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खिलाड़ी बने हथियारबाज: फर्जी दस्तावेजों से बने लाइसेंस, असलहा माफिया का पर्दाफाश

AGRA NEWS: फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हथियार लाइसेंस बनवाने और कहीं से भी हथियार खरीदकर लाइसेंस पर चढ़वाने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है. यह साजिश एसटीएफ (विशेष कार्य बल) की महीनों चली जांच के बाद सामने आई है. आरोप है कि कुछ रसूखदारों ने खुद को खिलाड़ी दर्शा कर शूटिंग की आड़ में शस्त्र लाइसेंस बनवाए. इस पूरे मामले में सेवानिवृत्त असलहा बाबू संजय कपूर समेत छह लोगों को नामजद किया गया है.

मुख्यमंत्री के जनता दरबार से खुला राज

यह मामला तब उजागर हुआ जब विशाल भारद्वाज नामक युवक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दरबार में शिकायत की. विशाल का आरोप था कि भूपेंद्र सारस्वत से पांच लाख रुपये के लेनदेन के बाद उसे झूठे मुकदमों में फंसाया गया और पुलिस से धमकियां दिलवाई गईं. मुख्यमंत्री के आदेश पर यह मामला एसटीएफ को सौंपा गया और आगरा यूनिट के इंस्पेक्टर यतींद्र शर्मा को जांच की जिम्मेदारी दी गई.

जांच में सामने आया बड़ा हथियार घोटाला

एसटीएफ इंस्पेक्टर यतींद्र शर्मा द्वारा की गई जांच में सामने आया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए शस्त्र लाइसेंस बनाए गए। इतना ही नहीं, हथियार कहां से खरीदे गए, कब खरीदे और कितनी कीमत में खरीदे इन सभी की जानकारी और दस्तावेज भी आरोपियों ने उपलब्ध नहीं कराए.

फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर बने खिलाड़ी

जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी खुद को कुशल निशानेबाज बताकर शस्त्र लाइसेंस प्राप्त करते थे. नेशनल शूटर मोहम्मद अरशद के पास पांच लाइसेंस पाए गए. उन्होंने उम्र कम दर्शाकर लाइसेंस प्राप्त किया, लेकिन शस्त्रों की खरीद से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए.

हर आरोपी का एक बार ‘गुम’ हुआ लाइसेंस

एसटीएफ की रिपोर्ट के अनुसार, सभी आरोपितों के शस्त्र लाइसेंस एक बार जरूर गुम होना बताए गए. लेकिन उनके पास गुमशुदगी का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं था. पुराने लाइसेंसों में दर्ज हथियारों और कारतूसों की जानकारी भी नए लाइसेंसों में दर्ज नहीं थी, जिससे शक गहराता गया.

इन लोगों पर दर्ज हुआ मुकदमा

नाई की मंडी थाने में एसटीएफ इंस्पेक्टर यतींद्र शर्मा ने IPC की धारा 420, 467, 468, 471 और Arms Act के तहत मुकदमा दर्ज कराया. आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:

1-: मोहम्मद जैद: वर्ष 2003 में शस्त्र लाइसेंस बनवाया. शपथ पत्र में जन्मतिथि 1975 बताई, जबकि प्रमाण पत्रों में 1972 है.

2-: मोहम्मद अरशद (नेशनल शूटर): दस्तावेजों में उम्र कम दर्शाई और सभी पांच लाइसेंसों के शस्त्रों की खरीद के दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए.

3-: राजेश कुमार बघेल: लाइसेंस से संबंधित मूल पत्रावली नहीं मिली. शस्त्र खरीद का कोई प्रमाण नहीं मिला.

4-: शोभित चतुर्वेदी: फर्जी शपथ पत्र देकर उत्तराखंड का लाइसेंस छुपाया. लखनऊ के बजाय आगरा को जन्म स्थान बताया. बरैठा की पिस्टल शिव कुमार सारस्वत से बिना कागजात खरीदी.

5-: भूपेंद्र सारस्वत: 21 वर्ष की आयु से कम होते हुए भी लाइसेंस बनवाया. गुमशुदगी के कागजात नहीं दिखाए.

6-: संजय कपूर (सेवानिवृत्त असलहा बाबू): तथ्यों को छिपाने, झूठा शपथ पत्र देने और कूट रचना का आरोप.

हथियारों की तस्करी और कारतूस घोटाले की भी आशंका

एसटीएफ ने जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया कि यह पूरा मामला सिर्फ फर्जी लाइसेंस तक सीमित नहीं है, बल्कि अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त और कारतूस घोटाले की ओर इशारा करता है. एसटीएफ ने आशंका जताई कि खिलाड़ियों की आड़ में अवैध धंधा चल रहा था.

धमकी का एक और मामला दबा दिया गया

विशाल भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि उसे बदमाश सोनू गौतम से धमकियां दिलवाई गईं. इस संबंध में धमकी की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जांच में प्रस्तुत की गई, लेकिन इस पर कोई मुकदमा अब तक दर्ज नहीं हुआ.

पुलिस कमिश्नर का बयान

पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने बताया कि एसटीएफ की तहरीर मिलने के बाद मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. विवेचना में यदि पुख्ता साक्ष्य मिलते हैं तो आगे सख्त कार्रवाई की जाएगी.

यह मामला कानून व्यवस्था और शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया की गंभीर खामियों को उजागर करता है. रसूखदारों और जिम्मेदार अफसरों की मिलीभगत से फर्जी लाइसेंस बनाकर अवैध हथियारों की तस्करी की आशंका को बल मिला है. जांच पूरी होने के बाद इस घोटाले में और भी नाम सामने आने की संभावना है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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