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July 17, 2026

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ईरान के बंदर खमीर पर अमेरिका का भीषण हमला, सात की मौत! चाबहार पुल तबाह

US-Iran War : अमेरिका ने शुक्रवार को ईरान के दक्षिणी होरमुजगान इलाके में जोरदार हवाई हमले किए. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बंदर खमीर शहर में हुए हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत हुई है. सोशल मीडिया पर आए वीडियो में भी कई पुल पूरी तरह ध्वस्त दिखाई दे रहे हैं. अमेरिका के इस हमले से होर्मुज की जंग और भड़क गई है. रणनीतिक पुलों और बंदरगाहों को बनाया निशाना अमेरिका द्वारा किए गए हमलों का मुख्य निशाना बंदर अब्बास को ईरान के अंदरूनी हिस्सों से जोड़ने वाले सड़क और रेलवे पुल थे. इन पुलों के क्षतिग्रस्त होने से ईरान के सबसे बड़े समुद्री बंदरगाह तक पहुंच प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा, चाबहार बंदरगाह पर भी हमले किए गए, जहां एक कंट्रोल टावर के ढहने की समाचार है. ईरान का कहना है कि यह टावर बंदरगाह के व्यावसायिक यातायात की निगरानी करता था. सेंटकॉम का दावा- दर्जनों ठिकानों पर कार्रवाई अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि शुक्रवार सुबह तक चले अभियान में ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया. यह लगातार छठी रात थी जब अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले किए. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही ईरान को चेतावनी दे चुके थे कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दबाव बनाना जारी रखता है, तो उसके महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाएगा. ईरान का पलटवार, खाड़ी देशों में बढ़ा तनाव अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सहयोगी देशों की ओर मिसाइलें दागीं. कुवैत में एक बिजली और समुद्री जल को मीठा बनाने वाले संयंत्र को नुकसान पहुंचने की समाचार है. उधर, कतर और जॉर्डन ने भी ईरान पर मिसाइल हमले किए. लेकिन ईरान द्वारा उन्हें रोकने की पुष्टि की है. वहीं, उत्तरी इराक के कुर्द क्षेत्र में भी धमाकों की आवाजें सुनाई दीं. एक हमले में ईरानी कुर्द संगठन कोमाला के कई सदस्यों के मारे जाने की समाचार है. यह भी पढ़ें-ईरान पर ट्रंप का सख्त संदेश, अमेरिका बोला- MoU तोड़ने की कीमत चुकानी होगी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना सबसे बड़ा रणक्षेत्र अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अस्थायी सीजफायर 8 जुलाई को पूरी तरह टूट चुका है. इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच लगातार हमलों से पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है. ईरानी अधिकारियों का दावा है कि हालिया अमेरिकी हमलों में दर्जनों लोगों की मौत और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं. वहीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है. यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है, इसलिए यहां बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय वित्तीय स्थिति पर भी गहरा असर डाल सकता है. यह भी पढ़ें-Iran US Deal: ईरान से मुनाफाखोरी की फिराक में अमेरिका, हुआ खुलासा तो भड़के जेडी वेंस! The post ईरान के बंदर खमीर पर अमेरिका का भीषण हमला, सात की मौत! चाबहार पुल तबाह appeared first on Naya Vichar.

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PoK पर नई साजिश? गिलगित-बाल्टिस्तान को 5वां प्रांत बनाने की तैयारी, पाक विधानसभा में प्रस्ताव पास

