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September 17, 2026

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Computer Science का क्रेज डाउन, IIIT रांची में इस BTech ब्रांच को मिला 60 लाख का पैकेज

IIIT Ranchi Placement 2026: आईआईआईटी रांची के 2022-26 बैच के प्लेसमेंट आंकड़ों में CSE के साथ ECE और Data Science & AI ने भी शानदार प्रदर्शन किया है. खास बात यह है कि ECE का औसत पैकेज CSE से थोड़ा ज्यादा रहा, जबकि इसी ब्रांच के एक छात्र को 60 लाख रुपये का हाईएस्ट पैकेज मिला. IIIT Ranchi Placement 2026: इस ब्रांच का बोलचाल ECE इस साल सबसे ज्यादा चर्चा में इसलिए भी है क्योंकि इस ब्रांच के एक छात्र को 60 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिला. ECE का औसत पैकेज 15.71 लाख और मीडियन पैकेज 11 लाख रुपये रहा. वहीं CSE का हाईएस्ट पैकेज 47.78 लाख रुपये रहा. हाईएस्ट पैकेज के मामले में BTech ECE ने CSE से करीब 12.22 लाख रुपये ज्यादा का आंकड़ा दर्ज किया. औसत पैकेज में DS & AI सबसे आगे अगर औसत पैकेज की बात करें तो इस आंकड़े में CSE DS & AI सबसे ऊपर है. इस ब्रांच का औसत पैकेज 22.44 लाख रुपये रहा. मीडियन पैकेज 20 लाख रुपये और हाईएस्ट पैकेज 56 लाख रुपये दर्ज किया गया. इस ब्रांच के लिए एक और खास आंकड़ा सामने आया है. उपलब्ध डेटा के अनुसार यहां प्लेसमेंट प्रतिशत 100% रहा. कुल 25 स्टूडेंट में सभी 25 कैंपस प्लेसमेंट में सेलेक्ट हो गए. BTech ब्रांच औसत पैकेज मीडियन हाईएस्ट लोएस्ट प्लेसमेंट CSE ₹15.61 लाख ₹12 लाख ₹47.78 लाख ₹3.4 लाख 89.79% CSE-DS & AI ₹22.44 लाख ₹20 लाख ₹56 लाख ₹8 लाख 100% ECE ₹15.71 लाख ₹11 लाख ₹60 लाख ₹4.8 लाख 74.55% ECE-ES & IoT ₹10.88 लाख ₹10 लाख ₹18 लाख ₹6 लाख 88.23% BTech CSE में 89.79% छात्रों का प्लेसमेंट BTech CSE की बात करें तो कुल 115 छात्रों में से 98 जॉब के लिए योग्य थे और 89 छात्रों को प्लेसमेंट मिला. इस तरह प्लेसमेंट प्रतिशत 89.79% रहा. CSE में औसत पैकेज 15.61 लाख रुपये, मीडियन 12 लाख रुपये और हाईएस्ट पैकेज 47.78 लाख रुपये रहा. ये भी पढ़ें: Computer Science नहीं, इस ब्रांच के स्टूडेंट्स को मिला 14.67 लाख का प्लेमसेंट, इंटरनेशनल कंपनी में जॉब सबसे कम पैकेज 3.4 लाख रुपये दर्ज किया गया. यानी CSE का औसत पैकेज ECE से मामूली रूप से कम है, लेकिन प्लेसमेंट प्रतिशत ECE से करीब 15 प्रतिशत अंक ज्यादा है. 195 में से 170 को मिली नौकरी पूरे 2022-26 बैच के आंकड़ों को देखें तो चारों ब्रांच में कुल 248 students थे, जिनमें 195 सेलेक्ट हुए. इनमें 170 छात्रों का प्लेसमेंट हुआ. कंपनियों की ओर से कुल 243 ऑफर्स दर्ज किए गए. ये भी पढ़ें: IIIT रांची में 60 LPA का हाईएस्ट पैकेज, BTech CSE ब्रांच का दिखा जलवा The post Computer Science का क्रेज डाउन, IIIT रांची में इस BTech ब्रांच को मिला 60 लाख का पैकेज appeared first on Naya Vichar.

