Fertiliser: किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए केंद्र प्रशासन विभिन्न स्तर पर कदम उठाती रही है. खरीफ और रबी सीजन 2025 के दौरान रेल मंत्रालय और उर्वरक विभाग के बीच बेहतर तालमेल का असर जमीनी स्तर पर साफ तौर पर दिखा. उर्वरक की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए रेलवे की ओर से उर्वरक की आपूर्ति के लिए रैक की तेज और सुचारु आवाजाही की गयी और इससे राज्यों को समय पर उर्वरक मिला.
उर्वरक की उपलब्धता के कारण किसानों को खेती के लिए समस्या का सामना नहीं करना पड़ा. उर्वरक विभाग ने रेलवे मंत्रालय के सहयोग से देश के हर कोने तक पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने में सफल रहा. विभाग का मानना है बेहतर समन्वय के कारण खाद्य सुरक्षा को लेकर प्रशासन के संकल्प का पता चलता है.
मंत्रालय के अनुसार जुलाई 2025 में औसतन 72 रैक रोजाना की लोडिंग हुई, जो अगस्त में 78 और सितंबर में बढ़कर 80 रैक रोजाना हो गयी. यह पिछले पांच खरीफ सत्रों में सबसे अधिक उर्वरक आपूर्ति का रहा. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अप्रैल से दिसंबर 2025 तक देश के सभी राज्यों में प्रमुख उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गयी.
यूरिया के लिए 312.40 लाख मीट्रिक टन की आवश्यकता के मुकाबले 350.45 लाख मीट्रिक टन की उपलब्धता करायी गयी. पीएंड के उर्वरकों (जैसे डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस) की 252.81 लाख मीट्रिक टन जरूरत थी, जबकि आपूर्ति 287.69 लाख मीट्रिक टन हुई.
रेलवे का रहा अहम योगदान
पिछले साल उर्वरकों की ढुलाई में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गयी. अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच कुल 530.16 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों की आपूर्ति की गई, जो पहली बार 500 लाख मीट्रिक टन के आंकड़े को पार कर गयी. यह पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 (472.58 लाख मीट्रिक टन) की समान अवधि की तुलना में 12.2 फीसदी अधिक और वर्ष 2023-24 के पूर्व रिकॉर्ड से 8.5 फीसदी से अधिक रही.
इस दौरान यूरिया के लिए कुल 10841 रैक का संचालन किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 8 फीसदी अधिक है. पीएंडके उर्वरकों (जैसे डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस) के लिए 8806 रैक चलाए गए, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में लगभग 18 फीसदी अधिक रहे.
जुलाई से जनवरी (13 जनवरी तक) की माहवार तुलना से यह स्पष्ट होता है कि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में उर्वरक रैक की आवाजाही में निरंतर और स्थायी वृद्धि हुई. रेल मंत्रालय, बंदरगाहों, राज्य प्रशासन और उर्वरक कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय के कारण उर्वरकों की आवाजाही बेहतर तरीके से हुई. समय पर योजना, लगातार निगरानी और आपसी तालमेल से किसानों तक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का काम प्रशासन ने किया.
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