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चिकन नेक के लिए रेल नेटवर्क पर हो रहा कार्य

प्रतिनिधि, ठाकुरगंज देश में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर प्रशासन का विशेष जोर है. रेल, सड़क और पोर्ट नेटवर्क को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार काम हो रहा है. प्रशासन की कोशिश देश में लॉजिस्टिक की कीमत कम करने पर है. इस कड़ी में हिंदुस्तानीय रेलवे द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए घोषित अपनी पिंक बुक में इस चिकन नेक के लिए जिस महत्वपूर्ण घोषणा का जिक्र किया था. वह अब धरातल पर उतरता दिखने लगा है. हालांकि इस पिंक बुक में स्टेशन के आधुनिकीकरण से लेकर नए रेल लाइन की महत्वपूर्ण योजनाओं का जिक्र था. लेकिन ठाकुरगंज होकर गुजरने वाली रेल लाइनों के दोहरीकरण की घोषणा ने सीमांचल में रेल नेटवर्क को और मजबूती प्रदान करने का आधार दे दिया है. साथ ही नई ट्रेन भी भविष्य में देखने को मिलेगी.

तीन लाइन का होगा दोहरीकरण

मालूम हो कि हिंदुस्तानीय रेलवे की पिंक बुक में जिन बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणा की गई थी. उसमें ठाकुरगंज-सिलीगुड़ी (57 किलोमीटर) के दोहरीकरण के लिए एफएलएस के लिए अंतिम स्थान सर्वेक्षण वही अलुआबाड़ी-ठाकुरगंज दोहरीकरण (19 किमी) के लिए अंतिम स्थान सर्वेक्षण इसके साथ अररिया-ठाकुरगंज नई रेल लाइन के दोहरीकरण के लिए अंतिम स्थान सर्वेक्षण (111 किमी) की घोषणा की गई थी. इसमें अलुआबाड़ी-ठाकुरगंज दोहरीकरण (19 किमी) का 326.67 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से स्वीकृती की घोषणा के बाद अन्य रेल लाइन के जल्द घोषणा की आशा लोगो ने की है.

बिहार के साथ उत्तर बंगाल के विकास में मिलेगी मदद

ठाकुरगंज-सिलीगुड़ी, अलुआबाड़ी-ठाकुरगंज और अररिया-ठाकुरगंज नई रेल लाइन के दोहरीकरण के बाद न सिर्फ बिहार के अररिया-किशनगंज बल्कि उत्तरबंगाल के दार्जलिंग जिले के लाखो लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी. इस प्रोजेक्ट से बिहार-बंगाल के इस क्षेत्र में कनेक्टिविटी मजबूत होगी. यह रूट कृषि उत्पाद, उर्वरक, सीमेंट जैसे उत्पादों के परिवहन के लिए काफी महत्वपूर्ण है. यह प्रोजेक्ट सिर्फ यात्री सुविधा के लिहाज से नहीं, बल्कि आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है. दोहरीकरण के बाद पूर्वोतर हिंदुस्तान और शेष हिंदुस्तान के बीच का यह मार्ग सबसे छोटा रेल रूट बन जाएगा, जिससे यात्रियों के समय की बचत होगी और माल वाहन की रफ्तार भी बढ़ेगी.

स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार

डबल लाइन की समाचार से स्थानीय लोग भी बेहद खुश हैं. स्थानीय गुलाम हसनेन बताते हैं कि इस इलाके में लंबे समय से डबल लाइन पटरी की मांग की जा रही थी. इसके बन जाने के बाद अब सीमांचल का यह पिछड़ा इलाका दूसरे महानगरों से आसानी से जुड़ पाएगा. साथ ही दूसरे राज्यों तक पहुंचने का सफर भी आसान होगा. ठाकुरगंज में नया व्यापार में व्यापार के केंद्र खुलेंगे जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा.

नई ट्रेनें मिलने की संभावना

ठाकुरगंज रेल यात्री समिति के संयोजक सह मुख्य पार्षद सिकंदर पटेल ने कहा कि दोहरीकरण का मतलब है कि एक ही रेल मार्ग पर दो समानांतर पटरियां बिछाई जाती हैं, जिससे ट्रेनों का आवागमन सुगम हो जाता है. इससे ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा सकती है और यात्रियों को अधिक सुविधा मिल सकती है. उन्होंने कहा दोहरीकरण से समय की बचत होगी और क्रोसिंग के नाम पर ट्रेनों को एक दूसरे का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, जिससे यात्रा का समय कम हो जायेगा.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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