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September 12, 2026

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BRICS Summit 2026 Live Updates in Hindi : चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दिल्ली के लिए रवाना, गलवान के बाद पहला भारत दौरा

BRICS Summit 2026 LIVE Updates in Hindi: ब्रिक्स सम्मेलन के दूसरे दिन नई दिल्ली के हिंदुस्तान मंडपम में दोपहर 2 बजे से सदस्य देशों के नेता पहुंचेंगे. दुनिया की नजर मोदी और जिनपिंग की मुलाकात पर रहने वाली है. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग गलवान में हुई झड़प के 7 साल बाद हिंदुस्तान आ रहे हैं. ब्रिक्स समिट की हर अपडेट के लिए आप जुड़े रहें नया विचार के साथ. The post BRICS Summit 2026 Live Updates in Hindi : चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दिल्ली के लिए रवाना, गलवान के बाद पहला हिंदुस्तान दौरा appeared first on Naya Vichar.

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ऑस्ट्रेलियाई : सोशल मीडिया पर दिखेगा आपकी पसंद का कंटेंट; माय फीड, माय वे से मिलेगा एल्गोरिदम पर कंट्रोल

ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन ने अपने डिजिटल सुरक्षा कानूनों को मजबूत करते हुए ‘डिजिटल ड्यूटी ऑफ केयर’ (Digital Duty of Care) का ड्राफ्ट पेश किया है. इस नए कानून के तहत सोशल मीडिया कंपनियों, ऑनलाइन ऐप्स, एआई चैटबॉट्स और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय की जाएगी, ताकि यूजर्स को एक सुरक्षित और पारदर्शी ऑनलाइन माहौल मिल सके. अपने फीड का कंटेंट खुद तय कर सकेंगे यूजर इस कानून का सबसे बड़ा आकर्षण “माय फीड, माय वे” (My Feed, My Way) पहल है. इसके जरिए ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले लोगों को यह अधिकार मिलेगा कि वे अपने फीड का कंटेंट खुद तय कर सकें. ‘माय फीड, माय वे’ कैसे काम करेगा? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपने पुराने और नए, सभी यूजर्स को नोटिफिकेशन भेजना अनिवार्य होगा. इसमें यूजर्स के पास दो विकल्प होंगे. एल्गोरिदम कंटेंट (ऑप्ट-इन): यूजर चाहें तो अपने हिसाब से पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन वाले फीड को चुन सकते हैं. फॉलो किए गए अकाउंट्स (ऑप्ट-आउट): यूजर एल्गोरिदम वाले कंटेंट को बंद कर केवल उन दोस्तों और क्रिएटर्स के पोस्ट देख सकते हैं जिन्हें वे फॉलो करते हैं. 18 साल से कम उम्र के युवाओं को मिलेगा विशेष सुरक्षा कवच ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स और AI चैटबॉट्स को 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए विशेष रूप से सुरक्षित बनाना होगा. कंपनियों को ऐसी सुविधाओं पर रोक लगानी होगी जो बच्चों को एडिक्टिव बनाती हैं या उनके आत्म-सम्मान पर बुरा असर डालती हैं. हानिकारक कंटेंट से बच्चों को बचाना प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी होगी. ईटिंग डिसऑर्डर (खान-पान से जुड़ी बीमारियों) को बढ़ावा देने वाला कंटेंट. स्त्रीओं और लैंगिक समानता के खिलाफ नफरत फैलाने वाली बातें. अश्लील साहित्य (Pornography) और अपराध/खतरनाक स्टंट को बढ़ावा देने वाले वीडियो. साइबर बुलिंग, मानसिक तनाव और प्रताड़ना बढ़ाने वाला कंटेंट. नियम तोड़ा तो लगेगा $109.2 मिलियन (लगभग 600 करोड़ रुपये) का जुर्माना डिजिटल कंपनियों को यह लिखित में देना होगा कि वे यूजर्स की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठा रही हैं. नियमों का उल्लंघन करने या कोताही बरतने पर कंपनियों पर 109.2 मिलियन डॉलर तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जा सकता है. ऑस्ट्रेलिया की स्वतंत्र ‘ई-सेफ्टी कमिश्नर’ (eSafety Commissioner) के पास डीपफेक/न्यूडिफाइ (Nudify) ऐप्स को तुरंत हटाने और साइबर बुलिंग पर त्वरित कार्रवाई करने का अधिकार होगा. “यह प्रशासन के नियंत्रण के बारे में नहीं है, बल्कि आम लोगों को अपनी ऑनलाइन दुनिया पर नियंत्रण देने की पहल है. ऑस्ट्रेलिया सोशल मीडिया एज बैन और ऑनलाइन सुरक्षा में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है.” — एंथनी अल्बनीज, प्रधानमंत्री, ऑस्ट्रेलिया “जैसे कारों, खिलौनों या खाने-पीने की चीजों के लिए सुरक्षा मानक होते हैं, वैसे ही डिजिटल प्रोडक्ट्स के लिए भी बुनियादी मानक होने चाहिए. 16 साल से अधिक उम्र के ऑस्ट्रेलियाई आसानी से तय कर सकेंगे कि वे अपने ऐप पर क्या देखना चाहते हैं.” — अनिका वेल्स, संचार मंत्री, ऑस्ट्रेलिया ये भी पढ़ें: NIT में मिला 1.16 करोड़ का प्लेसमेंट, Google समेत 350 कंपनियों से जॉब ऑफर The post ऑस्ट्रेलियाई : सोशल मीडिया पर दिखेगा आपकी पसंद का कंटेंट; माय फीड, माय वे से मिलेगा एल्गोरिदम पर कंट्रोल appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल उपचुनाव : नंदीग्राम में क्यों बार-बार हार जाती है तृणमूल, कुणाल घोष ने बतायी अपनी ही पार्टी की कमजोरी