Pakistan: पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान की तथाकथित विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर पाकिस्तान की संघीय प्रशासन से क्षेत्र को संवैधानिक और नेतृत्वक अधिकारों के साथ-साथ अस्थायी सूबे (प्रोविजनल प्रोविंस) का दर्जा देने की मांग की है. इस संबंध में पाकिस्तान के अंग्रेजी अखबार डॉन ने शुक्रवार को रिपोर्ट प्रकाशित की. रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को विधानसभा सत्र के दौरान विधायक जलाल अली शाह ने यह प्रस्ताव पेश किया. सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के सदस्यों ने इसका समर्थन किया और इसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया. 2009 और 2018 के आदेशों का दिया हवाला प्रस्ताव में कहा गया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान (सशक्तीकरण और स्व-शासन) आदेश, 2009 के तहत चुनी हुई विधानसभा का गठन हुआ, जिससे क्षेत्र में स्व-शासन की प्रक्रिया को बढ़ावा मिला. इसके अलावा, सरताज अजीज की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों के आधार पर गिलगित-बाल्टिस्तान आदेश, 2018 लागू किया गया, जिसके जरिए विधानसभा को अधिक विधायी अधिकार प्रदान किए गए. संघीय स्तर पर प्रतिनिधित्व की मांग विधानसभा ने पाकिस्तान प्रशासन से समिति की सिफारिशों को लागू करने और गिलगित-बाल्टिस्तान को अस्थायी सूबे का दर्जा देने की अपील की है. प्रस्ताव में कहा गया है कि ऐसा होने पर क्षेत्र के लोग पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के लिए अपने प्रतिनिधि चुन सकेंगे और उन्हें संघीय स्तर पर नेतृत्वक प्रतिनिधित्व मिल सकेगा. पाकिस्तान ने यह हरकत ऐसे समय में की है जब वो बलूचिस्तान में बढ़ती अशांति और खैबर पख्तूनख्वा में तेज होते उग्रवाद जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है. ऐसे में गिलगित-बाल्टिस्तान को लेकर उठाया गया यह कदम घरेलू संकटों से लोगों का ध्यान भटकाने और कब्जे वाले क्षेत्र पर अपने नियंत्रण को मजबूत दिखाने की कोशिश है. हिंदुस्तान अपने पुराने रुख पर कायम गिलगित-बाल्टिस्तान का प्रशासन फिलहाल पाकिस्तान अलग से संचालित करता है. वहीं, हिंदुस्तान लगातार हमेशा से यह साफ करता रहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) भी शामिल है, हिंदुस्तान का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं. हिंदुस्तान ने इन क्षेत्रों की संवैधानिक या प्रशासनिक स्थिति बदलने की पाकिस्तान की हर कोशिश को खारिज करते हुए कहा है कि ऐसे कदमों का कोई कानूनी आधार नहीं है और उनसे जमीनी हकीकत नहीं बदली जा सकती है. The post PoK पर नई साजिश? गिलगित-बाल्टिस्तान को 5वां प्रांत बनाने की तैयारी, पाक विधानसभा में प्रस्ताव पास appeared first on Naya Vichar.

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आनंद मोहन की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट बोला- अगर ड्यूटी पर तैनात DM की हत्या भी दुर्लभतम अपराध नहीं, तो फिर क्या है?

