Bihar Holi Special: (कुमार आशीष) सहरसा जिले की बनगांव की घुमौर होली का इतिहास 200 साल पुराना है. संत लक्ष्मीनाथ गोसाईं ने 1810 में शुरू की. होली की यह परंपरा आज भी कायम है और सालों के बाद आज भी सांप्रदायिक एकता का प्रतीक है. यहां होली में सभी जाति और धर्म के लोग शामिल होकर एकसाथ इस पर्व को मनाते हैं. होली को लेकर सालों पहले बनाई गई परंपरा को कायम रखते हुए देश और विदेश को आपसी भाईचारे का संदेश देते हैं.
अलग-अलग हिस्सों में टोली बनाकर स्पोर्ट्सते हैं होली
जाति धर्म का भेदभाव भूलकर होली के दिन लोग गांव के अलग-अलग हिस्सों से अलग-अलग टोली बनाकर मदमस्त हो ‘होली है…’ कहते हुए एक-दूसरे के कंधे पर चढ़कर होली स्पोर्ट्सते हैं. गांव के डिहली बंगला, बंगला गाछी, ललित झा बंगला, मयूरी खां आड़, मनसाराम खां दरवाजा, विषहरी स्थान, खोखा बाबू चौक सहित अन्य चिह्नित जगहों पर इकट्ठा होकर सभी मिलकर होली स्पोर्ट्सते हैं. सभी बंगले पर पानी और रंग की फुहार बहती रहती है. लोग एक-दूसरे से गले मिलकर होली की शुभकामनाएं देते हैं.
क्यों कहते हैं घुमौर होली?
गांव में सभी बंगले पर होली स्पोर्ट्सने के बाद हजारों लोग भगवती स्थान परिसर पहुंचते हैं, जहां एक-दूसरे के कंधे पर चढ़ गले मिलकर होली स्पोर्ट्सते हैं. होली वाले दिन यह नजारा बहुत ही अद्भुत दिखता है. भगवती मंदिर के ऊपर लगे फव्वारे से पानी की बारिश होती रहती है और नीचे हजारों की संख्या में लोग गोल-गोल घूमते रहते हैं. इसी कारण इसे घुमौर होली कहा जाता है.
बनगांव में हिंदू, मुस्लिम सहित सभी जाति के लोग सभी बैर भुलाकर होली स्पोर्ट्सते हैं. ऊंच-नीच, छूत-अछूत कोई भी भेद होली में यहां नहीं दिखता है. होली स्पोर्ट्स रहे लोग बाबाजी कुटी जाकर गोसाईं जी सहित अन्य देवताओं को प्रणाम कर इसका समापन करते हैं.
एक दिन पहले ही स्पोर्ट्सी जाती है यहां होली
सामान्य तौर से फाल्गुन पूर्णिमा को सम्मत जलाने और चैत्र प्रतिपदा को होली स्पोर्ट्सने की परंपरा है. लेकिन बनगांव में एक दिन पहले यानी पूर्णिमा के दिन ही होली स्पोर्ट्सी जाती है. होली स्पोर्ट्सने के बाद शास्त्र में दिए गए समय के अनुसार ही सम्मत जलाया जाता है. इस बार शहर में चार मार्च को होली मनाई जायेगी, जबकि बनगांव में यह त्यौहार दो मार्च को ही मनाया जाएगा.
बनगांव के होली के महत्व को देखते हुए बिहार प्रशासन का कला संस्कृति विभाग यहां तीन दिवसीय होली महोत्सव का आयोजन करता है. इस बार भी तीनों दिन अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे. मुख्य आकर्षण लोक गायिका देवी की गायिकी होगी.
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