दौरे के लिए उत्सुक हूं.’ हिंदुस्तान के नेतृत्वक, सैन्य और व्यापारिक अभिजात वर्ग-फोर स्टार जनरलों से लेकर बैकबेंच सांसदों तक, औद्योगिक दिग्गजों से लेकर राज्य स्तर के नौकरशाहों तक-के साथ इस निरंतर मेलजोल ने गोर के अंतर्निहित उद्देश्यों पर परेशान करने वाले सवाल खड़े कर दिये हैं. विपक्षी दलों ने, जो पहले से ही बढ़ते अमेरिकी असर के प्रति सतर्क हैं, इस तमाशे को नयी दिल्ली के नीतिगत प्रतिष्ठान पर वाशिंगटन के अनुचित प्रभाव के प्रमाण के रूप में लिया है. जिसे गोर पुल बनाना कहते हैं, उनके आलोचक उसे प्रभाव का सौदा और हिंदुस्तान के निर्णय लेने वाले तंत्र में एक सुनियोजित पैठ मानते हैं. गोर हिंदुस्तान-अमेरिका व्यापार सौदे को आगे बढ़ाने, रूसी तेल खरीद से जुड़े टैरिफ समायोजन पर बातचीत करने और सेमीकंडक्टर तथा एआइ आपूर्ति शृंखलाओं के लिए ‘पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन’ जैसी पहलों का समर्थन करने में सहायक रहे हैं. अपने उद्घाटन दूतावास संबोधन और बाद की टिप्पणियों में उन्होंने खुद को एक अपरिहार्य सेतु निर्माता के रूप में पेश किया है. फिर भी, इस सौहार्द के नीचे एक चिंताजनक विषमता छिपी है. आलोचकों ने उनकी इस अति संलिप्तता के पैटर्न पर चिंता जतानी शुरू कर दी है. रक्षा समझौतों के बीच पश्चिमी कमान की गोर की यात्रा को एक बड़े सिंड्रोम के प्रतीक के रूप में कोसा गया है-जहां अमेरिकी दूत सलाह देना बंद कर देते हैं और निर्देश देना शुरू कर देते हैं. एक विदेशी राजदूत, जिसे अभी मुश्किल से मान्यता मिली है, एक फोर स्टार अमेरिकी एडमिरल के साथ संवेदनशील सैन्य चर्चाओं में शामिल है. यह कूटनीति नहीं है, शालीनता के लिबास में प्रभुत्व है. उनके पूर्ववर्तियों ने खुद को प्रोटोकॉल तक सीमित रखा था. गोर इससे परे जाते हैं. पहुंच की इस संस्कृति को विकसित करके, संभ्रांत लोगों को अपने आवास पर आमंत्रित करके, वायरल तस्वीरों के लिए पोज देकर और खुद को हिंदुस्तानीय सत्ता संरचनाओं की नसों में डालकर, गोर उस पुराने संदेह को खतरनाक बल देते हैं कि हिंदुस्तान अमेरिकी धुन पर नाचता है. नयी दिल्ली में गोर का यह अति सक्रिय आधिपत्य एक चेतावनी भरी कथा के रूप में काम करना चाहिए. राजनयिकों को अदृश्य प्रेरक बने रहना चाहिए, सलाहकार के रूप में कार्य नहीं करना चाहिए. हिंदुस्तान, जो प्राचीन भव्यता और आधुनिक पुनरुत्थान की सभ्यता है, ऐसे दूतों का हकदार है, जो स्वायत्तता को नष्ट किये बिना गठबंधन को ऊपर उठायें. इससे कम कुछ भी कूटनीति नहीं है, यह दूसरे नाम से प्रभुत्व है. यह उस स्वतंत्रता का अपमान है, जिसकी हिंदुस्तान इतनी मजबूती से रक्षा करता है. (ये लेखक के निजी विचार हैं.) The post अमेरिकी राजदूत गोर

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3 मार्च की टॉप 20 खबरें: ईरान और इजराइल के बीच भयंकर जंग, एक्टिव हुए पीएम मोदी, बंगाल में असम मॉडल की चर्चा

