Jyotish Shastra: ज्योतिष शास्त्र केवल ग्रहों की चाल ही नहीं बताता, बल्कि यह व्यक्ति के दैनिक जीवन, स्वास्थ्य और भविष्य की संभावनाओं को भी दर्शाता है. जन्मकुंडली के बारह भाव होते हैं, जिनका अलग-अलग जीवन क्षेत्र पर प्रभाव होता है. इसमें छठा भाव रोग और स्वास्थ्य का प्रतिनिधि करता है, आठवां भाव आयु को दर्शाता है, जबकि द्वादश भाव खर्च और हॉस्पिटल से संबंधित होता है.
ग्रहों के प्रभाव से रोग
जन्मकुंडली में छठा भाव रोग का माना जाता है और इसके अधिपति को षष्ठेश कहते हैं. यह भाव व्यक्ति के स्वास्थ्य की स्थिति और रोगों को दर्शाता है. यदि इस भाव में शुभ ग्रह मौजूद हों, तो रोग कम प्रभावित करता है और व्यक्ति स्वस्थ रहता है. अशुभ ग्रहों के प्रभाव में थोड़ी राहत मिलने के बावजूद व्यक्ति स्वस्थ्य और दीर्घायु हो सकता है.
ज्योतिष के अनुसार निमोनिया कैसे होता है
निमोनिया शीत ज्वर का बिगड़ा रूप है, जिसमें फेफड़ों में संक्रमण और सूजन हो जाती है. यह रोग बच्चों और वृद्धों को ज्यादा प्रभावित करता है, और जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उन्हें अधिक जोखिम रहता है. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, जब गोचर में सूर्य, गुरु और मंगल मिथुन, सिंह या कुम्भ राशि में संचार करते हैं, तो निमोनिया रोग की प्रबल आशंका रहती है.
निमोनिया रोग से बचाव के लिए रत्न
ज्योतिष में रत्न चिकित्सक पद्धति के अनुसार निमोनिया रोग में राहत के लिए रत्नों का विशेष महत्व है. लाल मूंगा और पिला पुखराज धारण करने से रोग का प्रभाव कम हो जाता है और स्वास्थ्य में सुधार आता है. यह पद्धति प्राचीन काल से चली आ रही है और आज भी लोगों को गंभीर रोगों से राहत दिलाने में उपयोगी साबित हो रही है.
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ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
ज्योतिष, वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
8080426594 / 9545290847
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