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August 24, 2026

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Anushka Ranjan और Aditya Seal बने जुड़वां बेटियों के माता-पिता, सोशल मीडिया पर रिवील किए नन्हीं परियों के नाम

Anushka Ranjan and Aditya Seal Baby: अनुष्का रंजन और आदित्य सील के घर खुशियों ने दस्तक दी है. ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2’ फेम एक्टर आदित्य सील और उनकी पत्नी अनुष्का रंजन अब जुड़वां बेटियों के माता-पिता बन गए हैं. कपल ने सोशल मीडिया के जरिए यह खुशसमाचारी अपने फैंस के साथ शेयर की और अपनी दोनों बेटियों के नाम भी बताए. Aditya Seal and Anushka Ranjan Welcome Twin Baby Girl: अनुष्का और आदित्य ने किया जुड़वां बेटियों का स्वागत अनुष्का और आदित्य की दोनों बेटियों का जन्म 23 अगस्त 2026 को हुआ. कपल ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटियों का नाम वीरा रंजन सील और माही रंजन सील रखा है. इस खास मौके पर दोनों ने सोशल मीडिया पर एक प्यारा-सा पोस्ट शेयर किया. View on Instagram पोस्ट में दोनों बच्चियों की तस्वीरों वाला एक कार्ड नजर आया. आदित्य ने लिखा कि उनकी जिंदगी में दो ‘सनशाइन’ आई हैं, जिससे उनका दिल प्यार और आभार से भर गया है। उन्होंने अपनी बेटियों के नाम के साथ #TeamGirl भी लिखा. Anushka and Aditya Seal Pregnancy was Special: प्रेग्नेंसी की समाचार भी थी खास अनुष्का और आदित्य ने इस साल की शुरुआत में मैटरनिटी फोटोशूट के जरिए प्रेग्नेंसी की जानकारी दी थी. इसके बाद दोनों ने कई मौकों पर इस नए सफर को लेकर अपनी खुशी जाहिर की. View on Instagram एक इंटरव्यू के दौरान अनुष्का ने बताया था कि वह और आदित्य कुछ समय बाद यह समाचार लोगों के साथ शेयर करना चाहते थे. उन्होंने कहा था कि शिशु के सितंबर में आने की उम्मीद थी, इसलिए दोनों ने पहले खुद को इस बदलाव के लिए तैयार होने का समय दिया. अनुष्का ने यह भी बताया था कि प्रेग्नेंसी की समाचार साझा करना उनके लिए शादी की समाचार बताने से भी ज्यादा भावुक पल था. Anushka and Aditya on IVF Journey: IVF के सफर के बारे में की थी बात अनुष्का ने कुछ समय पहले अपने YouTube चैनल पर IVF के अनुभव को लेकर भी खुलकर बात की थी. उन्होंने बताया था कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. उनके मुताबिक, उन्होंने करीब 150 इंजेक्शन लिए थे और शुरुआत में आदित्य ही उन्हें इंजेक्शन लगाया करते थे. अनुष्का ने बताया था कि उन्हें इंजेक्शन से काफी डर लगता था और कई बार दर्द की वजह से वह रो भी पड़ती थीं. ऐसे समय में आदित्य ने उनका लगातार साथ दिया. आदित्य सील और अनुष्का रंजन, फोटो इंस्टाग्राम उन्होंने यह भी बताया था कि दोनों 2023 से परिवार बढ़ाने के बारे में सोच रहे थे. अनुष्का की बहन आकांक्षा रंजन ने उन्हें डॉक्टर से सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित किया था. अनुष्का ने IVF और गर्भधारण से जुड़ी कई ऐसी बातों पर भी चर्चा की थी, जिनके बारे में लोगों के बीच सही जानकारी कम होती है. Anushka Ranjan and Aditya Seal Love Story: 2017 में हुई थी पहली मुलाकात अनुष्का रंजन और आदित्य सील की पहली मुलाकात 26 जून 2017 को हुई थी. दोनों की मुलाकात अनुष्का के NGO ‘बेटी’ की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में हुई थी. पहली मुलाकात के बाद दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे रिश्ते में बदल गई. दोनों ने  साथ में एक  वेब सीरीज ‘फितरत’ (Fitrat) में भी नजर आए थे. इस सीरीज में क्रिस्टल डिसूजा भी थीं . कई साल तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद अनुष्का और आदित्य ने नवंबर 2021 में मुंबई में शादी कर ली थी. अब शादी के करीब पांच साल बाद दोनों ने अपनी जिंदगी के नए अध्याय की शुरुआत की है. जुड़वां बेटियों के माता-पिता बनने के बाद कपल के परिवार में खुशी का माहौल है. यह भी पढ़ें: VIDEO: अनुष्का रंजन के संगीत में जमकर नाचीं आलिया भट्ट, रानी मुखर्जी के छलका-छलका सॉन्ग पर किया शानदार डांस The post Anushka Ranjan और Aditya Seal बने जुड़वां बेटियों के माता-पिता, सोशल मीडिया पर रिवील किए नन्हीं परियों के नाम appeared first on Naya Vichar.