1. यूएस‑इजरायल के ईरान पर हमले के बाद हिंदुस्तान में अलर्ट जारी, ऐसे लोगों पर रहेगी खास नजर ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद हिंदुस्तान के भी कुछ इलाकों में प्रदर्शन हो रहे हैं. इसको लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने सभी राज्यों से इन विरोध प्रदर्शनों पर खास निगरानी रखने का निर्देश दिया है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 2. न न्यूक्लियर, न मिसाइल और न टेररिज्म, US-इजरायल क्यों ईरान पर हमला कर रहे? एक्सपर्ट ने बताई ये वजह अमेरिका ने ईरान पर क्यों हमला किया? यह एक ऐसा सवाल है जिसके कई उत्तर हो सकते हैं, जैसे ईरान पर आरोप लगाए जा सकते हैं कि वह न्यूक्लियर हथियार बना रहा है, या उसके पास ऐसी मिसाइलें हैं, जिनसे मिडिल ईस्ट में कई देशों पर खतरा मंडरा रहा है, या वह दुनिया भर में टेररिज्म फैला रहा है. सबके पास अपने-अपने कारण हैं, लेकिन हिंदुस्तानीय एक्सपर्ट ब्रह्मा चेलानी का इस बारे में दूसरा मत है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 3. सऊदी की तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला, धू-धूकर जली दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल एक्सपोर्ट फैसेलिटी ईरान इजरायल युद्ध की वजह से अब सऊदी अरब में भी हमले होने शुरू हो गए हैं. दुनिया की सबसे बड़ी तेल निर्यात सुविधा केंद्र पर ड्रोन से हमला हुआ, जिसके बाद वह आग के गोले के रूप में जलती नजर आई. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 4. अमेरिका-इजराइल ने ईरान के न्यूक्लियर साइट पर किया हमला अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच भयंकर जंग जारी है. इस बीच ईरान के न्यूक्लियर साइट पर हमला किया गया है. इसकी जानकारी IAEA (इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी) में ईरान के राजदूत ने दी है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 5. कुवैत ने 3 अमेरिकी F-15E विमानों को मार गिराया, US का बयान आया सामने मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध में एक चौकाने वाली घटना घटी. कुवैत ने 3 अमेरिकी F-15E विमानों को मार गिराया. जिसमें सभी 6 विमान चालक दल के सदस्य सुरक्षित रूप से बाहर निकल गए. सभी को बचा लिया गया है. विमानों को मार गिराने की घटना पर अमेरिका का भी बयान सामने आया है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 6. मिडिल ईस्ट में जंग: पीएम मोदी ने बहरीन के शाह, सऊदी अरब के युवराज और जॉर्डन के किंग से बात की मिडिल ईस्ट इस समय युद्ध की आग में जल रहा है. इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हमला कर दिया. जवाब में ईरान ने भी तोबड़तोड़ मिसाइल अटैक किया है. इस बीच हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहरिन, जॉर्डन और सऊद अरब से बात की. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 7. यूपी के संभल में होली से पहले मस्जिदों को तिरपाल से ढकी गई, सुरक्षा बढ़ाई गई उत्तर प्रदेश के संभल में होली पर्व में सुरक्षा को देखते हुए 10 से अधिक मस्जिदों को तिरपाल से ढक दी गई. होली से पहले सुरक्षा भी बढ़ा दी गई. पूरी समाचार यहां पढ़ें . 8. बांग्लादेशी घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए बंगाल में लागू होगा असम मॉडल, मालदा में बोले नितिन नबीन मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में हाल में नाम हटाये जाने का जिक्र करते हुए नबीन ने दावा किया कि निर्वाचन आयोग ने बंगाल में ‘50 लाख से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठियों’ को मताधिकार से वंचित कर दिया है. उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए बंगाल में भी असम मॉडल लागू किया जायेगा. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 9. इजरायल-ईरान वार पर बिहार प्रशासन की पहल, प्रवासियों के लिए 24×7 हेल्पलाइन नंबर जारी खाड़ी देशों में बढ़ते युद्ध संकट के बीच बिहार प्रशासन ने प्रवासी कामगारों के लिए विशेष हेल्पलाइन जारी की है. श्रम विभाग के सचिव दीपक आनंद ने कहा कि विदेशों में रह रहे किसी भी बिहारी को संकट में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा. 24 घंटे सहायता के लिए टीम अलर्ट मोड पर रहेगी. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 10. होली-रमजान पर बिहार में हाई अलर्ट, 30 हजार पुलिस फोर्स रहेंगे तैनात, DGP ने कहा- शांति भंग की तो होगी कार्रवाई होली और रमजान एक साथ पड़ने से बिहार में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. डीजीपी विनय कुमार ने शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर सभी जिलों को अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है. राज्यभर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर संवेदनशील इलाकों में खास निगरानी शुरू कर दी गई है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 11. विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों पर चर्चा के लिए बंगाल आ रहे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा की तारीख बहुत करीब आ गयी है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपनी टीम के साथ 2 दिन के दौरे पर कोलकाता में रहेंगे. इस दौरान वह बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों और जमीनी हकीकत की जानकारी लेंगे. इसके बाद कभी भी चुनाव की तारीखों की घोषणा हो सकती है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 12. अमित शाह का ‘परिवर्तन पैकेज’: 45 दिन में DA, 7वां वेतन आयोग और प्रशासनी नौकरी, ममता बनर्जी प्रशासन पर सीधा हमला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले अमित शाह ने दक्षिण 24 परगना जिले में परिवर्तन का आह्वान किया. उन्होंने प्रशासनी कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि बंगाल में भाजपा की प्रशासन बनने के 45 दिन के भीतर उन्हें महंगाई भत्ता दिया जायेगा. सातवें वेतन आयोग का लाभ मिलेगा और सभी रिक्त प्रशासनी पदों पर बहाली की जायेगी. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 13. वर्ल्ड कप में हार का हिसाब: PCB लगाएगा पाक खिलाड़ियों पर 50 लाख का जुर्माना? टी20 वर्ल्ड कप 2026 में पाकिस्तान टीम के खराब प्रदर्शन पर पीसीबी कड़ी कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है. PCB, टीम के निराशाजनक प्रदर्शन और सेमीफाइलन से पहले बाहर होने के बाद खिलाड़ियों पर आर्थिक दंड लगाने पर विचार कर रहा है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 14. सैमसन ने खोला 97 रन की पारी का राज, फोन और सोशल मीडिया से है कनेक्शन Sanju Samson ने रविवार को सुपर 8 के मैच में 50 गेंदों में नाबाद 97 रन बनाए, जिसमें 12 चौके और चार छक्के शामिल हैं. उनकी इस पारी की बदौलत हिंदुस्तान ने जीत हासिल करके सेमीफाइनल में जगह बनाई. सैमसन की इस बेशकीमती पारी की जमकर तारीफ हो रही है. इस बीच सैमसन ने अपनी 97

