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October 26, 2026

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Rahul Gandhi Defamation Case: राहुल गांधी के मानहानि केस में आज फैसला, सुल्तानपुर कोर्ट में होंगे पेश, जानें पूरा मामला

UP News: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के मानहानि मामले में आज फैसला सुनाया जाएगा. सुल्तानपुर की स्पेशल MP-MLA कोर्ट वर्ष 2018 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर की गई टिप्पणी से जुड़े मामले में अपना निर्णय देगी. राहुल गांधी फैसले के समय अदालत में मौजूद रह सकते हैं. उनके आने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के इंतजाम किए हैं. क्या है पूरा मामला? यह मामला मई 2018 का है. उस समय राहुल गांधी कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार में जुटे थे. इसी दौरान बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को लेकर टिप्पणी की थी. इस बयान पर भाजपा नेता विजय मिश्रा ने आपत्ति जताई थी. उनका आरोप था कि राहुल गांधी की टिप्पणी से भाजपा और उसके कार्यकर्ताओं की छवि को नुकसान पहुंचा है. भाजपा नेता ने दर्ज कराया था मुकदमा राहुल गांधी के बयान को लेकर भाजपा नेता विजय मिश्रा ने अगस्त 2018 में सुल्तानपुर की MP-MLA कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था. इसके बाद अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई. लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अब यह मामला फैसले के चरण तक पहुंच गया है. अदालत के निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हैं. तीन गवाहों के बयान हुए दर्ज मुकदमे की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने विजय मिश्रा, अनिल मिश्रा और रामचंद दुबे सहित तीन गवाहों के बयान दर्ज कराए. इसके बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब कोर्ट इस मामले में अपना अंतिम निर्णय सुनाएगी. फरवरी 2024 में पहली बार कोर्ट पहुंचे थे राहुल गांधी राहुल गांधी पहली बार 20 फरवरी 2024 को इस मामले में सुल्तानपुर की अदालत में पेश हुए थे. उस समय अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी. इसके बाद से वह इस मामले में जमानत पर हैं. अब फैसले के दिन उनकी मौजूदगी को लेकर चर्चा है. कोर्ट परिसर में सुरक्षा के इंतजाम जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी सोमवार को करीब 11 बजे सुल्तानपुर की MP-MLA कोर्ट पहुंच सकते हैं. उनकी पेशी को देखते हुए अदालत परिसर और आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई है. इस मामले की सुनवाई कोर्ट संख्या 17 में स्पेशल MP-MLA कोर्ट के न्यायाधीश शुभम वर्मा की अदालत में हो रही है. अब सभी की नजरें फैसले पर टिकी हैं. Must Read: आज कानपुर में सीएम योगी खोलेंगे सौगातों का पिटारा, 412 करोड़ की 48 परियोजनाओं से बदलेगी तस्वीर, जानें पूरा कार्यक्रम The post Rahul Gandhi Defamation Case: राहुल गांधी के मानहानि केस में आज फैसला, सुल्तानपुर कोर्ट में होंगे पेश, जानें पूरा मामला appeared first on Naya Vichar.

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Explained : महंगाई से लेकर भ्रष्टाचार तक, दुनिया भर में सड़कों पर क्यों उतर रहे लोग?

सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के ग्लोबल प्रोटेस्ट ट्रैकर के मुताबिक, पिछले 12 महीनों में दुनिया के 57 से ज्यादा देशों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं. अक्टूबर 2026 में फ्रांस, इटली, स्पेन, पुर्तगाल और अल्बानिया समेत कई देशों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इन आंदोलनों के मुद्दे अलग-अलग हैं. कहीं लोग महंगाई, कम वेतन और महंगे मकानों से परेशान हैं, तो कहीं शिक्षा, प्रशासनी सेवाओं, भ्रष्टाचार और नेतृत्वक जवाबदेही को लेकर विरोध कर रहे हैं. यहां अहम सवाल ये हैं कि अलग-अलग देशों में विरोध क्यों हो रहा है? इन आंदोलनों के पीछे क्या वजह हैं और प्रशासनों के सामने क्या चुनौतियां हैं? इस एक्सप्लेनर में आसान भाषा में समझेंगे. पहले समझिए, दुनिया में क्यों हो रहा विरोध? बढ़ती महंगाई, महंगे घर, कम वेतन और खराब प्रशासनी व्यवस्था के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है. खाने-पीने की चीजों, ईंधन और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर खर्च बढ़ने से आम लोगों का बजट बिगड़ रहा है. युवाओं और कामगारों के लिए नौकरी के बावजूद घर खरीदना, किराया देना और बचत करना मुश्किल हो रहा है. जिसके कारण विरोध हो रहा है. किस देश में क्यों विरोध हो रहा है. फ्रांस और इटली: यहां महंगाई, वेतन, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर प्रदर्शन हुए. कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुईं. स्पेन और पुर्तगाल: दोनों देशों में महंगे मकान, बढ़ता किराया और कम वेतन लोगों की नाराजगी की बड़ी वजह हैं. युवा किफायती घरों और बेहतर जीवन स्तर की मांग कर रहे हैं. बेल्जियम: प्रशासनी खर्च में कटौती और सार्वजनिक सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका के खिलाफ कामगारों, छात्रों और ट्रेड यूनियनों ने विरोध किया. अल्बानिया: यहां भ्रष्टाचार के आरोप और प्रशासन की जवाबदेही को लेकर प्रदर्शन हो रहे. प्रदर्शनकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. जर्मनी, ग्रीस, ऑस्ट्रिया और आयरलैंड: इन देशों में भी अलग-अलग आर्थिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर असंतोष है. फ्रांस में छात्रों, कामगार और ट्रेड यूनियनें का सड़कों पर विरोध रिपोर्ट के मुताबिक, 24 अक्टूबर को फ्रांस में हुए प्रदर्शन में गृह मंत्रालय ने करीब 4.10 लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान लगाया. इस दौरान सुरक्षा के लिए लगभग 70 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे. प्रशासनी आंकड़ों के अनुसार, 1,314 लोगों को गिरफ्तार किया गया और करीब 50 पुलिसकर्मी घायल हुए. कई जगह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुईं. कुछ जगह तोड़फोड़ और दुकानों में लूटपाट की समाचारें भी सामने आईं. इससे पहले 17 अक्टूबर को भी देश में हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं सामने आई थीं. प्रदर्शनकारी संगठनों ने 31 अक्टूबर को फिर प्रदर्शन करने और 5 नवंबर को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है. हालांकि प्रशासन ने छात्रों और ट्रेड यूनियनों से बातचीत भी की है, लेकिन प्रदर्शनकारी ठोस कदम उठाने तक आंदोलन करने की बात कर रहे हैं. ये भी पढ़ें: इन सभी आंदोलनों के पीछे एक साझा वजह क्या है? अलग-अलग देशों में हो रहे प्रदर्शनों को देखें, तो कुछ समस्याएं ऐसी हैं जो कई जगहों पर एक जैसी नजर आती हैं. महंगाई: बढ़ते खर्च, महंगे ईंधन और किराए से लोगों का बजट बिगड़ रहा है. प्रशासनी सुविधाओं से नाराजगी: लोग स्कूल, अस्पताल, पेंशन और दूसरी प्रशासनी सेवाओं में सुधार चाहते हैं. पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग: लोग चाहते हैं कि प्रशासन के फैसलों में पारदर्शिता हो और गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदारी तय की जाए. भविष्य की चिंता: रोजगार की कमी, महंगी शिक्षा और घर खरीदने में मुश्किलों से युवा परेशान हैं. कुल मिलाकर, दुनिया में विरोध के मुद्दे भले ही अलग हों, लेकिन लोगों की चिंता कई जगह एक जैसी है.महंगाई से राहत, अच्छी प्रशासनी सुविधाएं, जवाबदेह प्रशासन और बेहतर भविष्य. कहीं लोग महंगे घरों और कम वेतन से परेशान हैं, तो कहीं भ्रष्टाचार और प्रशासनी नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं. लेकिन इनकी गूंज में एक साझा सवाल सुनाई देता है कि जब आम लोगों की जिंदगी मुश्किल होती जा रही है, तो उनकी समस्याओं का हल कब और कैसे निकलेगा? अब देखना होगा कि प्रशासनें इस नाराजगी को सिर्फ विरोध मानकर टालती हैं या लोगों की मांगों पर ठोस कदम भी उठाती हैं. The post Explained : महंगाई से लेकर भ्रष्टाचार तक, दुनिया भर में सड़कों पर क्यों उतर रहे लोग? appeared first on Naya Vichar.