कोलकाता : नंदीग्राम में तृणमूल के प्रभारी रहे बेलेघाटा से तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने पार्टी के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया. उन्होंने कई नेताओं के नाम लिए. उन्होंने एआईपीएसी का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा- नुकसान पहुंचाने के लिए आत्म-आलोचना की जरूरत है. बेलेघाटा से तृणमूल विधायक ने कहा- अगर तृणमूल नंदीग्राम में बुरी स्थिति में है, तो सच्चाई यह है कि इसके लिए शुभेंदु अधिकारी से ज़्यादा हमारे कुछ प्रमुख नेता ज़िम्मेदार हैं, जो कोलकाता में बैठे-बैठे सोचते थे कि वे चुटकी बजाकर सभी ज़िलों को चला लेंगे. नंदीग्राम को नंदीग्राम के कार्यकर्ताओं ने घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया. हमें आत्म-विश्लेषण करना होगा. पार्टी प्रभारी को बताया कमजोर विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद तृणमूल पार्टी ताश के पत्तों की तरह ढह गई. हालांकि, कुणाल अभी भी ममता बनर्जी के साथ हैं. इसके बावजूद, उन्होंने नंदीग्राम मुद्दे पर पार्टी के खिलाफ आवाज उठाई. कई नेताओं का नाम लेते हुए कुणाल ने कहा- राजीव बनर्जी, तन्मय घोष, ये उम्मीदवार थे. वे समझ जाएंगे. जब तक मैं प्रभारी था, मैंने सबके साथ काम किया. सब कुछ सकारात्मक दिशा में जा रहा था और अगर कोई यह सोचता है कि कुणाल घोष को बिना सूचना दिए हटा दिया गया और उनकी जगह प्रमुख जन नेताओं को भेज दिया गया, तो वे समझ जाएंगे. अचानक, बिना मुझे कुछ बताए, एआईपीएसी और अन्य लोगों ने सब कुछ समझ लिया है, तो उन्हें माफी क्यों मांगनी चाहिए, ये तो कमजोर लोग हैं. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें क्या बोले राजीव बनर्जी कुणाल की टिप्पणियों के संबंध में, पूर्व राज्य मंत्री राजीव बनर्जी ने कहा-मुझे कभी भी नंदीग्राम किसी विशेष कार्य के लिए नहीं भेजा गया था. बल्कि, कुणालदा मुझे एक-दो बार बैठकों में ले गए थे. लोकसभा चुनाव के दौरान मैं तामलुक से लोकसभा उम्मीदवार की मदद करने गया था. मैं कुणालदा को याद दिलाता हूं कि जब भी पार्टी ने मुझे विशिष्ट जिम्मेदारियां सौंपीं, मैंने उन्हें पूरी ईमानदारी से निभाया. ममता समर्थक तृणमूल नेता तन्मय घोष ने कहा- जहां तक ​​मुझे याद है, ऐसा कभी नहीं था. जब मैं पूर्वी मेदिनीपुर का प्रभारी था, तब वहां के परिणाम साफ दिखते थे, पंचायत समेत. बाद में जिम्मेदारी बांट दी गई. कुणालदा नंदीग्राम का काम देखते थे. पार्टी द्वारा कुणालदा को नंदीग्राम की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद मैंने वहां काम नहीं किया. Also Read: शुभेंदु अधिकारी ने ठुकराई विश्व हिंदू परिषद की मांग, बोले- दुर्गा पूजा में मांसाहार पर रोक नहीं The post बंगाल उपचुनाव : नंदीग्राम में क्यों बार-बार हार जाती है तृणमूल, कुणाल घोष ने बतायी अपनी ही पार्टी की कमजोरी appeared first on Naya Vichar.

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Delhi Traffic: दिल्ली में सुबह 9:30 से रात 9:30 बजे तक रूट डायवर्जन, घर से निकलने से पहले पढ़ें ट्रैफिक एडवाइजरी

Delhi Traffic: 18वें ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी को लेकर दिल्ली में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त कर दी गई है. 12 और 13 सितंबर को आयोजित हो रहे इस वैश्विक सम्मेलन के मद्देनजर शनिवार को दिल्ली की कई प्रमुख सड़कों पर व्यापक ट्रैफिक पाबंदियां लागू रहेंगी. दिल्ली यातायात पुलिस द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार, सुबह 9:30 बजे से लेकर रात 9:30 बजे तक कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित रहेगी और कुछ रास्तों पर रूट डायवर्जन लागू रहेगा. इन इलाकों और प्रमुख मार्गों पर पड़ेगा असर ट्रैफिक प्रतिबंधों का सबसे ज्यादा असर प्रगति मैदान (हिंदुस्तान मंडपम) के आसपास के इलाकों में देखने को मिलेगा. इसके अलावा मध्य दिल्ली को शहर के अन्य हिस्सों – उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिमी दिल्ली से जोड़ने वाले मुख्य रास्तों पर भी गाड़ियां रोक-रोक कर या डाइवर्ट करके चलाई जाएंगी. दिल्ली ट्रैफिक, फोटो एक्स ये भी पढ़ें: शी जिनपिंग को शान्शी का अचार, पुतिन को कॉटेज चीज पसंद, जानें दोनों वर्ल्ड लीडर्स से कितने अलग हैं PM मोदी? जिन प्रमुख रास्तों को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है, उनमें शामिल हैं रिंग रोड और मथुरा रोड भैरों मार्ग और तिलक मार्ग इंडिया गेट / सी-हेक्सागन क्षेत्र सरदार पटेल मार्ग और पटेल रोड एनएच-48 और परेड रोड लुटियंस दिल्ली की प्रमुख सड़कें पुलिस की सलाह, निजी वाहनों के बजाय मेट्रो का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें दिल्ली पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे असुविधा से बचने के लिए अपने सफर में अतिरिक्त समय लेकर निकलें और निजी वाहनों के बजाय मेट्रो का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें. पुलिस ने वाहन चालकों को निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का चयन करने और ऑन-ड्यूटी ट्रैफिक कर्मियों के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है. एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड जैसी आपतकालीन सेवाओं को रोक नहीं यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया है कि एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आवश्यक व आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहनों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं होगी और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर रास्ता दिया जाएगा. ये भी पढ़ें: BRICS Summit 2026: दुनिया की 50% आबादी, 40% GDP और 25% से ज्यादा ट्रेड, बोले पीएम मोदी- दिख रही BRICS की रफ्तार The post Delhi Traffic: दिल्ली में सुबह 9:30 से रात 9:30 बजे तक रूट डायवर्जन, घर से निकलने से पहले पढ़ें ट्रैफिक एडवाइजरी appeared first on Naya Vichar.