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फरक्का बैराज पर बिहार में सियासत, लालू पर भड़के संजय झा, पूछा- 1996 में किसने राज्य के हित का सौदा किया था?

Farakka Barrage Treaty: ‘साल 1996 में बिहार का मुख्यमंत्री कौन था? उस वक्त के हितों का सौदा किसने किया था?’ यह सवाल राज्यसभा सांसद और JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने किया है. फरक्का बैराज को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है. आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद ने एक्स पर खुद का वीडियो शेयर कर नीतीश कुमार पर निशाना साधा था. इस पर अब संजय झा ने पलटवार किया है. संजय झा ने निकाली भड़ास मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने सवाल खड़ा करने के साथ-साथ तंज भरे लहजे में लालू प्रसाद पर भड़ास भी निकाली. संजय जा ने कहा, 1996 में बिहार के हितों को बेच दिया गया था. जो लोग इस तरह का बयान दे रहे हैं, उन्हें आत्ममंथन करना चाहिए. क्या कोई 1996 में हिंदुस्तान और बांग्लादेश के बीच हुई गंगा जल संधि के दौरान जो कदम उठाए गए थे, उसके पीछे का तर्क क्या था, उसे समझा सकता है. केंद्र में किसकी प्रशासन थी और बिहार में किसकी प्रशासन थी? नीतीश कुमार का किया समर्थन संजय झा इतने पर ही नहीं रुके बल्कि आगे उन्होंने यह भी कहा, 1996 में कांग्रेस के समर्थन वाली प्रशासन केंद्र में थी. उन्हें यह बताना चाहिए कि आखिर बिहार के जल हितों को खतरे में कैसे डाला गया. संजय झा ने नीतीश कुमार के पक्ष में कहा कि वह 10 साल से भी ज्यादा समय से फरक्का बैराज और गंगा में गाद जमा होने के मुद्दे को उठाते रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा, दिल्ली या फिर पटना में राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन आयोजित किए गए, जिसमें भी नीतीश कुमार ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया. साथ ही उन्होंने बताया कि फरक्का के ऊपरी हिस्से में गाद जमा होने के कारण बिहार में बाढ़ और सूखे की स्थिति कितनी गंभीर हो गई है. मीडिया से बातचीत के दौरान संजय झा ने यह स्पष्ट किया कि 1996 में जो गलती हुई थी, अब उस गलती को सुधारने का वक्त आ गया है. बिहार की अन्य ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें क्या कहना है नेतृत्वक जानकारों का? नेतृत्वक जानकारों की माने तो, फरक्का बैराज का विवाद कई कारण में महत्वपूर्ण माना जाता है. सबसे बड़ा कारण फरक्का बैराज की वजह से गंगा नदी में गाद जमा होना है. इसी की वजह से उत्तर बिहार में बाढ़ से तबाही का मंजर दिखता है. ऐसे में यह मुद्दा आम लोगों से जुड़ा हुआ है. साथ ही