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August 25, 2026

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PM Surya Ghar Application Rejected: फॉर्म भरने में की है ये भूल, तो ऐसे करें ऑनलाइन ठीक

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी कई बार छोटी-मोटी कागजी गलतियों या तकनीकी खामियों की वजह से अटक जाती है या खारिज (Reject) हो जाती है. टाटा पावर की वेबसाइट के अनुसार, केंद्र प्रशासन की इस महत्वाकांक्षी योजना में अब तक लाखों लोग आवेदन कर चुके हैं, लेकिन बिजली वितरण कंपनियों (DISCOM) और नेशनल पोर्टल के सख्त जांच नियमों के कारण कई अर्जियों को हरी झंडी नहीं मिल पाती. अगर आपका आवेदन भी रिजेक्ट हो गया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. ज्यादातर कारण ऐसे होते हैं जिन्हें आसानी से सुधारकर दोबारा सबमिट किया जा सकता है. वेंडर और सोलर पैनल नियमों का पालन न होना गैर-सूचीबद्ध (Non-Empanelled) वेंडर से इंस्टालेशन: अगर आपने MNRE या अपनी DISCOM के पोर्टल पर रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर के अलावा किसी अन्य लोकल वेंडर से सोलर सिस्टम लगवाया है, तो सब्सिडी जारी नहीं होगी. हमेशा आधिकारिक पोर्टल पर रजिस्टर्ड वेंडर का ही चुनाव करें. ALMM सूची से बाहर के पैनल: योजना के तहत केवल प्रशासन की ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) सूची में शामिल सोलर मॉडल्स और DCR (मेड इन इंडिया) पैनल ही मान्य हैं. यदि वेंडर ने सस्ते या गैर-प्रमाणित पैनल लगाए हैं, तो रिपोर्ट खारिज कर दी जाएगी. दस्तावेज और नाम में मिसमैच की समस्या नाम में अंतर: आपके आधार कार्ड, बिजली बिल और बैंक पासबुक में नाम की स्पेलिंग (अक्षर-दर-अक्षर) बिल्कुल एक समान होनी चाहिए. थोड़ा सा भी स्पेलिंग का अंतर या उपनाम (Surname) न होना आवेदन रद्द करा सकता है. गलत कंज्यूमर नंबर और IFSC कोड: बिजली बिल पर दर्ज कंज्यूमर नंबर (Consumer Account Number) की जगह मीटर नंबर डालने से सिस्टम उसे अमान्य कर देता है. इसी तरह बैंक खाते का गलत या पुराना IFSC कोड डालने पर सब्सिडी ट्रांसफर (DBT) फेल हो जाता है. अस्पष्ट या अधूरी तस्वीरें: कमीशनिंग रिपोर्ट अपलोड करते समय धुंधली छत की फोटो, बिना सीरियल नंबर वाले पैनल की फोटो या अधूरे दस्तावेज अपलोड करने से जांच टीम आवेदन को पेंडिंग में डाल देती है. कनेक्शन और स्वीकृत भार (Sanctioned Load) से जुड़ी कमियां स्वीकृत भार से बड़ा सोलर सिस्टम: यदि आपके बिजली बिल पर स्वीकृत लोड (Sanctioned Load) 2 kW है और आपने 5 kW का सोलर प्लांट लगा लिया है, तो DISCOM की फिजिबिलिटी रिपोर्ट रिजेक्ट हो जाएगी. पुराना बकाया बिल: अगर आपके बिजली कनेक्शन पर कोई पुराना बकाया (Dues) है, तो DISCOM फिजिबिलिटी क्लियर नहीं करती. आवेदन से पहले पूरा बकाया जमा करना अनिवार्य है. गलत कनेक्शन कैटेगरी: यह योजना केवल आवासीय (Residential/Domestic) ग्राहकों के लिए है. अगर आपका कनेक्शन कमर्शियल या एग्रीकल्चर श्रेणी में दर्ज है, तो अर्जी खारिज हो जाएगी. बैंक खाता और प्रॉपर्टी ओनरशिप से जुड़े कारण Aadhaar Seeding (DBT) का न होना: आपका बैंक खाता आपके आधार से लिंक होने के साथ-साथ NPCI मैपर पर Direct Benefit Transfer (DBT) के लिए एक्टिव होना अनिवार्य है. संयुक्त संपत्ति और बिना NOC के आवेदन: यदि मकान एक से अधिक लोगों के नाम पर (Joint Property) है या पुश्तैनी है, तो अन्य सह-मालिकों का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) अपलोड न करने पर ओनरशिप चेक फेल हो जाता है. एक ही पते पर multiple कनेक्शन: एक परिवार या एक मकान के लिए केवल एक ही सब्सिडी मान्य है. एक ही पते पर कई कनेक्शन होने पर डुप्लीकेट एप्लीकेशन का फ्लैग लग जाता है. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) {“type”:”faq”,”question”:”Q1. PM सूर्य घर योजना में आवेदन रिजेक्ट होने के बाद क्या दोबारा अप्लाई कर सकते हैं?”,”answer”:”उत्तर: हां, आप पोर्टल पर लॉगिन करके रिजेक्शन का कारण देख सकते हैं और त्रुटि सुधारकर (जैसे दस्तावेज अपडेट करना या लोड बढ़ाना) अपनी अर्जी दोबारा सबमिट कर सकते हैं.”