Supreme Court On Anand Mohan: गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी (DM) जी. कृष्णैया हत्याकांड में पूर्व सांसद आनंद मोहन की समय से पहले रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया. अब अदालत तय करेगी कि बिहार प्रशासन द्वारा दी गई रिहाई कानूनी रूप से सही थी या नहीं. कोर्ट की टिप्पणी- अगर यह दुर्लभतम अपराध नहीं, तो फिर क्या है? सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की उस टिप्पणी पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि यह मामला ‘दुर्लभतम अपराध’ (Rarest of Rare) की श्रेणी में नहीं आता. इस पर न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने कहा कि यदि ड्यूटी पर तैनात किसी प्रशासनी अधिकारी की हत्या भी दुर्लभतम अपराध नहीं मानी जाएगी, तो फिर आखिर किस अपराध को इस श्रेणी में रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि ऐसी सोच अपराधियों के लिए गलत संदेश दे सकती है. ‘ऐसी टिप्पणी अपराधियों का हौसला बढ़ाएगी’ कोर्ट ने कहा कि अगर लोक सेवकों की हत्या को भी दुर्लभतम अपराध नहीं माना जाएगा, तो अपराधियों को लगेगा कि ऐसे मामलों में भी कठोर कार्रवाई नहीं होगी. पीठ ने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां कानून का डर कम करती हैं और अपराधियों का मनोबल बढ़ा सकती हैं. अदालत ने यह भी कहा कि राज्य प्रशासन को ऐसे फैसले के खिलाफ अपील करनी चाहिए थी. ‘बिहार की परिस्थिति अलग रही होगी, लेकिन पूरे देश की नहीं’ न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने कहा कि संभव है उस समय बिहार की परिस्थितियां अलग रही हों, लेकिन दूसरे राज्यों में कोई न्यायाधीश शायद ऐसा नहीं मानेगा कि ड्यूटी पर तैनात अधिकारी की हत्या दुर्लभतम अपराध नहीं है. उन्होंने इस टिप्पणी को गंभीर और चिंताजनक बताया. क्या है पूरा मामला? 5 दिसंबर 1994 को गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी. कृष्णैया की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. इस मामले में आनंद मोहन को दोषी ठहराया गया था. निचली अदालत ने उन्हें मृत्युदंड सुनाया था, जिसे बाद में पटना हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास में बदल दिया. इसके बाद बिहार प्रशासन ने 24 अप्रैल 2023 को सजा में छूट (Remission) देते हुए उन्हें जेल से रिहा कर दिया. इसी रिहाई को जी. कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. बिहार प्रशासन ने कोर्ट में क्या कहा? बिहार प्रशासन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने कहा कि आनंद मोहन ने पहली बार वर्ष 2021 में रिहाई के लिए आवेदन दिया था, जिसे अस्वीकार कर दिया गया था. बाद में संबंधित अधिकारियों की सिफारिश मिलने के बाद उन्हें समयपूर्व रिहाई दी गई. उन्होंने यह भी कहा कि उस दौर में बिहार की कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब थी. रिहाई के नियमों पर भी कोर्ट ने उठाए सवाल सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान रिहाई की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि नियमों के अनुसार दोषी को 14 वर्ष की वास्तविक सजा और कुल 20 वर्ष की अवधि (रिमिशन सहित) पूरी करनी होती है. अदालत ने कहा कि पहली बार आवेदन करते समय स्वयं आनंद मोहन ने माना था कि उन्होंने 20 वर्ष की शर्त पूरी नहीं की थी. ऐसे में कोर्ट ने पूछा कि जब जरूरी शर्त पूरी नहीं हुई थी, तो पहली बार आवेदन खारिज करना गलत कैसे माना जा सकता है? दो लंबित मामलों की जानकारी छिपाने पर कोर्ट नाराज सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि जेल अधीक्षक ने माफी बोर्ड को बताया था कि आनंद मोहन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है. लेकिन रिकॉर्ड में उनके खिलाफ दो मामले लंबित बताए गए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई. न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि यदि बोर्ड को सही जानकारी दी जाती, तो उसका फैसला अलग हो सकता था. ‘माफी बोर्ड को गुमराह किया गया’ कोर्ट ने जेल प्रशासन और परिवीक्षा अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए. पीठ ने कहा कि माफी बोर्ड को पूरी जानकारी नहीं दी गई. ऐसा लगता है कि अधिकारियों ने अधूरी जानकारी देकर बोर्ड को गुमराह किया. न्यायमूर्ति दत्ता ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे हर अधिकारी किसी एक दिशा में झुका हुआ था. न्यायमूर्ति शील नागू ने भी जताई चिंता न्यायमूर्ति शील नागू ने कहा कि अधिकारियों की रिपोर्ट पढ़कर ऐसा लगता है जैसे सभी आनंद मोहन की रिहाई के पक्ष में थे. उन्होंने पूछा कि आखिर यह बताने की जिम्मेदारी किसकी थी कि उनके खिलाफ दो एफआईआर लंबित हैं. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें जेल में लिखी किताब का भी हुआ जिक्र आनंद मोहन की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि जेल में उनका आचरण अच्छा रहा. उन्होंने एक पुस्तक भी लिखी, जिसे बिहार के कुछ स्कूलों में पढ़ाया जा रहा है. वकील ने यह भी कहा कि वे स्वतंत्रता सेनानी परिवार से आते हैं. इस पर न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने कहा कि केवल पूर्वजों के स्वतंत्रता सेनानी होने के आधार पर किसी को विशेष लाभ नहीं दिया जा सकता. उन्होंने इस तर्क पर कड़ी आपत्ति जताई. पैरोल और उम्र को लेकर भी उठे सवाल याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत को बताया कि आनंद मोहन कई बार पैरोल पर बाहर आए थे. उन्होंने कहा कि पैरोल की अवधि को वास्तविक सजा में नहीं जोड़ा जाना चाहिए. साथ ही उम्र से जुड़े दस्तावेजों में भी विसंगति होने का आरोप लगाया. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार प्रशासन से जवाब मांगा. अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं नजरें सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. अब अदालत यह तय करेगी कि बिहार प्रशासन द्वारा आनंद मोहन को दी गई समयपूर्व रिहाई कानून के अनुरूप थी या नहीं. साथ ही यह भी देखा जाएगा कि रिहाई की प्रक्रिया के दौरान कहीं तथ्यों को छिपाया गया या नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ. Also Read: मुंबई की नौकरी छोड़ी, पहले बने IPS फिर IAS, अब पूरे बिहार में लागू होगा इस अफसर का एजुकेशन मॉडल The post आनंद मोहन की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट बोला- अगर ड्यूटी पर तैनात DM की

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देवेंद्र फडणवीस छोड़ सकते हैं CM पद? संजय राउत के दावे से महाराष्ट्र में सियासी हलचल