यह मुद्दा बिहार की वित्तीय स्थिति और भूगोल से भी सीधा जुड़ा हुआ है. उनका यह भी मानना है कि बिहार में एक बड़ा वर्ग है जो हर साल बाढ़ का कहर झेलता है. किसानों की फसलें बर्बाद होती हैं. कई लोगों के घर नदी में समा जाते हैं. स्थिति ऐसी हो जाती है कि वह खुद का घर छोड़कर कहीं दूसरे जगह रहने के लिए मजबूर हो जाते हैं. बिहार की सियासत में भले ही इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी हो रही हो, लेकिन लोग अब तक इस समस्या का समाधान कब तक निकलेगा, इसके इंतजार में हैं. लालू प्रसाद ने क्या कहा था? कुछ दिनों पहले ही लालू प्रसाद ने एक वीडियो खुद का शेयर किया था. इसमें उन्होंने फरक्का बैराज का मुद्दा उठाया और नीतीश कुमार पर निशाना साधा. लालू ने संजय झा का नाम लिए बिना उन्हें नौसिखिया बताया और कहा था कि फरक्का के मुद्दे पर बोलने से पहले इसका पूरा इतिहास और भूगोल समझना चाहिए. आगे लालू प्रसाद ने इस मुद्दे पर नीतीश कुमार को निशाने पर लिया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि नीतीश कुमार ने संसद में फरक्का बैराज को लेकर कभी आवाज नहीं उठाई. लालू ने कहा था कि नीतीश कुमार ने अपने लंबे नेतृत्वक सफर में दूर के असर वाले मुद्दों के बजाय ऐसे फैसलों को ज्यादा महत्व दिया, जिनसे तत्काल नेतृत्वक फायदा मिल सके. लालू प्रसाद ने कहा था, नीतीश कुमार के साथ नेतृत्व करने वाले नेताओं को फरक्का के मुद्दे पर बयान देने से पहले बिहार के जल संसाधन विभाग की जानकारी देखनी चाहिए. उन्होंने गंगा में पानी की उपलब्धता, बांग्लादेश के साथ हुए समझौते का असर और उस समय बिहार प्रशासन की ओर से किए गए प्रयासों को समझने की बात कही थी. साथ ही लालू ने विभाग में रखे पुराने दस्तावेजों के साथ तत्कालीन सिंचाई मंत्री जगदानंद सिंह और केंद्र प्रशासन के बीच हुए पत्राचार को पढ़ने की भी सलाह दी थी. क्या है पूरा मामला ? इस पूरे मामले की बात करें तो, फरक्का को लेकर विवाद की वजह हिंदुस्तान और बांग्लादेश के बीच 1996 में हुआ जल समझौता है. इस समझौते की अवधि दिसंबर 2026 में खत्म होने वाली है. समझौते की अवधि खत्म होने से पहले बिहार में गंगा के पानी और राज्य की भविष्य की जरूरतों को लेकर नेतृत्वक चर्चा तेज हो गई है. बिहार की सियासत में बयानबाजी जमकर हो रही है. लेकिन आखिर में क्या कुछ कदम उठाए जाते हैं, यह देखने वाली बात होगी. Also Read: बिहार के 24 जिलों में आज बिगड़ा रहेगा मौसम, भारी बारिश के साथ चलेगी तेज हवा, IMD का डबल अलर्ट जारी The post फरक्का बैराज पर बिहार में सियासत, लालू पर भड़के संजय झा, पूछा- 1996 में किसने राज्य के हित का सौदा किया था? appeared first on Naya Vichar.

