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तारिक रहमान की एंट्री होते ही बदली बांग्लादेशी राजनीति, भारत विरोधियों में गठबंधन की आहट; दो फाड़ हुई NCP

Bangladesh Politics NCP Jamat-E-Islami Tarique Rahman: बांग्लादेश में फरवरी 2026 में होने वाले राष्ट्रीय संसदीय चुनावों से पहले देश का नेतृत्वक परिदृश्य लगातार अहम मोड़ों से गुजर रहा है. जहां बांग्लादेश की सबसे पुरानी पार्टियों में से एक बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यकारी संयोजक तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद ढाका लौटे. उनके आगमन पर जोरदार स्वागत किया गया. उनके आने का साफ मतलब है कि चुनावी नेतृत्व में गहमागहमी बढ़ने वाली है. 12 फरवरी 2026 को घोषित चुनाव के मद्देनजर और मौजूदा नेतृत्वक दिशा में हो रहे बदलावों के बीच, ‘जुलाई विद्रोह’ के बाद गठित छात्र-नेतृत्व वाली नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) अब कट्टरपंथी इस्लामी दल जमात-ए-इस्लामी के साथ चुनावी गठबंधन की दिशा में बढ़ती दिख रही है. 

प्रोथोम आलो की एक रिपोर्ट के अनुसार, एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट के पूर्व समन्वयक और शेख हसीना प्रशासन गिराने वाले ‘जुलाई विद्रोह’ के नेताओं में शामिल अब्दुल कादिर के अनुसार, एनसीपी फिलहाल आगामी संसदीय चुनावों से पहले जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत कर रही है.अब्दुल कादिर ने गुरुवार को फेसबुक पर एक पोस्ट में दावा किया कि दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर चर्चा चल रही है और यदि बातचीत योजना के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो शुक्रवार को गठबंधन की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है. 

कादिर ने की आलोचना

हालांकि, कादिर ने इस संभावित गठबंधन की कड़ी आलोचना भी की. फेसबुक पोस्ट में कादिर ने लिखा, “युवा नेतृत्व की कब्र खोदी जा रही है. एनसीपी ने आखिरकार जमात के साथ गठबंधन करने का फैसला कर लिया है. देश भर के लोगों, पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की उम्मीदों और आकांक्षाओं को नजरअंदाज करते हुए, केवल कुछ नेताओं के हितों के लिए यह आत्मघाती निर्णय लिया गया है. यदि सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो इस गठबंधन की घोषणा शुक्रवार को हो सकती है. इसके जरिए एनसीपी व्यावहारिक रूप से जमात के गर्भ में समा जाएगी.”

कैसा होगा सीटों का बंटवारा?

कादिर ने यह भी दावा किया कि बातचीत के शुरुआती दौर में एनसीपी ने जमात से 50 सीटों की मांग की थी, जिसे बाद में घटाकर 30 सीटें कर दिया गया. हालांकि, प्रोथोम आलो के मुताबिक, एनसीपी के कई वरिष्ठ नेताओं ने अब तक इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. वहीं, जमात-ए-इस्लामी की ओर से भी इस मुद्दे पर कोई बयान जारी नहीं किया गया है.

कौन हैं अब्दुल कादिर?

अब्दुल कादिर औपचारिक रूप से एनसीपी से जुड़े नहीं हैं, लेकिन जुलाई विद्रोह से जुड़े उनके कई साथी बाद में इस पार्टी का हिस्सा बने. खुद कादिर की तरह, एनसीपी के संयोजक नाहिद इस्लाम और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी पहले एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट के समन्वयक रह चुके हैं. पिछले साल सितंबर में हुए ढाका यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन (DUCSU) चुनाव में अब्दुल कादिर ने एनसीपी समर्थित पैनल से उपाध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ा था. कादिर को छात्र आंदोलन के एक अन्य पूर्व समन्वयक आसिफ महमूद शोजिब भुइयां का करीबी समर्थक माना जाता है. 

एनसीपी जीती तो नाहिद पीएम, हारी तो विपक्षी नेत

जब अब्दुल कादिर ने फेसबुक पोस्ट साझा की, तो एनसीपी के संयुक्त सदस्य सचिव मीर अर्शादुल हक ने भी पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा की. उन्होंने आरोप लगाया कि एनसीपी अपने मूल सिद्धांतों से भटक रही है. कादिर का कहना है कि उन्हें जमात के साथ कथित गठबंधन की जानकारी भी इसी समय मिली. कादिर ने यह आरोप भी लगाया कि चर्चा के दौरान यह संकेत मिला है कि यदि गठबंधन चुनाव जीतता है, तो एनसीपी संयोजक नाहिद इस्लाम प्रधानमंत्री बन सकते हैं और हार की स्थिति में उन्हें विपक्ष का नेता बनाया जा सकता है.

पहले ही दो पार्टियों के साथ गठबंधन कर चुकी है एनसीपी

बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने 13वें संसदीय चुनाव और एक जनमत संग्रह की तारीख 12 फरवरी 2026 तय की है. एनसीपी इन चुनावों में ‘शापला कली’ (कमलिनी पुष्प की कली) को अपना चुनाव चिह्न बनाकर मैदान में उतर रही है और अब तक 100 से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है. एनसीपी पहले ही एबी पार्टी और राष्ट्रो संगस्कार आंदोलन के साथ मिलकर ‘गणतांत्रिक संगस्कार जोट’ बना चुकी है. वहीं, अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी अन्य नेतृत्वक दलों के साथ भी गठबंधन को लेकर बातचीत जारी रखे हुए है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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