}{“type”:”faq”,”question”:”Q2. अगर आधार और बिजली बिल में नाम अलग-अलग है तो क्या करें?”,”answer”:”उत्तर: आप अपनी DISCOM ऑफिस में आवेदन देकर बिजली बिल पर नाम सुधरवा सकते हैं या आधार के अनुसार सही नाम दर्ज कराके नया बिल अपलोड कर सकते हैं.”}{“type”:”faq”,”question”:”Q3. क्या किराए के मकान में रहने वाले लोग इस योजना का लाभ ले सकते हैं?”,”answer”:”उत्तर: नहीं, इस योजना के लिए स्वयं का मकान और छत का मालिकाना हक होना अनिवार्य है.”} ये भी पढ़ें: PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana: फ्री बिजली के साथ मिलेगी ₹78,000 तक सब्सिडी, ऐसे करें ऑनलाइन अप्लाई ये भी पढ़ें: EPFO Interest Credit: आपके PF खाते में ब्याज आया या नहीं, 2 मिनट में ऐसे करें चेक The post PM Surya Ghar Application Rejected: फॉर्म भरने में की है ये भूल, तो ऐसे करें ऑनलाइन ठीक appeared first on Naya Vichar.

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रामगढ़ के नेमरा में गरमाया माहौल, देवेंद्र महतो की भर्ती यात्रा पर भड़के ग्रामीण, बोले- मुख्यमंत्री का विरोध बर्दाश्त नहीं

रामगढ़ से सलाउद्दीन की रिपोर्ट रामगढ़ : रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड अंतर्गत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा में सोमवार को भारी नेतृत्वक और सामाजिक गरमा-गरमी देखने को मिली. छात्र नेता देवेंद्र महतो के नेतृत्व में प्रस्तावित ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा’ का नेमरा गांव के संथाली समाज ने पुरजोर विरोध किया. हालांकि, तमाम विरोध और तनाव के बीच यात्रा दोपहर बाद गोला के लुकैयाटांड पहुंची, जहां नेताओं ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर यात्रा आगे बढ़ाई. नेमरा में ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक हथियारों के साथ जुटे ग्रामीण सोमवार सुबह नेमरा के धुमकुड़िया भवन के पास मांझी हड़ाम और संथाली समाज के लोग पारंपरिक हथियारों व ढोल-नगाड़ों के साथ गोलबंद हो गए. गांव में आयोजित बैठक के दौरान ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी सूरत में गांव के भीतर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन नहीं होने देंगे. ग्रामीणों का कहना था कि हेमंत सोरेन सिर्फ एक नेतृत्वक व्यक्ति या मुख्यमंत्री नहीं हैं, बल्कि वे नेमरा गांव के ‘मांझी हड़ाम’ हैं. ये भी पढ़ें: JPSC-JSSC विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, केंद्र और झारखंड प्रशासन को नोटिस गांव छोड़कर कहीं भी करें विरोध मांझी हड़ाम चेतन टुडू, जोग मांझी विश्वनाथ बेसरा, विजय सोरेन और मंगल टुडू सहित ग्रामीणों ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने का अधिकार सभी को है. यात्रा गोला या रामगढ़ में कहीं से भी निकाली जाए, वे उसका विरोध नहीं करेंगे, लेकिन गांव की सीमा के अंदर इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. 3 बजे लुकैयाटांड पहुंची यात्रा रामगढ़ के नेमरा में विरोध के बाद देवेंद्र महतो के नेतृत्व में ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा’ दोपहर लगभग तीन बजे बरलंगा चौक होते हुए लुकैयाटांड मैदान पहुंची. मैदान में लगी दिशोम गुरु शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा के समक्ष देवेंद्र महतो व अन्य यात्रियों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. सफेद टी-शर्ट पहने यात्रा में शामिल युवा हाथों में भगवान बिरसा मुंडा, बिनोद बिहारी महतो और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तस्वीरें लिए हुए थे. इस दौरान युवाओं ने ‘जय झारखंड’ और महापुरुषों के अमर रहने के नारे लगाए. ये भी पढ़ें: बिहार की सिपाही भर्ती में जो गया था जेल, उसे CGL परीक्षा की मिली जिम्मेवारी The post रामगढ़ के नेमरा में गरमाया माहौल, देवेंद्र महतो की भर्ती यात्रा पर भड़के ग्रामीण, बोले- मुख्यमंत्री का विरोध बर्दाश्त नहीं appeared first on Naya Vichar.