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21 की उम्र में 2 बेटियों की मां, लोग बोले- ‘कोई शादी नहीं करेगा’, टूटी अक्षय कुमार से सगाई, ऐसी रही रवीना टंडन की जिंदगी

Raveena Tandon Birthday Special: बॉलीवुड की चमक-दमक, कैमरों की रोशनी और लाखों दिलों की धड़कन बनने का सपना. 90 के दशक में जब रवीना टंडन ने हिंदी फिल्मों में कदम रखा, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक दिन उनकी कहानी इतनी खास बन जाएगी. कभी ‘मस्त-मस्त गर्ल’ बनकर लोगों के दिलों पर राज किया, तो कभी अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में रहीं. सलमान खान के साथ पहली फिल्म से शुरू हुआ उनका सफर, अक्षय कुमार से प्यार और फिर ब्रेकअप तक पहुंचा. लेकिन रवीना की जिंदगी की कहानी सिर्फ इतने तक ही नहीं थी. 21 साल की उम्र में उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी. सलमान खान के साथ किया डेब्यू, फिर बन गईं ‘मस्त-मस्त गर्ल’ रवीना टंडन ने साल 1991 में फिल्म ‘पत्थर के फूल’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था. इस फिल्म में उनके साथ सलमान खान नजर आए थे. रवीना के लिए यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने की शुरुआत थी. उनकी पहली ही फिल्म ने उन्हें पहचान दिलाई और उन्हें बेस्ट फीमेल डेब्यू का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला. रवीना टंडन और अक्षय कुमार लेकिन यह रिश्ता शादी तक नहीं पहुंच सका. दोनों अलग हो गए और उनकी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी बातें हुईं. उस समय किसी रिश्ते के टूटने की समाचार अखबारों और मैगजीन में कई दिनों तक छाई रहती थी. रवीना के लिए यह दौर आसान नहीं रहा होगा, लेकिन उन्होंने अपनी जिंदगी को एक टूटे रिश्ते तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने आगे बढ़ने का फैसला किया और अपनी जिंदगी में नए रास्ते तलाशे. 21 साल की उम्र में दो बेटियां, लोगों ने कहा- ‘कोई शादी नहीं करेगा’ साल 1995 में रवीना टंडन का करियर तेजी से आगे बढ़ रहा था. इसी दौरान महज 21 साल की उम्र में उन्होंने पूजा और छाया नाम की दो बच्चियों की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया. दोनों उनके रिश्तेदार की बेटियां थीं और मां के निधन के बाद उनकी परवरिश ठीक से नहीं हो पा रही थी. रवीना ने फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में बताया था कि यह देखकर उनका दिल टूट गया और उन्होंने दोनों को अपना कानूनी कानूनी गार्जियन बनाने का फैसला कर लिया. रवीना टंडन और अनिल थडानी शादी के बाद रवीना की जिंदगी में एक नया चैप्टर शुरू हुआ. उनके घर बेटी राशा और बेटे रणबीरवर्धन का जन्म हुआ. इस तरह पूजा और छाया के साथ उनका परिवार और बड़ा हो गया. रवीना कई बार अपनी बेटियों के साथ अपने रिश्ते पर बात कर चुकी हैं. वह पूजा और छाया को अपने परिवार का अहम हिस्सा मानती हैं. पर्सनल लाइफ में नए बदलावों के साथ रवीना ने अपने फिल्मी करियर में भी अलग-अलग तरह के रोल किए. उन्होंने यह साबित किया कि वह सिर्फ ग्लैमरस रोल करने तक सीमित नहीं हैं. ‘मस्त-मस्त गर्ल’ से नेशनल अवॉर्ड जीतने तक का सफर रवीना की पहचान सिर्फ ग्लैमरस रोल और हिट गानों तक सीमित नहीं रही. साल 2001 में आई फिल्म ‘दमन’ में उन्होंने एक ऐसी स्त्री का रोल किया, जो घरेलू हिंसा का सामना करती है. इस फिल्म में उनकी एक्टिंग को खूब पसंद किया गया और उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला. ‘शूल’, ‘अक्स’ और ‘सत्ता’ जैसी फिल्मों में भी रवीना ने अलग तरह के रोल किए. इन फिल्मों से पता चला कि वह सिर्फ रोमांटिक फिल्मों और डांस नंबर तक सीमित नहीं हैं. वह सीरियस किरदार भी अच्छी तरह निभा सकती हैं. कुछ समय तक फिल्मों से दूर रहने के बाद रवीना ने फिर वापसी की. वेब सीरीज ‘अरण्यक’ में उनके काम को पसंद किया गया. वहीं ‘केजीएफ: चैप्टर 2’ में भी वह एक अहम रोल में नजर आईं. ये भी पढ़ें: ‘हसेलु त भाग हमार जाग जाए…’, ‘Gorakhpur’s Got Latent’ में बृजेश बिरजू ने अपने अंदाज में गाया पवन सिंह का गाना ये भी पढ़ें: दलेर मेहंदी से मंत्री सुबोध उनियाल ने मांगी माफी, मीका सिंह की टीम ने बताई पूरी बात The post 21 की उम्र में 2 बेटियों की मां, लोग बोले- ‘कोई शादी नहीं करेगा’, टूटी अक्षय कुमार से सगाई, ऐसी रही रवीना टंडन की जिंदगी appeared first on Naya Vichar.