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एक सरकारी नौकरी के पीछे हजारों युवा क्यों? भारत में Government Job की भूख की असली कहानी

सुबह के पांच बजे हैं. झारखंड के एक छोटे से शहर में एक कमरा खुलता है. टेबल पर किताबें हैं, दीवार पर टाइम-टेबल चिपका है और मोबाइल में एक ही चीज बार-बार चेक हो रही है- ‘नई वैकेंसी आई क्या?’ यह कहानी सिर्फ एक उम्मीदवार की नहीं है. आज देश के लाखों युवा प्रशासनी नौकरी की एक-एक सीट के लिए महीनों नहीं, सालों तक तैयारी कर रहे हैं. क्यों? क्योंकि हिंदुस्तान में प्रशासनी नौकरी अब सिर्फ नौकरी नहीं रह गई है. यह स्थिर भविष्य, सामाजिक सम्मान, नियमित आय और परिवार की आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक बन चुकी है. लेकिन दूसरी तरफ प्रशासनी नौकरियां सीमित हैं. और यहीं से शुरू होती है असली कहानी- कम सीटें, लाखों आवेदन, लंबी परीक्षाएं, पेपर लीक, परीक्षा रद्द, कोर्ट केस और फिर वही तैयारी दोबारा. Jantar Mantar Protest पेपर लीक से भरोसे का संकट Competitive examination की पूरी व्यवस्था एक चीज पर टिकी है- Trust. उम्मीदवार मानता है कि वह पढ़ेगा, परीक्षा देगा और उसके प्रदर्शन के आधार पर उसका चयन होगा. लेकिन जब पेपर लीक, cheating, technical glitches या recruitment irregularities की समाचारें आती हैं, तो उम्मीदवार के मन में सबसे पहला सवाल उठता है- ‘क्या मेहनत सच में पर्याप्त है?’ यहीं परीक्षा का विवाद सिर्फ प्रशासनिक समस्या नहीं रहता. यह न्याय और अवसर की समस्या बन जाता है. और फिर शुरू होता है आंदोलन जब हजारों उम्मीदवारों को लगता है कि उनकी आवाज नहीं सुनी जा रही, तो आंदोलन शुरू होता है. पहले सोशल मीडिया पोस्ट. फिर hashtag. फिर धरना. फिर सड़क. फिर नेतृत्वक दलों की एंट्री. और धीरे-धीरे एक परीक्षा का विवाद युवा असंतोष का नेतृत्वक मुद्दा बन सकता है. यही कारण है कि आज प्रशासनी भर्ती सिर्फ education policy का विषय नहीं है. यह politics का भी विषय है. प्रशासन के सामने सबसे मुश्किल सवाल प्रशासन के लिए स्थिति आसान नहीं है. अगर किसी परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत है और प्रशासन परीक्षा रद्द नहीं करती, तो सवाल उठेगा- ‘ईमानदार उम्मीदवारों के साथ न्याय कहां है?’ लेकिन अगर पूरी परीक्षा रद्द कर दी जाती है, तो दूसरा सवाल सामने आता है- ‘जिन उम्मीदवारों ने बिना किसी गलती के परीक्षा पास की, उनकी गलती क्या थी?’ यानी प्रशासन के सामने दो competing principles हैं- Exam integrity vs. Candidates’ rights और दोनों को एक साथ बचाना आसान नहीं है. निजी परीक्षा एजेंसियां भी सवालों के घेरे में आज कई बड़ी परीक्षाओं के आयोजन में private technology और examination agencies की भूमिका बढ़ी है. इसका फायदा है- तेजी, technology और बड़े स्तर पर परीक्षा कराने की क्षमता. लेकिन इसके साथ एक नया सवाल भी आता है- जवाबदेही किसकी होगी? अगर परीक्षा केंद्र पर गड़बड़ी होती है तो जिम्मेदार कौन? अगर data leak होता है तो कौन जवाब देगा? अगर paper security में breach होता है तो किसकी liability होगी? और सबसे महत्वपूर्ण- क्या एक private agency को प्रशासनी भर्ती की पूरी credibility सौंपना सुरक्षित है? प्रशासनी नौकरी की scarcity सिर्फ बेरोजगारी की कहानी नहीं यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है. हिंदुस्तान में युवा आबादी बहुत बड़ी है. हर साल लाखों युवा graduate होते हैं. लेकिन प्रशासनी नौकरियां सीमित हैं. इसका मतलब यह नहीं कि हर graduate