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7 साल बाद भारत में मोदी-जिनपिंग की मुलाकात, सीमा विवाद से व्यापार तक चर्चा, इसलिए खास है शी का दौरा

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग हिंदुस्तान पहुंचने वाले हैं. इस दौरान दुनिया की नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय मुलाकात पर रहेगी है. दोनों नेताओं की यह लगातार तीसरे साल आमने-सामने होने वाली बैठक है. इस मुलाकात से पहले चीन ने हिंदुस्तान के साथ संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं. चीनी राजदूत शू फेइहॉन्ग ने कहा है कि बीजिंग दोनों देशों के बीच बातचीत और सहयोग बढ़ाने के साथ मतभेदों को सही तरीके से सुलझाने के लिए हिंदुस्तान के साथ काम करना चाहता है. इसलिए खास है सात साल बाद शी जिनपिंग का हिंदुस्तान दौरा शी जिनपिंग का हिंदुस्तान दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि 2019 के मामल्लपुरम शिखर सम्मेलन के बाद यह उनकी पहली हिंदुस्तान यात्रा है. 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद हिंदुस्तान और चीन के रिश्तों में लंबे समय तक तनाव रहा. हालांकि, पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश तेज हुई है. अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और शी की मुलाकात हुई थी. इसके बाद 2025 में तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों नेताओं की बातचीत हुई. अब नई दिल्ली में होने वाली बैठक को इसी कूटनीतिक प्रक्रिया की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है. ये भी पढ़ें: Video : कार डिप्लोमेसी से दुनिया को क्या संकेत देते हैं पीएम मोदी? पुतिन के साथ क्यों खास है ये कैमिस्ट्री PM मोदी-जिनपिंग की मुलाकात से पहले चीन ने क्या कहा? हिंदुस्तान में चीन के राजदूत शू फेइहॉन्ग ने सोशल मीडिया पर कहा कि दोनों देश राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच द्विपक्षीय बैठक की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि चीन दोनों नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन को लागू करने, द्विपक्षीय संबंधों को लंबे समय के नजरिए से देखने, बातचीत और सहयोग बढ़ाने तथा मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाने के लिए हिंदुस्तान के साथ काम करेगा. चीन की ओर से आया यह संदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देशों के रिश्तों में सबसे बड़ी चुनौती अभी भी भरोसे की बहाली है. मोदी-शी की बैठक में किन मुद्दों पर बातचीत हुई ? रिपोर्ट की मानें तो दोनों नेताओं की बातचीत में सीमा और वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC का मुद्दा सबसे अहम रह सकता है. गलवान के बाद सीमा पर तनाव कम करने के लिए कई दौर की सैन्य और राजनयिक बातचीत हुई है. इसके बावजूद दोनों देशों के बीच पूरी तरह पुराना भरोसा कायम होना बाकी है. इसके साथ व्यापार भी बातचीत का बड़ा हिस्सा हो सकता है चीन हिंदुस्तान का बड़ा कारोबारी साझेदार है, लेकिन हिंदुस्तान लंबे समय से चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को लेकर चिंता जताता रहा है. यानी बैठक में सुरक्षा के साथ-साथ कारोबार, निवेश और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के रास्तों पर भी चर्चा की उम्मीद है. हिंदुस्तान-चीन की नजदीकी क्यों मायने रखती है? हिंदुस्तान इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है. नई दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया में व्यापार तनाव, भू-नेतृत्वक खींचतान और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं. हिंदुस्तान ब्रिक्स के जरिए ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को प्रमुखता देने पर जोर दे रहा है. चीन भी ब्रिक्स सहयोग को महत्वपूर्ण मानता है और उसने हिंदुस्तान की अध्यक्षता में होने वाले सम्मेलन के लिए समर्थन जताया है. ऐसे में मोदी और शी की बैठक का असर सिर्फ हिंदुस्तान-चीन संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा. दोनों नेताओं के बीच बातचीत से एशिया और ग्लोबल साउथ की नेतृत्व को लेकर भी एक बड़ा संदेश जा सकता है. ब्रिक्स के मंच से हिंदुस्तान का बड़ा दांव हिंदुस्तान इस बार 18वें ब्रिक्स सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है. 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली बैठक में वैश्विक शासन में सुधार, व्यापार, निवेश, तकनीक, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. 11 सदस्यीय ब्रिक्स अब दुनिया की करीब आधी आबादी और वैश्विक वित्तीय स्थिति के लगभग 40 फीसदी हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है. ऐसे में मोदी-शी मुलाकात सिर्फ हिंदुस्तान-चीन संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी. यह बैठक इस बात का भी संकेत दे सकती है कि एशिया की दो बड़ी ताकतें बदलती वैश्विक नेतृत्व में अपने रिश्तों को किस दिशा में ले जाना चाहती हैं. मोदी-शी बैठक से पहले चीन के सुर निश्चित तौर पर सकारात्मक नजर आ रहे हैं. लेकिन असली तस्वीर बैठक के बाद सामने आएगी. सवाल यही है कि क्या दोनों नेता सिर्फ रिश्तों में गर्मजोशी बढ़ाने पर बात करेंगे या सीमा और व्यापार जैसे मुश्किल मुद्दों पर भी आगे बढ़ने का कोई रास्ता निकलेगा? अगर बातचीत में ठोस प्रगति होती है, तो यह हिंदुस्तान-चीन संबंधों को स्थिर करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा सकता है. फिलहाल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में होने वाली इस मुलाकात पर हिंदुस्तान ही नहीं, पूरी दुनिया की नजर है. ये भी पढ़ें: हिंदुस्तान, चीन और रूस की बढ़ती ताकत से बदल रहा पावर बैलेंस! समझिए BRICS कैसे बना रहा है नया वर्ल्ड ऑर्डर? The post 7 साल बाद हिंदुस्तान में मोदी-जिनपिंग की मुलाकात, सीमा विवाद से व्यापार तक चर्चा, इसलिए खास है शी का दौरा appeared first on Naya Vichar.