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हर साल नया बवाल, डॉक्यूमेंट्री पर रोक से लेकर गोलीकांड तक, कब-कब जामिया बना ‘बवालिया’

Jamia University Controversies: NIRF रैंकिंग में ऑल टाइम टॉपर, IAS IPS की फैक्ट्री कहे जाने वाली दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी एक बार फिर चर्चा में है. यूनिवर्सिटी में ताजा विवाद छात्रसंघ चुनाव की बहाली की मांग, कैंपस की दीवारों पर लिखे नारों और छात्रों-सुरक्षाकर्मियों के बीच टकराव को लेकर है. जामिया में आखिरी छात्रसंघ चुनाव 2005 में हुए थे. 2006 में छात्रसंघ भंग कर दिया गया था. छात्रों ने 12 अक्टूबर से छात्रसंघ बहाल करने और चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. इससे पहले भी यूनिवर्सिटी में कई बार विवाद देखने को मिले हैं. पिछले 6-7 सालों में जामिया के रिकॉर्ड को देखा जाए तो इस यूनिवर्सिटी में लगभग साल नया बवाल देखने को मिला है. हालांकि, इसी साल अप्रैल महीने में यूनिवर्सिटी के कुलपति मजहर आसिफ के एक बयान ने भी बवाल खड़ा किया था. “हम हिंदुस्तानीय हैं, क्योंकि हमारे DNA में महादेव का DNA है.” — मजहर आसिफ, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति के वायरल वीडियो में कथित बयान आइए जानते हैं जामिया से जुड़ी ऐसी पांच घटनाएं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी- 2019: CAA प्रदर्शन के दौरान कैंपस में घुसी पुलिस जामिया से जुड़ा सबसे चर्चित विवाद 15 दिसंबर 2019 को सामने आया. उस समय नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हो रहे थे. दिल्ली में भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया. जामिया के आसपास प्रदर्शन के दौरान बसों और दूसरी गाड़ियों में आगजनी तथा पथराव की घटनाएं हुईं. इसके बाद पुलिस विश्वविद्यालय परिसर में दाखिल हुई. छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने लाइब्रेरी में पढ़ रहे विद्यार्थियों के साथ मारपीट की और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. इस घटना के वीडियो सामने आने के बाद देशभर में विरोध हुआ. पुलिस का कहना था कि हिंसा में शामिल लोगों को पकड़ने के लिए कार्रवाई की गई थी. जामिया की स्टूडेंट सफूरा जरगर (Image: PTI) सफूरा जरगर उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक अलग मामले में भी आरोपी थीं. ऐसे में उनके कैंपस प्रवेश पर रोक के फैसले ने विश्वविद्यालय में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, छात्र अधिकारों और प्रशासनिक अनुशासन को लेकर बहस छेड़ दी. ये भी पढ़ें: स्टूडेंट प्रोटेस्ट के बीच जामिया में ऑफलाइन क्लासेज बंद, जानें पूरा मामला 2022: छात्रों के बीच झड़प और गोलीकांड 29 सितंबर 2022 को जामिया की लाइब्रेरी में दो छात्र समूहों के बीच झड़प की समाचार सामने आई. पुलिस के मुताबिक, इस दौरान एक छात्र नोमान चौधरी के सिर में चोट लगी. उसे इलाज के लिए होली फैमिली अस्पताल ले जाया गया. पुलिस के अनुसार, इसके बाद दूसरे समूह का एक छात्र अपने साथियों के साथ अस्पताल पहुंचा और वहां नौमान अली पर गोली चला दी. नौमान अली के सिर में गोली लगने से चोट आई और उन्हें इलाज के लिए एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया. अस्पताल ने भी दो समूहों के बीच झड़प और इमरजेंसी वार्ड के पास गोली चलने की पुष्टि की थी. इस घटना ने कैंपस में छात्रों की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए. बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस तरह की घटनाओं पर कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया. मई 2023 में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2022 की झड़प से जुड़े मामले में 15 छात्रों पर कार्रवाई की गई थी. इनमें तीन छात्रों को निष्कासित करने की कार्रवाई भी शामिल थी. 2023: डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग पर विवाद 25 जनवरी 2023 को जामिया में BBC की डॉक्यूमेंट्री ‘India: The Modi Question’ की स्क्रीनिंग को लेकर विवाद हुआ. स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से जुड़े विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय परिसर में डॉक्यूमेंट्री दिखाने की योजना बनाई थी. विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि स्क्रीनिंग के लिए अनुमति नहीं ली गई थी और बिना अनुमति कार्यक्रम की इजाजत नहीं दी जाएगी. इसके बाद कैंपस के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई. दिल्ली पुलिस ने स्क्रीनिंग की कोशिश के दौरान कम से कम एक दर्जन विद्यार्थियों को हिरासत में लिया. इस घटनाक्रम के बीच विश्वविद्यालय में कक्षाएं भी प्रभावित हुईं. जामिया कैंपस की तस्वीर (ANI) यह डॉक्यूमेंट्री गुजरात में 2002 के दंगों और उस समय नरेंद्र मोदी की भूमिका से जुड़े सवालों पर आधारित थी. हिंदुस्तान प्रशासन ने इससे जुड़े ऑनलाइन कंटेंट को रोकने के लिए आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया था. डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर दूसरे विश्वविद्यालयों में भी विवाद हुआ था. 2024: बाबरी मस्जिद को लेकर नारेबाजी 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दिन जामिया में कुछ छात्रों ने बाबरी मस्जिद के विध्वंस के विरोध में नारे लगाए. विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की और सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को वहां से हटाया. ये भी पढ़ें: Explained: DU, JNU में छात्रसंघ चुनाव तो जामिया में क्यों नहीं? जानें क्या है लिंगदोह कमेटी की सिफारिश The post हर साल नया बवाल, डॉक्यूमेंट्री पर रोक से लेकर गोलीकांड तक, कब-कब जामिया बना ‘बवालिया’ appeared first on Naya Vichar.

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Amazon के सर्वर 2027 तक बुक, AI की मांग में ऐसा क्या बदला, जानें पूरा मामला

