Weight Loss Drugs: हिंदुस्तान में मोटापा और डायबिटीज के इलाज के क्षेत्र में दस्तक दे रही है, जहां आधुनिक GLP-1 दवाओं का बाजार अगले पांच वर्षों में 12,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सेगमेंट में आई तेजी की सबसे बड़ी वजह पेटेंट की समाप्ति और हिंदुस्तानीय कंपनियों की बड़े स्तर पर एंट्री है.
अब तक नोवो नॉर्डिस्क जैसी विदेशी कंपनियों के कब्जे वाले इस बाजार में Semaglutide मॉलिक्यूल का पेटेंट खत्म होने से घरेलू कंपनियों के लिए रास्ते खुल गए हैं, जिससे आने वाले समय में इलाज के विकल्पों में भारी बढ़ोतरी और कीमतों में और अधिक गिरावट देखने को मिलेगी.
कीमतों में भारी गिरावट, इलाज हुआ आसान
दवाओं की कीमतों में आई भारी गिरावट ने इस आधुनिक इलाज को मध्यम वर्ग और आम आदमी की पहुंच के भीतर ला दिया है. पहले जहां इन दवाओं का मासिक खर्च ₹8,000 से ₹16,000 के बीच होता था, वहीं अब हिंदुस्तानीय कंपनियों द्वारा पेश की गई जेनेरिक दवाएं महज ₹1,300 से ₹5,000 प्रति माह में उपलब्ध हैं.
कुछ विशेष मामलों में साप्ताहिक खर्च गिरकर ₹300-400 तक आ गया है, जिससे डॉक्टरों के लिए अधिक से अधिक मरीजों को यह दवा सुझाना आसान हो गया है. कीमतों का यह ‘क्रैश’ हिंदुस्तान जैसे बड़े मरीज बेस वाले देश में गेम-चेंजर साबित हो रहा है.
बड़ा मरीज बेस और ग्रोथ की संभावना
हिंदुस्तान में इन दवाओं के लिए एक विशाल और अभी तक अछूता बाजार मौजूद है, जिसमें लगभग 10 करोड़ लोग डायबिटीज से और 25 करोड़ लोग मोटापे से जूझ रहे हैं. वर्तमान में, इन दवाओं की पहुंच डायबिटीज के मरीजों में केवल 5% और मोटापे के शिकार लोगों में महज 4% तक ही है.
जैसे-जैसे जागरूकता बढ़ेगी और कीमतें मध्यम वर्गीय परिवारों के अनुकूल होंगी, यह ‘पेनेट्रेशन’ तेजी से बढ़ेगा. यही कारण है कि विश्लेषक इसे स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की सबसे बड़ी ‘ग्रोथ स्टोरी’ मान रहे हैं, जो आने वाले वर्षों में फार्मा सेक्टर की दिशा बदल सकती है.
कंपनियों के बीच कड़ी टक्कर
बाजार में अपनी हिस्सेदारी पक्की करने के लिए सन फार्मा, जाइडस लाइफसाइंसेज (Zydus), अल्केम (Alkem) और डॉ. रेड्डीज जैसी दिग्गज कंपनियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है. कंपनियां न केवल दवाओं की कीमत कम कर रही हैं, बल्कि इस्तेमाल में आसान ‘पेन डिवाइस’ और री-यूजेबल पेन पर भी फोकस कर रही हैं.
उदाहरण के तौर पर, Zydus ने एक ऐसा एडजस्टेबल पेन पेश किया है जिससे मरीज अपनी जरूरत के हिसाब से डोज तय कर सकते हैं, जबकि Alkem ने बेहद कम कीमत पर शुरुआती डोज लॉन्च की है. हालांकि ये दवाएं टैबलेट और शीशी (Vial) के रूप में भी आ रही हैं, लेकिन सुविधा के कारण ‘पेन’ सबसे ज्यादा लोकप्रिय हो रहा है.
निवेशकों के लिए बड़ा मौका
बाजार विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि GLP-1 सेगमेंट में निवेश का यह एक सुनहरा अवसर है, जो लंबी अवधि में बड़ा मुनाफा दे सकता है. जो कंपनियां अपनी सप्लाई चेन मजबूत रखेंगी और टियर-2 व टियर-3 शहरों तक पहुंच बनाएंगी, उन्हें इस विस्तार का सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा.
पहले जो महंगी दवाएं केवल बड़े महानगरों तक सीमित थीं, वे अब छोटे शहरों के क्लीनिकों तक पहुंच रही हैं. आने वाले समय में बेहतर डोज, नए डिवाइस और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण मरीजों की संख्या में कई गुना इजाफा होने की उम्मीद है, जिससे निवेशकों को स्थिर रिटर्न मिलने की संभावना है.
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