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क्या आप भी लकड़ी का चम्मच-बेलन बस पानी से धोकर रख देते हैं? जानें सफाई का सही तरीका

How to Clean Wooden Utensils: काम की बात सीरीज में आज बात किचन में रोज इस्तेमाल होने वाली लकड़ी की चीजों की करेंगे. लकड़ी के चम्मच और बेलन का इस्तेमाल तो लगभग हर घर में होता है, लेकिन इनकी सफाई पर अक्सर उतना ध्यान नहीं दिया जाता. आखिर इन्हें कितने दिन में साफ करना चाहिए और सही तरीका (How to Clean Wooden Utensils) क्या है. तो आज की काम की बात में जानिए लकड़ी के चम्मच और बेलन की सफाई से जुड़ी जरूरी बातें, ताकि किचन की हाइजीन भी बनी रहे और ये लंबे समय तक इस्तेमाल किए जा सकें. हर इस्तेमाल के बाद करें ये काम लकड़ी के चम्मच और बेलन को हर इस्तेमाल के बाद साफ करना चाहिए. इन्हें लंबे समय तक सिंक में पानी के अंदर छोड़ने के बजाय इस्तेमाल के बाद धो लें. हल्के साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ करें, खासकर अगर इन पर तेल, आटा या खाने के अवशेष लगे हों. FDA के मुताबिक, खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले बर्तन को गर्म साबुन वाले पानी से धोना चाहिए. धोने के बाद इन्हें अच्छी तरह सुखाना भी जरूरी है. साफ कपड़े से पानी पोंछकर इन्हें ऐसी जगह रखें जहां हवा लग सके. जरूरत के हिसाब से करें सफाई (How to Clean Wooden Utensils) लकड़ी के चम्मच और बेलन को सप्ताह में एक बार ही साफ करना जरूरी है, ऐसा कोई तय नियम नहीं है. अगर इन पर तेल, आटा या खाने की परत जम गई है, तो उसी समय इन्हें अच्छी तरह साफ करें. नरम स्पंज और साबुन-पानी से लकड़ी की सतह को धीरे-धीरे साफ किया जा सकता है. बहुत खुरदुरे स्क्रबर से रगड़ने से लकड़ी की सतह पर खरोंच या घिसाव हो सकता है. लकड़ी के सामान को पानी में न भिगोएं  लकड़ी के चम्मच और बेलन को जरूरत से ज्यादा देर तक पानी में डुबोकर रखना अच्छा तरीका (How to Clean Wooden Utensils) नहीं है. सफाई के बाद इन्हें पानी से निकालकर अच्छी तरह सुखा दें. बेलन को भी इसी तरह साफ करके सूखी और हवादार जगह पर रखना बेहतर है. FDA Food Code में बेलन को food-contact wooden utensil के रूप में स्वीकार किया गया है. PC: AI Generated यह भी पढ़ें: गैस चूल्हे की नीली आंच पड़ गई पीली? नजरअंदाज करने की गलती न करें, जानें वजह बदबू आने पर क्या करें?  अगर लकड़ी के चम्मच पर प्याज, लहसुन या मसालों की गंध रह गई है, तो उसे दोबारा साबुन-पानी से अच्छी तरह साफ करें और पूरी तरह सूखने दें. अगर लकड़ी की सतह पर खाने के अवशेष दिखाई दे रहे हैं, तो उन्हें भी साफ करना जरूरी है. सिर्फ पानी से जल्दी-जल्दी धोकर सामान रख देने से सफाई पूरी नहीं मानी जा सकती. कब बदल देना चाहिए लकड़ी का चम्मच या बेलन? सिर्फ सफाई करना ही काफी नहीं है. अगर लकड़ी का सामान बहुत ज्यादा घिस गया है या उसमें ऐसी गहरी दरारें और खांचे बन गए हैं जिन्हें अच्छी तरह साफ करना मुश्किल हो, तो उसे बदल देना बेहतर है. FDA भी अत्यधिक घिसे हुए लकड़ी का कटिंग बोर्ड को बदलने की सलाह देता है, क्योंकि गहरी दरारों और मुश्किल से साफ होने वाली जगहों में बैक्टीरिया मौजूद रह सकते हैं. यह भी पढ़ें: फ्रिज को समझ लिया है हर चीज का ठिकाना? इन 6 चीजों को अंदर रखना पड़ सकता है भारी The post क्या आप भी लकड़ी का चम्मच-बेलन बस पानी से धोकर रख देते हैं? जानें सफाई का सही तरीका appeared first on Naya Vichar.