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A19 चिप और MagSafe समेत कई अपग्रेड के साथ लॉन्च हुआ Apple iPhone 17e, देखें फीचर्स और प्राइस

Apple ने आखिरकार अपने iPhone 17e को हिंदुस्तान समेत ग्लोबल मार्केट में लॉन्च कर दिया है. इसके साथ ही नई जनरेशन का iPad Air M4 भी पेश किया गया है. नया iPhone 17e दमदार A19 चिपसेट के साथ आता है और खास तौर पर उन यूजर्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है जो कम बजट में फ्लैगशिप जैसा परफॉर्मेंस चाहते हैं. यह फोन तीन अलग-अलग कलर ऑप्शन में उपलब्ध है. आइए एक नजर दाल लेते हैं इसके फीचर्स. iPhone 17e के फीचर्स iPhone 17e में 6.1-इंच का शानदार Super Retina XDR OLED डिस्प्ले दिया गया है. कंपनी का दावा है कि तेज धूप में भी इसकी ब्राइटनेस 1,200 निट्स तक पहुंच सकती है, यानी बाहर इस्तेमाल करते वक्त भी स्क्रीन साफ दिखाई देगी. डिस्प्ले की सेफ्टी के लिए इसमें Ceramic Shield 2 लगाया गया है. इतना ही नहीं, यह फोन IP68 रेटिंग के साथ आता है. यानी धूल और पानी से भी अच्छी सुरक्षा मिलती है. परफॉर्मेंस की बात करें तो iPhone 17e लेटेस्ट iOS 26 पर चलता है. इसके अंदर Apple का दमदार A19 चिपसेट मिल जाता है, जो एडवांस्ड 3nm टेक्नोलॉजी पर बना है. इस डिवाइस में 6-core CPU, 4-core GPU और 16-core Neural Engine दिया गया है. इसे खास तौर पर generative AI मॉडल्स के लिए ऑप्टिमाइज किया गया है. इतना ही नहीं, इसमें Apple का नया C1X cellular modem भी मिलता है, जो कंपनी के मुताबिक iPhone 16e में मौजूद C1 modem से करीब 2 गुना तेज काम करता है. कैमरा की बात करें तो iPhone 17e में 48MP का सिंगल रियर कैमरा दिया गया है. कंपनी का कहना है कि इसका 48MP Fusion कैमरा सिस्टम optical-quality 2x telephoto zoom देता है. यानी आपको एक तरह से 2-in-1 कैमरा एक्सपीरियंस मिलता है. इसके अलावा फोन में 24MP डिफॉल्ट फोटो कैप्चर, Night Mode, एडजस्टेबल फोकस वाला next-gen Portrait Mode, Smart HDR और 60fps तक 4K Dolby Vision वीडियो रिकॉर्डिंग जैसे दमदार फीचर्स भी शामिल हैं. iPhone 17e में चार्जिंग और कनेक्टिविटी को लेकर काफी काम की सुविधाएं दी गई हैं. यह USB-C के जरिए फास्ट वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट करता है, जिससे फोन करीब 30 मिनट में लगभग 50% तक चार्ज हो सकता है. वायरलेस चार्जिंग की बात करें तो इसमें MagSafe और Qi2 सपोर्ट मिलता है, जो 15W तक चार्जिंग देता है. कितनी है कीमत?  हिंदुस्तानीय बाजार में इसका बेस 256GB वेरिएंट 64,900 रुपये में उपलब्ध है. जबकि ज्यादा स्टोरेज चाहने वालों के लिए 512GB मॉडल 84,900 रुपये में आता है. अच्छी बात यह है कि इसे आप अपनी पसंद के तीन स्टाइलिश रंगों पिंक, ब्लैक और व्हाइट में चुन सकते हैं. यह भी पढ़ें: MWC 2026 में लॉन्च हुआ Motorola Razr Fold और Motorola Edge 70 Fusion, देखें फीचर्स The post A19 चिप और MagSafe समेत कई अपग्रेड के साथ लॉन्च हुआ Apple iPhone 17e, देखें फीचर्स और प्राइस appeared first on Naya Vichar.

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