को प्रशासनी नौकरी मिलनी चाहिए. लेकिन सवाल यह जरूर है कि- क्या economy इतनी quality private और formal employment पैदा कर रही है कि युवा प्रशासनी नौकरी को लेकर इतना desperate न हों? अगर जवाब कमजोर है, तो प्रशासनी नौकरी की competition लगातार बढ़ती जाएगी। एक सीट के पीछे हजारों उम्मीदवार क्यों खड़े हैं? क्योंकि कहानी सिर्फ नौकरी की नहीं है. यह सुरक्षा की तलाश है. यह सामाजिक mobility की तलाश है. यह परिवार को आर्थिक रूप से ऊपर उठाने की कोशिश है. और कई युवाओं के लिए यह उस शिक्षा का अंतिम reward है, जिसमें उन्होंने 15-20 साल लगाए हैं. इसीलिए जब कोई परीक्षा रद्द होती है, तो केवल एक परीक्षा नहीं टूटती. एक उम्मीद भी टूटती है. Read more: Digital India के 10 साल: अब असली परीक्षा trust और inclusion की क्या इसका समाधान सिर्फ और प्रशासनी नौकरी है? शायद नहीं. प्रशासनें ज्यादा पद निकाल सकती हैं. लेकिन प्रशासनी क्षेत्र हर युवा को नौकरी नहीं दे सकता. इसलिए लंबी अवधि का समाधान तीन दिशाओं में दिखाई देता है- पहला—भर्ती प्रक्रिया पर भरोसा. पेपर security, technology, audit और accountability को मजबूत करना होगा. दूसरा—तेज recruitment. वैकेंसी से appointment तक वर्षों का समय नहीं लगना चाहिए. तीसरा—private employment को मजबूत करना. अगर युवाओं के पास अच्छी salary, career growth और job security वाली private opportunities बढ़ती हैं, तो प्रशासनी नौकरी के लिए असामान्य competition भी कम हो सकता है. आखिर में सवाल एक परीक्षा का नहीं है झारखंड से लेकर दिल्ली तक प्रशासनी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं की कहानी एक बड़े सवाल की ओर इशारा करती है- हिंदुस्तान का युवा आखिर प्रशासनी नौकरी के पीछे इतना भाग क्यों रहा है? क्या इसलिए कि प्रशासनी नौकरी बहुत अच्छी है? या इसलिए कि बाकी विकल्प अभी उतने भरोसेमंद नहीं हैं? शायद असली जवाब दोनों के बीच कहीं है। लेकिन एक बात साफ है- जब एक प्रशासनी पद के लिए हजारों युवा कतार में खड़े हों, परीक्षा में गड़बड़ी हो और फिर पूरी प्रक्रिया वर्षों तक अटक जाए, तो समस्या सिर्फ recruitment system की नहीं रहती. वह देश की employment economy और युवाओं के भरोसे, दोनों की परीक्षा बन जाती है. और यही वजह है कि अगली बार जब किसी प्रशासनी भर्ती का विज्ञापन निकले और लाखों युवा उसका फॉर्म भरें, तो सवाल सिर्फ यह नहीं होना चाहिए- ‘कितनी वैकेंसी है?’ सवाल यह भी होना चाहिए- “क्या इस बार सिस्टम पर भरोसा किया जा सकता है?” The post एक प्रशासनी नौकरी के पीछे हजारों युवा क्यों? हिंदुस्तान में Government Job की भूख की असली कहानी appeared first on Naya Vichar.

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अमरावती के अस्पताल में आग, तीन नवजात की झुलसने से मौत

महाराष्ट्र के अमरावती के प्रशासनी अस्पताल में सोमवार तड़के अचानक आग लग गई. हादसे में तीन नवजात बच्चों की मौत हो गई. आग लगते ही अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई और इलाज करा रहे दर्जनों नवजात बच्चों को आनन-फानन में सुरक्षित बाहर निकालकर दूसरी जगह शिफ्ट किया गया. न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल की तीसरी मंजिल पर सोमवार तड़के करीब 3:30 बजे आग लग गई. बताया जा रहा है कि नवजात बच्चों के इलाज वाले यूनिट में वेंटिलेटर में अचानक विस्फोट के बाद आग भड़की. हादसे के वक्त अस्पताल की स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट में 39 नवजात शिशु भर्ती