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जब हार मानकर सो गई थी भारतीय टीम, जागी तो पाकिस्तान को कर दिया ढेर; बचाया था वनडे का सबसे छोटा स्कोर

India vs Pakistan 1985 Match: हिंदुस्तान और पाकिस्तान की क्रिकेट राइवलरी में कई मुकाबले ऐसे रहे हैं, जिन्हें आज भी याद किया जाता है. लेकिन 22 मार्च 1985 को शारजाह में हुआ मुकाबला इसलिए खास है, क्योंकि उस दिन हिंदुस्तान ने लगभग हारी हुई बाजी पलट दी थी. पाकिस्तान के इमरान खान ने हिंदुस्तानीय बल्लेबाजी को तहस-नहस कर दिया था. हिंदुस्तान 125 रन पर ऑलआउट हो गया था. इसके बाद जो हुआ, उसने इस मुकाबले को क्रिकेट इतिहास की यादगार कहानियों में शामिल कर दिया. इमरान खान के सामने हिंदुस्तानीय बल्लेबाज बेबस रॉथमैन फोर-नेशंस कप के सेमीफाइनल में पाकिस्तान ने टॉस जीतकर हिंदुस्तान को पहले बल्लेबाजी के लिए भेजा. हिंदुस्तानीय टीम उस समय ऑस्ट्रेलिया में बेंसन एंड हेजेस वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतकर लौटी थी और उसका आत्मविश्वास काफी ऊंचा था. लेकिन शारजाह में इमरान खान ने अकेले ही हिंदुस्तानीय बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी. इमरान ने 10 ओवर में सिर्फ 14 रन देकर 6 विकेट झटके. रवि शास्त्री पहली ही गेंद पर आउट हुए. इसके बाद श्रीकांत, दिलीप वेंगसरकर, सुनील गावस्कर, मोहिंदर अमरनाथ और मदन लाल भी इमरान का शिकार बने. हिंदुस्तान के लिए मोहम्मद अजहरुद्दीन ने 47 और कपिल देव ने 30 रन बनाए, जिसकी मदद से टीम 42.4 ओवर में 125 रन तक पहुंच सकी. ये भी पढ़ें: Richest Cricket League: आखिर कौन है दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट लीग? कितने नंबर पर है IPL, देखें टॉप-10 की लिस्ट 125 रन देखकर हिंदुस्तानीय ड्रेसिंग रूम में छा गई खामोशी 125 रन का स्कोर उस दौर के वनडे क्रिकेट में भी बेहद छोटा माना जा रहा था. हिंदुस्तान की पारी खत्म होने के बाद ड्रेसिंग रूम में जश्न जैसा माहौल नहीं था. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक खिलाड़ियों ने लंच तक करने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई और कुछ खिलाड़ी आराम करने लगे. माहौल इतना शांत था कि टीम के खिलाड़ी झपकी लेने लगे. शायद यही वह पल था जिसने मैच की दिशा बदल दी. बल्लेबाजी की निराशा में डूबे रहने के बजाय हिंदुस्तानीय खिलाड़ी थोड़ी देर के लिए खुद को मानसिक रूप से रीसेट कर रहे थे. मैदान पर लौटते समय उनके सामने बचाने के लिए बड़ा स्कोर नहीं था, लेकिन पाकिस्तान को हर गेंद पर रन के लिए संघर्ष कराने का लक्ष्य जरूर था. कपिल देव की टीम ने पलट दिया पूरा मैच कपिल देव 1983 वर्ल्ड कप ट्रॉफी के साथ (फोटो- सोशल मीडिया) पाकिस्तान की पारी शुरू हुई तो उसके बल्लेबाजों को लगा होगा कि 126 रन का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल नहीं होगा. शुरुआत में भी पाकिस्तान पूरी तरह दबाव में नहीं था. लेकिन हिंदुस्तान ने धीरे-धीरे पकड़ बनाना शुरू किया. रोजर बिन्नी ने मुदस्सर नजर को 18 रन पर आउट किया और मोहसिन खान रन आउट हुए. रमीज राजा 29 रन बनाकर कुछ देर तक टिके, लेकिन कपिल देव ने उन्हें चलता कर दिया. इसके बाद हिंदुस्तानीय गेंदबाजों ने पाकिस्तान को एक के बाद एक झटके दिए. रवि शास्त्री ने 10 ओवर में 5 मेडन के साथ सिर्फ 17 रन देकर 2 विकेट लिए. लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने 16 रन देकर 2 विकेट चटकाए, जबकि कपिल देव ने 17 रन देकर 3 विकेट लिए. मदन लाल और रोजर बिन्नी को भी एक-एक विकेट मिला. ये भी पढ़ें: Lala Amarnath Birthday: स्वतंत्र हिंदुस्तान के पहले टेस्ट कप्तान थे अमरनाथ, पहला शतक जड़ते ही स्त्रीओं ने फेंक दिए थे मंगलसूत्र पाकिस्तान 87 पर ढेर, हिंदुस्तान ने 38 रन से जीता मैच जिस पाकिस्तान के सामने हिंदुस्तान की टीम 125 रन पर सिमट गई थी, वही टीम हिंदुस्तानीय गेंदबाजों के सामने सिर्फ 87 रन पर ऑलआउट हो गई. पाकिस्तान की पारी 32.5 ओवर में खत्म हो गई और हिंदुस्तान ने मुकाबला 38 रन से अपने नाम कर लिया. सबसे दिलचस्प बात यह रही कि हिंदुस्तान को हराने जैसी गेंदबाजी करने वाले इमरान खान ही उस दिन पाकिस्तान को जीत नहीं दिला सके. उनके 6 विकेट के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया, जबकि उनकी टीम मुकाबला हार गई. 40 साल तक कायम रहा हिंदुस्तान का रिकॉर्ड इस जीत के साथ हिंदुस्तान ने लंबे समय तक वनडे क्रिकेट में सबसे कम स्कोर का सफल बचाव करने का रिकॉर्ड अपने नाम रखा. 125 रन का यह रिकॉर्ड करीब 40 साल तक कायम रहा. फरवरी 2025 में USA ने ओमान के खिलाफ सिर्फ 122 रन बनाकर मैच जीत लिया और हिंदुस्तान का रिकॉर्ड तोड़ दिया. ये भी पढ़ें: 34 साल पुराने जेपी अत्रे टूर्नामेंट का अंत, क्या बढ़ते क्रिकेट कैलेंडर में घरेलू क्रिकेट की जगह घट रही है? The post जब हार मानकर सो गई थी हिंदुस्तानीय टीम, जागी तो पाकिस्तान को कर दिया ढेर; बचाया था वनडे का सबसे छोटा स्कोर appeared first on Naya Vichar.