सुबह फोन पर कोई सवाल पूछना हो, फोटो बनानी हो, ऑफिस का काम करना हो या ऑनलाइन खरीदारी करनी हो, आज सभी कामों में AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल हो रहा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब करोड़ों लोग एक साथ AI का इस्तेमाल करते हैं, तो उनके सवालों के जवाब देने के लिए कितने कंप्यूटर काम करते होंगे? इन्हीं जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी टेक कंपनियां लगातार नए डेटा सेंटर बना रही हैं और कंप्यूटरों की क्षमता बढ़ा रही हैं. अब इस बढ़ती मांग का असर दुनिया की बड़ी टेक कंपनी Amazon पर भी दिख रहा है. Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, Amazon के CEO Andy Jassy ने कहा है कि कंपनी की क्लाउड कंप्यूटिंग सर्वर का ज्यादातर हिस्सा 2027 तक बुक हो चुका है. 2028 की सर्वर का भी बड़ा हिस्सा ग्राहक पहले ही बुक कर चुके हैं. इसकी बड़ी वजह AI कंपनियों और दूसरे कारोबारों की बढ़ती मांग है. Amazon का सर्वर बुक होने का क्या मतलब है? सबसे पहले समझिए कि Amazon सिर्फ ऑनलाइन सामान बेचने वाली कंपनी नहीं है. उसका एक बड़ा कारोबार क्लाउड सेवाओं का भी है. इसकी मदद से दूसरी कंपनियां अपनी वेबसाइट, ऐप और डेटा को चलाने के लिए Amazon के कंप्यूटर और सर्वर का इस्तेमाल करती हैं. Amazon की इस सेवा को Amazon Web Services यानी AWS कहा जाता है. इसे ऐसे समझिए, जैसे किसी को दुकान खोलनी है, लेकिन दुकान खरीदने के बजाय वह किराये पर जगह ले लेता है. Amazon भी दूसरी कंपनियों को इसी तरह अपने कंप्यूटर इस्तेमाल करने की सुविधा देती है. कंपनियों को कंप्यूटर खरीदने और संभालने की जरूरत नहीं पड़ती. वे Amazon को पैसे देकर उसके कंप्यूटर इस्तेमाल करती हैं और अपनी वेबसाइट, ऐप और AI चलाती हैं. यानी कंप्यूटर उनके अपने नहीं होते, लेकिन उनका काम इन्हीं कंप्यूटरों के सहारे चलता है. इसी व्यवस्था को क्लाउड कंप्यूटिंग कहते हैं. अब दिक्कत ये है कि AI बनाने और चलाने वाली कंपनियों को बड़ी संख्या में कंप्यूटर और सर्वर चाहिए. इसके लिए वे Amazon की क्लाउड सेवा पहले से बुक कर रही हैं. Amazon के CEO Andy Jassy के मुताबिक, 2027 तक के लिए कंपनी की ज्यादातर कंप्यूटर सर्वर बुक हो चुकी है. 2028 के लिए भी काफी सर्वर पहले ही बुक की जा चुकी है. इसका मतलब ये नहीं कि Amazon के सारे कंप्यूटर बुक हो गए हैं, बल्कि ये है कि AI की बढ़ती मांग के चलते कंपनियां पहले से ही कंप्यूटर और सर्वर इस्तेमाल करने की जगह पक्की कर रही हैं. Amazon कितना पैसा खर्च कर रही है? Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, Amazon ने 2026 में करीब 220 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बनाई थी. इस पैसे का बड़ा हिस्सा AI से जुड़े काम और नए डेटा सेंटर बनाने पर खर्च होना है. इसके लिए कंपनी को नए कंप्यूटर, सर्वर और उन्हें चलाने के लिए जरूरी दूसरी चीजें जुटानी हैं. इतना पैसा लगाने के बाद भी Amazon के सामने चुनौती है कि AI बनाने वाली कंपनियों की जरूरत कैसे पूरी की जाए. नए डेटा सेंटर बनाने और उन्हें चालू करने में काफी समय लगता है, जबकि कंपनियों को अभी ज्यादा कंप्यूटर और सर्वर चाहिए. यानी AI की दौड़ में सिर्फ नया ऐप या सॉफ्टवेयर बनाना ही काफी नहीं है. उसे चलाने के लिए ढेर सारे कंप्यूटर, बिजली और बड़ी इमारतों की भी जरूरत पड़ती है. जो कंपनी इन सबका इंतजाम जल्दी कर पाएगी, वह बढ़ती मांग को पूरा करने में आगे रह सकती है. आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा? Amazon की कंप्यूटर सर्वर पहले से बुक होने का मतलब ये नहीं है कि इंटरनेट बंद हो जाएगा या AI ऐप काम करना बंद कर देंगे. लेकिन आगे चलकर इसका असर आम लोगों पर पड़ सकता है. AI की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ज्यादा चिप्स, RAM, स्टोरेज और बिजली की जरूरत पड़ रही है. अगर इन चीजों की मांग बढ़ती है और सप्लाई उतनी तेजी से नहीं बढ़ती, तो मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ सकती है. इसके अलावा, क्लाउड स्टोरेज और कुछ AI सेवाएं भी महंगी हो सकती हैं. कंप्यूटर और सर्वर की कमी बनी रहती है, तो नई AI सेवाएं शुरू होने में देरी भी हो सकती है. मोबाइल, लैपटॉप, इंटरनेट या AI सेवाओं के दाम जरूर बढ़ेंगे. ऐसा होगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां बढ़ती मांग को कैसे पूरा करती हैं और उनकी लागत कितनी बढ़ती है. एक्सपर्ट क्या कहते हैं AI की बढ़ती मांग का असर सिर्फ क्लाउड कंप्यूटिंग तक सीमित नहीं है. J.P. Morgan Global Research की रिपोर्ट के मुताबिक, AI डेटा सेंटर में मेमोरी चिप्स की बढ़ती जरूरत से इनकी सप्लाई पर दबाव पड़ रहा है और कीमतें बढ़ने का अनुमान है. इसका असर मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर बनाने वाली कंपनियों की लागत पर भी पड़ सकता है, क्योंकि इन डिवाइस में भी मेमोरी चिप्स का इस्तेमाल होता है. Amazon के CEO Andy Jassy ने 23 अक्टूबर 2026 को बताया कि कंपनी की क्लाउड कंप्यूटिंग क्षमता 2027 तक ज्यादातर बुक हो चुकी है और 2028 की भी काफी क्षमता पहले से बुक है. ये दोनों बातें दिखाती हैं कि AI के लिए कंप्यूटर और सर्वर की मांग तेजी से बढ़ रही है. हालांकि, इससे आम लोगों के गैजेट या AI सेवाएं महंगी होंगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां बढ़ती मांग और लागत को कैसे संभालती हैं. आगे क्या होगा? Amazon की यह समाचार बताती है कि AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ उसके पीछे काम करने वाले कंप्यूटरों की जरूरत भी तेजी से बढ़ रही है. कंपनी 2027 और 2028 के लिए अपनी क्षमता का बड़ा हिस्सा पहले ही ग्राहकों को देने की बात कह रही है. ऐसे में उसके लिए नई कैपिसिटी तैयार करना और बिजली, चिप्स तथा डेटा सेंटर का इंतजाम करना अहम चुनौती रहेगा. आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Amazon और दूसरी टेक कंपनियां बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कितनी तेजी से अपने डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ा पाती हैं. AI के बारे में अक्सर बात उसके नए फीचर्स और काम

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142km vs 123km रेंज, इस धनतेरस Ampere खरीदें या Ather? जानें यूपी, बिहार और झारखंड में दोनों के इलेक्ट्रिक स्कूटर की ऑन-रोड कीमत

