Iran Women’s Football Team Australia: ईरान की स्त्री फुटबॉल टीम की पांच खिलाड़ी इन दिनों अपने देश से हजारों किलोमीटर दूर ऑस्ट्रेलिया में हैं. ये सभी ईरान युद्ध शुरू होने से पहले एशिया कप में भाग लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुंचीं थीं. लेकिन टूर्नामेंट के दौरान राष्ट्रगान न गाने के फैसले के बाद पैदा हुए विवाद ने उनकी जिंदगी को अचानक बदल दिया. अब 5 खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया में शरण लेनी पड़ी है. ऑस्ट्रेलिया के गृह मामलों के मंत्री टोनी बर्क ने बताया कि ये खिलाड़ी गोल्ड कोस्ट स्थित टीम होटल से देर रात चुपचाप बाहर निकल गईं. इसके बाद वे एक सुरक्षित स्थान पर पहुंचीं और वहीं से ऑस्ट्रेलिया प्रशासन से शरण की गुहार लगाई.
बर्क के मुताबिक ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने तुरंत उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की और उनके मानवीय वीजा के आवेदन को मंजूरी दे दी गई. उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर ईरान की बाकी खिलाड़ी भी चाहें तो वे ऑस्ट्रेलिया में रहने के लिए आवेदन कर सकती हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर इस पूरी प्रक्रिया की फोटोज भी शेयर कीं. इसमें वे कुछ कागजी प्रक्रिया पूरी कर रही हैं. इस दौरान पांच खिलाड़ी नजर आईं, जो काफी खुश दिख रही थीं.
Last night I was able to tell five women from the Iranian Women’s Soccer team that they are welcome to stay in Australia, to be safe and have a home here. pic.twitter.com/2JQp9q9Z8W
— Tony Burke (@Tony_Burke) March 9, 2026
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा कि हमने मानवीय आधार पर ईरानी फुटबॉल टीम के लिए 5 वीजा इशू किए हैं. हम इसके लिए पिछले कुछ समय से तैयारी कर रहे थे. ऑस्ट्रेलिया उनके मुद्दे की वजह से काफी भावुक है. अब वे यहां सुरक्षित हैं और उन्हें ये अपने घर जैसा महसूस होना चाहिए.
They are safe here, and should feel at home here. pic.twitter.com/hDTvp8xkHy
— Anthony Albanese (@AlboMP) March 10, 2026
ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद तेजी से बढ़ी प्रक्रिया
इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तब और ध्यान खींचा, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से बात कर ईरानी स्त्री खिलाड़ियों को शरण देने की अपील की. ट्रंप ने कहा था कि यदि ये खिलाड़ी अपने देश लौटती हैं तो उनकी जान खतरे में पड़ सकती है. उन्होंने इस मामले पर अपने ट्रुथ सोशल से ट्वीट भी किया था.
हालांकि, ट्रंप ने बाद में फिर इस बात की जानकारी साझा की, पांच खिलाड़ियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है, लेकिन टीम की कुछ अन्य सदस्य अभी भी दुविधा में हैं. कई खिलाड़ियों को अपने परिवारों की चिंता सता रही है, क्योंकि अगर वे वापस नहीं लौटीं तो उनके परिजनों को धमकियों का सामना करना पड़ सकता है.
अन्य लोगों, मानवाधिकार समूहों ने भी मांगी मदद
ईरान के अपदस्थ शाह के बेटे रेजा पहलवी ने भी ऑस्ट्रेलिया से खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की. उन्होंने कहा कि नागरिक अवज्ञा के इस साहसिक कदम के कारण इन खिलाड़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. कई राजनेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और मशहूर लेखिका जे. के. रोलिंग ने भी इन खिलाड़ियों को आधिकारिक सुरक्षा देने की मांग की.