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क्रिकेट खेलते-खेलते सीखी लीडरशिप, आज संभाल रहे Microsoft की कमान, जानिए सत्या नडेला की कहानी

आज दुनिया के करोड़ों लोग Windows वाले कंप्यूटर यूज करते हैं, Microsoft Office पर काम करते हैं और AI के लिए Copilot जैसे टूल का सहारा लेते हैं. लेकिन जिस कंपनी की कमान आज सत्या नडेला के हाथों में है, उस सफर की शुरुआत किसी बड़े बिजनेस परिवार या सिलिकॉन वैली से नहीं हुई थी. सत्या नडेला हिंदुस्तान के हैदराबाद से निकलकर अमेरिका पहुंचे और फिर धीरे-धीरे Microsoft के सबसे बड़े पद तक पहुंचे. उनकी कहानी सिर्फ एक इंजीनियर के CEO बनने की नहीं है, बल्कि क्रिकेट, कविता, पढ़ाई और लोगों को समझने जैसी आदतों से एक अलग तरह का लीडर बनने की कहानी भी है. ‘टेक टाइकून्स की कहानी’ सीरीज की इस कड़ी में आइए जानते हैं सत्य नडेला के बारे में हैदराबाद में बीता बचपन, क्रिकेट और कविता से था खास लगाव सत्या नडेला का जन्म और शुरुआती जीवन हैदराबाद में बीता. बहुत कम लोग जानते हैं कि टेक्नोलॉजी की दुनिया के इस बड़े नाम को बचपन से सिर्फ कंप्यूटर में ही दिलचस्पी नहीं थी. उन्हें क्रिकेट का काफी शौक था और कविता पढ़ने में भी रुचि थी. Microsoft की एक बातचीत में बताया गया है कि क्रिकेट और कविता के शौक ने उन्हें आगे चलकर लोगों के साथ काम करने और एक अच्छा लीडर बनने में मदद की. उनके पिता एक सिविल सर्वेंट थे, जबकि उनकी मां संस्कृत नाटक से जुड़ी प्रोफेसर थीं. एक तरफ घर में पढ़ाई और विचारों का माहौल था, तो दूसरी तरफ उनका मन क्रिकेट के मैदान में लगता था. शायद यही वजह है कि आज भी वह लीडरशिप की बात करते समय क्रिकेट का उदाहरण देना नहीं भूलते. क्रिकेट के मैदान पर मिला एक ऐसा सबक, जो CEO बनने के बाद भी काम आया सत्या नडेला खुद कई बार बता चुके हैं कि क्रिकेट ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया है. एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने बचपन का एक दिलचस्प किस्सा सुनाया था. उनकी टीम एक ऐसे क्लब के खिलाफ क्रिकेट मैच स्पोर्ट्स रही थी, जिसमें कुछ विदेशी खिलाड़ी भी थे. सत्या और उनके साथी उन खिलाड़ियों को देखकर इतने प्रभावित थे कि मुकाबला करने के बजाय उन्हें ज्यादा देखने लगे. सत्या मैदान में काफी दूर खड़े होकर मैच देख रहे थे. तभी टीम के एक मैनेजर ने उन्हें वहां से हटाकर मैदान की ऐसी जगह खड़ा कर दिया, जहां स्पोर्ट्स का असली एक्शन चल रहा था. इस घटना से उन्हें एक सीधी बात समझ आई, मैदान में हो तो सिर्फ देखने के लिए नहीं, मुकाबला करने के लिए रहो. यही सोच आगे चलकर उनके करियर का भी हिस्सा बनी. Microsoft के एक कार्यक्रम में उन्होंने क्रिकेट से मिली लीडरशिप की दूसरी सीख भी बताई थी. उनके मुताबिक, मुश्किल समय में भी टीम के लिए स्पोर्ट्सना, पूरे जोश के साथ मुकाबला करना और दूसरों से उनका सर्वश्रेष्ठ काम निकलवाना एक अच्छे लीडर की पहचान है. इंजीनियरिंग से अमेरिका तक का सफर सत्या नडेला ने हिंदुस्तान में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वह अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने University of Wisconsin-Milwaukee से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स किया. इसके बाद उन्होंने बिजनेस की पढ़ाई भी की और University of Chicago से MBA की डिग्री हासिल की. Microsoft की आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक, उनके पास इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस और बिजनेस, तीनों क्षेत्रों की पढ़ाई का एक्सपीरियंस रहा है. यही बात उनके करियर में भी दिखाई देती है. वह सिर्फ एक टेक्निकल इंजीनियर बनकर नहीं रहे. उन्होंने टेक्नोलॉजी के साथ बिजनेस को भी समझा. जब CEO बने तो पहले प्रोडक्ट नहीं, कंपनी की सोच बदलने पर दिया जोर फरवरी 2014 में सत्या नडेला को Microsoft का CEO बनाया गया. वह कंपनी के इतिहास में तीसरे CEO थे. उस समय Microsoft एक बड़ी और सफल कंपनी थी, लेकिन टेक्नोलॉजी की दुनिया तेजी से बदल रही थी. स्मार्टफोन, क्लाउड और नई इंटरनेट सर्विसेज का दौर तेजी से आगे बढ़ रहा था. ऐसे में सत्या नडेला ने सिर्फ नया प्रोडक्ट लॉन्च करने पर ध्यान नहीं दिया. उन्होंने सबसे पहले कंपनी की कल्चर यानी काम करने की सोच बदलने पर जोर दिया. उनका मानना रहा कि कोई भी कंपनी सिर्फ पुरानी सफलता के भरोसे हमेशा आगे नहीं बढ़ सकती. नए दौर में आगे रहने के लिए लगातार सीखना जरूरी है. Harvard Business Review के साथ बातचीत में उन्होंने कहा था कि नई सफलता पाने के लिए नए विचार, नई क्षमता और सही कंपनी संस्कृति की जरूरत होती है. Microsoft में उन्होंने ग्रोथ माइंडसेट को बढ़ावा दिया. कविता पढ़ना पसंद करते हैं सत्या नडेला सत्या नडेला की एक और दिलचस्प बात यह है कि उन्हें कविता से काफी लगाव है. टेक्नोलॉजी की दुनिया में काम करने वाले इस CEO को शब्दों और विचारों की ताकत भी पसंद है. Microsoft की 2025 की बातचीत में भी उनके क्रिकेट और कविता के शौक का जिक्र किया गया है. सत्य ने एक बार कोडिंग की तुलना भी पोएट्री से की थी. हिंदुस्तान में छात्रों के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने कहा था कि कोडिंग को वह कविता की तरह देखते हैं, क्योंकि दोनों में कम शब्दों या कम चीजों में एक बड़ा विचार व्यक्त किया जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि कोडिंग सिर्फ कंप्यूटर साइंस के छात्रों के लिए नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है. सत्या नडेला के लिए एम्पैथी सिर्फ अच्छी आदत नहीं, काम करने का तरीका है सत्या नडेला की कहानी में अगर एक शब्द सबसे ज्यादा बार सामने आता है, तो वह है एम्पैथी. उनकी किताब Hit Refresh में भी एम्पैथी को काफी महत्व दिया गया है. Microsoft के अनुसार, नडेला का मानना है कि तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी की दुनिया में लोगों की जरूरतों को समझना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है. University of Chicago के एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया था कि एक अच्छे लीडर को तीन काम करने चाहिए, जब चीजें साफ न हों तो स्पष्टता लाएं, लोगों में काम करने की ऊर्जा पैदा करें और आखिर में सफलता हासिल करें. लेकिन इन सबके पीछे एक चीज जरूरी है, लोगों को समझना. उनके मुताबिक, अगर आप ऐसा प्रोडक्ट बनाना चाहते हैं जो लोगों की असली समस्या हल करे, तो आपको उनकी