Devendra Fadnavis: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे, UBT) के नेता संजय राउत ने शुक्रवार (17 जुलाई) को दावा किया कि यदि आगामी महीनों में केंद्र और महाराष्ट्र में मंत्रिमंडल का विस्तार या फेरबदल होता है, तो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को केंद्र में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में फडणवीस दिल्ली जा सकते हैं और उनकी जगह बीजेपी का कोई वरिष्ठ नेता महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बन सकता है. राउत अपने नागपुर दौरे के दौरान शिवसेना (उबाठा) के प्रस्तावित राम रक्षा आंदोलन से पहले पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे. केंद्र और राज्य में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि आने वाले समय में महाराष्ट्र की नेतृत्व में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. राम रक्षा आंदोलन में RSS और बीजेपी नेताओं को न्योता संजय राउत ने बताया कि अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के विरोध में शिवसेना (UBT) 18 जुलाई को नागपुर में राम रक्षा प्रदर्शन आयोजित कर रही है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) सहित सभी हिंदुत्ववादी संगठनों को इसमें शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया है. राउत ने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से भी अनुरोध किया गया है कि यदि वे स्वयं शामिल नहीं हो सकते तो अपना प्रतिनिधि भेजें. इसके अलावा भाजपा समेत विभिन्न नेतृत्वक दलों के नेताओं और स्थानीय विधायकों को भी आमंत्रित किया गया है. उन्होंने बताया कि विदर्भ क्षेत्र के 11 जिलों से राम भक्त और शिवसेना (UBT) के कार्यकर्ता इस प्रदर्शन में भाग लेंगे. सोनम वांगचुक के समर्थन में केंद्र पर निशाना जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के जंतर-मंतर पर परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे आंदोलन और भूख हड़ताल पर भी संजय राउत ने केंद्र प्रशासन को घेरा. उन्होंने कहा कि वहां 20 साल की एक युवती भी अनशन पर बैठी है, लेकिन प्रशासन उसकी बिगड़ती हालत को लेकर संवेदनहीन बनी हुई है. राउत ने कहा- क्या उनकी हालत की जानकारी प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तक नहीं पहुंच रही है? सत्ता में बैठे लोगों में संवेदना खत्म हो गई है. क्या मोदी मंत्रिमंडल में किसी में सोनम वांगचुक के समर्थन में खड़े होने की हिम्मत है? परिसीमन पर खरगे की मांग का समर्थन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संसद के मानसून सत्र से पहले परिसीमन के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग का भी राउत ने समर्थन किया. उन्होंने कहा- हम खरगे की बात से सहमत हैं. बता दें, केंद्र प्रशासन 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लाने की तैयारी में है. प्रस्तावित विधेयक में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और परिसीमन प्रक्रिया शुरू करने का प्रावधान शामिल है. Also Read:राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: सोमवार को SC में SIT की अंतरिम रिपोर्ट, फाइनल रिपोर्ट के लिए मांगा और समय The post देवेंद्र फडणवीस छोड़ सकते हैं CM पद? संजय राउत के दावे से महाराष्ट्र में सियासी हलचल appeared first on Naya Vichar.

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मुंबई की नौकरी छोड़ी, पहले बने IPS फिर IAS, अब पूरे बिहार में लागू होगा इस अफसर का एजुकेशन मॉडल