अगर आप इस दिवाली और धनतेरस अपने घर नया इलेक्ट्रिक स्कूटर लाने की तैयारी कर रहे हैं, तो बाजार में Ampere Magnus G Max और Ather Rizta के रूप में दो शानदार विकल्प मौजूद हैं. ये दोनों ही स्कूटर ऑफिस जाने, बाजार के काम निपटाने और परिवार के साथ सफर करने के लिए बेहतरीन हैं. लेकिन, दोनों की कीमत, रेंज, रफ्तार और फीचर्स में बड़ा अंतर है. आइए समझते हैं कि आपके बजट और जरूरत के हिसाब से कौन सा स्कूटर फायदे का सौदा रहेगा. कीमत की बात करें तो Ampere Magnus G Max की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत ₹1.03 लाख है, जबकि Ather Rizta करीब ₹1.22 लाख से शुरू होता है. यानी दोनों के बीच लगभग ₹19 हजार का सीधा अंतर है. कम बजट वालों के लिए Ampere एक पॉकेट-फ्रेंडली विकल्प है, वहीं Ather उन लोगों के लिए है जो ज्यादा पावर और स्मार्ट फीचर्स चाहते हैं. एक नजर में दोनों की खासियतें फीचर्स Ampere Magnus G Max Ather Rizta शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत ₹1,02,999 ₹1,21,999 बैटरी क्षमता 3 kWh 2.9 kWh बैटरी टाइप LFP लिथियम-आयन दावा की गई रेंज (IDC) 142 KM 123 KM मोटर की पावर 2.4 kW 4.3 kW टॉप स्पीड 65 KM/घंटा 80 KM/घंटा डिक्की 33 लीटर 34 लीटर बैटरी वारंटी 5 साल या 75,000 KM 3 साल या 30,000 KM नोट: कीमतें शुरुआती एक्स-शोरूम कीमतें हैं. Ather Rizta के अलग-अलग बैटरी और वेरिएंट के हिसाब से कीमत और रेंज बदलती है. ये भी पढ़ें: ₹100 के तेल में दौड़ेगी करीब 26KM, कीमत ₹4.77 लाख से शुरू और पुश-बटन स्टार्ट जैसे फीचर्स, दिवाली में घर लाएं ये 5 ऑटोमैटिक कारें यूपी, बिहार और झारखंड में कितनी है कीमत? इलेक्ट्रिक स्कूटर की एक्स-शोरूम कीमत के अलावा रजिस्ट्रेशन, बीमा और अन्य शुल्क भी कुल कीमत को प्रभावित कर सकते हैं. नीचे कुछ प्रमुख शहरों में उपलब्ध कीमतों का अनुमान दिया गया है. शहर Ampere Magnus G Max की शुरुआती ऑन-रोड कीमत Ather Rizta की शुरुआती ऑन-रोड कीमत लखनऊ लगभग ₹1.07 लाख लगभग ₹1.30 लाख पटना लगभग ₹1.14-1.17 लाख लगभग ₹1.31-1.37 लाख रांची लगभग ₹1.13-1.17 लाख लगभग ₹1.31-1.38 लाख जमशेदपुर लगभग ₹1.13 लाख लगभग ₹1.31-1.38 लाख ये ऑनलाइन उपलब्ध कीमतों के अनुमान हैं. अलग-अलग पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन, बीमा और अन्य शुल्क की गणना अलग होने से कीमत में अंतर हो सकता है. अंतिम ऑन-रोड कीमत अधिकृत डीलर से जरूर कंफर्म करें. किसमें है कितना दम? Ampere Magnus G Max में 3 kWh की LFP बैटरी मिलती है. कंपनी के मुताबिक, यह एक बार चार्ज करने पर 142 KM तक की IDC रेंज देता है. LFP बैटरी का इस्तेमाल इसे रोजमर्रा के सफर के लिए उपयोगी बनाता है. दूसरी ओर, Ather Rizta में 2.9 kWh और 3.7 kWh बैटरी के विकल्प उपलब्ध हैं. इसके छोटे बैटरी वाले वेरिएंट की दावा की गई IDC रेंज 123 KM है, जबकि बड़ी बैटरी वाला वेरिएंट लगभग 159-161 KM तक की रेंज देता है. फीचर्स और परिवार की जरूरत Ampere Magnus G Max: यह सादगी और बचत पर फोकस करता है. डिजिटल स्पीडोमीटर, 33 लीटर का बूट स्पेस और सबसे अहम- 5 साल की लंबी वारंटी इसे एक टेंशन-फ्री फैमिली स्कूटर बनाती है. Ather Rizta: यह स्कूटर तकनीक से लैस है. इसमें 34 लीटर का बड़ा स्पेस, 7-इंच का डिस्प्ले, मोबाइल ऐप कनेक्टिविटी और पीछे बैठने वाले के लिए आरामदायक बैकरेस्ट मिलता है. परिवार के आराम और स्मार्ट नेविगेशन के लिए यह एक बेहतरीन चुनाव है. आपकी जरूरत के हिसाब से कौन सा स्कूटर सही? Ampere Magnus G Max खरीदें अगर: आपका बजट ₹1.10 लाख के आसपास है. आपको 5 साल की लंबी बैटरी वारंटी और ज्यादा रेंज चाहिए. आपका मुख्य इस्तेमाल रोजमर्रा के साधारण कामों और ऑफिस जाने के लिए है. Ather Rizta खरीदें अगर: आपका बजट थोड़ा ज्यादा है और आपको 80 KM/घंटा वाली तेज रफ्तार चाहिए. आप टचस्क्रीन, गूगल मैप्स और स्मार्ट कनेक्टेड फीचर्स के शौकीन हैं. परिवार के बैठने के लिए चौड़ी सीट और आरामदायक बैकरेस्ट आपकी प्राथमिकता है. ये भी पढ़ें: ₹1.25 लाख रुपये तक की छूट, पेट्रोल मॉडल से CNG तक के विकल्प, दिवाली से पहले Hyundai की इन कारों पर मिल रहा है डिस्काउंट The post 142km vs 123km रेंज, इस धनतेरस Ampere खरीदें या Ather? जानें यूपी, बिहार और झारखंड में दोनों के इलेक्ट्रिक स्कूटर की ऑन-रोड कीमत appeared first on Naya Vichar.

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रेलवे काउंटर से टिकट लेने से पहले जान लें ये नियम, वरना हाथ से निकल जाएगा ₹10 लाख का फायदा

Train Ticket Insurance: अब रेलवे स्टेशन के रिजर्वेशन काउंटर से ट्रेन टिकट खरीदने वाले यात्रियों के लिए भी बीमा की सुविधा शुरू होने जा रही है. 27 अक्टूबर 2026 से काउंटर पर मिलने वाले टिकटों को भी रेलवे यात्रा बीमा के दायरे में लाने का निर्देश दिया गया है. यानी अब टिकट खरीदने के लिए IRCTC की वेबसाइट या ऐप का इस्तेमाल नहीं करने वाले यात्रियों को भी इस सुविधा का फायदा मिल सकेगा. सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर को एक मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया था. कोर्ट ने साफ कहा कि ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले यात्रियों की तरह रेलवे काउंटर से टिकट लेने वालों को भी बीमा की सुविधा मिलनी चाहिए. हालांकि, काउंटर से टिकट लेने पर बीमा के लिए कितने पैसे देने होंगे और इसके लिए अलग से क्या प्रक्रिया होगी, यह अभी साफ नहीं है. आखिर 27 अक्टूबर से क्या बदलने वाला है? अभी तक IRCTC से पात्र ई-टिकट बुक करने वाले यात्री अतिरिक्त पैसे देकर यात्रा बीमा लेने का ऑप्शन चुन सकते हैं. लेकिन रेलवे काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्रियों के लिए इसी तरह की सुविधा का साफ इंतजाम नहीं था. अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रेलवे को काउंटर से बिकने वाले टिकटों को भी बीमा के दायरे में लाना होगा. इससे उन यात्रियों को फायदा मिल सकता है, जो स्टेशन पर जाकर टिकट खरीदना पसंद करते हैं. यह निर्देश सभी रेलवे स्टेशनों के रिजर्वेशन काउंटर से बेचे जाने वाले टिकटों पर लागू करने के लिए दिया गया है. ट्रेन हादसे में कितना पैसा मिल सकता है? IRCTC की मौजूदा ऑनलाइन यात्रा बीमा योजना के तहत तय शर्तों के अनुसार अलग-अलग तरह के नुकसान पर बीमा राशि मिलती है. इसकी जानकारी नीचे दिए गए टेबल से समझिए: नुकसान या खर्च बीमा राशि यात्री की मौत ₹10 लाख पूरी तरह स्थायी अपंगता ₹10 लाख आंशिक स्थायी अपंगता ₹7.5 लाख तक चोट लगने पर अस्पताल का खर्च ₹2 लाख तक मृत शरीर को ले जाने का खर्च ₹10,000 ध्यान देने वाली बात यह है कि ये रकम हर हादसे में अपने आप नहीं मिलती. बीमा कंपनी भुगतान तभी करेगी, जब घटना पॉलिसी में शामिल हो और उसकी शर्तें पूरी हों. ऑनलाइन टिकट पर बीमा के लिए कितने पैसे लगते हैं? मौजूदा IRCTC योजना में पात्र हिंदुस्तानीय नागरिकों के लिए बीमा लेना जरूरी नहीं है. यानी टिकट बुक करते समय यात्री चाहें तो इसे चुन सकते हैं. IRCTC की मौजूदा नीति के मुताबिक, बीमा का प्रीमियम प्रति यात्री 45 पैसे, टैक्स सहित है. बीमा चुनने पर कंपनी रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ईमेल पर पॉलिसी की जानकारी भेजती है. यात्री IRCTC की बुकिंग हिस्ट्री में भी पॉलिसी नंबर देख सकते हैं. हालांकि, काउंटर से टिकट लेने वालों के लिए 45 पैसे वाला यही नियम लागू होगा या नहीं, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है. टिकट खरीदते समय यात्रियों को क्या ध्यान रखना चाहिए? 27 अक्टूबर से काउंटर टिकटों पर बीमा लागू करने का निर्देश है, लेकिन इसकी पूरी प्रक्रिया की जानकारी अभी सामने नहीं आई है. इसलिए यात्रियों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए: काउंटर टिकट पर बीमा कैसे मिलेगा, इसकी रेलवे की आधिकारिक जानकारी देखें. यह जरूर पता करें कि बीमा अपने आप मिलेगा या इसके लिए अलग से ऑप्शन चुनना होगा. प्रीमियम और बीमा की शर्तों की जानकारी लिए बिना यह न मानें कि हर यात्री को अपने आप ₹10 लाख मिलेंगे. ये भी पढ़ें: ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने से पहले जान लें नए नियम, वरना अटक सकता है आपका काम The post रेलवे काउंटर से टिकट लेने से पहले जान लें ये नियम, वरना हाथ से निकल जाएगा ₹10 लाख का फायदा appeared first on Naya Vichar.