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Prachi Desai Birthday: 17 में बनीं टीवी स्टार, 19 में बॉलीवुड पहुंचीं, फिर जिस छवि ने बनाया स्टार उसी ने रोक दिया करियर

महज 17 साल की उम्र में एक टीवी शो ने प्राची देसाई को रातों-रात घर-घर का चेहरा बना दिया था. इसके सिर्फ दो साल बाद वह बॉलीवुड में पहुंच गईं और लगा कि अब उनका करियर तेजी से आगे बढ़ेगा. लेकिन कहानी ने ऐसा मोड़ लिया कि जिस मासूम छवि ने उन्हें पहचान दिलाई, वही आगे चलकर उनके करियर की सबसे बड़ी रुकावट बन गई. आखिर ऐसा क्या हुआ कि टीवी की चहेती बानी को अपनी ही पहचान बदलने के लिए संघर्ष करना पड़ा? 12 सितंबर को प्राची देसाई के जन्मदिन पर जानिए उनकी स्टारडम से संघर्ष तक की कहानी. 17 साल में ‘कसम से’ की बानी बनकर छा गईं प्राची ने साल 2006 में धारावाहिक ‘कसम से’ से अभिनय की शुरुआत की थी. इसमें उन्होंने बानी का किरदार निभाया और कम उम्र में ही बड़ी पहचान हासिल कर ली. दर्शकों को उनका सादा और सहज अंदाज पसंद आया. टीवी पर उनकी लोकप्रियता इतनी तेजी से बढ़ी कि प्राची बहुत जल्द छोटे पर्दे के चर्चित चेहरों में शामिल हो गईं. लेकिन उन्होंने अपनी पहचान को सिर्फ टीवी तक सीमित रखने का फैसला नहीं किया. प्राची देसाई 19 साल की उम्र में ‘रॉक ऑन’ से फिल्मों में कदम साल 2008 में प्राची ने ‘रॉक ऑन’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया. उस समय वह सिर्फ 19 साल की थीं. फिल्म में उनके साथ फरहान अख्तर थे और यह प्राची के लिए बिल्कुल नई दुनिया थी. फिल्म को दर्शकों ने पसंद किया और प्राची के काम की भी चर्चा हुई. टीवी से फिल्मों तक का उनका ट्रांजिशन देखकर लगा कि अब उनके करियर में लगातार बड़े मौके आने वाले हैं. इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में काम भी किया. View on Instagram बड़ी फिल्मों के बावजूद करियर क्यों नहीं पकड़ पाया रफ्तार? ‘रॉक ऑन!!’ के बाद प्राची ‘वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई’, ‘बोल बच्चन’, ‘आई, मी और मैं’ और ‘अजहर’ जैसी फिल्मों में नजर आईं. उन्होंने अलग-अलग कलाकारों के साथ काम किया, लेकिन उनका करियर उस तेजी से आगे नहीं बढ़ पाया जिसकी उम्मीद उनकी शुरुआती सफलता को देखकर की जा रही थी. इसकी एक बड़ी वजह उनकी बन चुकी छवि भी थी. दर्शकों के मन में प्राची की एक खास तस्वीर पहले से बैठ चुकी थी और उसे बदलना आसान नहीं था. जिस ‘स्वीट गर्ल’ इमेज ने पहचान दिलाई, वही बनी दिक्कत प्राची की शुरुआती पहचान एक सीधी-सादी और मासूम लड़की के तौर पर बनी. टीवी में दर्शकों ने इसी अंदाज में उन्हें पसंद किया. लेकिन फिल्मों में पहुंचने के बाद वह इससे बिल्कुल अलग किरदार करना चाहती थीं. प्राची को महसूस हुआ कि लोग उन्हें उसी पुराने अंदाज में देखना चाहते हैं. वहीं वह खुद को एक ही तरह की भूमिकाओं तक सीमित नहीं रखना चाहती थीं. किसी कलाकार के लिए यह एक अजीब स्थिति होती है. जिस छवि के कारण उसे पहली बड़ी पहचान मिलती है, आगे चलकर उसी छवि को तोड़ना भी पड़ता है. View on Instagram प्राची सिर्फ बड़े सितारों के साथ काम नहीं करना चाहती थीं प्राची ने अपने करियर को लेकर यह बात भी कही थी कि उनके लिए सिर्फ बड़े नामों वाली फिल्म का हिस्सा बनना काफी नहीं था. वह ऐसे किरदार करना चाहती थीं, जिनमें उन्हें अपना अभिनय दिखाने का मौका मिले. उन्होंने अलग तरह की कहानियां और भूमिकाएं तलाशने की कोशिश की. यही वजह थी कि वह धीरे-धीरे उस छवि से बाहर निकलने की कोशिश करती रहीं, जिसमें लोग उन्हें शुरुआत से देखते आए थे. फिल्मी परिवार से नहीं थीं, खुद बनाया अपना रास्ता प्राची किसी फिल्मी परिवार से नहीं आती थीं. उन्होंने टीवी से शुरुआत की, वहां अपनी पहचान बनाई और फिर उसी दम पर फिल्मों तक पहुंचीं. इतनी कम उम्र में मनोरंजन की दुनिया में जगह बनाना आसान नहीं था. उनके सफर में उतार-चढ़ाव भी आए. कई बार काम के बीच लंबा अंतर रहा, लेकिन उन्होंने अभिनय से दूरी बनाने के बजाय अपने लिए नए मौके तलाशे. View on Instagram ओटीटी ने दी खुद को नए अंदाज में दिखाने की जगह बदलते दौर के साथ ओटीटी का विस्तार हुआ तो कलाकारों के सामने भी नई तरह की कहानियां आने लगीं. प्राची के लिए यह बदलाव काफी अहम रहा. डिजिटल मंच पर उन्हें ऐसे किरदार और कहानियां मिलीं, जिनके जरिए वह अपनी पुरानी पहचान से आगे बढ़ सकती थीं. इस दौर ने उन्हें यह मौका दिया कि दर्शक उन्हें सिर्फ बानी या ‘स्वीट गर्ल’ वाली भूमिका में नहीं, बल्कि एक अलग रंग में भी देखें. ये भी पढ़ें: बिग बॉस के घर में छिड़ी महाजंग, इन कंटेस्टेंट्स ने पार की सारी हदें, Weekend Ka Vaar में किसकी होगी शामत? ये भी पढ़ें: Anurag Kashyap Birthday: फुटपाथ पर सोने के लिए देते थे 6 रुपये, पत्नी ने घर से निकाला, फिल्में हुईं ठप.. फिर ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ ने बदल दी पूरी कहानी The post Prachi Desai Birthday: 17 में बनीं टीवी स्टार, 19 में बॉलीवुड पहुंचीं, फिर जिस छवि ने बनाया स्टार उसी ने रोक दिया करियर appeared first on Naya Vichar.

