Iran Secret Plan: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब उस मोड़ पर आ गया है, जहां बातचीत के साथ-साथ जंग की तैयारी भी जोरों पर है. ताजा सैटेलाइट तस्वीरों ने खुलासा किया है कि ईरान अपने परमाणु और सैन्य ठिकानों को बचाने के लिए उन्हें जमीन के नीचे छिपाने और कंक्रीट की मोटी परतों से ढकने में जुटा है. एक तरफ जेनेवा में परमाणु डील को लेकर मेज पर चर्चा चल रही है, तो दूसरी तरफ खाड़ी में बारूद की गंध तेज होती जा रही है.
सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा ‘सुरक्षा कवच’
‘इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी’ (ISIS) की नई हाई-रिजोल्यूशन तस्वीरों ने ईरान की बड़ी तैयारी को जगजाहिर कर दिया है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ईरान अपने संवेदनशील ठिकानों को मिट्टी और कंक्रीट के नीचे दबाकर ‘फोर्टिफाइड बंकर्स’ (मजबूत किले) में बदल रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि ईरान ने एक नए ठिकाने पर कंक्रीट की मजबूत ढाल तैयार की है और उसे मिट्टी से पूरी तरह ढक दिया है ताकि आसमान से होने वाले हमलों से बचा जा सके.
Over the last two to three weeks, Iran has been busy burying the new Taleghan 2 facility at the Parchin military complex with soil. Once the concrete sarcophagus around the facility was hardened, Iran did not hesitate to move soil over large parts of the new facility. More soil… pic.twitter.com/LWSrCnDdfy
— Inst for Science (@TheGoodISIS) February 17, 2026
इन खास ठिकानों पर चल रहा है काम:
परचिन सैन्य परिसर: तेहरान से 30 किमी दूर स्थित इस संवेदनशील साइट पर ईरान ने एक ‘कंक्रीट सरकोफैगस’ (मजबूत ढांचा) बनाया है. एक्सपर्ट डेविड अलब्राइट के अनुसार, इसे मिट्टी से इसलिए ढका गया है ताकि कंक्रीट का रंग छिप जाए और हवाई हमलों से सुरक्षा मिले.
इसफहान परमाणु केंद्र: जून 2025 में हुए अमेरिकी-इजरायली हमले के बाद, ईरान ने यहां के टनल (सुरंग) के रास्तों को मिट्टी से भर दिया है. ISIS का कहना है कि ऐसा इसलिए किया गया है ताकि कोई जमीनी हमला या यूरेनियम जब्त करने की कोशिश नाकाम हो जाए.
नतांज साइट: यहां पहाड़ों के नीचे टनल के रास्तों को भारी मशीनों के जरिए और भी मजबूत किया जा रहा है.
शीराज मिसाइल बेस: यहां भी पिछले हमलों में हुए नुकसान की मरम्मत की जा रही है और इसे फिर से पूरी क्षमता से शुरू करने की कोशिश जारी है.
अमेरिका ने तैनात किए 50 से ज्यादा लड़ाकू विमान
जंग की आहट के बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी ताकत कई गुना बढ़ा दी है. अमेरिकी अधिकारियों और फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 50 से ज्यादा खतरनाक फाइटर जेट्स (F-22, F-35 और F-16) इस इलाके में भेजे गए हैं. साथ ही हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर भी तैनात हैं. समुद्र में ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ जैसे युद्धपोत पहले से ही मौजूद हैं.
बातचीत का दौर भी जारी
तनाव के बावजूद जेनेवा में दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की ‘इनडायरेक्ट टॉक’ (अप्रत्यक्ष बातचीत) हुई है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि कुछ मुद्दों पर सैद्धांतिक सहमति बनी है और ईरान जल्द ही अपना लिखित प्रस्ताव देगा. वहीं, अमेरिका का साफ कहना है कि ईरान को यूरेनियम संवर्धन (enrichment) रोकना होगा और अपनी मिसाइल प्रोग्राम पर पाबंदी माननी होगी.
ईरान के सुप्रीम लीडर की चेतावनी
ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने हाल ही में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका कभी भी ईरान की प्रशासन को नहीं गिरा पाएगा. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हमला हुआ तो दुनिया की सबसे ताकतवर सेना को भी ईरान करारा जवाब देगा.
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