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मनीष रंजन को नहीं मिली जमानत, पटना NEET छात्रा केस में CBI बोली- जांच में हमें हॉस्टल ऑनर की जरूरत नहीं

Patna NEET Student Death Case: पटना NEET छात्रा मौत मामले में शंभू गर्ल्स हॉस्टल की बिल्डिंग के मालिक मनीष रंजन को राहत नहीं मिली है. सोमवार को उनकी जमानत याचिका पर करीब पौने दो घंटे तक सुनवाई चली. लेकिन कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए अगली तारीख दे दी. अब इस मामले में 11 मार्च को CBI के मजिस्ट्रेट कोर्ट में सुनवाई होगी.

जमानत पर बहस के दौरान तीखी नोकझोंक

सुनवाई के दौरान पीड़ित परिवार के वकील और CBI के वकील के बीच तीखी बहस हुई. परिवार के वकील ने जांच में लापरवाही का आरोप दोहराया. उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही जांच ठीक से नहीं की गई.

इस पर CBI के वकील ने आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि यह जमानत की सुनवाई है, एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का मंच नहीं. सबसे अहम बात यह रही कि CBI ने कोर्ट में लिखित तौर पर कहा कि फिलहाल उन्हें जांच में मनीष रंजन की जरूरत नहीं है.

कोर्ट के सीधे सवाल

28 फरवरी को कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कई सख्त सवाल किए. पूछा गया कि मनीष रंजन पर आखिर ठोस आरोप क्या हैं? उनके खिलाफ सबूत क्या हैं? क्या एजेंसी को अब भी उनकी जरूरत है?

कोर्ट ने यह भी पूछा कि केस में पॉक्सो एक्ट क्यों नहीं लगाया गया? CBI ने 12 फरवरी को 307 (अटेंप्ट टू मर्डर) की धारा में केस दर्ज किया है. कोर्ट ने साफ कहा कि जब आपके पास अटेंप्ट टू मर्डर का केस है, तो यह स्पष्ट करें कि आरोपी की हिरासत क्यों जरूरी है.

SIT और CBI का अलग रुख

इस केस की शुरुआत चित्रगुप्त नगर थाने से हुई थी. 17 जनवरी तक तत्कालीन थानेदार रौशनी कुमारी जांच कर रही थीं. इसके बाद SIT को जांच सौंपी गई. सुनवाई के दौरान SIT ने कहा कि मनीष रंजन एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं. इसी आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था. हालांकि अब जांच CBI कर रही है, इसलिए SIT को उनकी जरूरत नहीं है.

CBI को जांच संभाले 15 दिन से ज्यादा हो चुके हैं. कोर्ट ने पूछा कि इस दौरान मनीष रंजन को लेकर क्या ठोस प्रगति हुई?

जब्त सबूतों पर उठे सवाल

कोर्ट ने तत्कालीन IO रौशनी कुमारी से पूछा कि छात्रा का मोबाइल और हॉस्टल का DVR जब्त करने के बाद FSL जांच क्यों नहीं कराई गई? सबूत 24 घंटे में कोर्ट में क्यों पेश नहीं किए गए? रौशनी ने कहा कि उन्होंने 17 जनवरी को सभी सामान SIT को सौंप दिए थे. लेकिन SIT ने कहा कि उन्हें यह सामग्री 24 जनवरी को मिली. दोनों के बयानों में अंतर दिखा. इस पर पीड़ित परिवार ने सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया.

SDPO से भी पूछताछ

SIT को लीड कर रहीं सचिवालय SDPO-1 डॉ. अन्नू कुमारी से भी कोर्ट ने सवाल किए. पूछा गया कि मनीष रंजन कब बिहार से बाहर गए? कब पकड़े गए? उनका बयान क्या था? डॉ. अन्नू ने कोर्ट को बताया कि CDR खंगाला गया है और लोकेशन मिलान किया गया है.

11 मार्च को अगली सुनवाई

करीब दो घंटे चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने अगली तारीख 11 मार्च तय की. फिलहाल मनीष रंजन को जमानत नहीं मिली है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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