थे. अस्पताल के कर्मचारियों ने रेस्क्यू किया नवजात बच्चों का आग लगते ही डॉक्टर, नर्स और अस्पताल के अन्य कर्मचारी तुरंत वार्ड में पहुंचे और नवजात बच्चों को बाहर निकालने में जुट गए. बचाव के दौरान जरूरी मेडिकल उपकरणों को हटाया गया और बच्चों को प्रभावित हिस्से से सुरक्षित बाहर ले जाया गया. अस्पताल के कर्मचारियों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. आग की चपेट में आए छह नवजात गंभीर आग की चपेट में आए छह गंभीर रूप से प्रभावित नवजात बच्चों को बेहतर इलाज के लिए पास के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया. बच्चों की हालत को देखते हुए उन्हें तत्काल दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है. The post अमरावती के अस्पताल में आग, तीन नवजात की झुलसने से मौत appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल के हारोआ में हादसा, जहरीली अमोनिया गैस के रिसाव से कई लोग बीमार

उत्तर 24 परगना : एक आइस फैक्ट्री से जहरीली अमोनिया गैस लीक होने के बाद कई ग्रामीण गंभीर रूप से बीमार पड़ गए. समाचार फैलते ही पूरे इलाके में दहशत फैल गई. आक्रोशित ग्रामीणों ने स्थिति को नियंत्रित करने और आइस फैक्ट्री मालिक की गिरफ्तारी की मांग करते हुए टायर जलाकर सड़क जाम कर दी. हरोआ पुलिस स्टेशन की भारी पुलिस और दमकल बल स्थिति पर काबू पाने के लिए मौके पर पहुंची. यह घटना उत्तर 24 परगना के हरोआ ग्राम पंचायत के सप्पुकुर गांव में हुई. तीन लोगों की हालत बिगड़ी स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रविवार को इलाके की एक आइस फैक्ट्री से अचानक अमोनिया गैस का गंभीर रिसाव शुरू हो गया. कुछ ही क्षणों में, यह अत्यधिक जहरीली गैस आसपास के घनी आबादी वाले इलाकों में फैल गई. गैस के प्रभाव से कई ग्रामीण सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन और उल्टी जैसे लक्षणों से बीमार पड़ गए. उनमें से तीन की हालत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत हारोआ ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया और भर्ती कराया गया. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें गुस्साये लोगों ने सड़क को किया जाम इस घटना के बाद स्थानीय निवासी गुस्से में भड़क उठे और बर्फ मिल के मालिक की गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग करने लगे. उन्होंने हारोआ और बेराचापा के बीच मुख्य सड़क पर आग लगाकर उसे अवरुद्ध कर दिया. सूचना मिलते ही दमकल और हारोआ पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मी लाल बत्ती वाली गाड़ियों के साथ मौके पर पहुंचे. दमकल ने गैस रिसाव को रोकने के लिए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी. वहीं, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर और उचित जांच का आश्वासन देकर स्थिति को नियंत्रण में कर लिया. कारखाने की सुरक्षा व्यवस्था में खामियों की जांच की जा रही है. Also Read: तारापीठ होटल अग्निकांड: होटल मालिक गिरफ्तार, हादसे के बाद फरार थे प्रवीर कुमार पाल The post बंगाल के हारोआ में हादसा, जहरीली अमोनिया गैस के रिसाव से कई लोग बीमार appeared first on Naya Vichar.

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Tata Sierra.ev में बोलकर ऑर्डर होगी कॉफी, FASTag भी होगा रिचार्ज, जानें DrivePay फीचर के बारे में

