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बजट में भत्ते नहीं बढ़ने से बंगाल के इमाम ममता बनर्जी से नाराज, बोले- 3000 में कुछ नहीं होता

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Imam: जलपाईगुड़ी : एक ओर चुनाव से पहले बंगाल की नेतृत्वक भत्ते में बढ़ोतरी को लेकर गरमायी हुई है, वहीं दूसरी ओर भत्ते में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं होने से इमामों और मुअज़्ज़मों में ममता बनर्जी को लेकर गुस्सा है. लक्ष्मी भंडार, आशा कार्यकर्ताओं से लेकर आंगनवाड़ी और नागरिक स्वयंसेवकों तक, सभी के मानदेय में वृद्धि हुई है, लेकिन इनके मानदेय में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इस बात को लेकर भी काफी आक्रोश है. नेतृत्वक हलकों में वाम मोर्चा इस मसले को हवा दे रहा है. माकपा नेता का कहना है कि ममता प्रशासन ने भत्ते में बढ़ोतरी न कर के अल्पसंख्यक समुदाय के एक बड़े हिस्से को नाराज कर दिया है.

शिक्षक से कर्मचारी तक सब नाखुश

जलपाईगुड़ी गरल बारी मस्जिद के इमाम ज़ाहिरुल इस्लाम कहते हैं कि आशा कार्यकर्ताओं के भत्ते में 1000 टका की बढ़ोतरी की गई है. हालांकि लगातार उनके गुस्से से यह साफ ज़ाहिर होता है कि इस बढ़ोतरी से कोई खास फर्क पड़ेगा. दोपहर के भोजन कराने वाली कार्यकर्ताओं से लेकर अंशकालिक शिक्षकों तक, सभी नाखुश हैं. इस बार मोअज़्ज़म भी नाराज़गी ज़ाहिर करने वालों की सूची में अपना नाम जोड़ चुके हैं. स्थानीय मीडिया से बात करते हुए जलपाईगुड़ी स्थित चरकडांगी जामा मस्जिद के मुअज़्ज़म अब्दुल मजीद ने कहा- बाजार बहुत महंगा है. यह मामूली भत्ता किसी काम का नहीं है. हमारा भत्ता बढ़ाया जाना चाहिए था. ममता बनर्जी की प्रशासन बंगाल में पुजारियों की तरह मुअज़्ज़मों को भी 1,500 टका प्रति माह भत्ता देती है.

मासिक भत्ता बेहद कम

एक बाग्ला दैनिक अखबार से बात करते हुए तृणमूल समर्थित इमाम संगठन के जलपाईगुड़ी सदर ब्लॉक अध्यक्ष ज़ाहिरुल इस्लाम स्पष्ट रूप से कहते हैं- हम तृणमूल पार्टी हैं. इस साल के राज्य बजट में सभी के भत्ते में कुछ हद तक बढ़ोतरी की गई है, लेकिन प्रशासन ने हमारे लिए कुछ नहीं किया है. जिस दर से कीमतें बढ़ी हैं, उस हिसाब से 3000 रुपये का मासिक भत्ता कुछ भी नहीं रह गया है. अगर इसमें कम से कम 500 टका की भी वृद्धि हो जाती है, तो मैं समझ जाऊंगा कि प्रशासन ने हमारे लिए कुछ नया सोचा है. इस्लामी समुदाय के लोगों के मन में भी आक्रोश बढ़ता जा रहा है.

जलपाईगुड़ी में नेतृत्वक तनाव बढ़ा

तृणमूल से संबद्ध इमामों के संगठन की ममता प्रशासन के खिलाफ प्रकट हुई नाराजगी के कारण जलपाईगुड़ी में नेतृत्वक तनाव बढ़ गया है. सीपीएम के जिला सचिव और परिषद सदस्य जमीनार अली का कहना है कि सभी के भत्ते में कमोबेश बढ़ोतरी कर दी गई है, लेकिन इमामों के भत्ते में बढ़ोतरी नहीं की गई है. यह भत्ता बढ़ाया जाना चाहिए था. साथ ही, उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि राज्य के बजट को देखकर ऐसा लगता है जैसे यह तृणमूल का चुनावी घोषणापत्र हो. भत्तों से जुड़ी समस्याएं, नौकरियों की कमी, हर चीज का असर इस साल के चुनावों पर पड़ेगा.

बजट को लेकर समाज के कई वर्गों में आक्रोश

भाजपा भी इस मसले से खुद को अलग नहीं रख पा रही है. भाजपा जिला समिति सदस्य पॉलेन घोष का कहना है- बजट को लेकर समाज के कई वर्गों में आक्रोश बढ़ रहा है. इसका असर वोटों पर जरूर पड़ेगा. इस बार तृणमूल हार मानने को तैयार नहीं है. हालांकि, सत्ताधारी पार्टी विपक्ष की बात सुनने को तैयार नहीं है. तृणमूल जिला समिति के सदस्य पॉल हसन प्रधान ने कहा- हालांकि कई लोगों के भत्ते बढ़ा दिए गए हैं, लेकिन इमामों और मुअज़्ज़मों के भत्ते नहीं बढ़े हैं. यह राज्य प्रशासन का मामला है. हमें उम्मीद है कि प्रशासन इस पर जरूर विचार करेगी, लेकिन इससे वोट पर कोई असर नहीं पड़ेगा. क्योंकि इमाम भत्ता ममता बनर्जी द्वारा ही शुरू किया गया था.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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