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PM Modi @ 76: महिलाओं के लिए मोदी सरकार की योजनाओं और चुनौतियों की पूरी कहानी

हिंदुस्तान के विकास की कहानी में स्त्रीओं की भूमिका को लेकर नीति का फोकस पिछले कुछ वर्षों में बदला है. पहले सवाल मुख्य रूप से यह था कि स्त्रीओं तक प्रशासनी योजनाओं का लाभ कैसे पहुंचे. अब इसके साथ यह सवाल भी जुड़ गया है कि स्त्रीएं कमाने वाली, उद्यमी, किसान, तकनीकी कामगार और नेतृत्वक निर्णयकर्ता कैसे बनें. इसी सोच को केंद्र में रखते हुए प्रशासन ‘Women-Led Development’ को Viksit Bharat @2047 के बड़े लक्ष्यों से जोड़ती है. यानी 2047 तक विकसित हिंदुस्तान की कल्पना में स्त्रीओं की आर्थिक और सामाजिक भागीदारी को एक अहम घटक माना जा रहा है. Cchavi Vasisht Drone Didi से Digital Didi तक स्त्री उद्यमिता को पारंपरिक कामों से आगे ले जाने की कोशिश भी दिखाई देती है. NaMo Drone Didi जैसी पहल में स्त्री SHGs को कृषि में ड्रोन सेवाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया. प्रशासन ने 15,000 चयनित स्त्री SHGs को ड्रोन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा था. इसका प्रतीकात्मक महत्व भी है—ग्रामीण स्त्री को केवल स्वयं सहायता समूह की सदस्य नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी आधारित सेवा देने वाली उद्यमी के रूप में देखने की कोशिश. Read more: BRICS 2026: विरोधाभासों का मंच क्यों बना दिल्ली शिखर सम्मेलन? जानिए दोस्त कौन, प्रतिद्वंद्वी कौन? बैंक खाता, ऋण और आर्थिक पहचान स्त्री सशक्तीकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वित्तीय समावेशन है. बैंक खाता, डिजिटल भुगतान, SHG बैंक क्रेडिट और छोटे कारोबार के लिए ऋण स्त्रीओं को आर्थिक निर्णयों में अधिक स्वतंत्रता दे सकते हैं. DAY-NRLM से जुड़े SHGs ने अब तक ₹12 लाख करोड़ से अधिक बैंक क्रेडिट तक पहुंच बनाई है. प्रशासनी आंकड़ों के अनुसार, 50 हजार से अधिक प्रशिक्षित Bank Sakhis ग्रामीण स्त्रीओं को बैंकिंग सेवाओं और ऋण तक पहुंच में मदद कर रही हैं. इसका असर केवल एक स्त्री की आय तक सीमित नहीं रहता. जब स्त्री की अपनी आर्थिक पहचान मजबूत होती है तो परिवार के खर्च, बच्चों की शिक्षा और स्थानीय वित्तीय स्थिति में भी उसका प्रभाव बढ़ सकता है. सुरक्षा और गरिमा भी विकास का हिस्सा स्त्री-नेतृत्व वाले विकास का अर्थ केवल रोजगार नहीं है. सुरक्षा, कानूनी अधिकार और गरिमा भी इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं. Mission Shakti के तहत One Stop Centres, Women Helpline और अन्य सहायता तंत्र चलाए जा रहे हैं. इसी व्यापक नीति ढांचे में स्त्रीओं की सुरक्षा और सहायता को जोड़ा गया है. 2019 में मुस्लिम स्त्रीओं के लिए instant triple talaq की प्रथा को कानूनी रूप से अपराध घोषित करने वाला कानून भी लागू हुआ. प्रशासन इसे स्त्रीओं के अधिकार और गरिमा से जुड़ा सुधार बताती है. नेतृत्व में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व: लेकिन लागू होने की तारीख अभी बाकी स्त्रीओं की आर्थिक भागीदारी के बाद सबसे बड़ा सवाल नेतृत्वक प्रतिनिधित्व का है. 