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Chhath Puja: छठ की तैयारी में बढ़े जलस्तर और दलदल की चुनौती, घाटों तक पहुंच अभी भी मुश्किल

Chhath Puja: जेपी गंगा सेतु से घाट और कई रास्ते अभी भी दलदल और गड्ढों से भरे हैं. अंडरपास में जमा बारिश का पानी व श्रद्धालुओं की भारी संख्या इस तैयारी को चुनौती दे रही है. नगर निगम और नगर परिषद ने छठ की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन जलस्तर घटने तक घाटों को पूरी तरह तैयार करना मुश्किल दिख रहा है.

जेपी सेतु और आसपास के घाटों की स्थिति

जेपी गंगा सेतु पूर्वी घाट तक जाने वाले रास्ते अपेक्षाकृत ठीक हैं, लेकिन जेपी गंगा पथ के नीचे कई जगह गड्ढे बने हैं. वार्ड नंबर एक के सैनिटरी इंस्पेक्टर के अनुसार, इस वर्ष जेपी गंगा सेतु घाट, घाट नंबर 93, 88 और 83 पर छठ पूजा होगी. फिलहाल साफ-सफाई का काम चल रहा है और इसके बाद गड्ढों को भरकर रास्तों को समतल किया जाएगा. विशेष रूप से घाट नंबर 88 और 83 पर जलस्तर अभी भी अधिक है. कनीय अभियंता शिशिर कुमार ने बताया कि पिछले 24 घंटों में गंगा का जलस्तर लगभग 30 सेंटीमीटर घटा है. यदि यही रफ्तार बनी रही, तो छठ तक जलस्तर डेढ़ मीटर तक कम होने की संभावना है.

जलस्तर घटने के बाद की तैयारियां

अपर जिला दंडाधिकारी खगेंद्र कुमार झा ने बताया कि जहां दलदल जैसी स्थिति है, वहां मिट्टी भरकर रास्ते तैयार किए जाएंगे. जलस्तर घटने के बाद घाटों की समतलीकरण, लाइटिंग और बैरिकेडिंग का काम पूरा किया जाएगा. अंडरपास में जमा पानी को पंप मशीन के माध्यम से निकाला जाएगा. जेपी गंगा पथ के नीचे बड़े गड्डों को बैरिकेडिंग से सुरक्षित किया जाएगा.

दानापुर के घाटों की चुनौती

दानापुर क्षेत्र में भी गंगा का बढ़ा जलस्तर सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. कई पारंपरिक घाटों पर अभी भी पानी भरा है, जिससे श्रद्धालुओं को घाट तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है. नगर परिषद के अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष गंगा का जलस्तर सामान्य से ऊपर है. नासरीगंज, फक्कर महतो घाट, हजामा टोली घाट, राजपूतना घाट, चाई टोला, नारियल घाट, वनपर टोली घाट, गुरूद्वारा घाट, चौधराना घाट, गोला घाट, इमलीतल घाट, पीपा पुल घाट और कचहरी घाट पर पानी अधिक है.

नगर परिषद वैकल्पिक घाट तैयार करने पर भी विचार कर रही है. फक्कर महतो, राजपुतना और गुरूद्वारा घाट पक्का हैं, जबकि बाकी घाट मिट्टी वाले हैं. इससे व्रतियों को नारियल घाट जैसे पारंपरिक घाटों पर कीचड़ और दलदल का सामना करना पड़ सकता है. एसडीओ दिव्या शक्ति ने बताया कि घाटों की साफ-सफाई का कार्य चल रहा है, ताकि व्रतियों को अर्घ देने में परेशानी कम हो.

प्रशासन की सतर्कता और श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा

अधिकारियों का मानना है कि जल स्तर घटने के बाद ही घाटों की अंतिम तैयारियां पूरी होंगी. नदी के किनारे सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. जेपी गंगा सेतु और दानापुर के घाटों की स्थिति यह संकेत देती है कि छठ की तैयारियों में जलवायु और पारंपरिक संरचना दोनों की चुनौती है.

छठ पूजा के मौके पर लाखों श्रद्धालु गंगा घाटों पर इकट्ठा होते हैं, इसलिए प्रशासन इस बार जलस्तर और दलदल जैसी समस्याओं से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है. जलस्तर घटने के साथ ही घाटों को तैयार किया जाएगा, ताकि व्रतियों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक पहुंच सुनिश्चित हो सके.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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