कैसे शुरू हुआ यह विवाद
यह पूरी कहानी एशिया कप के एक मैच से पहले शुरू हुई. ईरान स्त्री राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की खिलाड़ी जब मैदान में उतरीं तो उन्होंने राष्ट्रगान के दौरान गाना गाने के बजाय खामोशी से खड़े रहकर विरोध जताया. 2 मार्च को दक्षिण कोरिया स्त्री राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के खिलाफ मुकाबले से पहले खिलाड़ियों की यह चुप्पी एक प्रतीकात्मक संदेश बन गई.
हालांकि, वह यह मैच हार गईं. यह उस समय हुआ जब दो दिन पहले ही अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी और पूरे देश में तनाव का माहौल था. कुछ लोगों ने इसे दुख माना, लेकिन ज्यादातर ने इसे विरोध का ही प्रतीक माना. इसके बाद इस घटना को अंतर्राष्ट्रीय चर्चा मिलनी शुरू हो गई.
हालांकि बाद के मैचों में तस्वीर कुछ बदली हुई दिखी. पहले ऑस्ट्रेलिया और फिर फिलीपींस स्त्री राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के खिलाफ अंतिम मुकाबले से पहले खिलाड़ियों ने राष्ट्रगान गाया और सलामी भी दी. लेकिन आलोचकों का मानना था कि ऐसा करने के पीछे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) का दबाव हो सकता है.
🚨🇮🇷 Iran’s women’s football team sang the national anthem and saluted in their latest game after being called “wartime traitors” by state TV.
The players were reportedly forced to comply through threats against their families and are being monitored by Iranian security.
They… https://t.co/vmjbuceTJU pic.twitter.com/LHFZEMzota
— Mario Nawfal (@MarioNawfal) March 8, 2026
एकदम से बदला माहौल
फिलीपींस के खिलाफ 2-0 की हार के बाद हालात और भावनात्मक हो गए. लगभग 200 प्रदर्शनकारियों ने टीम बस को घेर लिया और “लेट देम गो” के नारे लगाए. इसी दौरान बस के अंदर से एक खिलाड़ी ने अंतरराष्ट्रीय एसओएस संकेत दिखाया और अपने अंगूठे को हथेली में दबाकर बाकी उंगलियों से ढकते हुए ( दुनिया भर में मदद की पुकार का संकेत माना जाता है) दिखाया. इस दृश्य ने कई लोगों को झकझोर दिया.
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होटल से निकलकर मांगी मदद
इंटरनेशल मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसके बाद हालात तेजी से बदले. ऑस्ट्रेलियाई प्रसारक ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (एबीसी) के मुताबिक पांच खिलाड़ी गोल्ड कोस्ट के होटल से टीम प्रबंधन की निगरानी से बचते हुए निकलने में कामयाब रहीं. रिपोर्ट्स के अनुसार होटल में उस समय काफी नाटकीय माहौल बन गया था. बताया जाता है कि कुछ खिलाड़ी कार्यकर्ताओं से बातचीत के बाद समूह में लॉबी से बाहर निकलीं और ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन से मदद मांगने लगीं.
Five Iran women’s football players have reportedly defected from the team and are currently in a safe house in Australia following their Asian Cup exit.
🇦🇺 Fans fearing for the team’s safety want Australia to give them asylum after they were called “traitors” on state TV. pic.twitter.com/5VFNw9DLNe
— DW Sports (@dw_sports) March 9, 2026
हालांक, भले ही अब ये खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया में सुरक्षित हैं, लेकिन अन्य के सामने अभी भी अनिश्चित भविष्य है. क्योंकि इस टीम में कुल 26 खिलाड़ी थे. इनमें से केवल 5 को ही सुरक्षा मिली है. बाकी 21 खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ के बारे में कोई सूचना साझा नहीं की गई है. वैसे ईरानी टीम एशिया कप से बाहर हो गई है, लेकिन ईरान में चल रहे युद्ध की वजह से उनका घर लौट पाना शायद इतना आसान न हो. वहीं, टीम की हेड कोच मरजिया जाफरी ने ऑस्ट्रेलियाई न्यूज एजेंसी एएपी से कहा कि खिलाड़ी जल्द से जल्द घर वापस जाना चाहती हैं.
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