Hot News

ड्यूटी-फ्री चीनी इम्पोर्ट के बदले नियम, अब रिफाइंड चीनी बेचने के लिए मिलेगा 2 महीने का समय

प्रशासन ने ड्यूटी-फ्री कच्ची चीनी के इम्पोर्ट से जुड़े नियमों में बदलाव किया है. अब इंपोर्टर्स को कच्ची चीनी को रिफाइंड करके घरेलू बाजार में बेचने के लिए तय 31 अक्टूबर की आखिरी तारीख के बजाय बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से दो महीने का समय मिलेगा. प्रशासन का मकसद घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ाना और त्योहारों से पहले बढ़ती कीमतों पर दबाव कम करना है.

क्या बदला है चीनी इम्पोर्ट के नियम में?

20 अगस्त को प्रशासन ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट की अनुमति दी थी. यह इम्पोर्ट टैरिफ रेट कोटा यानी टीआरक्यू के तहत 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा सकता है. पहले नियम था कि इम्पोर्ट की गई कच्ची चीनी को देश में रिफाइंड करके सफेद चीनी बनानी होगी और उसे 31 अक्टूबर तक घरेलू बाजार में बेच देना होगा. अब इस तय तारीख की जगह दो महीने की समय सीमा लागू होगी. यानी अगर किसी इम्पोर्टर ने बिल ऑफ एंट्री 25 अगस्त को दाखिल किया है, तो उसे इम्पोर्टेड कच्ची चीनी को प्रोसेस करके रिफाइंड चीनी बेचने के लिए करीब दो महीने का समय मिलेगा.

प्रशासन ने यह बदलाव क्यों किया?

देश में इस समय चीनी की उपलब्धता को लेकर दबाव है. चालू सीजन में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 लाख टन था. यानी प्रोडक्शन अनुमान से करीब 11 फीसदी कम है. कम प्रोडक्शन और घटते स्टॉक के बीच घरेलू चीनी कीमतें भी हाल के महीनों में तेजी से बढ़ी हैं. अगस्त से नवंबर के बीच त्योहारों का सीजन होने के कारण चीनी की मांग और बढ़ने की उम्मीद है. ऐसे में प्रशासन चाहती है कि इम्पोर्टेड कच्ची चीनी जल्दी घरेलू बाजार तक पहुंचे और उपलब्धता बेहतर हो.

ये भी पढ़ें: Sugar Price Hike: हिंदुस्तान में चीनी 55 रुपये के पार, प्रशासन ने रेड रॉट और एल्निनो को ठहराया जिम्मेदार; विपक्ष ने एथेनॉल पर घेरा

कारोबारियों और ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?

इस फैसले से चीनी कारोबार से जुड़े इंपोर्टर्स को काम करने के लिए ज्यादा लचीलापन मिलेगा. तय 31 अक्टूबर की एक ही डेडलाइन के बजाय हर बिल ऑफ एंट्री के हिसाब से दो महीने की समय सीमा मिलने से इम्पोर्टेड चीनी को प्रोसेस और बेचने की प्रक्रिया आसान हो सकती है. इसका फायदा आगे चलकर घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ने के रूप में दिख सकता है. अगर उपलब्धता सुधरती है, तो त्योहारों के दौरान कीमतों पर दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है.

थोक खरीदारों के लिए भी बदले नियम

प्रशासन ने चीनी की जमाखोरी पर नजर रखने के लिए स्टॉक रखने की सीमा भी तय की है. 10 टन से ज्यादा चीनी हर महीने इस्तेमाल करने वाले कारोबार 1 सितंबर से 30 नवंबर के बीच अधिकतम 15 दिन की खपत के बराबर स्टॉक रख सकेंगे. यह पाबंदी ऐसे समय लगाई गई है जब त्योहारों के कारण मांग बढ़ने की उम्मीद है. मौसम से जुड़ी परेशानियों और कम गन्ना उत्पादन ने भी चीनी की घरेलू सप्लाई पर दबाव बढ़ाया है. प्रशासन ने साथ ही मौजूदा एडवांस ऑथराइजेशन में से एसआईओएन ई-52 के तहत जारी कुछ अनुमतियों को एक बार टीआरक्यू व्यवस्था में बदलने की सुविधा भी दी है. यह उन कच्ची चीनी के इम्पोर्ट पर लागू है जो 20 अगस्त तक वास्तव में इम्पोर्ट हो चुकी थी.

ये भी पढ़ें: Sugar Price: क्या इथेनॉल की वजह से महंगी हुई चीनी? जानें ISMA ने क्या दिया जवाब

The post ड्यूटी-फ्री चीनी इम्पोर्ट के बदले नियम, अब रिफाइंड चीनी बेचने के लिए मिलेगा 2 महीने का समय appeared first on Naya Vichar.

Spread the love

विनोद झा
संपादक नया विचार

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top