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26 अक्टूबर सुबह की टॉप 20 खबरें: खरगे के ‘मोदी का बाप भी जाएगा’ बयान पर BJP का पलटवार, कूचबिहार में BSF जवानों पर पत्थरों से हमला

1. खरगे के ‘मोदी का बाप भी जाएगा’ बयान पर भड़की BJP: अमित शाह बोले- अब गाली देना ही बचा है; संबित पात्रा ने राहुल गांधी को घेरा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पीएम मोदी पर विवादित बयान पर बीजेपी ने पलटवार किया है. अमित शाह ने कांग्रेस पर गाली-गलौज की नेतृत्व करने का आरोप लगाया, जबकि संबित पात्रा ने राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाए. पूरी समाचार यहां पढ़ें 2. खरगे के ‘मोदी का बाप भी जाएगा’ बयान पर भड़के CM सम्राट, बोले- कांग्रेस और राहुल गांधी तुरंत मांगें माफी Mallikarjun Kharge On PM Modi: पटना में मल्लिकार्जुन खरगे की टिप्पणी पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कांग्रेस अध्यक्ष और राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग की है. वहीं, भाजपा के अन्य नेताओं ने भी खरगे के बयान की निंदा करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है. पूरी समाचार यहां पढ़ें 3. क्या 2 साल के लिए जेल जाएंगे राहुल गांधी? 26 अक्टूबर को सुल्तानपुर कोर्ट में होंगे पेश, अमित शाह पर टिप्पणी मामले में आएगा फैसला राहुल गांधी ने साल 2018 में अमित शाह, जो उस समय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, को ‘हत्या का आरोपी’ (Murder Accused) कहा था. जिसके बाद उनके खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज किया गया था. इसकी शिकायत भाजपा के जिला अध्यक्ष विजय मिश्रा ने कराई थी. पूरी समाचार यहां पढ़ें 4. India-EU FTA की डील दिसंबर में हो सकती है फाइनल, ब्रसेल्स में PM मोदी की यात्रा से पहले तेज हुई तैयारी हिंदुस्तान और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत तेज हो गई है. सूत्रों के मुताबिक, 17 या 18 दिसंबर को ब्रसेल्स में पीएम मोदी के दौरे के दौरान इस ऐतिहासिक समझौते पर दस्तखत हो सकते हैं. इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है, जिससे दुनिया भर में हिंदुस्तान का व्यापार, निवेश और नए अवसर बढ़ेंगे. पूरी समाचार यहां पढ़ें 5. जस्टिस संजय कौल ने पूर्व CJI चंद्रचूड़ पर लगाए आरोप, कहा- जजों की नियुक्ति से पहले प्रशासन की लेते थे राय सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल ने अपनी आने वाली किताब ‘विदाउट फियर ऑर फेवर’ में पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ के कार्यकाल में जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. जानिए इस पर पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने क्या कहा? पूरी समाचार यहां पढ़ें 6. PM मोदी ने ओडिशा में किया RBI डेटा सेंटर का उद्घाटन: बोले- आजकल युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं लड़े जाते, वित्तीय स्थिति पर चोट भी एक जंग पीएम मोदी ने ओडिशा में RBI के नए ग्रीनफील्ड डेटा सेंटर और साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का उद्घाटन किया. यह बैंकिंग सिस्टम की डिजिटल सुरक्षा मजबूत करेगा. पूरी समाचार यहां पढ़ें 7. सड़क पर नग्न होकर किस बात का हंगामा कर रहे किन्नर? विरोध प्रदर्शन और मारपीट का वीडियो वायरल सड़क पर नग्न होकर किन्नर किस बात का विरोध कर रहे है? पुलिस लाइन के सामने हंगामे, ट्रैफिक रोकने और मारपीट का वीडियो वायरल हैं. पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार भी किया है. जानिए क्या है मामला? पूरी समाचार यहां पढ़ें 8. छात्र ने ईमेल के जरिए अपने स्कूल को दी बम से उड़ाने की धमकी, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान स्कूल से छुट्टी पाने के लिए एक छात्र ने बम से उड़ाने की धमकी दी. पुलिस की जांच में पोल खुलने के बाद अब जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत कार्रवाई हुई है. पूरी समाचार यहां पढ़ें 9. कूचबिहार बॉर्डर पर बवाल: BSF जवानों पर लाठी-पत्थरों से हमला, जवाब में चला साउंड ग्रेनेड पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में हिंदुस्तान-बांग्लादेश सीमा पर रेत-पत्थर उत्खनन को लेकर BSF जवानों और स्थानीय लोगों के बीच झड़प हुई, जिसमें साउंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया. जानिए पूरा माामला. पूरी समाचार यहां पढ़ें 10. देश की सेवा में शहीद हुआ गुमला का लाल, गांव में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई गुमला के बीएसएफ जवान प्रबोध तिर्की देश की सेवा में शहीद हो गए. वीरगति को प्राप्त प्रबोध तिर्की को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. पूरी समाचार यहां पढ़ें 11. Bullet Train: जमीन से 100 फीट नीचे बनेगा स्टेशन, समुद्र के अंदर 7 KM लंबी सुरंग से दौड़ेगी हिंदुस्तान की पहली बुलेट ट्रेन हिंदुस्तान की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद के बीच 320 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी. जानें 100 फीट नीचे बनने वाले स्टेशन और 7 किमी लंबी समुद्री सुरंग की खासियतें. पूरी समाचार यहां पढ़ें 12. खरगे के ‘मोदी का बाप भी जाएगा’ बयान पर गिरिराज बोले- कांग्रेस मूर्खों की टोली, JDU और HAM ने भी घेरा Mallikarjun Kharge On PM Modi: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर बिहार में सियासी घमासान तेज हो गया है. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस को ‘मूर्खों की टोली’ बताया. वहीं, JDU और HAM ने भी खरगे को घेरा और सार्वजनिक माफी की मांग की. पूरी समाचार यहां पढ़ें 13. JDU से निकाले जाने के बाद अनंत सिंह का ऐलान, बोले- नई पार्टी बना लेंगे, बताया फ्यूचर प्लान Mokama MLA Anant Singh : जदयू से निष्कासित विधायक अनंत सिंह ने ऐलान करते हुए कहा है कि वे अपनी पार्टी बनाएंगे. उन्हें पार्टी से निकाले जाने का कोई दुख नहीं है. पूरी समाचार यहां पढ़ें 14. हैदराबाद में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के पास फेंका अंडा, तनाव के बाद एक संदिग्ध हिरासत में हैदराबाद में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के पास अंडा फेंके जाने से तनाव की स्थिति पैदा हो गई. पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है. जानिए पूरा मामला. पूरी समाचार यहां पढ़ें 15. Cyclone Alert: आंध्र, तमिलनाडु और ओडिशा में तूफान का खतरा, ओडिशा के 5 जिलों में स्कूल बंद; 140 KMph की रफ्तार से चलेंगी हवाएं बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव चक्रवाती तूफान का रूप ले रहा है. 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश में लैंडफॉल की आशंका है, कई राज्यों में अलर्ट जारी किया गया है. वहीं ओडिशा के 5 जिलों में स्कूलों की छुट्टी घोषित कर दी गई है. पूरी समाचार यहां पढ़ें 16. गाजियाबाद में 1000 बेटियों को बांटनी थीं साइकिलें, आधी रात को बुलडोजर एक्शन से मचा बवाल, अब सपा ने दी चुनौती गाजियाबाद में 1000 छात्राओं को साइकिल बांटने के समाजवादी पार्टी के कार्यक्रम