Tata Sierra.ev अब सिर्फ रास्ता बताने या गाने चलाने तक सीमित नहीं रहेगी. इस कार में अब आप बोलकर कॉफी ऑर्डर करने, FASTag रिचार्ज करने और ऐसा चार्जिंग स्टेशन ढूंढने जैसे काम भी कर सकेंगे, जहां पेमेंट के लिए सुविधा उपलब्ध हो. यह फीचर DrivePay के जरिए काम करता है, जिसे Tata ने ToneTag के साथ मिलकर तैयार किया है. Sierra.ev में इसकी खासियत यह है कि इसमें अब वॉयस से काम करने वाला कॉमर्स फीचर भी जुड़ गया है. यानी ड्राइवर को हर छोटे काम के लिए फोन निकालकर अलग-अलग ऐप खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कार का इंफोटेनमेंट सिस्टम आपकी आवाज के कमांड को समझकर काम कर सकेगा. इस फीचर की मदद से क्या-क्या कर सकते हैं? DrivePay का सबसे साफ और काम का इस्तेमाल सामान ऑर्डर करना है. इस सिस्टम के साथ जुड़ने वाला पहला ब्रांड Blue Tokai Coffee है. यानी ड्राइवर को कॉफी ऑर्डर करने के लिए फोन उठाने, आउटलेट खोजने और फिर अलग से पेमेंट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कार में वॉइस कमांड देकर सीधे ऑर्डर किया जा सकता है. इसी तरह FASTag को भी कार में बैठे-बैठे वॉइस कमांड से रिचार्ज किया जा सकेगा. इसका फायदा तब ज्यादा होगा, जब टोल प्लाजा के पास पहुंचने पर अचानक पता चले कि FASTag में पैसे कम हैं. ऐसी स्थिति में आपको गाड़ी रोककर या फोन निकालकर रिचार्ज करने की जरूरत नहीं होगी. रास्ते में ही बोलकर FASTag रिचार्ज किया जा सकेगा. फोटो: TATAev/YouTube ये भी पढ़ें: Tata Punch से लेकर Safari तक… 1 सितंबर से महंगी हो जाएंगी टाटा की ये कारें, ₹25,000 तक बढ़े दाम चार्जिंग के मामले में भी DrivePay आपके लिए काम आसान कर सकता है. यह सिस्टम आपके आसपास मौजूद चार्जिंग स्टेशनों की जानकारी रियल टाइम में दिखा सकता है. साथ ही, आपकी कार के हिसाब से सही चार्जर और जहां सीधे पेमेंट किया जा सकता है, ऐसे चार्जर भी खोजने में मदद करेगा. इस फीचर की शुरुआत Harrier.ev से हुई थी Tata ने Harrier.ev में DrivePay नाम का इन-कार UPI पेमेंट सिस्टम दिया था. इसकी मदद से कार के अंदर से ही चार्जिंग और FASTag का पेमेंट किया जा सकता है. Harrier.ev में चार्जिंग स्टेशन खोजने का फीचर भी कार के नेविगेशन सिस्टम से जुड़ा हुआ था. साथ ही, कार में कितनी बैटरी बची है, इसकी जानकारी भी मिलती थी. अब Sierra.ev के साथ Tata ने इस आइडिया को एक कदम और आगे बढ़ाया है. इसमें ड्राइवर बोलकर सामान या कॉफी जैसी चीजें ऑर्डर करने की शुरुआत कर सकता है. आसान शब्दों में कहें तो Harrier.ev ने दिखाया कि कार का डैशबोर्ड पेमेंट करने के काम आ सकता है. वहीं, Sierra.ev यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि कार की स्क्रीन का यूज ऑर्डर करने के लिए भी किया जा सकता है. ये भी पढ़ें: 7-सीटर EV में मिलेगा 500km का बैकअप! लॉन्च से पहले देखें JSW MG की नई SUV के फीचर्स The post Tata Sierra.ev में बोलकर ऑर्डर होगी कॉफी, FASTag भी होगा रिचार्ज, जानें DrivePay फीचर के बारे में appeared first on Naya Vichar.

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बिहार की सिपाही भर्ती में जो गया था जेल, उसे CGL परीक्षा की मिली जिम्मेवारी