IAS Kundan Kumar Success Story: बिहार में प्रशासनी स्कूलों की पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए शुरू किया गया ‘पूर्णिया लाइव क्लासेस’ मॉडल अब पूरे राज्य में लागू होने जा रहा है. इस पहल की शुरुआत वर्ष 2024 में तत्कालीन पूर्णिया डीएम IAS कुंदन कुमार ने की थी. इसका मकसद था कि प्रशासनी स्कूलों के बच्चों तक भी अच्छे शिक्षकों की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी आसानी से पहुंच सके. इस मॉडल की सफलता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसे पूरे बिहार में लागू करने का निर्देश दिया है. अब इसे ‘बिहार लाइव क्लासेस’ के नाम से आगे बढ़ाया जाएगा. मुंबई की नौकरी छोड़ चुनी सिविल सेवा की राह IAS कुंदन कुमार का सफर युवाओं के लिए प्रेरणा है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक इंजीनियर के रूप में की थी. मुंबई की एक प्रतिष्ठित कंपनी में करीब पांच साल तक नौकरी की. इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी शुरू कर दी. पहले बने IPS, फिर दोबारा परीक्षा देकर बने IAS कुंदन कुमार ने पहली बार 2009 में UPSC परीक्षा पास की. तब उनका चयन IPS के रूप में हुआ. लेकिन उनका सपना IAS बनने का था. इसलिए उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा परीक्षा दी. 2012 में उन्होंने IAS बनकर अपना लक्ष्य हासिल कर लिया. इसके बाद उन्होंने बिहार के कई जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं और कई नए प्रयोग किए. दो बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर चुके हैं सम्मानित बेहतरीन प्रशासनिक कार्यों और नवाचारों के लिए IAS कुंदन कुमार को दो बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों सम्मान मिल चुका है. उन्हें यह सम्मान डिजिटल शिक्षा और कृषि क्षेत्र में किए गए नवाचारों के लिए मिला था. उनके काम की चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर भी हुई. क्या है ‘पूर्णिया लाइव क्लासेस’ मॉडल? 2024 में पूर्णिया के डीएम रहते हुए कुंदन कुमार ने ‘पूर्णिया लाइव क्लासेस’ की शुरुआत की. इस प्लेटफॉर्म के जरिए प्रशासनी स्कूलों के छात्रों को लाइव क्लास, रिकॉर्डेड लेक्चर, डाउट क्लियरिंग सेशन और साप्ताहिक टेस्ट की सुविधा दी जाती है. बाद में इसमें NEET और IIT-JEE की तैयारी भी शामिल कर दी गई. इससे दूर-दराज के छात्रों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने लगी. मुख्यमंत्री ने देखा लाइव डेमो वर्तमान में पटना के डीएम के रूप में कार्यरत IAS कुंदन कुमार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी को इस मॉडल का लाइव डेमो दिखाया. पूर्णिया के जिला स्कूल से लाइव क्लास संचालित की गई. इसमें पूर्णिया के वर्तमान डीएम अंशुल कुमार भी मौजूद रहे. डेमो देखने के बाद मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना की और अधिकारियों को 15 अगस्त तक पूरे बिहार में इसे लागू करने का निर्देश दिया. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें 265 प्रशासनी स्कूल जुड़े, हजारों छात्रों को मिल रहा लाभ फिलहाल पूर्णिया जिले के 265 प्रशासनी स्कूल इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं. यहां 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के साथ-साथ NEET और IIT-JEE की तैयारी भी कराई जाती है. अगर कोई छात्र लाइव क्लास नहीं देख पाता, तो उसे रिकॉर्डेड वीडियो उपलब्ध कराया जाता है. नियमित टेस्ट के जरिए छात्रों की तैयारी का आकलन भी किया जाता है. अब लाखों छात्रों को मिलेगा फायदा पूर्णिया मॉडल की सफलता के बाद अब इसे पूरे बिहार में लागू किया जाएगा. प्रशासन को उम्मीद है कि इससे राज्य के लाखों प्रशासनी स्कूलों के छात्रों को बेहतर शिक्षा, विशेषज्ञ शिक्षकों का मार्गदर्शन और प्रतियोगी परीक्षाओं की गुणवत्तापूर्ण तैयारी का अवसर मिलेगा. Also Read: 710 अंक, AIR 4… बिहार के आयुष ने बताया NEET क्रैक करने का फॉर्मूला The post मुंबई की नौकरी छोड़ी, पहले बने IPS फिर IAS, अब पूरे बिहार में लागू होगा इस अफसर का एजुकेशन मॉडल appeared first on Naya Vichar.

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डोप टेस्ट में फेल हुए पाकिस्तानी स्पिनर मोहम्मद नवाज, ICC ने लगाया तीन महीने का बैन

पाकिस्तान के स्टार स्पिनर मोहम्मद नवाज पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने डोपिंग नियमों के उल्लंघन के चलते सभी प्रारूपों के क्रिकेट से तीन महीने का प्रतिबंध लगा दिया है. ICC ने शुक्रवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की. हालांकि नवाज ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है और नशा मुक्ति उपचार कार्यक्रम पूरा करने पर उनकी सजा तीन महीने से घटकर एक महीने रह जाएगी. नवाज का डोप टेस्ट 7 फरवरी 2026 को श्रीलंका के कोलंबो में स्पोर्ट्से गए पाकिस्तान और नीदरलैंड्स के बीच पुरुष टी20 विश्व कप मैच के बाद लिया गया था. जांच में उनके नमूने में कार्बोक्सी-THC पाया गया, जो कैनबिस (गांजा) के सेवन के बाद शरीर में बनने वाला प्रमुख मेटाबोलाइट माना जाता है. THC वही मनो-सक्रिय तत्व है, जो नशे का प्रभाव पैदा करता है. नवाज ने स्वीकार की गलती नवाज ने स्वीकार किया कि यह पदार्थ प्रतियोगिता के बाहर इस्तेमाल किया गया था और इसका स्पोर्ट्स प्रदर्शन बढ़ाने से कोई संबंध नहीं था. इसी आधार पर ICC ने उन्हें तीन महीने के लिए अयोग्य घोषित किया. यह प्रतिबंध 1 मई 2026 से प्रभावी माना गया है, जब उन्होंने स्वैच्छिक अस्थायी निलंबन स्वीकार किया था. उपचार कार्यक्रम पूरा करने पर मिलेगी राहत ICC के अनुसार, यदि नवाज निर्धारित नशा मुक्ति उपचार कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा कर लेते हैं, तो उनकी सजा घटकर केवल एक महीने की रह जाएगी. चूंकि वह पहले ही लगभग ढाई महीने का निलंबन काट चुके हैं, इसलिए कार्यक्रम पूरा होने पर उन्हें अतिरिक्त प्रतिबंध नहीं झेलना पड़ेगा. ICC एंटी-डोपिंग कोड के तहत 7 फरवरी को नीदरलैंड्स के खिलाफ स्पोर्ट्से गए मैच और उसके बाद 1 मई तक स्पोर्ट्से गए सभी मुकाबलों में नवाज के परिणाम अमान्य कर दिए गए हैं. PSL में नवाज का प्रदर्शन रहा फीका नवाज हाल ही में पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) में मुल्तान सुल्तांस के लिए स्पोर्ट्सते नजर आए थे. उन्होंने छह पारियों में केवल 54 रन बनाए, जबकि गेंदबाजी में नौ मैचों में छह विकेट हासिल किए. इस दौरान उनका प्रदर्शन अपेक्षाकृत फीका रहा और वह काफी महंगे भी साबित हुए. ये भी पढ़ें: सचिन-गांगुली के क्लब में शामिल हुए रोहित शर्मा, ODI में विदेशी सरजमीं पर ऐसा करने वाले तीसरे हिंदुस्तानीय बने The post डोप टेस्ट में फेल हुए पाकिस्तानी स्पिनर मोहम्मद नवाज, ICC ने लगाया तीन महीने का बैन appeared first on Naya Vichar.