2023 में संसद ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया. इसके तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में स्त्रीओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान है. हालांकि यह प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू नहीं हुआ. कानून के अनुसार इसका क्रियान्वयन संबंधित जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा है. इसलिए स्त्री नेतृत्वक प्रतिनिधित्व के मामले में अगला बड़ा पड़ाव कानून का वास्तविक क्रियान्वयन होगा. लेकिन असली चुनौती यहीं से शुरू होती है स्त्रीओं की भागीदारी के आंकड़े बढ़ने के बावजूद कुछ बुनियादी समस्याएं अभी बनी हुई हैं. सबसे पहला सवाल रोजगार की गुणवत्ता का है. श्रम बाजार में स्त्रीओं की भागीदारी बढ़ना सकारात्मक संकेत हो सकता है, लेकिन बड़ी संख्या में स्त्रीएं अनौपचारिक, अस्थायी या कम सामाजिक सुरक्षा वाले कामों में रहती हैं. दूसरा सवाल है—कौशल और नौकरी के बीच का अंतर. प्रशिक्षण तभी प्रभावी होगा जब वह बाजार की वास्तविक मांग, बेहतर वेतन और करियर की संभावनाओं से जुड़ा हो. तीसरी और अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली चुनौती है unpaid care work. हिंदुस्तान के Time Use Survey 2019 के अनुसार घरेलू सदस्यों के लिए बिना भुगतान वाले घरेलू कामों में स्त्रीओं का समय पुरुषों की तुलना में काफी अधिक था. खाना बनाने और भोजन प्रबंधन जैसे कामों में भी स्त्रीओं का औसत समय पुरुषों से कहीं अधिक दर्ज किया गया. यानी यदि स्त्री के पास नौकरी है, तब भी उसके घर के भीतर काम का बड़ा हिस्सा अक्सर बना रहता है. अगला चरण: योजना से परिणाम तक इसलिए 2047 की स्त्री-नेतृत्व वाली विकास यात्रा का अगला सवाल केवल यह नहीं होगा कि कितनी स्त्रीओं को योजना का लाभ मिला? सवाल यह होगा— कितनी स्त्रीएं स्थायी आय अर्जित कर रही हैं? कितनी स्त्रीएं formal jobs में पहुंच रही हैं? कितनी स्त्री उद्यमी बाजार से जुड़ पा रही हैं? कितनी स्त्रीओं के पास सामाजिक सुरक्षा है? और कितनी स्त्रीएं परिवार से लेकर संसद तक वास्तविक निर्णय लेने की स्थिति में पहुंच रही हैं? यही वह अंतर है जो women-centric welfare और women-led development के बीच है. प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर ‘नारी शक्ति’ और ‘विकसित हिंदुस्तान 2047’ की चर्चा इसलिए केवल योजनाओं की सूची नहीं है. यह हिंदुस्तान की विकास रणनीति के उस बदलाव को समझने का अवसर है जिसमें स्त्री को विकास की लाभार्थी के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन की भागीदार के रूप में देखा जा रहा है. आने वाले वर्षों में इस दृष्टिकोण की वास्तविक परीक्षा योजनाओं की संख्या से नहीं, बल्कि स्त्रीओं की आय, रोजगार की गुणवत्ता, आर्थिक स्वतंत्रता, सुरक्षा और निर्णय लेने की शक्ति में होने वाले ठोस बदलाव से होगी. Read more: Viral 80’s trend: ‘1980-1989’- वो 10 साल जिन्होंने आज का हिंदुस्तान बनाया The post PM Modi @ 76: स्त्रीओं के लिए मोदी प्रशासन की योजनाओं और चुनौतियों की पूरी कहानी appeared first on Naya Vichar.