रांची से पंकज त्रिपाठी की रिपोर्ट रांची: JSSC डिप्लोमा स्तरीय भर्ती परीक्षा गड़बड़ी में दिल्ली से गिरफ्तार अरुण कुमार को लेकर सीआइडी को अहम जानकारियां मिली हैं. इसके अनुसार बिहार सिपाही भर्ती (सीएसबीसी) में 14.3 करोड़ गबन के आरोपी अरुण कुमार को जेल भेजा गया था, जहां उसने सिंडिकेट बनाकर झारखंड नियुक्ति घोटाले की योजना बनायी. करीब चार साल पहले वर्ष 2022 में ही जेएसएससी परीक्षा के संबंध में हुई जांच में आरोपी अभिषेक ने पुलिस को सारी जानकारी दी थी. चौंकाने वाला तथ्य यह है कि बिहार में गबन के आरोप में जेल जा चुके अरुण कुमार की कंपनी को जेएसएससी की डिप्लोमा स्तरीय भर्ती परीक्षा से जुड़ा काम मिल गया. जांच में सामने आया है कि टेंडर हासिल करने में भारी खर्च होने का हवाला देकर अरुण ने वसूली की नयी योजना बनायी. इसके तहत परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक कर परीक्षार्थियों से मोटी रकम वसूलने का जाल बिछाया गया. वर्ष 2017-18 और 2018-19 में सीएसबीसी सिपाही भर्ती का टेंडर एक निजी कंपनी को मिला था. इसमें परीक्षार्थियों से एप्लीकेशन फीस के रूप में वसूली गयी रकम में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गयी. इसी मामले में अरुण को जेल भेजा गया था. वहां रहने के दौरान ही हाइकोर्ट से जमानत की प्रक्रिया के सिलसिले में अरुण का संपर्क एक अन्य व्यक्ति अभिषेक से हुआ, जो पटना हाइकोर्ट में सेक्शन अफसर के पद पर था. हाइकोर्ट से गबन की कुल रकम का एक तिहाई हिस्सा जमा करने के बाद अरुण कुमार को जमानत मिल गयी. लेकिन इसी कानूनी प्रक्रिया के दौरान पटना में ही उक्त सेक्शन अफसर अभिषेक और अन्य कुछ लोगों के साथ मिलकर अरुण ने झारखंड में भर्तियां बेचने की पटकथा तैयार कर ली. यह जानकारी स्वयं अभिषेक ने पुलिस को दी है. यह जानकारी अब सीआइडी की जांच में सामने आयी है. जमानत के बाद भी अरुण ने जेल में बनी इसी पहचान का इस्तेमाल कर आगे की साजिश को अंजाम दिया. वर्ष 2022 में ही दर्ज हो गया था पूरा ब्योरा पुलिस सूत्रों के अनुसार, सितंबर 2022 में इस मामले में हुई एक गिरफ्तारी के दौरान आरोपी अभिषेक ने पूछताछ में अरुण कुमार की बिहार वाली पृष्ठभूमि, जमानत की परिस्थितियां और झारखंड में मिले काम की पूरी जानकारी पुलिस को दे दी थी. यह पूरा बयान केस डायरी में दर्ज है. इसके बावजूद अरुण कुमार तब गिरफ्तारी से बचा रहा. अब अगस्त माह में सीआइडी ने उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया. उसने पूछताछ में कई जानकारी सीआईडी को दी है. अब जब सीआइडी ने अरुण कुमार को गिरफ्तार किया है, तो जांच एजेंसी के सामने वही तथ्य दोबारा आ रहे हैं, जो 2022 की केस डायरी में पहले से दर्ज थे. इससे यह सवाल उठ रहा है कि पुख्ता जानकारी होने के बावजूद अरुण की गिरफ्तारी में इतना वक्त क्यों लगा? रांची और हजारीबाग के दो कोचिंग संस्थानों में सीआइडी ने की जांच जेपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों की जांच के क्रम में सीआइडी ने रांची और हजारीबाग के कोचिंग संस्थानों की जांच की है. जांच के क्रम में सीआइडी को कुछ तथ्य मिले थे, जिसके बाद रांची के लालपुर स्थित शिवांगन की पाठशाला और इसके निदेशक संजीत कुमार के रातू रोड स्थित आवास पर जांच की गयी. इसके साथ ही हजारीबाग में संचालित मेघा कोचिंग सेंटर में भी जांच की गयी. दोनों जगहों से दस्तावेज जब्त किये गये हैं. सीआइडी अभय तिवारी, उसके भाई और उसकी पत्नी से पूछताछ कर रही है. एक अन्य आरोपी, उत्तर प्रदेश के मो एबाद से भी पूछताछ की गयी है. उसने परीक्षा उप नियंत्रक समेत अन्य लोगों पर ओएमआर शीट में गड़बड़ी कराने का आरोप लगाया है. इसके साथ ही अन्य 18 सफल अभ्यर्थियों से भी सीआइडी ने पूछताछ की है. पूछताछ के दौरान कोचिंग संस्थानों की भूमिका संदिग्ध पाये जाने के बाद दोनों कोचिंग संस्थानों की जांच-पड़ताल की गयी. The post बिहार की सिपाही भर्ती में जो गया था जेल, उसे CGL परीक्षा की मिली जिम्मेवारी appeared first on Naya Vichar.

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