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TRE-4 की पीटी में बदल सकता है सिलेबस, बिहार से होंगे 30% प्रश्न, शिक्षा विभाग ने BPSC को भेजा पत्र

BPSC TRE-4 Prelims Syllabus Change: शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 की प्रारंभिक परीक्षा के सिलेबस में बदलाव की तैयारी है. शिक्षा विभाग ने परीक्षा के सिलेबस को लेकर बिहार लोक सेवा आयोग को पत्र भेजा है. इसमें प्रारंभिक परीक्षा में 50 प्रतिशत सवाल बाल मनोविज्ञान से और 50 प्रतिशत सवाल सामान्य ज्ञान एवं सामान्य अध्ययन से पूछने का सुझाव दिया गया है. हालांकि, इन बदलावों पर अंतिम फैसला अभी बिहार लोक सेवा आयोग को लेना है. बाल मनोविज्ञान पर रहेगा खास जोर शिक्षा विभाग के अनुसार, टीआरई-4 में शिक्षक बनने के लिए बीएड और डीएलएड करने वाले अभ्यर्थियों के लिए बाल मनोविज्ञान और पढ़ाने की जानकारी काफी जरूरी है. इसी को देखते हुए छात्र संघों ने प्रारंभिक परीक्षा में बाल मनोविज्ञान से 50 प्रतिशत सवाल रखने की मांग की थी. विभाग ने इस मांग को बिहार लोक सेवा आयोग के सामने रखा है. सामान्य ज्ञान में बिहार से 30% सवाल की मांग प्रारंभिक परीक्षा में बाकी 50 प्रतिशत सवाल सामान्य ज्ञान और सामान्य अध्ययन से रखने की बात कही गई है. इसमें से 30 प्रतिशत सवाल बिहार से जुड़े सामान्य ज्ञान पर आधारित रखने का सुझाव दिया गया है. इन सवालों में बिहार का इतिहास, नेतृत्व, वित्तीय स्थिति और भौगोलिक जानकारी समेत दूसरे जरूरी विषय शामिल किए जा सकते हैं. छात्र संघों से बैठक के बाद शिक्षा विभाग ने भेजा पत्र टीआरई-4 की आने वाली परीक्षा को लेकर छात्र संघों ने अपनी कई मांगें शिक्षा विभाग के सामने रखी थीं. इन मांगों पर सोमवार को शिक्षा विभाग के अधिकारियों और छात्र संघों के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई. बैठक सोमवार देर शाम तक चली. इसके बाद शिक्षा विभाग ने बिहार लोक सेवा आयोग को पत्र भेजकर छात्र संघों की मांगों से अवगत कराया. शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन ने सोमवार देर रात बिहार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को पत्र भेजा. पत्र में बताया गया कि अलग-अलग छात्र संघों के प्रतिनिधियों ने टीआरई-4 को लेकर विभाग के अधिकारियों के साथ बातचीत की और परीक्षा से जुड़ी अपनी मांगें रखीं. बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें एक अभ्यर्थी-एक परिणाम की मांग भी पहुंची आयोग तक छात्र संघों ने टीआरई-4 को लेकर ‘एक अभ्यर्थी-एक परिणाम’ की मांग भी उठाई है. शिक्षा विभाग ने इस मांग को भी बिहार लोक सेवा आयोग को भेज दिया है. विभाग ने आयोग से छात्र संघों की मांगों पर जरूरी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है. अब टीआरई-4 की प्रारंभिक परीक्षा के सिलेबस में ये बदलाव होंगे या नहीं, इसका अंतिम फैसला बिहार लोक सेवा आयोग को करना है. फिलहाल शिक्षा विभाग ने बाल मनोविज्ञान, सामान्य ज्ञान एवं सामान्य अध्ययन में बिहार से जुड़े सवाल और एक अभ्यर्थी-एक परिणाम से जुड़ी मांग आयोग के सामने रख दी है. इसे भी पढ़ें:  कोइलवर से गंगा किनारे आगे बढ़ेगा मरीन ड्राइव, 70 हजार करोड़ से बनेगा 126 किमी लंबा मार्ग, सीएम ने क्या बताया The post TRE-4 की पीटी में बदल सकता है सिलेबस, बिहार से होंगे 30% प्रश्न, शिक्षा विभाग ने BPSC को भेजा पत्र appeared first on Naya Vichar.

