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सावधान! झारखंड के शहर बन रहे हीट आईलैंड, पैदा हो रहा स्वास्थ्य संबंधी खतरा

रांची के मनोज सिंह की रिपोर्ट

Climate Changing: अगर आप झारखंड के किसी शहर में रहते हैं, तो आपके लिए एक खतरनाक समाचार है. वह यह है कि राज्य के कई शहरों में अर्बन हीट आईलैंड का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. एक हालिया अध्ययन में सामने आया है कि शहरी क्षेत्रों का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य सहित कई तरह के जोखिम पैदा हो सकते हैं. यह अध्ययन झारखंड प्रशासन के वन विभाग ने केंद्र प्रशासन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से कराया है. इसमें राज्य के पांच प्रमुख शहरों और उनके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के तापमान अंतर का विश्लेषण किया गया है. अध्ययन में पाया गया है कि शहरों और गांवों के तापमान में 1.5 से 2 डिग्री सेल्सियस तक का अंतर हो चुका है. इससे शहरी इलाकों में हीट आईलैंड बनने का खतरा बढ़ गया है.

अध्ययन में 1984 से 2024 तक का आंकड़ा

अध्ययन में इससे निपटने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने की सिफारिश की गयी है. रिसर्च में 1984 से 2024 तक के आंकड़ों को शामिल किया गया है. वन विभाग ने रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो और हजारीबाग का अध्ययन कराया है. यह राज्य में अपनी तरह का पहला व्यवस्थित अध्ययन है, जिसमें सरफेस अर्बन हीट आईलैंड की घटना का विस्तृत विश्लेषण किया गया है. रिपोर्ट में हाई-रिजॉल्यूशन रिमोट सेंसिंग डेटा का उपयोग कर लैंड सरफेस टेंपरेचर (एलएसटी) मापा गया है.

रांची-जमशेदपुर में सबसे अधिक तापमान

अध्ययन के अनुसार जमशेदपुर में शहरी और ग्रामीण एलएसटी के बीच सबसे अधिक अंतर, लगभग 1.5 से 2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. रांची में भी यह अंतर लगभग 1.5 से 2 डिग्री सेल्सियस है. हालांकि मानव स्वास्थ्य पर बढ़ते खतरे के मामले में जमशेदपुर सबसे अधिक प्रभावित पाया गया है. हजारीबाग और धनबाद जैसे शहरों में शहरी और ग्रामीण तापमान का अंतर सबसे कम, लगभग 0.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है.

मानव स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा

रिपोर्ट में वेट-बल्ब ग्लोब टेंपरेचर (डब्ल्यूबीजीटी) के बढ़ते स्तर पर विशेष जोर दिया गया है. डब्ल्यूबीजीटी का आकलन तापमान, आर्द्रता, हवा की गति और सौर विकिरण को ध्यान में रखकर किया जाता है. अध्ययन से पता चलता है कि सभी शहरों में डब्ल्यूबीजीटी के स्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और खुले में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर और बढ़ता जोखिम है.

क्या हैं मुख्य कारण

रिपोर्ट के अनुसार, शहरीकरण की तेज रफ्तार, वनस्पति आवरण में कमी, जल निकायों का खत्म होना और कंक्रीट संरचनाओं के बढ़ते विस्तार ने शहरी परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है. इसके कारण शहरी क्षेत्र आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में कहीं अधिक गर्म हो रहे हैं. अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि बिल्ट-अप क्षेत्र में वृद्धि और हरित आवरण में कमी ही एलएसटी में स्थानिक भिन्नता का मुख्य कारण है.

प्रशासन से सिफारिश

  • शहरी ताप की चुनौती से निपटने के लिए नगर प्रशासन, टाउन प्लानर और नीति-निर्माताओं को मिलकर काम करना होगा.
  • गर्मी अनुकूलन रणनीतियों के लिए वैज्ञानिक जानकारी का व्यापक प्रसार जरूरी है.
  • अर्बन फॉरेस्ट्री कार्यक्रम शुरू करने की जरूरत है.
  • शहरी क्षेत्रों में ग्रीन बिल्डिंग को अनिवार्य बनाने की सिफारिश की गई है.
  • ग्रीन बिल्डिंग के लिए मैनुअल तैयार कर उसकी सख्त मॉनिटरिंग करनी होगी.
  • इको-होम जैसी अवधारणाओं को बढ़ावा देने और प्रोत्साहन देने की जरूरत है.
  • सिफारिश में क्लीन ट्रांसपोर्ट पॉलिसी लागू करने पर जोर दिया गया है.
  • इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है.

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क्या कहते हैं अधिकारी

कैंपा के एपीसीसीएफ रवि रंजन ने कहा कि यह अध्ययन केंद्र प्रशासन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जलवायु परिवर्तन पर रणनीतिक ज्ञान के लिए राष्ट्रीय मिशन के तहत किया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य नीति-निर्माताओं, नगर निगमों, शहरी योजनाकारों और आम नागरिकों के बीच ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन से जुड़े अहम तथ्यों का प्रसार करना है, ताकि इससे होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी नीतिगत निर्णय लिए जा सकें.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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