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बिहार में राशन कार्ड बनवाना हुआ आसान, पंचायत में लगेंगे शिविर, ये दस्तावेज होंगे जरूरी

Bihar Ration Card: बिहार प्रशासन ने राशन कार्ड से वंचित पात्र परिवारों को राहत देने का फैसला लिया है. प्रशासन जल्द ही पंचायत स्तर पर विशेष शिविर आयोजित करेगी. इन शिविरों में लोग आसानी से नए राशन कार्ड के लिए आवेदन कर सकेंगे. प्रशासन का लक्ष्य है कि राज्य का कोई भी पात्र परिवार राशन कार्ड और उससे मिलने वाली प्रशासनी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे. पंचायत में ही होगी आवेदन की सुविधा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी ने बताया कि विशेष शिविरों में लोगों को आवेदन करने से लेकर दस्तावेज जमा करने तक पूरी मदद मिलेगी. आवेदकों को यह भी बताया जाएगा कि आवेदन कैसे करना है और किन-किन दस्तावेजों की जरूरत होगी. इससे पूरी प्रक्रिया पहले के मुकाबले काफी आसान हो जाएगी. पंचायत प्रतिनिधियों को भी मिलेगी जिम्मेदारी प्रशासन इस अभियान में पंचायत प्रतिनिधियों को भी शामिल करेगी. उन्हें निर्देश दिए जाएंगे कि वे अपने क्षेत्र के ऐसे परिवारों की पहचान करें, जिनके पास अभी तक राशन कार्ड नहीं है. साथ ही उन्हें आवेदन कराने में भी मदद करें. आवेदन प्रक्रिया होगी सरल प्रशासन राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया को भी आसान बना रही है. शिविरों में आवेदन जमा करने के बाद दस्तावेजों और आवेदक की जानकारी का सत्यापन किया जाएगा. इससे लोगों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें राशन कार्ड बनवाने के लिए किन दस्तावेजों की होगी जरूरत? नया राशन कार्ड बनवाने के लिए आवेदकों को ये दस्तावेज देने होंगे. जाति प्रमाण पत्र आय प्रमाण पत्र आवासीय प्रमाण पत्र परिवार के सभी सदस्यों का आधार कार्ड बैंक पासबुक की छायाप्रति परिवार की ग्रुप फोटो एक्टिव मोबाइल नंबर ग्रामीण परिवारों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा प्रशासन के इस फैसले से खासकर ग्रामीण इलाकों के लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. ऐसे कई परिवार हैं जो जानकारी की कमी या आवेदन प्रक्रिया की जटिलता के कारण अब तक राशन कार्ड नहीं बनवा पाए थे. पंचायत स्तर पर शिविर लगने से उन्हें घर के पास ही आवेदन करने की सुविधा मिलेगी और प्रशासनी योजनाओं का लाभ लेने का रास्ता आसान होगा. Also Read: बिहार पंचायत चुनाव 2026: समय पर ही होंगे चुनाव, परिसीमन की वजह से टलने की समाचारों पर मंत्री दीपक प्रकाश ने क्या कहा The post बिहार में राशन कार्ड बनवाना हुआ आसान, पंचायत में लगेंगे शिविर, ये दस्तावेज होंगे जरूरी appeared first on Naya Vichar.