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ऑनलाइन गेमिंग के खिलाफ सख्ती जरूरी, पढ़ें विराग गुप्ता का लेख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से संबोधन में नशे के खिलाफ जंग का आह्वान किया है. उन्होंने बच्चों को रीलबाजी से दूर रहकर किताबें पढ़ने के लिए भी प्रेरित किया है. केंद्र प्रशासन के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन के अनुसार, जंक फूड, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग की तिकड़ी से बर्बाद होते युवा नौकरियों के लिए अनफिट हो रहे हैं. लॉकडाउन के दौरान देश में करोड़ों शिशु ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर जुआ और सट्टेबाजी की लत का शिकार हो गये. बीते वर्ष अगस्त में संसद में पारित कानून में लिखा था कि ऑनलाइन मनी गेमिंग से परिवार और समाज के साथ वित्तीय स्थिति तबाह हो रही है. आइटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, ऑनलाइन मनी गेमिंग कंपनियों की आड़ में मनी लॉन्ड्रिंग, साइबर अपराध और टैक्स चोरी जैसे गंभीर वित्तीय अपराध बढ़ रहे हैं. संसद से बने नये कानून और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद ऑनलाइन गेमिंग का मकड़जाल हिंदुस्तान में कम नहीं हो रहा. बच्चों और युवाओं को गेमिंग के नशे से बचाने के लिए इन छह कानूनी पहलुओं को समझना बेहद आवश्यक है. पहला-संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार, सट्टेबाजी, लॉटरी, जुआ पर कानून बनाने और टैक्स वसूली के लिए राज्यों को अधिकार हैं. ताश के पत्तों से कुछेक हजार रुपये का जुआ स्पोर्ट्सने वालों को पुलिस जेल में डाल देती है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, गैंबलिंग एक्ट के अनुसार, देश में 2021 में 1.64 लाख, 2022 में 1.69 लाख और 2023 में 1.66 लाख लोगों के खिलाफ मुकदमे दायर हुए. पर ऑनलाइन सट्टेबाजी के संगठित अपराधों को रोकने के लिए केंद्र प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रही. नये कानून में गैर-कानूनी एप्स को ब्लॉक करने और अवैध पेमेंट गेटवे को रोकने के लिए राज्यों की पुलिस को अधिकार नहीं हैं. गेमिंग विधेयक को लोकसभा में मात्र सात मिनट में और राज्यसभा में 26 मिनट में चर्चा के बगैर ही पारित कर दिया गया था. पीआइबी द्वारा जारी बैकग्राउंडर नोट में गैंबलिंग, लॉटरी और सट्टेबाजी को रोकने की बात कही गयी है. पर कानून में स्पष्ट तौर पर इस बारे में कोई प्रावधान न होने से लोगों में भ्रम बढ़ रहा है. दूसरा-सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री एल मुरगन ने विगत मार्च में लोकसभा में जवाब दिया था. उनके अनुसार, सभी तरह के ऑनलाइन मनी गेम के विज्ञापन, प्रमोशन और संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध है. इसका उल्लंघन करने वालों के अभियोजन के साथ नये कानून के अनुसार भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है. गेमिंग एप्स को ब्लॉक करने के लिए केंद्र प्रशासन आइटी कानून की धारा-69-ए के तहत कार्रवाई कर सकती है. थिंक टैंक सेंटर फॉर अकाउंटेबिलिटी एंड सिस्टेमिक चेंज (सीएएससी) ने सुप्रीम कोर्ट में 2,000 से ज्यादा एप्स का विवरण देकर उन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है. जस्टिस पारदीवाला की पीठ ने पिछले साल 17 अक्तूबर और फिर तीन नवंबर को केंद्र प्रशासन से कार्रवाई के लिए लिखित आदेश जारी किया. पिछले एक साल से केंद्र प्रशासन ने अभी तक