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WB Census Phase 1: पश्चिम बंगाल में जनगणना का पहला चरण समय से पहले हुआ पूरा, शुभेंदु अधिकारी ने जतायी खुशी

WB Census Phase 1: पश्चिम बंगाल ने जनगणना के पहले चरण का 100 प्रतिशत क्षेत्रीय कार्य (Fieldwork) निर्धारित समयसीमा से 2 दिन पहले ही पूरा कर लिया. 14 सितंबर की समयसीमा से पहले इस चरण का काम पूरा होने पर राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खुशी व्यक्त करते हुए इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है. शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए प्रशासनिक तंत्र की कार्यकुशलता, बारीकी से तैयार की गयी योजना और टीम के लगातार प्रयासों की सराहना की. 3.68 करोड़ मकानों की हुई गिनती मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के अनुसार, राज्य के सभी जिलों, अनुमंडलों, प्रखंडों, नगर निगमों और नगरपालिकाओं में मकानों की सूचीकरण (House-listing) का शत-प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है. राज्य में अनुमानित 3.69 करोड़ मकानों के मुकाबले अब तक 3.68 करोड़ (3,68,30,150) मकानों की गणना दर्ज की जा चुकी है. यह आंकड़ा कुल अनुमानित परिवारों का लगभग 99.7 प्रतिशत है. कठिन परिस्थितियों में गणनाकर्मियों ने किया काम शुभेंदु अधिकारी ने जमीनी स्तर पर तैनात गणनाकर्मियों और पर्यवेक्षकों के योगदान की विशेष प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि इन कर्मियों ने प्रतिकूल मौसम और कठिन परिस्थितियों के बावजूद राज्य के पहाड़ी, मैदानी और नदी तटीय इलाकों में घर-घर पहुंचकर आंकड़ों का संकलन किया. ये भी पढ़ें: Video: पश्चिम बंगाल में जनगणना शुरू, शुभेंदु अधिकारी ने ऑनलाइन भरा अपना फॉर्म अधिकारियों और नागरिकों को सीएम ने दिया धन्यवाद उन्होंने इस अभियान के सफल संचालन के लिए जिलाधिकारियों, अनुमंडल अधिकारियों, प्रखंड विकास अधिकारियों (BDO), नगर आयुक्तों और अन्य संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का आभार जताया. इसके साथ ही उन्होंने गणना के दौरान पूर्ण सहयोग देने के लिए राज्य के नागरिकों का भी धन्यवाद किया. ये भी पढ़ें: बांग्लादेशी घुसपैठिये कल्याणकारी योजनाओं के हकदार नहीं, हम उन्हें खाना नहीं खिलायेंगे : शुभेंदु अधिकारी The post WB Census Phase 1: पश्चिम बंगाल में जनगणना का पहला चरण समय से पहले हुआ पूरा, शुभेंदु अधिकारी ने जतायी खुशी appeared first on Naya Vichar.

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PM Modi @ 76: Rising Power से Shaping Power तक भारत की विदेश नीति का सफर

जब नरेंद्र मोदी 2014 में हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री बने, तब हिंदुस्तान को दुनिया पहले से ही एक Rising Power यानी उभरती हुई शक्ति के रूप में देख रही थी. वित्तीय स्थिति का विस्तार हो रहा था, अमेरिका के साथ रणनीतिक रिश्ते मजबूत हो चुके थे और शीत युद्ध के दौर की गुटनिरपेक्षता की सीमाओं से हिंदुस्तान धीरे-धीरे आगे बढ़ चुका था. लेकिन मोदी दौर की खासियत यह नहीं थी कि हिंदुस्तान का उदय उनके साथ शुरू हुआ. असली बदलाव हिंदुस्तान की रणनीतिक सोच, महत्वाकांक्षा और आत्मविश्वास में दिखाई देता है. प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के मौके पर हिंदुस्तान की विदेश नीति के इसी बदलाव को समझने की कोशिश की है इजरायल की India Expert Dr Lauren Dagan Amoss ने. Dr. Lauren Dagan Amoss अब सवाल ‘क्या हिंदुस्तान बड़ी शक्ति बनेगा?’ से आगे है हिंदुस्तान के सामने अब सवाल केवल यह नहीं है कि वह एक Major Power बनेगा या नहीं. बड़ा सवाल यह है कि हिंदुस्तान किस तरह की Major Power बनना चाहता है? क्या हिंदुस्तान किसी एक वैश्विक शक्ति-गुट के साथ जाएगा या Multi-Alignment जारी रखेगा? क्या Strategic Autonomy भविष्य में भी उसकी विदेश नीति का केंद्रीय सिद्धांत बनी रहेगी? क्या Global South की आवाज बनने की कोशिश हिंदुस्तान की स्थायी कूटनीतिक भूमिका बनेगी? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या हिंदुस्तान की बढ़ती रणनीतिक महत्वाकांक्षा को लंबे समय तक आर्थिक, तकनीकी, सैन्य और संस्थागत क्षमता में बदला जा सकेगा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर हिंदुस्तान की विदेश नीति को देखने का शायद यही सबसे महत्वपूर्ण फ्रेम है. Read more: Viral 80’s trend: ‘1980-1989’- वो 10 साल जिन्होंने आज का हिंदुस्तान बनाया The post PM Modi @ 76: Rising Power से Shaping Power तक हिंदुस्तान की विदेश नीति का सफर appeared first on Naya Vichar.