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Investigation : स्ट्रीट फूड बिजनेस से घर चला रही बिहार की 52% महिलाएं, राष्ट्रीय औसत को पछाड़ पहुंची देश में दूसरे नंबर पर

Investigation : पटना. बिहार में घर की रसोई संभालने वाली स्त्रीएं अब खान-पान के कारोबार में भी अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं. ठेला-खोमचा, ढाबा, चाट-पकौड़ा व स्ट्रीट फूड के कारोबार से जुड़कर बिहार की स्त्रीएं न सिर्फ अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं, बल्कि परिवार के भरण-पोषण में भी अहम भूमिका निभा रही है. फूड सेक्टर में स्त्रीओं की भागीदारी के मामले में बिहार राष्ट्रीय औसत से आगे है. मुख्य बातें बिहार में ठेला-खोमचा और ढाबों से परिवार चला रहीं स्त्रीएं. फूड सेक्टर में 1.90 लाख कामगार ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत. बिहार में स्ट्रीट फूड बना रोजगार का बड़ा जरिया. खान-पान के कारोबार में स्त्रीओं की भागीदारी 52 फीसदी. स्ट्रीट फूड कारोबार में बिहार की स्त्रीएं देश में दूसरे स्थान पर. पटना में सबसे अधिक रोजगार. बिहार देश में दूसरे स्थान पर राज्य भर में इस क्षेत्र में काम करने वाले कुल कामगारों में 52 फीसदी स्त्रीएं हैं, जबकि देश में स्त्रीओं की औसत भागीदारी 41 फीसदी है. इस मामले में बिहार देश में दूसरे स्थान पर है. असंगठित क्षेत्र के कामगारों का पंजीकरण 2021 से ई-श्रम पोर्टल पर किया जा रहा है. पोर्टल पर फूड सेक्टर के 18.60 लाख से अधिक कामगारों ने पंजीकरण कराया है. इनमें यूपी में सबसे अधिक 3.82 लाख और बिहार में 1.90 लाख कामगार पंजीकृत है. ई-श्रम पोर्टल पर फूड सेक्टर के पंजीकृत कामगार क्रम संख्या राज्य/विवरण पंजीकृत कामगारों की संख्या 1 उत्तर प्रदेश 3.82 लाख 2 बिहार 1.90 लाख 3 महाराष्ट्र 1.64 लाख 4 मध्य प्रदेश 1.62 लाख — देशभर में कुल 18.60 लाख से अधिक फूड सेक्टर में स्त्रीओं की भागीदारी क्रम संख्या विवरण स्त्रीओं की भागीदारी 1 बिहार 52% 2 राष्ट्रीय औसत 41% — राष्ट्रीय औसत से बिहार आगे 11 प्रतिशत अंक मुख्य तथ्य फूड सेक्टर में काम करने वाले कुल कामगारों में बिहार में 52% स्त्रीएं हैं. स्त्री भागीदारी के मामले में बिहार देश में दूसरे स्थान पर है. ई-श्रम पोर्टल पर असंगठित क्षेत्र के कामगारों का पंजीकरण वर्ष 2021 से किया जा रहा है. 18 से 40 वर्ष के 69 फीसदी कामगार बिहार के फूड सेक्टर में युवाओं की भागीदारी सबसे अधिक है.इस क्षेत्र में काम करने वाले 69 फीसदी कामगार 18 से 40 वर्ष की उम्र के है. वहीं, 40 से 50 वर्ष की उम्र के कामगारों की हिस्सेदारी 18 फीसदी है. 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोग भी इस कारोबार में अपनी आजीविका चला रहे हैं. उनकी हिस्सेदारी 12 फीसदी से अधिक है. बिहार के फूड सेक्टर में उम्र के आधार पर कामगारों की भागीदारी क्रम संख्या कामगारों का आयु वर्ग कुल कामगारों में हिस्सेदारी 1 18 से 40 वर्ष 69% 2 40 से 50 वर्ष 18% 3 50 वर्ष से अधिक 12% से अधिक ठेला-खोमचा और ढाबे सबसे अधिक दे रहा रोजगार राज्य में स्ट्रीट फूड का कारोबार रोजगार का बड़ा माध्यम बनकर उभरा है. बिहार में फूड सेक्टर के रोजगार में ठेला-खोमचा, ढाबा, चाट-पकौड़ा और अन्य स्ट्रीट फूड कारोबार की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है. इस क्षेत्र में 4.36 लाख से अधिक लोग काम कर रहे हैं. वहीं, बेकरी में करीब 40 हजार, फूड ग्रेन और मिलिंग से जुड़े काम में 16 हजार तथा होम डिलिवरी के क्षेत्र में 15 हजार लोग कार्यरत है. दूध बेचने और चाय बनाने के काम में भी 10-10 हजार से अधिक लोग जुड़े है. खाना बनाने के काम में करीब 10 हजार और ठेले पर फल बेचने के कारोबार में 6,500 से अधिक लोग काम कर रहे है. बिहार की ताजा समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें बिहार में फूड सेक्टर के विभिन्न कारोबारों में रोजगार क्रम संख्या कारोबार का क्षेत्र कामगारों की संख्या 1 चाट-पकौड़ा और अन्य स्ट्रीट फूड 4.36 लाख से अधिक 2 बेकरी करीब 40 हजार 3 फूड ग्रेन और मिलिंग करीब 16 हजार 4 होम डिलिवरी करीब 15 हजार 5 दूध बेचने का कारोबार 10 हजार से अधिक 6 चाय बनाने का कारोबार 10 हजार से अधिक 7 खाना बनाने का काम करीब 10 हजार 8 ठेले पर फल बेचने का कारोबार 6,500 से अधिक पटना में सबसे अधिक कामगार बिहार के जिलों में फूड सेक्टर से जुड़े कामगारों की संख्या क्रम संख्या जिला कामगारों की संख्या 1 पटना 12 हजार से अधिक 2 मुजफ्फरपुर करीब 10 हजार 3 मधुबनी लगभग 8,400 4 पूर्वी चंपारण लगभग 8,400 5 समस्तीपुर 7,500 से अधिक 6 पश्चिमी चंपारण लगभग 7,300 7 भागलपुर करीब 5,700 स्ट्रीट फूड का यह कारोबार स्त्रीओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है. कम पूंजी में शुरू होने वाले इन व्यवसायों के जरिये स्त्रीएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ परिवार की आय में भी योगदान दे रही है. केस स्टडी-1: नर्सिंग चायवाली प्रीति झा पटना के महेंद्रू इलाके में एक छोटी-सी चाय की दुकान चलाने वाली प्रीति झा आज सोशल मीडिया पर ‘नर्सिंग चायवाली’ के नाम से जानी जाती हैं. आज उनकी पहचान सिर्फ चाय बेचने तक सीमित नहीं है, इसके पीछे संघर्ष, हिम्मत और अपनी बेटी के बेहतर भविष्य के लिए कुछ करने का जुनून है. प्रीति ने नर्सिंग की पढ़ाई की है और उनकी शादी भी हुई, लेकिन पति की शराब की लत और शादीशुदा जिंदगी में परेशानियों के कारण उन्हें अपने पति से अलग होने का फैसला लेना पड़ा. अपनी छोटी बेटी की जिम्मेदारी उठाने और उसे बेहतर भविष्य देने के लिए प्रीति ने खुद चाय का स्टॉल शुरू किया. आज वह अपनी मेहनत से महीने का 30,000 रुपये तक की कमाई कर लेती है. प्रीति झा से हमारी सहयोगी पत्रकार रिया सिंह की बातचीत केस स्टडी-2 : दो बहनों का स्टार्टअप ‘कुचु पुचु’ पटना के एसके पुरी पार्क के पास अपना स्टॉल चलाने वाली दो बहनों का ‘कुचु-पुचु’ नाम से चलने वाला स्टॉल युवा वर्ग में खास पॉपुलर है. एक बहन शादीशुदा हैं, जबकि दूसरी बहन ने अपनी मां की खराब तबीयत के कारण कॉरपोरेट जॉब छोड़ कर पटना आयी. राशिका वरुण तिवारी और सपना तिवारी दोनों बहनों ने स्टॉल लगाने का फैसला लिया. आज अपनी मेहनत से अच्छी कमाई कर रही हैं. लेकिन इनका सफर आसान नहीं रहा. सड़क किनारे जगह की व्यवस्था से लेकर घर की व्यवस्था देखने तक के लिए इन्हें संघर्ष करना पड़ा. सपना बताती है कि नौकरी