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12 सितंबर की टॉप 20 खबरें: भारत मंडपम में मिले मोदी-पुतिन, बिहार विधान परिषद चुनाव- RJD ने जारी की पहली सूची

1. BRICS Summit 2026: दिल्ली में जुटे दुनिया के दिग्गज, पुतिन-पेजेशकियान और रामफोसा पहुंचे, 12 सितंबर से शिखर सम्मेलन BRICS Summit 2026 से पहले दिल्ली वैश्विक नेताओं की मौजूदगी से कूटनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गई है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा समेत कई नेता 12-13 सितंबर के शिखर सम्मेलन के लिए हिंदुस्तान पहुंच चुके हैं. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 2. BRICS Summit 2026: दुनिया की 50% आबादी, 40% GDP और 25% से ज्यादा ट्रेड, बोले पीएम मोदी- दिख रही BRICS की रफ्तार BRICS Summit 2026: वैश्विक वित्तीय स्थिति में BRICS की बढ़ती ताकत का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़े आंकड़े सामने रखे. उन्होंने कहा कि BRICS देश आज दुनिया की 50 प्रतिशत आबादी, 40 प्रतिशत GDP और 25 प्रतिशत से अधिक वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं. साथ ही ये देश नवाचार और समाधानों के महत्वपूर्ण केंद्र बन रहे हैं. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 3. PM Modi-Putin Meeting: गले मिले, हाथ मिलाया, पीएम मोदी ने पुतिन को भेंट किया ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद PM Modi-Putin Meeting: ब्रिक्स समिट से पहले हिंदुस्तान-रूस रिश्तों की गर्मजोशी एक खास तोहफे में भी नजर आई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को प्राचीन तमिल ग्रंथ तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया. दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग से जुड़े अहम मुद्दों पर द्विपक्षीय वार्ता भी की. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 4. Video : कार डिप्लोमेसी से दुनिया को क्या संकेत देते हैं पीएम मोदी? पुतिन के साथ क्यों खास है ये कैमिस्ट्री Brics Summit : पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन की कार डिप्लोमेसी फिर चर्चा में है. जानिए क्या है कार डिप्लोमेसी और हिंदुस्तान-रूस रिश्तों के लिए इसका क्या संदेश है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 5. बिहार विधान परिषद चुनाव 2026: पटना से डॉ. संजीव और दिलीप पर भरोसा, RJD ने जारी की 6 उम्मीदवारों की पहली सूची बिहार विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र 2026 को लेकर राष्ट्रीय जनता दल ने अपनी पहली आधिकारिक सूची जारी कर दी है. पार्टी ने कुल आठ में से छह सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है. राजद प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल द्वारा यह सूची जारी की गई. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 6. Bihar Politics: तेजस्वी की मांग में रामविलास, शरद और रघुवंश, जानिए कैसे एक साथ साधे कई निशाने Bihar Politics: चिराग पासवान ने रामविलास पासवान के नाम पर प्रतिमा और गोलंबर की मांग की, तो तेजस्वी यादव ने शरद यादव, रघुवंश प्रसाद सिंह और रामविलास पासवान को भी इस बहस में शामिल कर दिया. आइये समझते हैं तेजस्वी की मांग के मायने क्या हैं? यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 7. अमित शाह से मिले सुदेश महतो, कुड़मी को एसटी दर्जा देने की मांग आजसू पार्टी के अध्यक्ष सुदेश महतो ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने कुड़मी समुदाय को एसटी दर्जा देने, JPSC-JSSC परीक्षाओं में धांधली और खनिज मामलों जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की और ज्ञापन सौंपा. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 8. फर्जी GST और अवैध कोयला कारोबार पर झारखंड में सख्ती, वित्त मंत्री बोले- केंद्र की नीतियों से 22,000 करोड़ नुकसान झारखंड प्रशासन अपने राजस्व लक्ष्य से फिलहाल 6% पीछे चल रही है. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र प्रशासन की नीतियों के कारण 22,000 करोड़ रुपये के नुकसान का आरोप लगाया है. फर्जी GST और अवैध कोयला कारोबार पर सख्ती की तैयारी है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 9. नंदीग्राम उपचुनाव : ममता बनर्जी के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेगा रीतब्रत गुट पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो गई है. ऐसे में, टीएमसी के बागी गुट ने ममता बनर्जी को नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का खुला प्रस्ताव दिया है. यह फैसला बीजेपी विरोधी वोटों को एकजुट रखने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 10. बोले नितिन गडकरी- टोल बूथ पर रुकने का झंझट खत्म, मार्च 2027 तक बदल जाएगी व्यवस्था केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि फास्टैग को पूरी तरह लागू करने से प्रशासन को हर साल 25,000 करोड़ रुपये तक का फायदा हो सकता है. उन्होंने बताया कि मार्च 2027 तक नेशनल हाईवे के सभी टोल बूथ बिना रुकावट के काम करने लगेंगे. इससे टोल भुगतान आसान और तेज होगा. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 11. BRICS Summit 2026: मोदी-पुतिन-जिनपिंग की बैठक से हिंदुस्तान को क्या मिलेगा? UPI, कारोबार, तेल और टेक्नोलॉजी पर समझें असर नई दिल्ली में होने वाली BRICS समिट पर दुनिया की नजर है. जानिए इस बैठक से हिंदुस्तान को व्यापार, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और आम आदमी को क्या फायदे मिल सकते हैं. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 12. अब मोबाइल जेब में, AI कान और कलाई पर: नए गैजेट्स क्या स्मार्टफोन की जरूरत बदलने वाले हैं? AI ईयरबड्स, स्मार्टवॉच और स्मार्ट ग्लासेज अब सिर्फ एक्सेसरीज नहीं रहे, बल्कि पर्सनल असिस्टेंट की तरह काम करने लगे हैं. आने वाले समय में ये गैजेट्स फोन की स्क्रीन पर आसरा कम कर सकते हैं. आइए डिटेल में जानते हैं कैसे. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 13. BMW ने लॉन्च की नई 7 Series और i7, कार के अंदर मिलेगी 31.3 इंच की बड़ी 8K स्क्रीन, कितनी है कीमत? BMW ने हिंदुस्तान में नई 7 Series और इलेक्ट्रिक i7 के फेसलिफ्ट वर्जन लॉन्च किए हैं. इनमें नया डिजाइन, फ्यूचरिस्टिक इंटीरियर और कई एडवांस फीचर्स मिलते हैं. इनकी कीमत 1.95 करोड़ रुपये से शुरू होकर 2.65 करोड़ रुपये तक जाती है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 14. ड्रोन हमले में बाल-बाल बचे जेलेंस्की, PM मोदी के हवाई सफर के लिए क्या होता है बैकअप प्लान? 8 सितंबर को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की का विमान मोल्दोवा से उड़ान भरने की तैयारी कर रहा था, तभी एक ड्रोन उनके विमान के काफी करीब आ गया. सुरक्षा बलों की मुस्तैदी से विमान बाल-बाल ड्रोन हमले की चपेट में आने से बच गया. दुनिया के बड़े नेताओं पर हवाई हमले की यह पहली घटना नहीं है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 15. देश में MBBS की 3275 सीटें बढ़ीं, NMC ने जारी किया नया सीट मैट्रिक्स NEET UG 2026: देश में मेडिकल सीटों में इजाफा हो