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: सोमवार को SC में SIT की अंतरिम रिपोर्ट, फाइनल रिपोर्ट के लिए मांगा और समय

Ram Mandir: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी अंतरिम रिपोर्ट दाखिल कर सकती है. सूत्रों के मुताबिक, जांच अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए एसआईटी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए उत्तर प्रदेश प्रशासन से अतिरिक्त समय मांगने की तैयारी में है. अंतरिम रिपोर्ट में अब तक की जांच की प्रगति और जुटाए गए सबूतों और प्रमाणों का ब्योरा दिया जा सकता है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश प्रशासन ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था. जांच पूरी करने के लिए दल को शुरुआत में 15 दिन का समय दिया गया था हालांकि बाद में एक जुलाई को इसका कार्यकाल 15 दिन के लिए बढ़ा दिया गया था. 22 जुलाई को अयोध्या में हो सकती है राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक! राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट को बेहद अहम माना जा रहा है. माना जा रहा है कि रिपोर्ट में की गई सिफारिशों के आधार पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर के प्रबंधन, दान की गणना और चढ़ावे के प्रबंधन तंत्र में बड़े सुधारों पर फैसला ले सकता है. ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को अयोध्या में प्रस्तावित है, जिसमें इस मुद्दे पर भी चर्चा होने की संभावना है. प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद हुई बड़ी कार्रवाई एसआईटी ने 23 जून को उत्तर प्रदेश प्रशासन को नौ पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी. इसके बाद मामले में कई अहम कदम उठाए गए, जिनमें एफआईआर दर्ज होना, मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी और मंदिर ट्रस्ट के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे शामिल हैं. ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने कहा था कि वह एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ेंगे. उन्होंने यह सवाल भी उठाया था कि एसआईटी की गोपनीय प्रारंभिक रिपोर्ट सार्वजनिक कैसे हुई. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच सुप्रीम कोर्ट ने 13 जुलाई को मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग वाली याचिकाओं पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया था. साथ ही एसआईटी को जांच की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था. प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने एसआईटी से स्टेटस रिपोर्ट भी तलब की थी. तीन सदस्यीय एसआईटी कर रही जांच मामले की जांच तीन सदस्यीय एसआईटी कर रही है, जिसमें लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं. ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि महाराज ने 14 जुलाई को पुणे में कहा था कि उन्हें एसआईटी की जांच और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी, दोनों पर पूरा भरोसा है. उन्होंने साफ किया था कि ट्रस्ट जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करेगा और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि एसआईटी की जांच पूरी होने तक ट्रस्ट इस मामले पर कोई श्वेत पत्र जारी नहीं करेगा. अब तक क्या-क्या हुआ? इस मामले में अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. मंदिर ट्रस्ट के दो पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया है, जबकि मंदिर के चढ़ावे से कथित तौर पर निकाली गई नकदी भी बरामद की जा चुकी है. अब सभी की नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई और प्रशासनिक सुधारों की दिशा तय हो सकती है. Also Read: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला में 100 से अधिक कर्मियों पर गाज की तैयारी, ट्रस्ट ने शुरू की छंटनी की कवायद The post राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: सोमवार को SC में SIT की अंतरिम रिपोर्ट, फाइनल रिपोर्ट के लिए मांगा और समय appeared first on Naya Vichar.

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वेट लॉस से लेकर ग्लोइंग स्किन तक, जानिए आपके लिए कौन-सा सीड्स वॉटर है बेस्ट

Seeds Water Benefits: आजकल वजन कम करने से लेकर स्किन को ग्लोइंग बनाने और पाचन सुधारने तक के लिए लोग अलग-अलग तरह के सीड्स वॉटर पीना पसंद कर रहे हैं. चिया सीड्स, अलसी, मेथी और तुलसी के बीज जैसे कई ऑप्शन  मौजूद हैं. लेकिन हर सीड्स वॉटर का फायदा अलग होता है. ऐसे में जरूरी है कि आप अपनी हेल्थ गोल के अनुसार सही सीड्स वॉटर चुनें. आइए जानते हैं किस लक्ष्य के लिए कौन-सा सीड्स वॉटर (Seeds Water Benefits) सबसे बेहतर माना जाता है.  वजन कम करना चाहते हैं? चिया सीड्स वॉटर चुनें अगर आपका लक्ष्य वजन कम करना है, तो चिया सीड्स वॉटर अच्छा विकल्प हो सकता है. चिया सीड्स में फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है. इससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग से बचने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा यह शरीर को हाइड्रेट रखने में भी सहायक होता है.  PC: Freepik दिल की सेहत के लिए अलसी का पानी अलसी (Flax Seeds) ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा सोर्स है. अगर आप हार्ट हेल्थ को बेहतर रखना चाहते हैं, तो अलसी का पानी अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं. यह शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बनाए रखने में मदद कर सकता है. PC: Freepik एनर्जी और इम्यूनिटी के लिए कद्दू के बीज कद्दू के बीजों को भिगोकर सेवन करने से शरीर को जिंक, मैग्नीशियम और प्रोटीन जैसे पोषक तत्व मिलते हैं. ये इम्यूनिटी को सपोर्ट करने और शरीर की एनर्जी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं.  PC: Freepik Seeds Water Benefits: सीड्स वॉटर पीते समय रखें ये बातें किसी भी सीड्स वॉटर का सेवन सीमित मात्रा में करें.  अगर आपको किसी तरह की एलर्जी या कोई गंभीर बीमारी है, तो डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसे नियमित रूप से लें.  केवल सीड्स वॉटर पीने से हेल्थ गोल पूरे नहीं होंगे. संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, अच्छी नींद और नियमित एक्सरसाइज भी उतनी ही जरूरी है.  अलग-अलग सीड्स को एक साथ मिलाकर पीने के बजाय अपनी जरूरत के हिसाब से एक ऑप्शन चुनें.  यह भी पढ़ें: मानसून में सेहत का रखना है ख्याल? आज ही डाइट में शामिल करें ये 10 सब्जियां The post वेट लॉस से लेकर ग्लोइंग स्किन तक, जानिए आपके लिए कौन-सा सीड्स वॉटर है बेस्ट appeared first on Naya Vichar.