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वकालत से क्रिकेट के मैदान तक… कौन हैं किम कॉटन, जो पुरुषों के T20I में अंपायरिंग करने वाली पहली महिला बनीं?

Kim Cotton Umpire: ऑकलैंड की रहने वाली किम कॉटन ने हिंदुस्तान और न्यूजीलैंड के बीच दूसरे टी20 मैच में मैदान पर अंपायरिंग की. 2023 में भी वह पुरुषों के अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच में अंपायरिंग कर इतिहास रच चुकी हैं. ये भी पढ़ें: IND vs NZ 3rd T20: नए वेन्यू पर होगा हिंदुस्तान-न्यूजीलैंड का तीसरा मुकाबला, क्या न्यूजीलैंड करेगा वापसी? हिंदुस्तान-न्यूजीलैंड मैच में रचा इतिहास हिंदुस्तान और न्यूजीलैंड के बीच स्पोर्ट्से गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में न्यूजीलैंड की किम कॉटन ने अंपायरिंग कर इतिहास रच दिया. वह हिंदुस्तानीय पुरुष क्रिकेट टीम के किसी टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में मैदान पर अंपायरिंग करने वाली पहली स्त्री बनीं. यह मुकाबला न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च स्थित हैगली ओवल मैदान पर स्पोर्ट्सा गया. इस मैच में हिंदुस्तान ने जीत दर्ज की. हिंदुस्तानीय टीम के लिए यह मुकाबला दोहरी उपलब्धि वाला रहा. टीम ने अपना 300वां टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच स्पोर्ट्सा और इस प्रारूप में अपनी 200वीं जीत भी हासिल की. कौन हैं किम कॉटन? किम कॉटन न्यूजीलैंड के ऑकलैंड की रहने वाली हैं. वह पेशे से वकील हैं और लंबे समय से क्रिकेट में अंपायरिंग कर रही हैं. साल 2018 में ICC ने उनके काम को पहचानते हुए उन्हें स्त्री अंपायरों के डेवलपमेंट पैनल में शामिल किया. उन्होंने स्त्री टी20 विश्व कप 2018 में अंपायरिंग की. इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई. वह स्त्री क्रिकेट के कई बड़े मुकाबलों में अंपायर की भूमिका निभा चुकी हैं. ये भी पढ़ें: Video: रेप केस में फंसे अभिषेक पोरेल के साथ जेल में क्या हुआ था? क्रिकेटर ने बताई पूरी कहानी पुरुषों के अंतरराष्ट्रीय मैच में भी कर चुकी हैं अंपायरिंग किम कॉटन के लिए पुरुषों के अंतरराष्ट्रीय मैच में अंपायरिंग करना नया नहीं है. 5 अप्रैल 2023 को न्यूजीलैंड और श्रीलंका के बीच स्पोर्ट्से गए टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में उन्होंने मैदान पर अंपायरिंग की थी. इसके साथ ही वह आईसीसी के दो पूर्ण सदस्य देशों की पुरुष टीमों के बीच टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में मैदान पर अंपायरिंग करने वाली पहली स्त्री बनी थीं. ये भी पढ़ें: पाकिस्तान के 154 रन पर गिरे 9 विकेट, चाहिए थे 88 रन, फिर शादाब ने पलट दिया मैच! हिंदुस्तानीय टीम के मैचों में पहले भी निभा चुकी हैं जिम्मेदारी किम कॉटन इससे पहले हिंदुस्तान के न्यूजीलैंड दौरे पर टी20 सीरीज के मैचों में टीवी अंपायर की जिम्मेदारी भी निभा चुकी हैं. मौजूदा सीरीज के पहले मैच में भी वह तीसरी अंपायर थीं. दूसरे मुकाबले में मैदान पर अंपायरिंग करके उन्होंने हिंदुस्तानीय पुरुष टीम के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया. किम कॉटन की यह उपलब्धि क्रिकेट में स्त्रीओं की बढ़ती भागीदारी और अंपायरिंग के क्षेत्र में उनके लिए खुलते नए अवसरों को दिखाती है. The post वकालत से क्रिकेट के मैदान तक… कौन हैं किम कॉटन, जो पुरुषों के T20I में अंपायरिंग करने वाली पहली स्त्री बनीं? appeared first on Naya Vichar.

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