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बारिश में नमक हो जाता है गीला? डिब्बे में बस ये छोटा सा जुगाड़ करें, नहीं बनेगी गांठ

How to Keep Salt Dry: रोजमर्रा की छोटी-छोटी परेशानियों का आसान समाधान बताने के लिए शुरू की गई ‘काम की बात’ सीरीज में हम ऐसी रोजमर्रा के काम की उपयोगी जानकारी लेकर आते हैं, जो आपके रोज के काम को थोड़ा आसान बनाएं. इसी कड़ी में आज बात किचन में इस्तेमाल होने वाले नमक की है. बारिश और उमस के मौसम में हवा में नमी बढ़ने से नमक के दाने आपस में चिपकने लगते हैं और डिब्बे में गांठें बन जाती हैं. अगर आपके नमक में भी नमी आ गई है, तो इसे सूखा रखने और दोबारा नमी से बचाने के लिए कुछ आसान तरीके काम आ सकते हैं. नमक में नमी क्यों आ जाती है? बारिश और उमस के मौसम में हवा में नमी बढ़ जाती है. नमक ऐसी नमी को अपनी तरफ खींच सकता है, जिसकी वजह से उसके दाने आपस में चिपकने (How to Keep Salt Dry) लगते हैं और डिब्बे में गांठें बनने लगती हैं. खासकर अगर नमक का डिब्बा गैस चूल्हे, सिंक या भाप वाली जगह के पास रखा हो, तो समस्या ज्यादा हो सकती है. नमक गीला हो गया है तो सबसे पहले क्या करें? सबसे पहले नमक के डिब्बे को गैस, सिंक और भाप वाली जगह से हटाकर किसी सूखी जगह पर रखें. अगर नमक में सिर्फ हल्की नमी आई है, तो उसे एक साफ और पूरी तरह सूखे कंटेनर में डाल दें. नमक निकालने के लिए हमेशा सूखी चम्मच का इस्तेमाल करें, क्योंकि गीली चम्मच से डिब्बे में और नमी जा सकती है. क्या नमक के डिब्बे में चावल डाल सकते हैं? हां, घरों में नमक को कम चिपचिपा रखने के लिए कुछ सूखे कच्चे चावल के दाने डालने का तरीका इस्तेमाल किया जाता है. आप नमकदानी में थोड़े से साफ और सूखे चावल डाल सकते हैं. इससे नमक के आसपास मौजूद नमी को कम करने में मदद मिल सकती है और दाने आपस में चिपकने से बच सकते हैं. हालांकि, अगर नमक बहुत ज्यादा गीला हो चुका है, तो केवल चावल डालना पर्याप्त उपाय नहीं है. ऐसी स्थिति में नमक को साफ, सूखे और अच्छी तरह बंद होने वाले कंटेनर में रखना ज्यादा जरूरी है. PC: AI Generated क्या करें क्या न करें नमक को हमेशा सूखी जगह पर रखें नमक के डिब्बे को गैस के ठीक पास न रखें नमक के लिए एयरटाइट डिब्बे का इस्तेमाल करें नमक के डिब्बे का ढक्कन कभी खुला न छोड़ें नमक निकालने के लिए हमेशा सूखी चम्मच का इस्तेमाल करें नमक के डिब्बे में कभी गीली चम्मच न डालें केवल जरूरत के समय ही नमक का डिब्बा खोलें नमक को भाप वाली जगह या नमी के संपर्क में न रखें रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाली ऐसी ही छोटी-सी लेकिन जरूरी जानकारी के साथ ‘काम की बात’ की अगली कड़ी में फिर मिलेंगे. यह भी पढ़ें: बारिश में जूते भीगते ही आती है बदबू? सिर्फ धूप में रखना नहीं है इलाज, ऐसे करें ड्राई The post बारिश में नमक हो जाता है गीला? डिब्बे में बस ये छोटा सा जुगाड़ करें, नहीं बनेगी गांठ appeared first on Naya Vichar.

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