India Pakistan GDP: आतंकवाद की यूनिवर्सिटी चलाने वाला पाकिस्तान इस समय आर्थिक कंगाली की मार झेल रहा है. तंगी के बावजूद वह हिंदुस्तान के साथ पंगा लेने में वह कोई कसर बाकी नहीं रख रहा है. लेकिन, उसे इस बात का इल्म ही नहीं है कि वह जिस पड़ोसी देश हिंदुस्तान से लगातार पंगे पर पंगा ले रहा है, उसकी वित्तीय स्थिति दुनिया में तेजी से बढ़ने वाली वित्तीय स्थितिओं में चौथे नंबर पर पहुंच गया है और उसका जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) करीब 4.12 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. पिछले 65 सालों के दौरान दोनों देशों के जीडीपी की तुलना करेंगे, तो 1960-2025 तक हिंदुस्तान का जीडीपी 37.02 बिलियन डॉलर से लेकर 4.12 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि पाकिस्तान का जीडीपी 3.74 बिलियन डॉलर से चलकर अभी 410.49 बिलियन डॉलर तक ही पहुंचा है.
1960-1970: शुरुआत में ही दिख गया फर्क
विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 1960 में हिंदुस्तान का जीडीपी जहां 37.02 बिलियन डॉलर था, वहीं पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति सिर्फ 3.74 बिलियन डॉलर की थी. दोनों देशों की आर्थिक यात्रा की शुरुआत से ही हिंदुस्तान आकार और क्षमता में आगे था. 1965 तक हिंदुस्तान 59.55 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया, जबकि पाकिस्तान 5.92 बिलियन डॉलर तक ही सीमित रहा. 1970 आते-आते हिंदुस्तान का जीडीपी 62.42 बिलियन डॉलर और पाकिस्तान का 10.02 बिलियन डॉलर हुआ. शुरुआती दशक में ही यह साफ हो गया था कि हिंदुस्तान की वित्तीय स्थिति ज्यादा मजबूत आधार पर आगे बढ़ रही है.
1975-1985: हिंदुस्तान की रफ्तार तेज, पाकिस्तान पीछे
ग्लोबल स्टेट्सएक्स की ओर से सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट किए गए आंकड़ों के अनुसार, 1975 में हिंदुस्तान का जीडीपी 98.47 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि पाकिस्तान 11.23 बिलियन डॉलर पर ही था. 1980 में हिंदुस्तान ने 186.32 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार किया. वहीं, पाकिस्तान 23.65 बिलियन डॉलर तक पहुंचा. 1985 में हिंदुस्तान 232.51 बिलियन डॉलर पर था, जबकि पाकिस्तान का जीडीपी 31.14 बिलियन डॉलर रहा. इस दौर में हिंदुस्तान में औद्योगीकरण, सार्वजनिक क्षेत्र और बुनियादी ढांचे पर निवेश का असर साफ दिखने लगा.
🇮🇳 India vs 🇵🇰 Pakistan — Historical Economic Comparison
(Nominal GDP, 1960–2025)➜ 1960
🇮🇳 India: $37.02B
🇵🇰 Pakistan: $3.74B➜ 1965
🇮🇳 India: $59.55B
🇵🇰 Pakistan: $5.92B➜ 1970
🇮🇳 India: $62.42B
🇵🇰 Pakistan: $10.02B➜ 1975
🇮🇳 India: $98.47B
🇵🇰 Pakistan: $11.23B➜ 1980… pic.twitter.com/hwmRNE1HWo
— GlobalStatsX (@GlobalStatsX) January 10, 2026
1990-2000: उदारीकरण ने बदली हिंदुस्तान की तस्वीर
विश्व बैंक के आकंड़ों के अनुसार, 1990 में हिंदुस्तान का जीडीपी 320.97 बिलियन डॉलर और पाकिस्तान का 40.01 बिलियन डॉलर था. 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद हिंदुस्तान की रफ्तार और तेज हो गई. 1995 तक हिंदुस्तान 360.28 बिलियन डॉलर और 2000 में 468.39 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया. वहीं, पाकिस्तान 2000 में भी सिर्फ 99.48 बिलियन डॉलर तक ही पहुंच सका. यह वही दौर था, जब हिंदुस्तान में निजीकरण, विदेशी निवेश और आईटी सेक्टर का उभार शुरू हुआ.
2005-2015: हिंदुस्तान ट्रिलियन डॉलर क्लब में शामिल
2005 में हिंदुस्तान का जीडीपी 820.38 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि पाकिस्तान 145.20 बिलियन डॉलर पर था. 2010 आते-आते हिंदुस्तान 1.67 ट्रिलियन डॉलर की वित्तीय स्थिति बन चुका था. वहीं, पाकिस्तान 196.70 बिलियन डॉलर पर ही रहा. 2015 में हिंदुस्तान 2.10 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि पाकिस्तान 299.96 बिलियन डॉलर पर अटका रहा. इस दशक में हिंदुस्तान वैश्विक निवेशकों के लिए बड़ा बाजार बना, जबकि पाकिस्तान नेतृत्वक अस्थिरता और कर्ज संकट से जूझता रहा.
2020-2025: आर्थिक अंतर ऐतिहासिक स्तर पर
2020 में हिंदुस्तान का जीडीपी 2.67 ट्रिलियन डॉलर और पाकिस्तान का 300.42 बिलियन डॉलर था. 2021 में हिंदुस्तान 3.16 ट्रिलियन डॉलर, 2022 में 3.34 ट्रिलियन डॉलर और 2023 में 3.63 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गया. 2024 में हिंदुस्तान का जीडीपी 3.90 ट्रिलियन डॉलर आंका गया, जबकि पाकिस्तान 371.57 बिलियन डॉलर पर रहा. 2025 के अनुमान के मुताबिक हिंदुस्तान 4.12 ट्रिलियन डॉलर की वित्तीय स्थिति बन चुका है, जबकि पाकिस्तान करीब 410.49 बिलियन डॉलर तक ही पहुंच पाया है.
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65 साल में चौड़ी हो गई आर्थिक खाई
1960 से 2025 तक के आंकड़ों से साफ है कि हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच आर्थिक फासला लगातार बढ़ता गया. हिंदुस्तान जहां आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी वित्तीय स्थितिओं में शामिल है, वहीं पाकिस्तान कर्ज, महंगाई और विदेशी मुद्रा संकट से जूझ रहा है. 65 सालों में हिंदुस्तान ने अपने जीडीपी को 100 गुना से ज्यादा बढ़ाया, जबकि पाकिस्तान आज भी 500 अरब डॉलर के आंकड़े को छूने के लिए संघर्ष कर रहा है. यही कारण है कि वैश्विक मंच पर हिंदुस्तान की आर्थिक ताकत बढ़ती जा रही है और पाकिस्तान आर्थिक मोर्चे पर कमजोर होता दिख रहा है.
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