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जामताड़ा के सदर अस्पताल में डॉक्टरों की हड़ताल, बिना इलाज के गर्भवती को बैरंग लौटाने का आरोप

Jamtara News: झारखंड के जामताड़ा सदर अस्पताल में गुरुवार को एक गर्भवती स्त्री की मौत के बाद उत्पन्न विवाद शुक्रवार को और गहरा गया. अस्पताल में हुई तोड़फोड़ और चिकित्सकों के साथ अभद्र व्यवहार के विरोध में डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया. झारखंड मेडिकल एसोसिएशन के नेतृत्व में शुरू हुई हड़ताल को चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ का भी समर्थन मिला. इसके चलते सदर अस्पताल की ओपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं, जबकि इमरजेंसी सेवाओं का संचालन जारी रखा गया. हड़ताल के कारण इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. प्रसूता की मौत के बाद अस्पताल में हुआ था हंगामा जानकारी के अनुसार गुरुवार को शहर के प्रशासनबांध निवासी एक प्रसूता की इलाज के दौरान मौत हो गई थी. घटना के बाद परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया. आक्रोशित लोगों ने अस्पताल में तोड़फोड़ की और प्रशासनी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया. इस दौरान चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने की भी बात सामने आई. घटना के बाद अस्पताल का माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसके विरोध में डॉक्टरों ने अगले दिन कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया. आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े चिकित्सक कार्य बहिष्कार पर बैठे चिकित्सकों ने अस्पताल में तोड़फोड़ करने वालों की पहचान कर उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग की. साथ ही अस्पताल परिसर में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई. सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. मिक्की माझी ने कहा कि भय के माहौल में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अपना दायित्व नहीं निभा सकते. जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाते, तब तक सामान्य माहौल बहाल होना मुश्किल है. वहीं डॉ. अशोक चौधरी ने कहा कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. हड़ताल से मरीजों की बढ़ी परेशानी डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार का सबसे अधिक असर इलाज के लिए आने वाले मरीजों पर पड़ा. ओपीडी बंद रहने के कारण दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे लोगों को बिना इलाज लौटना पड़ा. कई मरीज निजी अस्पतालों की ओर जाने को मजबूर हुए. अस्पताल परिसर में दिनभर मरीजों और उनके परिजनों की भीड़ लगी रही, लेकिन नियमित चिकित्सा सेवाएं बाधित रहने से लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली. इसे भी पढ़ें: झारखंड में चिकित्सा व्यवस्था की एक और भयावह तस्वीर, एंबुलेंस नहीं मिली तो टोटो से पहुंची गर्भवती की मौत गर्भवती को भर्ती नहीं करने का आरोप शुक्रवार सुबह नारायणपुर थाना क्षेत्र के मोहनपुर से प्रसव पीड़ा से पीड़ित एक गर्भवती स्त्री को एंबुलेंस से सदर अस्पताल लाया गया. परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों की हड़ताल का हवाला देते हुए स्त्री को भर्ती नहीं किया गया और दूसरे अस्पताल जाने की सलाह देकर वापस भेज दिया गया. स्त्री के पति और साथ आई सहिया ने बताया कि वे सुरक्षित प्रसव की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन इलाज नहीं मिलने से निराश होकर लौटना पड़ा. हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से इस आरोप पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. फिलहाल डॉक्टरों का कार्य बहिष्कार जारी है और मरीजों की परेशानियां भी लगातार बढ़ रही हैं. इसे भी पढ़ें: धनबाद के पाथरडीह में बेल्ट से बेरहमी से पिटाई का वीडियो वायरल, तीन युवक लापता The post जामताड़ा के सदर अस्पताल में डॉक्टरों की हड़ताल, बिना इलाज के गर्भवती को बैरंग लौटाने का आरोप appeared first on Naya Vichar.

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