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रिटायर्ड अफसरों के लिए सेल में नौकरी का मौका, 14 सलाहकारों की होगी नियुक्ति; वेतन 1 लाख रुपये तक

बोकारो. स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के इस्को बर्नपुर इस्पात संयंत्र में विभिन्न विभागों के लिए अनुबंध के आधार पर सलाहकारों की नियुक्ति की जायेगी. इसके लिए सेल की इकाइयों से सेवानिवृत्त अधिकारियों को मौका दिया गया है. बीएसएल समेत सेल की अन्य इकाइयों में कनीय प्रबंधक से लेकर महाप्रबंधक स्तर तक काम कर चुके अधिकारी इस पद के लिए आवेदन कर सकते हैं. प्रतीकात्मक फोटो इच्छुक और पात्र उम्मीदवारों को 30 सितंबर 2026 तक इस्को बर्नपुर इस्पात संयंत्र के महाप्रबंधक कार्मिक ओडी कार्यालय में अपना आवेदन जमा करना होगा. आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया जायेगा. चयनित अधिकारियों को सलाहकार के पद पर नियुक्ति दी जायेगी. छह माह का होगा अनुबंध, प्रदर्शन के आधार पर बढ़ सकती है अवधि सलाहकार के रूप में चयनित अधिकारियों की प्रारंभिक नियुक्ति छह माह के लिए होगी. विभागीय कार्यप्रणाली और आवश्यकता के आधार पर उनके अनुबंध की अवधि को आगे बढ़ाया जा सकता है. अधिकतम एक वर्ष तक सेवा विस्तार का प्रावधान रखा गया है. ये भी पढ़ें: इंस्टाग्राम पर हुई दोस्ती, शादी का झांसा देकर युवती को ले जाने का आरोप; तीन सप्ताह बाद झारसुगुड़ा से बरामद 10 विभागों में 14 सलाहकार होंगे नियुक्त इस्को बर्नपुर इस्पात संयंत्र में कुल 14 सलाहकारों की नियुक्ति की जानी है. इनमें प्रोजेक्ट सिविल में दो, प्रोजेक्ट सेफ्टी में एक, प्रोजेक्ट हॉट स्ट्रिप मिल में दो, प्रोजेक्ट इलेक्ट्रिकल में दो और प्रोजेक्ट फाइनेंस में दो पद शामिल हैं. इसके अलावा वर्क्स सेफ्टी, वर्क्स पावर, वर्क्स वायर रॉड मिल, वर्क्स यूआरएम और ऊर्जा प्रबंधन विभाग में एक-एक सलाहकार की नियुक्ति होगी. इन अधिकारियों को नहीं मिलेगा आवेदन का मौका नियुक्ति की शर्तों के अनुसार, सेल के वैसे पूर्व अधिकारी जिन्होंने नौकरी से इस्तीफा दिया है या जिन्हें कंपनी प्रबंधन की ओर से स्वैच्छिक अथवा अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गयी है, वे इस पद के लिए पात्र नहीं होंगे. इसी तरह, अपने तीन साल के सेवाकाल के दौरान सी ग्रेड प्राप्त करने वाले पूर्व अधिकारियों को भी सलाहकार पद के लिए योग्य नहीं माना जायेगा. आवेदन करने वाले उम्मीदवार की अधिकतम आयु 65 वर्ष निर्धारित की गयी है. पद के अनुसार 50 हजार से एक लाख तक वेतन सलाहकार पद पर चयनित अधिकारियों को उनके पूर्व पद के स्तर के आधार पर मासिक पारिश्रमिक दिया जायेगा. पूर्व कनीय प्रबंधक से लेकर पूर्व प्रबंधक स्तर के अधिकारियों को 50 हजार रुपये प्रतिमाह मिलेंगे. ये भी पढ़ें: BSL में कर्मियों ने तैयार किया इन-हाउस CDI सिस्टम, कोक की जगह पुल्वराइज्ड कोल से सालाना 100 करोड़ की बचत का अनुमान पूर्व वरीय प्रबंधक को 60 हजार रुपये, पूर्व सहायक महाप्रबंधक को 70 हजार रुपये, पूर्व उप महाप्रबंधक को 80 हजार रुपये और पूर्व महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी को एक लाख रुपये प्रतिमाह का पारिश्रमिक दिया जायेगा. इसके अलावा चयनित सलाहकारों को आवास और मोबाइल फोन की सुविधा भी उपलब्ध करायी जायेगी. नियुक्ति का उद्देश्य संयंत्र के विभिन्न विभागों में अनुभवी अधिकारियों के ज्ञान और कार्यानुभव का उपयोग करना है. The post रिटायर्ड अफसरों के लिए सेल में नौकरी का मौका, 14 सलाहकारों की होगी नियुक्ति; वेतन 1 लाख रुपये तक appeared first on Naya Vichar.

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