इस मामले में कोई जवाब या स्टेटस रिपोर्ट दायर नहीं की. तीसरा-संसदीय समिति की रिपोर्ट और एनआइए जांच के अनुसार, गेमिंग की चैट से युवाओं को कट्टरपंथ और आतंकवाद से जोड़ा जा रहा है. चीनी गेमिंग एप फीविन की इडी जांच में म्यूल खातों और क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट के जरिये खरबों के लेन-देन का खुलासा हुआ था. चीनी एप्स को सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए 2020 में प्रशासन ने सैकड़ों चाइनीज एप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था. गेमिंग के नये कानून के बाद ड्रीम-11 कंपनी 26 करोड़ यूजर्स के डाटा के दम पर वित्तीय और एआइ सेक्टर में कारोबार बढ़ा रही है. गेमिंग के डाटा के कारोबार से बच्चों की सुरक्षा में सेंध लगने के साथ साइबर अपराध बढ़ रहे हैं. संसद ने 2023 में डाटा सुरक्षा कानून बनाया था, जिसे लागू न करने से डाटा के अवैध कारोबार के साथ टैक्स चोरी बढ़ रही है. चौथा-विधि आयोग की 2018 में पेश रिपोर्ट के अनुसार, महाहिंदुस्तान काल में जुए के खिलाफ कानून होता, तो द्रौपदी दांव पर नहीं लगती. वर्ष 2021 में केंद्र प्रशासन ने दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा में कहा था कि ऑनलाइन गैंबलिंग और सट्टेबाजी रोकने के लिए राज्यों को कानून बनाने का अधिकार है. उसके बाद तमिलनाडु, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे कई राज्यों ने कानून बनाकर गेमिंग कंपनियों की नकेल कसने की कोशिश की. पर राज्यों के दखल को रोकने के लिए केंद्र ने 2023 में गेमिंग कंपनियों को इंटरमीडियरी का सुरक्षा कवच और स्व-नियमन का विशेषाधिकार दे दिया. अधिकांश राज्यों में जुआ और सट्टेबाजी रोकने के लिए पहले से ही कानून बने हुए हैं. लेकिन केंद्र प्रशासन के नये कानून से भ्रम बढ़ रहा है, जिसका फायदा गेमिंग कंपनियां उठा रही हैं. पांचवां-हेरफेर करने वाले फीचर्स, लत वाले एल्गोरिदम और बॉट्स के माध्यम से गेमिंग कंपनियां सालाना कई लाख करोड़ की ठगी का कारोबार कर रही हैं. कई गेमिंग एप कंपनियों ने लगभग 2.5 लाख करोड़ की जीएसटी और 58 हजार करोड़ की आयकर चोरी की थी. जीएसटी वसूली की प्रक्रिया के खिलाफ कई कंपनियां अदालत गयीं. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पारदीवाला की पीठ ने 27 मई के आदेश से अपीलों को निरस्त करते हुए टैक्स वसूली का मार्ग प्रशस्त कर दिया. विदेशों से संचालित हो रहे एप्स को रोकने और उनसे टैक्स वसूली के लिए इंटरपोल की मदद से प्रशासन ने प्रभावी कारवाई नहीं की है. नये कानून की आड़ में सट्टेबाजी और गैंबलिंग के एप्स को शिक्षा और स्पोर्ट्स के नाम पर मान्यता और वित्तीय प्रोत्साहन देने से यह नासूर और बढ़ेगा. छठा-जुआ और सट्टेबाजी के नाम पर गांवों में गरीबों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके जेल में बंद कर दिया जाता है. लेकिन ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में गैंबलिंग और सट्टेबाजी के संगठित अपराधियों के खिलाफ प्रशासन ठोस कार्रवाई नहीं कर रही. अठारह साल से कम उम्र के शिशु गेमिंग कंपनियों के साथ अनुबंध नहीं कर सकते. तो फिर इ-स्पोर्ट्स और सोशल गेमिंग की आड़ में नाबालिग बच्चों को गेमिंग के नशे के शिकंजे में फंसाने के लिए नये कानून में इजाजत क्यों दी जा रही है? गेमिंग की लत की वजह से बच्चों और युवाओं में अवसाद, आत्महत्या और नाबालिग अपराध के मामले

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